जेम पोर्टल बने उत्पादों की सरकारी खरीद व बेचान का जरिया: एसीएस डॉ. अग्रवाल

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जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने कहा है कि एमएसएमई सेक्टर की रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण ही राज्य में सरकारी खरीद में एमएसएमई सेक्टर से 80 प्रतिशत खरीद के लिए इस सेक्टर को प्राथमिकता के प्रावधान हैे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार का जेम पोर्टल सरकारी खरीद का ऐसा ई-हाॅट पोर्टल है जहां एमएसएमई इकाइयों को अपने उत्पाद देश के किसी भी कोने की सरकारी खरीद में बिक्री हेतु उपलब्ध कराने की सुविधा है। उन्होंने बताया कि इस प्लेटफार्म का लाभ सरकारी क्रेता और विक्रेता दोनों ले सकते हैं।
एसीएस उद्योग डॉ. अग्रवाल शुक्रवार को ओटीएस में जेम संवाद कार्यशाला आउट रीच अवेयरनेस प्रोग्राम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास को गति देने के लिए राजस्थान सरकार ने क्रान्तिकारी अग्रगामी कदम उठाए है। उन्होंने कहा कि जहां बड़े उद्योग करोड़ों रुपए के निवेश के बाद चंद लोगों को ही रोजगार दे पाते हैं वहीं एमएसएमई उद्यम कम निवेश के बावजूद अधिक संख्या में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इनके विकास के लिए कृत संकल्पित है।
आयुक्त उद्योग मुक्तानन्द अग्रवाल ने कहा कि सरकार का जेम पोर्टल पेपरलेस, कैशलेस और कॉन्टैक्टलेस पारदर्शी व्यवस्था है। इससे जहां एमएसएमई उद्यमों को एक ही प्लेटफार्म पर सरकारी क्षेत्र से कारोबार के लिए समूचे देश में बाजार उपलब्ध होता है, वहीं सरकारी खरीदकर्ता भी पेचदगियों से परे आसानी से इस प्लेटफार्म के माध्यम से खरीद कर सकते हैं।
आयुक्त अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान में भी इस पोर्टल के माध्यम से एमएसएमई उद्यमों ने करीब 500 करोड़ का कारोबार किया है पर अभी कारोबार के वॉल्यूम को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी विभागों व उपक्रमों और एमएसएमई उद्यमों को आगे आकर इस पोर्टल पर पंजीयन कराकर मल्टीपल प्लेटफार्म की सुविधा का लाभ उठाना चाहिए।
केन्द्र सरकार के वाणिज्य व उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी एस. सुरेश कुमार ने बताया कि सरकारी खरीद व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और एमएसएमई उद्यमों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए जेम पोर्टल विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि डिजिटल इण्डिया की दिशा में यह बढ़ता हुआ कदम है। इस पोर्टल पर तीन लाख से अधिक एमएसएमई उद्यमों और सेवा प्रदाताओं के 17 लाख 84 हजार से अधिक उत्पाद/सेवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि जेम पोर्टल के माध्यम से 31 लाख से अधिक आदेश दिए जा चुके हैं।
सुरेश ने कहा कि मई 2017 में लांट किया गया जेम पोर्टल पब्लिक प्रोक्यूरमेंट पोर्टल है और इसमें नए-नए फीचर्स लाए जा रहे हैं ताकि अधिक उपादेय हो सके। उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश जैन ने प्रेजेंटेशन के माध्यम से जेम पोर्टल की बारीकियों को समझाया।
गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा सरकारी खरीद की पारदर्शी व्यवस्था के लिए जेम पोर्टल यानी कि गवर्नमेंट ई मार्केट पैलेस पोर्टल विकसित किया ताकि सरकारी विभागों और संस्थाओं की खरीद आवश्यकताएं इस पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से हो सके। यह व्यवस्था पूरी तरह से कागज रहित, संपर्क रहित औक कैशलेस होने से अपने आप में पारदर्शी व्यवस्था है। उन्होंने बताया कि इस पोर्टल पर पिनकोड आधार पर भी उद्यमों को चयनित कर उत्पादों की खरीद की जा सकती है। इस पोर्टल पर बिड्स और रिवर्स ऑक्शन की भी सुविधा है। आपूर्ति और भुगतान की निगरानी के साथ ही क्रेता विक्रेता दोनों के ही हितों को ध्यान में रखा गया है।
दो सत्रों में आयोजित जेम संवाद में लंच पूर्व सत्र में सरकारी खरीद करने वाले विभागों के अधिकारी, जिलों क ट्रेजरी ऑफिसर व उद्योग विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया वहीं लंच बाद के सत्र में प्रदेश के एमएसएमई उद्योग संघों के प्रतिनिधि और उद्यमियों ने हिस्सा लिया।
आभार संयुक्त निदेशक उद्योग वाई एन माथुर ने व्यक्त किया। संयोजन सहायक निदेशक गीत गोस्वामी ने किया।

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