इस देश में नहीं ढलता सूरज, लोग ऐसे करते हैं काम

डेस्क। दुनिया के ऊपरी छोर पर आर्कटिक सर्किल में एक ऐसा देश भी है, जहां पर दो महीनों के लिए सूरज चढ़ा रहता है। मतलब यह ढलता नहीं है। यहां पर सूरज बस क्षितिज पर जाकर टिक जाता है। वहीं रात के 12 बजे भी वहीं रहता है। इसी कड़ी में इस देश को लैंड ऑफ मिडनाइट सन भी कहा जाता है। आपके मन में खयाल आ रहा होगा कि क्या इस देश के लोग दो महीने सोते नहीं हैं? साथ ही दिन और रात का पता कैसे चलता है?
पहले तो आपको बता दें कि इस देश का नाम नॉर्वे। वहीं मई से लेकर जुलाई के बीच करीब 76 दिनों तक सूरज यहां पर ढलता ही नहीं है। असल में नॉर्वे धरती की ऐसी जगह पर स्थित है जो पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव के पास में है। धरती तो अपनी धुरी पर घूमती है, तब सूरज के विपरीत दिशा वाले हिस्से में अंधेरा हो जाता है। पर नॉर्वे के किनारे-किनारे से अंधेरा निकल जाता है. लेकिन सिर्फ इन दो महीनों में ही यहां ऐसा नहीं होता।
बता दें कि नॉर्वे ही एक इकलौता देश नही है, जहां पर ऐसा देखने को मिलता है। आर्कटिक सर्किल के नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन, कनाडा का नुनावुत, आइसलसैंड और अलास्का का बरो में भी यह देखने को मिलता है। वहीं सिर्फ नॉर्वे ऐसा देश है जहां पर दो महीने से ज्यादा सूरज ढलता ही नहीं है। समुद्र के किनारे अगर आप खड़े होकर देखेंगे तो सूरज आपको क्षितिज पर टिका हुआ दिखाई देने वाला है। साथ ही जून में अधिकतम 40 मिनट की रात होती है। ऐसे में क्योंकि इस समय धरती का उत्तरी हिस्सा 66 डिग्री से 90 डिग्री लैटिट्यूड के बीच में होता है।
आपको बता दें कि मई से जुलाई तक नॉर्वे में दिन 20 घंटे का होता है यानी सूरज की रोशनी रहती है साथ ही इसके बाद परिस्थिति बदल जाती है। क्योंकि नॉर्वे में नवबंर, दिसंबर और जनवरी में पूरी तरह अंधेरा रहता है। इन तीन महीनों में सूरज निकलता ही नहीं और यहां पूरी तरह से घुप्प अंधेरा रहता है। 
नॉर्वे का क्षेत्रफल 3.85 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का है। वहीं यहां पर प्रति वर्ग किलोमीटर पर 14 लोग भी रहते हैं। यानी यहां की कुल आबादी 54.25 लाख तक है। 

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