पंजाब की कोई भूमिका नहीं बेअंत के हत्यारे की रिहाई में: अमरिंदर सिंह

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लुधियाना। पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सोमवार को स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को लंबे समय से कैद टाडा कैदियों की सिर्फ सूची भेजी थी और मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे या किसी दूसरे खास कैदी की रिहाई के केंद्र के कथित फैसले में उनकी कोई भूमिका नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सिर्फ 17 कैदियों की सूची भेजी थी, जिन्हें पंजाब में आतंकवादी व विघटकारी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) के तहत गिरफ्तार किया गया था। केंद्र ने कैदियों की रिहाई पर स्वतंत्र तौर पर फैसला लिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार को अभी भी नौ कैदियों के नाम प्राप्त करने हैं, जिन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विशेष छूट देने का निर्णय लिया है।

अमरिंदर सिंह मीडिया में आईं उन रपटों पर कांग्रेस का रुख स्पष्ट कर रहे थे, जिनमें कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना उन आठ कैदियों में शामिल है, जिन्हें केंद्र ने गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर मानवीय आधार पर रिहा करने का फैसला किया है।

बेअंत सिंह ने पंजाब में आतंकवाद खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी 31 अगस्त, 1995 को हत्या कर दी गई थी।

उन्होंने कहा कि राजोआना, राज्य सरकार द्वारा केंद्र को सौंपी गई 17 लोगों की सूची में शामिल है, क्योंकि वह एक टाडा कैदी है। सूची के दूसरे कैदियों की तरह उसने जेल में 14 साल से ज्यादा समय काटा है।

अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस का रुख बेअंत सिंह के हत्यारों पर हमेशा से साफ व सुसंगत रहा है कि उन्हें अपनी पूरी सजा काटनी चाहिए।

हालांकि, उन्होंने कहा कि वह निजी तौर पर मौत की सजा के खिलाफ हैं, जिसे उन्होंने 2012 में भी कहा था।

उनकी निजी राय है कि मौत की सजा के सभी मामलों को आजीवन कारावास में बदला जाना चाहिए।

टाडा कैदियों की रिहाई से राज्य की शांति को खतरा होने की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी को राज्य का सौहार्द्र बिगाड़ने नहीं देंगे।

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