अनुदान योजना जारी नई सीईटीपी लगाने और पुराने सीईपीटी उन्नयन की

अनुदान योजना जारी नई सीईटीपी लगाने और पुराने सीईपीटी उन्नयन की

जयपुर। राज्य सरकार ने उद्योगों के प्रदूषित जल के एकत्रिकरण से लेकर अंतिम उपचार तक की एकीकृत सीईटीपी एवं सीईटीपी उन्नयन की योजना जारी की है। उद्योग व राजकीय उपक्रम मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2019-20 के बजट में उद्योगों के प्रदूषित जल के परिशोधन के लिए सीईटीपी की स्थापना व प्रोत्साहन के लिए अनुदान की योजना जारी करने की घोषणा की थी।

उन्होंने बताया कि बजट घोषणा के क्रियान्वयन में राज्य सरकार द्वारा योजना जारी करते हुए उद्योग विभाग को नोडल विभाग बनाया है।
उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन के लिए 200 करोड़ रु. का कोरपस फण्ड बनाया गया है। इस योजना में मुख्य सचिव की अध्यक्षता मेें उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की है। नई योजना की खासबात यह है कि यह योजना प्रदूषित जल को एकत्रित कर सीईटीपी प्लांट तक ले जाने और जल परिशोधन के बाद बची अंतिम गाद के निस्तारण के प्लांट लगाने का प्रावधान है। इस योजना में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर बल दिया गया है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि नई सीईपीटी व सीईपीटी उन्नयन की इस योजना में अधिकतम 50 करोड़ रु. की अनुदान सहायता दी जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इस योजना में समेकित रुप से प्रदूषित जल के सीईटीपी तक परिवहन से लेकर परिशोधन, परिशोधित जल के दोबारा उपयोग और शेष बचे जल और ठोस अपशिष्ठ के निस्तारण तक के प्लांट लगाने को प्रोत्साहित करने का प्रावधान है।
एसीएस डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस योजना में प्लांट लागत की 50 प्रतिशत या अधिकतम 50 करोड़ रु. जो भी कम हो वह राशि अनुदान क रुप में दी जाएगी। सीईटीपी प्लांट स्थापना संबंधित औद्योगिक क्षेत्र के स्पेशल परपज व्हीकल यानी की एसपीवी द्वारा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेन्सी द्वारा किया जाएगा।डॉ. अग्रवाल ने बताया कि प्रदूषण की गंभीर समस्या के चलते नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय के आदेशों से पाली, बालोतरा, जसोल, सांगानेर सहित कई क्षेत्रों में उद्योगों के संचालन में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की इस योजना से प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में नए सीईटीपी स्थापना और पुराने सीईटीपी के उन्नयन की राह प्रशस्त होगी।
उद्योग आयुक्त मुक्तानन्द अग्रवाल ने बताया कि रीको और राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की एक सौ-एक सौ करोड़ की सहभागिता से 200 करोड़ का यह कोरपस फड बनाया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टेट लेवल एप्रूवल कमेटी बनाई है जिसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव वित, उद्योग, पर्यावरण, एमडी रीको, सदस्य सचिव आरएसपीसीबी और समिति के सदस्य सचिव आयुक्त उद्योग को बनाया गया है। अग्रवाल ने बताया कि इसी तरह से राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण इंजीनियर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय टेक्निकल इवेलूएशन कमेटी गठित की गई है जिसमें अतिरिक्त निदेशक/संयुक्त निदेशक उद्योग को सदस्य सचिव व पर्यावरण विभाग के प्रतिनिधि, जीएम ईएम रीको, संबंधित रिजनल अधिकारी राजस्थान प्रदूषण बोर्ड, जीएम डीआईसी और संबंधित यूनिट प्रमुख रीको को सदस्य बनाया गया है।

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