शादी के एक दिन बाद ही किन्नर क्यों हो जातें हैं विधवा

डेस्क। शादी का समय हर व्यक्ति के लिए बहुत ही सुखमय और विशेष होता हैं। शादी के समय आप लंबे जीवन आने वाले पलों के सपने सजाने लगते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि किन्नर समाज के लोग विधवा होने के लिए ही विवाह करते हैं। यह जानते हुए की दूसरे दिन विधवा होना है किन्नर किस्से और ऐसा क्या करने के लिए विवाह करते हैं।

हमारी तरह ही किन्नर जाति भी विवाह करती है। आमतौर पर आपने सुना होगा कि किन्नर अपनी दुनिया में बहुत ही अकेले होते है। पूरा जीवन उनका साथ देने वाला कोई नहीं होता है। वह केवल एक ही क्षमता पर जीते है और वो है उनकी एकजुटता, किन्नर समाज के लोग एक दूसरे के प्रति जुड़ाव की भावना रखते हैं।

आपने सुना होगा कि जब समाज में किसी नए किन्नर का जन्म होता है तो सारे किन्नर उसे काफी धूमधाम से मानते है। और साथ ही यदि किसी किन्नर की मृत्य हो जाए तो अलग-अलग स्थानों से काफी संख्या में किन्नर अंतिम संस्कार के लिए आते हैं और किन्नरों के अंतिम संस्कार की विधि भी दुनिया से काफी अलग होती है। हम सभी यही जानते है की एक किन्नर की शादी नहीं होती है, लेकिन हमारी ये मान्यता गलत है किन्नर समाज भी शादी करता है।

एक किन्नर की भी शादी होती है पर सिर्फ एक दिन के लिए ही वह विवाहित होती है उसके बाद वो विधवा हो जातीं हैं। 

क्यों एक दिन में किन्नर हो जातीं हैं विधवा

यह एक प्रथा का हिस्सा है जो महाभारत के समय से चली आ रही है। मान्यताओं के अनुसार,  जब पांडवों को एक विशेष युद्ध पर जाने के लिए एक राजकुमार की बलि देनी थी। इस दौरान पांडवों ने कई प्रयास किये लेकिन कोई भी राजकुमार अपनी बलि देने के लिए तैयार नहीं था। तब इरावन इस बलि के लिए तैयार हो गया | बता दें कि इरावन धनुर्धर अर्जुन और नाग कन्या उलूपी का पुत्र था। पर इस बलि से पहले उसने एक शर्त रखी। उसकी शर्त थी कि वह बलि से पहले विवाह करना चाहता है। अब राजा युधिष्ठिर चिंतित हो गए | क्योंकि, एक दिन के लिए इरावन से शादी कौन करता।

तब इस समस्या का निवारण करने के लिए स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने मोहिनी रूप धारण किया और इरावन से शादी की। इसके ठीक एक दिन बाद इरावन की बलि दी गयी तो, शादी के अगले ही दिन मोहिनी रूपी श्री कृष्ण विधवा हो गए। इसके बाद मोहिनी रूप में प्रभु ने विलाप भी किया और विधवा रूप में सभी रीति-रिवाजों का पालन भी किया।

इसी घटना को प्रथा के रूप में मानकर किन्नर जाति खुद को भगवान श्री कृष्ण का मोहिनी रूप मानती है और इरावन रुपी प्रतिमा से शादी भी करती है। इसके बाद जब एक दिन गुजर जाता है तो विवाहित किन्नर इरावन की प्रतिमा को तोड़ देती है। इसके बाद वह भी भगवान श्री कृष्ण की तरह घोर विलाप करती है। 

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