जाने जगतपिता शिव के त्रिशूल का रहस्य

Aadhyatmik: भगवान शिव हमारे आराध्य है। उन्हें इस संसार का पालनकर्ता कहा जाता है। इस सम्पूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण शिव से हुआ है। महाकाल सभी के कष्टों को हरने की शक्ति रखते हैं। शिव को तीनों लोकों का स्वामी कहा जाता है और जो भी सच्चे मन से शिव की आराधना करता है व ओम नमः शिवाय का जाप करता है उसके सभी कष्ट मिट जाते हैं और उसे कलयुग में स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

शिव के सामने सभी दैत्य व देवता शीश झुकाते है। शिव की भक्ति जो सच्चे मन से करता है उसे शिव वरदान देते हैं। शिव दौत्य देवता सभी को समानांतर देखते है उसके लिए इस सृष्टि का प्रत्येक जीव समान है। वही शिव वह शक्ति है जिसे कभी किसी अस्त्र शस्त्र की जरूरत नही होती है। उनका सबसे प्रमुख शस्त्र उनकी तीसरी आंख है।
शिव की तीसरी आंख प्रतापी है। उसकी लौ को कोई नही सह सकता है। वही शिव के गले मे सर्प, हाथ मे डमरू व त्रिशूल, माथे पर चंद्रमा और जटाओं में गंगा समाहित है। इन सबमें बहुत प्रताप होता है। वही अगर हम शिव त्रिशूल की बात करे तो यह किसी भी बुरी शक्ति को मिटा सकता है। शिव का त्रिशूल अनेको रहस्यों को खुद में छुपाए हुए हैं। वही आज हम आपको बताने जा रहे हैं शिव के त्रिशूल के 7 ऐसे रहस्य जिन्हें सुनकर आप दंग रह जाएंगे और आज से पहले शायद ही आपने कभी सुना हो…

जाने शिव के त्रिशूल के 7 रहस्य:-

शिव का त्रिशूल कष्ट निवारक है। शिव के त्रिशूल को घर मे रखने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और घर का वातावरण अच्छा रहता है।
शिव के त्रिशूल के तीन शूल इस बात जा प्रतीक है की इस संसार की सबसे बड़ी शक्ति सत, रज और तम है।
शिव के त्रिशूल के तीन शूल , उदय संरक्षण और लयीभूत होने का प्रतिनिधित्व करते भी हैं। 
शिव के त्रिशूल के तीन शूल पशुपति, पशु एवं पाश का प्रतीक है।
धर्म ग्रन्थों के अनुसार शिव के त्रिशूल के तीन शूल भूतकाल, भविष्यकाल और वर्तमान का प्रतिरूप है।
शिव के त्रिशूल में स्वपिंड, ब्रह्मांड और शक्ति मौजूद हैं।
यह वाम भाग में स्थिर इड़ा, दक्षिण भाग में स्थित पिंगला तथा मध्य देश में स्थित सुषुम्ना नाड़ियों का भी प्रतीक है।

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