धर्म: सनातन धर्म में सात्विक, शुद्ध शाकाहारी भोजन करने की परम्पर है। धर्म ग्रंथो के मुताबिक यदि हिन्दू धर्म में कोई व्यक्ति मांसाहारी भोजन करता है तो उसके घर में नकारात्मक उर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। वही ब्राह्मणों का हिन्दू धर्म में अत्यधिक सम्मान किया जाता है, ब्राह्मण को पूज्यनीय बताया गया है लेकिन अगर कोई ब्राह्मण मांसाहारी है तो उसे नास्तिक कहा जाता है।
लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि मनुस्मृति में ब्राह्मण मांस खा सकते हैं या नहीं इसको लेकर क्या कहा गया है। यदि हम हिन्दू विद्वानों की मानें तो मनुस्मृति एक पवित्र धर्मिक ग्रन्थ है मनुस्मृति के श्लोक 30, अध्याय 5 में लिखा गया है। मनुस्मृति के मुताबिक ब्राह्मण खाने योग्य जानवरों का मांस खा सकता है। लेकिन इसकी कुछ स्थिति होती हैं।
मनुस्मृति के मुताबिक – ब्राह्मण किसी विकट परिस्थिति में फसा है तो वह मांस खा सकता है। यदि किसी के जीवन पर मांस का प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो व्यक्ति मांस खा सकता है। मनुस्मृति के मुताबिक – मछली,हिरण, मृग, मुर्गी, बकरी, भेड़ और खरगोश के मांस को बलि के भोजन के रूप में मंजूरी है।
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