पटना। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के शेलटर हाउस में नाबालिग लड़कियों के साथ सामूहिक दुषकर्म मामले की आवाज संसद तक पहुंच गई. कांग्रेस सांसद ने इस मुद्दे की सीबीआई जांच कराने की मांग की है. कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने लोकसभा में इसे सीबीआई जांच की मांग की है. जिसपर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार सीबीआई मांग की सिफारिश करती है तो इसपर विचार किया जाएगा।
मुजफ्फरपुर बालिका गृह का संचालक और रेप का आरोपित ब्रजेश ठाकुर प्रातः कमल अखबार के तीन एडिसन का मालिक है. साथ ही वह दो बार विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुका है और मुख्यमंत्री के साथ साथ उपमुख्यमंत्री ने भी इस दरिंदे के लिए चुनाव प्रचार किया. ठाकुर का रसूख ऐसा है कि नेता अधिकारी और पुलिस उसकी दरबारी करते थे. तभी तो बालिका गृह के बारे में नकारात्मक रिपोर्ट आने के बाद भी समाज कल्याण विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। मुजफ्फरपुर शहर का एक ऐसा नाम जिसका रुतबा पूरे शहर में था. प्रातः कमल अखबार के तीन एडिसन का मालिक है. पुलिस और अधिकारी अखबार के ठसक से शांत रहते थे. अधिकारियों के बीच ठसक ऐसी थी कि 2013 में सभी नियम कानून को ताक में रखकर अपने प्राइवेट मकान में सरकारी बालिका गृह खोल दिया. नेताओं के बीच जान पहचान ऐसी थी कि ब्रजेश ठाकुर हमेशा या तो मुख्यमंत्री या फिर उपमुख्यमंत्री के चैम्बर में बैठा रहता था. ब्रजेश भले ही 1995 और 2000 में विधानसभा का चुनाव एक दूसरे क्षेत्रीय पार्टी से लड़ा हो, लेकिन उसके प्रचार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी हिस्सा लिया।
ब्रजेश ठाकुर के प्राइवेट मकान में सरकारी बालिका गृह पिछले पांच सालों से चल रहा था जबकि सरकारी नियम के अनुसार यह नियम नहीं है. हर महीने समाज कल्याण विभाग के तरफ से जांच होती थी. कई बार विभाग ने नकारात्मक रिपोर्ट दी, लेकिन कार्रवाई कुछ भी नही। मुजफ्फरपुर मामले में सरकार बैकफुट पर है. भले ही सरकार की तरफ से ही जांच की गई और उसके बाद मामला उजागर हुआ, लेकिन अब सरकार सीबीआई जांच से भाग रही है. सरकार की माने तो वह हर तरह की जांच और कार्रवाई कर रही है. सत्ता रूढ़ नेताओं से सम्बद्ध के बारे में सरकार का कहना है कि ब्रजेश का किसी पार्टी से कोई सम्बंध नहीं था, लेकिन राजभल्लभ यादव राजद के विधायक थे जिनपर बलात्कार का आरोप लगा है. बिहार में सुशासन की सरकार है जो ना किसी को बचाती है और ना ही किसी को फंसाती है।
मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में लडकियों के शोषण की कहानी2013 में ही शुरू हो गई थी जब इसकी शुरुवात हुई थी. अल्पावास गृह में रह रही एक लड़की गर्भवती हो गई थी और तब हंगामे के बाद थाने में नाईट गार्ड और अधीक्षक के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ था लेकिन कोई कारवाई नहीं हुई. ताजा मामले में भी कुछ यही हो रहा है इसे ब्रजेश ठाकुर का रसूख ही कहेंगे की गिरफ्तारी के एक महीने के बाद भी पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ नहीं कर सकी है।
इस अल्पावास गृह में 2013 में भी ऐसी घटनाये हो चुकी है । मली जानकारी के अनुसार बिहार के मुजफ्फरपुर में बालिका गृह में बच्चियों की सुरक्षा और अस्मत पर गिद्दों की नजर वर्ष 2013 में ही पड़ गई थी. वर्ष 2013 में भी यहां की बच्चियों की सुरक्षा को लेकर बहुत हंगामा हुआ था. दरअसल मामले का खुलासा तब हुआ जब यहां की एक लड़की गर्भवती हो गई थी. मामला सामने आने के बाद जमकर बवाल हुआ और तब लड़की का आरोप था कि पैसा लेकर उसे बाहर भेजा जाता है. मामले ने जब जोड़ पकड़ लिया तो बाल संरक्षण आयोग का छापा भी पड़ा था।
महिला थाने में कांड संख्या 23ध्13 के तौर पर दर्ज किया गया. लेकिन सत्ता के गलियारों तक पहुच ,पैसा पैरवी और स्थानीय प्रशासन पर पकड़ की बदौलत मामले के असली गुनहगार साफ साफ बच गये और दो नाइट गार्ड समेत तात्कालिक अधीक्षक पर मामला दर्ज कर पुलिस ने जांच के नाम पर मामले को भुला दिया. वही, दोनों गार्ड और अधीक्षक पर अब भी मामला कोर्ट में चल रहा है।
इससे पहले नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म मामले को लेकर राजद ने आवाज उठाई है. राजद नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने शेल्टर हाउस रेप प्रकरण को लेकर राज्य सरकार पर घटना में शामिल नेताओं और अधिकारियों को बचाने का आरोप लगाया है. राजद नेता ने कहा कि कोर्ट के आदेश पर शेल्टर हाउस में खुदाई शुरू हुई थी. उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहाता है कि इस मामले की सीबीआई हाईकोर्ट मोनिटर जांच करें।
बहरहाल, बिहार सरकार ने कल विधानसभा में स्वीकार कर लिया कि 29 बालिकाओं के साथ दुष्कर्म हुआ है। सरकार की तरफ से मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि बालिका गृह को ब्रजेश ठाकुर की संस्था सेवा संकल्प एवं विकास समिति को 24 अक्टूबर 2013 में दी गई थी। सरकार ने जून 2017 में टीम को सोशल आडिटिंग की जिम्मेवारी सौंपी थी जिसकी रिपोर्ट 27 अप्रैल इस वर्ष मिली। रिपोर्ट में यौन शोषण का उल्लेख था। अब सवाल उठता है कि आखिर केस दर्ज करने में एक महीना 3 दिन क्यों लग गया? बालिका गृह के रख रखाव और देख रेख के लिए सरकारी स्तर कम से कम आधा दर्जन यूनिट हैं। मसलन असिसटेंट डाईरेक्टर, चाईल्ड प्रोटेक्शन तथा इनके अंडर में दो चाईल्ड प्रोटेक्शन आफिसर होते हैं। किसी के खिलाफ सरकार ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। क्यों?
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