जाने क्यों हर साल मनाई जाती है नागपंचमी और कब शुरू हुआ यह त्योहार

आध्यात्मिक: नागों का हमारे जीवन मे महत्वपूर्ण स्थान है हम उन्हें शिव प्रिय रूप में देखते है और उनकी पूजा भी करते हैं। सावन के महीने में नागपंचमी के दिन नागों को दूध पिलाया जाता है। नागपंचमी का त्योहार हिन्दू धर्म का प्रमुख त्योहार है। इस दिन को लेकर मान्यता है कि यदि आप नागों की पूजा करते हैं तो आपको विशेष फल प्राप्त होगा। नागों को सूर्य व शक्ति का अवतार माना जाता है। 

भारत मे नागपंचमी का त्योहार युगों युगों से मनाया जा रहा है। हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष में पंचमी को नाग पंचमी को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन नागों का दर्शन शुभ माना जाता है। वही मान्याता यह भी है कि अगर कोई इस दिन विधि पूर्वक शिव की आराधना करता है और नागों को पूजता है तो उसे शिव का वरदान प्राप्त होता है और उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।

जाने क्या है नागपंचमी मनाने के पीछे की कहानी :-

कहा जाता है कि एक गांव में एक लीलाधर नाम का किसान रहता था। किसान के तीन पुत्र व एक पुत्री थी। वह काफी मेहनती था। रोज सुबह हलं लेकर अपना खेत जोतने जाता था। एक दिन जब वह हल से अपना खेत जोत रहा था तो उसके हल से नाग के बच्चो की मौत हो गई। नागों की मौत ने नागिन को बहुत क्रोध आया वह अपने बच्चो की मौत का बदला लेने किसान के घर पहुंच गई।
रात को जब किसान अपने बच्चो व अपनी पत्नी के साथ सो रहा था तो नागिन ने उसे व उसकी पत्नी व तीनो बेटों को डस लिया। उन सबकी मौत हो गई लेकिन किसान की बेटी को नागिन ने नही काटा। जब दूसरे दिन नागिन किसान की बेटी को डसने के लिये उसके घर पहुंची तो उसने नाग माता को प्रसन्न करने के लिये उनके सामने दूध रख दिया और उनके सम्मुख हाथ जोड़कर खड़ी हो गई। अपने पिता की भूल के लिये उनसे माफी मांगी और उन सबका जीवन नाग माता से वापस मांगा। नागमात उसके भक्ति भाव से प्रसन्न हुई और उनके परिवार वालो को जीवन दान दिया।
नाग माता ने कहा अब से हर साल श्रावण शुक्ल पंचमी को जो महिला सांप की पूजा करेगी उसकी कई पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी। तब से आज तक हर साल नागपंचमी की पूजा होती है और लोग नाग को पूजते है व अपने परिवार की सुरक्षा की कामना करते हैं।
नागों को न पिलाये दूध:
नागपंचमी की कथा में भले ही किसान की बेटी ने नाग माता को मनाने के लिये उन्हें दूध पिलाया था। लेकिन आप नागपंचमी के दिन नागों को दूध न पिलाये क्योंकि कहा जाता है दूध पीने से नागों की मौत हो जाती है और आपको मृत्यु दोष लगता है। आज के दिन मिट्टी की खुदाई नही की जाती है। इसके अलावा कई जगहों पर तवे का उपयोग नही होता है इसे दोष माना जाता है और कहा जाता है आप अगर तवा चढ़ाते हैं तो इसका मतलब है कि आप नाग का फन आग में झोंक रहे हैं।

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