देखें इस वीडियो में, इस दीदी में बाप की राजनैतिक ताकत का ‘नशा’

श्रुति शर्मा उर्फ “दीदी” बाप का नाम सत्यनारायण शर्मा (मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व सचिव)! पहले वीडियो देखिए फिर खबर पढ़िए. दरसल खबर वीडियो का ही विस्तार है. आप के मुंह से निकलेगा ऐसा तो होना ही था. सचिव के पद पर बाप की नौकरी शुक्लजी, तिवारीजी, रोहाणीजी जिसने भी लगाई हो….विधानसभा सचिव के पास बेपनाह पावर होते हैं. पूरे सेवाकाल में वह ताकत के दहाने पर बैठा रहता है. शर्मा जी ताकत और रसूख का वैभव भोगते रहे बच्ची हाथ से निकल गई.

बाप की राजनैतिक ताकत का नशा दिखता है वीडियो में. राहगीरों और घरों पर सरेआम प्रतिबंधित सुतली बम फेकते हुए दीदी. साथी समझाते हैं गाड़ियों को तो निकल जाने दे. श्रुति कहती है…’ अब ये मेरी गलती है वे आ रही हैं साली.’ दो बाइक सवारों के सिर पर बम फटता है तो उनमें से एक हैरत में कहता है पागल हो गई है क्या! …इतना सुनते ही ताकत के नशे में चूर शर्मा जी की बिटिया उन पर झपटती है ‘…हां हां मैं पागल हो गई हूं ,…आओ आओ मैं पागल हो गई हूं.’ जाहिर है यदि उन बच्चों में से कोई रुक जाता तो श्रुति और उसके मुसटण्डे उसे मार ही डालते. और सिर पर बम फटने के बाद बाइक अनकंट्रोल्ड हो जाती तो हादसे में बच्चे मर जाते. …तब ये नशैलची दीदी क्या करती? शायद सड़क पर घायल पड़े बच्चों को अस्पताल भेजने के बजाए उनके गिर्द अट्टहास लगाती पिशाचनी की तरह. इसको बलि चाहिए थी और आखिरकार उसने ले ली.

बैतूल के एक मेडीकल छात्र यश पाठे ने भोपाल की इस दीदी के नशे की हसरत पूरी करते करते परेशान होकर फांसी लगा ली. यश अपनी फीसें चुकाता कि दीदी की ब्राउनशुगर का खर्च देता. भोपाल इंदौर गये न जाने कितने बच्चे इन दीदियों और भाइयों के शिकार हो रहे हैं. वे इनको नशा करा रहे हैं और उनके घरों का पैसा लूट रहे हैं. पेरैंट्स के हाथ से बच्चे का भविष्य और बच्चे की जान दोनों चले जाते हैं.

प्रदेश की राजधानी में जब नशे के कारोबार का खुला नर्तन हो रहा है तो उसके आगे इंदौर, उज्जैन, देवास में क्या हो रहा होगा जो अफीम नगरी मंदसौर के नजदीक है? यहां पढ़ने गये बच्चों के अभिभावक क्या कर सकते हैं? कर सकते हैं…वे श्राप दे सकते हैं कि यह ऐसा उड़ता मध्यप्रदेश बने जिसमें मंत्रियों , पुलिस अफसरों और आला ब्यूरोक्रेट्स के कुछ और बच्चे इस नशे की खाई में डूब जाएं ताकि उन्हें यश पाठे के मां बाप जैसे लाखों माता पिताओं की तकलीफ का अहसास हो. शायद तब उनकी आंख खुले!

फेसबुक लिंक: https://www.facebook.com/rajnish.jain.543/posts/1776096385818331

साभार:रजनीश जैन के फेसबुक टाइम लाइन पोस्ट

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