खुलासा : कंप्यूटर ट्रेनिंग के नाम पर 150 करोड़ की ठगी, पढ़े पूरी स्टोरी

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छात्रों को कंप्यूटर प्रशिक्षण देने पर कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर संचालकों से मोटा मुनाफा देने का झांसा देकर 6 राज्यों में डेढ़ अरब ठगने वाले आईटीएसपीएल कंपनी के डायरेक्टर जगन्नाथ दास को बड़ी कंपनियों से मेलजोल कराने वाले कोलकाता निवासी सुब्रतो मंडल उर्फ बाबुन को पुलिस ने कोलकाता से गिरफ्तार किया है।

पुलिस की पूछताछ में जगन्नाथ और सुब्रतो ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ठगी करने के बाद जगन्नाथ ने सालभर बाद देश छोड़कर फरार होने की प्लानिंग कर रखी थी।

वह भूटान में मकान बनवाकर वहीं सेटल होना चाहता था। वह इसकी तैयारी कर रहा था, लेकिन विदेश भागने से पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

साथ ही उसने बताया कि सुब्रतो बड़ी कंपनियों और ट्रेनिंग सेंटरों से संपर्क कर सीएसआर फंड दिलाने का आश्वासन देता था। उसके बाद जगन्नाथ से मिलवाकर सौदा तय कराता था।

उसके पास से पुलिस ने बैंक पासबुक और एटीएम कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद किए हैं। बुधवार को पुलिस उसे कोलकाता से रिमांड पर लेकर गुरुवार को रायपुर पहुंची। शुक्रवार को उसे रायपुर की कोर्ट में पेश किया।

आपको बता दें कि इससे पहले कंपनी के डायरेक्टर जगन्नाथ दास, अशोक जैन और स्टेट कोआर्डिनेटर योगेंद्र बारिक को पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

उनके पास से 5 बैंक पासबुक, 80 करोड़ रुपए के चेक समेत अन्य दस्तावेज मिले थे। उसने 11 हजार 541 छात्र-छात्राओं के नाम से संचालकों से पैसे वसूले थे।

आरोपी जगन्नाथ प्रसाद ने कोलकाता में स्वर्ण युग ह्यूमन रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड का दफ्तर खोल रखा था। इसका राजस्थान, मध्यप्रदेश में भी दफ्तर था।

साथ ही 8 नामों से अलग-अलग राज्यों में ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन करा रखा था। ट्रेनिंग संचालकों को ट्रस्ट रजिस्ट्रेशन का सर्टिफिकेट दिखाकर झांसे में लेता था।

कोलकाता के गंजाम निवासी जगन्नाथ दास और ब्रम्हपुर ओडिशा निवासी अशोक जैन ने दुर्ग और रायपुर के कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर संचालकों को एक हजार से 1200 रुपए जमा करने पर प्रति छात्र 8 हजार रुपए के हिसाब से देने का झांसा देकर 6 राज्यों में 150 करोड़ रुपए की ठगी की थी।

पुलिस के मुताबिक जगन्नाथ दास ने ओडिशा में साल 2008 में एक छोटा कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर खोला। इनकम टैक्स का बेहतर ज्ञान होने की वजह से कंपनियों को टैक्स बचाने का झांसा देकर विश्वास में लेता था।

इस दौरान उसने कार्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड मैनेजमेंट की ओडिशा, राजस्थान, कोलकाता, दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में ट्रेनिंग सेंटर संचालकों से ठगी की।

कंपनी के स्टेट कोआर्डिनेटर योगेंद्र बारिक ने कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर संचालकों से संपर्क कर हाईवेयर, बीपीया, सीएसीए, मल्टी मीडिया एनीमेश और ड्रेस मेकिंग कोर्स कराने पर छात्रों को सर्टिफिकेट देनी योजना बताई थी।

इसके तहत संस्था को प्रति छात्र 8 हजार रुपए देने का अाश्वासन देकर उन्हें अपने जाल में फंसाया था।

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