कांग्रेस और भाजपा को चेताया राजस्थान के वागड़-मेवाड़ में हुए स्थानीय निकाय चुनावों ने

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जयपुर । वागड़-मेवाड़ में हुए स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों में प्रतिपक्ष नेता गुलाब चन्द कटारिया को मिलीजुली और विधानसभा अध्यक्ष समर्थकों को राजसमंद में ज़ोरदार सफलता मिलीं हैं ,वहीं डूंगरपुर में भाजपा के राज्यसभा सांसद हर्ष वर्धन सिंह, सागवाडा में जिला काँग्रेस अध्यक्ष दिनेश खोडनिया और सलुंबर में काँग्रेस के पूर्व सांसद रघुवीर मीणा का क़द बढ़ा है।

स्वच्छता के लिए देश दुनिया में मशहूर हुए डूंगरपुर में इस बार नगर परिषद चुनाव का नेतृत्व भाजपा के राज्यसभा सांसद और डूंगरपुर राजपरिवार के महाराज कुँवर हर्ष वर्धन सिंह ने किया और बहुत ही सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने उदय बिलास महल में विभिन्न समाजों की कई बैठकें आयोजित कर शहरवासियों को अपने स्वर्गीय दादाजी राजस्थान विधानसभा में वर्षों प्रतिपक्ष के नेता रहें और तत्कालीन स्वतन्त्र पार्टी के दिग्गज नेता डूंगरपुर महारावल लक्षमण सिंह के युग की याद ताज़ा करवा दी।

टिकट वितरण से भाजपा के कतिपय स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराज़गी से उपजी स्थिति को भी उन्होंने कुशलता से सम्भाला और भाजपा जिला अध्यक्ष प्रभु पण्ड्या और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के साथ सभी को विश्वास में लेकर चुनाव रणनीति बनाई।इसी वजह से भाजपा ने डूंगरपुर में चालीस में से सत्ताईस वार्डों में विजयी रह कर सातवीं बार अपना बोर्ड बनाने में कामयाब पाई है। डूंगरपुर शहर में पिछलीं बार निवर्तमान अध्यक्ष के के गुप्ता के नेतृत्व में स्वच्छता अभियान के लिए किए गए कार्यों और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नगर का नाम रोशन होने का सम्बंधी योगदान पर भी जनता ने अपनी मुहर लगाई ।

हर्ष वर्धन सिंह ने राजनीति में अपना परिपक्व रूप प्रदर्शित करते हुए चुनाव परिणामों की घोषणा होने के साथ ही इस बार अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित डूंगरपुर नगर परिषद चेयरमेन के लिए भाजपा की ओर से वार्ड नम्बर 39 से विजयी अमृत लाल कलासुआ के नाम की भी पार्टी जिला अध्यक्ष प्रभु पण्ड्या से घोषणा करवा दी। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद हर्ष वर्धन सिंह ने शहर वासियों के जेहन में भाजपा द्वारा नगर के विकास के लिए किए गए कार्यों को स्थापित करने में सफलता हासिल की।

पूर्व सांसद ताराचन्द भगोरा के भरसक प्रयासों के बावजूद इन चुनावों में डूंगरपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। राज्य में कांग्रेस की सरकार होने का लाभ नहीं दिलवा पाने के लिए स्थानीय विधायक गणेश घोघरा की छवि पर भी प्रतिकूल असर हुआ है।बीटीपी ने विधानसभा और लोकसभा चुनावों की तरह नगर में भी कुछ सीटें जीत दक्षिण राजस्थान की राजनीति में दोनों प्रमुख पार्टियों को अपने इरादों का संकेत दिया हैं।
इधर जिले के दूसरे सबसे बड़े क़स्बे सागवाडा में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष दिनेश खोडनिया ने अपने सगे भाई और चेयरमेन प्रत्याशी नरेन्द्र खोडनिया सहित नगर के 35 वार्डों में से बाईस वार्डों में कांग्रेस को भारी जीत दिलवाईं। खोडनिया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नज़दीक बताए जाते हैं। उन्होंने अपने गृह नगर सागवाडा में तो पार्टी का बोर्ड बनवा दिया लेकिन वे डूंगरपुर में पार्टी को ऐसी जीत नही दिलवा पायें।सागवाडा में बीजेपी को मिली हार से वर्तमान सांसद कनकमल कटारा की सांख को धक्का लगा है।

वहीं वागड़ के गुजरात और मध्य प्रदेश से सटे बाँसवाड़ा ज़िले की कुशलगढ़ नगरपालिका में भाजपा द्वारा बाज़ी मार लेने से कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।यहाँ कांग्रेस निर्दलियों से भी पिछड़ गई।प्रदेश के सीमावर्ती कुशलगढ़ से लगें दो प्रदेशों गुजरात और मध्य प्रदेश में अभी भाजपा की सरकारें है जिसका असर कुशलगढ़ पर हुआ,ऐसा बताया जा रहा है। कुशलगढ़ कभी दिग्गज समाजवादी नेता मामाजी बालेश्वर दयाल के जनता दल (एस )का गढ़ था।इन दिनों बाँसवाड़ा जिले में सत्ताधारी कांग्रेस के पूर्व मंत्री महेंद्रजीत मालवीय का वर्चस्व हैं।इस हार से उनकी प्रतिष्ठा पर असर हुआ है।
मेवाड़ में उदयपुर से जुड़े आदिवासी क्षेत्र प्रतापगढ़ नगरपरिषद में भी काँग्रेस को बड़ा झटका लगा और वहाँ भाजपा का बोर्ड चुना गया है। दूसरी ओर चित्तोड़गढ जिले की बेगू और छोटी सादड़ी नगरपालिकाओं में कांग्रेस का बॉर्ड बनने से सत्ताधारी दल की सांख कुछ बच सकी है।
बीजेपी को उदयपुर संभाग में सबसे बड़ा झटका राजसमन्द में हुई पराजय से लगा है। वहाँ की लोकप्रिय विधायक पूर्व मंत्री किरण माहेश्वरी के असामयिक निधन के बाद हुए चुनाव में यह हार मिलना मेवाड़ में भाजपा के दिग्गज एवं विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता तथा स्थानीय सांसद दिया कुमारी के ख़ेमे के लिए चिंता का विषय है। बताया जाता है कि निकटवर्ती देश की सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थली नाथद्वारा के विधायक और राज्य विधानसभा के अध्यक्ष डॉ.सी पी जोशी की रणनीति यहाँ सफल रहीं है वहीं उदयपुर जिले के सलुंबर कस्बे में भी भाजपा को इस बार पराजय देखनी पड़ी है। यहाँ कांग्रेस को मिली जीत से पूर्व सांसद रघुवीर मीणा का क़द बढ़ा है।

भाजपा को जिले की वल्लभनगर विधानसभा के भिंडर कस्बे में भी पूर्व गृह मंत्री दिवंगत गुलाब सिंह शक्तावत के बेटे और स्थानीय विधायक गजेन्द्र सिंह शक्तावत के असामयिक निधन के तत्काल बाद हुए नगरपालिका चुनाव में गुलाब चंद कटारिया के घोर विरोधी और पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे के निकट माने जाने वाले भाजपा छोड़ जनता सेना बनाने वाले क्षेत्र के दिग्गज नेता रणधीर सिंह भिंडर को मिलीं विजय ने निकट भविष्य में होने वाले उप चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस को चेता दिया है। हालाँकि फ़तहनगर नगरपालिका में भाजपा को मिली विजय से उसे कुछ सकुन ज़रूर मिला है।

उल्लेखनीय है कि निकट भविष्य में राज्य में विधायकों के निधन से रिक्त हुई चार विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होने हैं जिनमें दो विधानसभा क्षेत्र वल्लभनगर और राजसमन्द उदयपुर संभाग में है।

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