जाने कैसे रुका था नागदाह अर्थ और क्या होता था इस यज्ञ में

नागपंचमी: आज पूरे भारत मे नागपंचमी का त्योहार मनाया जा रहा है। नागपंचमी के दिन लोग नाग देवता की पूजा करते हैं। कहते हैं जो भी सच्चे मन से नाग देवता को पूजता है नागदेवता उसकी सभी मनोकनाओं को पूरा करते हैं और उसे मन चाह वरदान देते हैं। वही पुराणों में नागदाह यज्ञ का जिक्र किया गया है। तो आइए जानते हैं क्या है नागदाह यज्ञ और क्या है इसकी कहानी।

जाने क्या है नागदाह यज्ञ:

नागदाह यज्ञ एक ऐसा यज्ञ है जिसमे बड़े बड़े साँपो की आहुति दी जाती थी। महाभारत की कथा के मुताबिक राजा जनमेजय ने अपने पिता राजा परीक्षित की मौत का बदला लेने नागदाह यज्ञ करवाया था। इस यज्ञ में दुनिया के बड़े बड़े संपो की आहुति दे दी गई थी। उनके इस यज्ञ से दुनिया के सभी सांप खत्म हो गए थे। सभी लोग चिंता में थे की अगर यह यज्ञ चलता रहा तो इस संसार स साँपो की प्रजाति खत्म हो जाएगी
कहा जाता है जनमेजय के पिता परीक्षित की मौत तक्षक नाग के काटने से हुई थी। जिसके कारण उन्होंने नागदाह यज्ञ करवाया। मौत के डर से तक्षक इंद्र लोक में जाकर छुप गए थे। जब इस बात की सूचना आस्तिक ऋषि को मिली तो उन्होंने यज्ञ देवता की स्तुति शुरू कर दी। जनमेजय ने उन्हें बुलाया तब उन्होंने उससे नागदाह यज्ञ को बन्द करने को कहा, पहले जनमेजय ने ऋषि के आग्रह को न कह दिया लेकिन बाद में वह उसे मान गए।
इस यज्ञ को रुकवाने के बाद जब आस्तिक मुनि अपने मामा वासुकी के घर पहुंचे तो वहां नाग नागिन सभी उनका गुणगाण करने लगे। यह सब देखकर वासुकी काफी प्रसन्न हुए उन्होंने आस्तिक मुनि से कहा वत्स वरदान मांग लो । तब आस्तिक ऋषि ने उनसे वरदान मांगा की जो भी व्यक्ति मेरा नाम ले उसे कभी भी कोई सांप न काटे ओर उसके मन से सांप का भय खत्म हो जाये। वासुकी ने उन्हें यह वरदान दे दिया।

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