यदि आप भी हैं हिन्दू तो जान ले हिन्दू का एक होना क्यों है आवश्यक

इतिहास l जब हम हिन्दू धर्म की बात करते हैं तो हमारे मन मे इसको लेकर कई सवाल उत्पन्न होते हैं। लोग हिन्दू धर्म को लेकर अपनी अलग अलग प्रकार की परिभाषा देते हैं। वही यदि हम इतिहास की बात करें तो हिन्दू धर्म एक ऐसा धर्म है जो सबसे पुराना धर्म है जिसे वैदिक धर्म के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसा धर्म है जो एकता अखण्डता और समरूपता का प्रतीक है। इस धर्म की कोई जाति नहीं थी। लेकिन जैसे जैसे समय बीतता गया लोगों ने इस धर्म की दुर्गति करना आरंभ कर दिया और हिन्दू धर्म जातियों और उपजातियों में विभक्त हो गया। कुछ राजनीतिक व्यक्तियों ने अपने स्वार्थ सिद्धि हेतु हिंदुओ की एकता को तोड़ने हेतु उसे इस जातियों में विभक्त किया और उनके मध्य मतभेद पैदा कर दिया।

 

जाने आज हिन्दू क्यों हो रहा है अलग:-

सबसे पुराना धर्म हिन्दू धर्म जो की एकता अखण्डता और समरूपता का प्रतीक है। कई लोग आज उसको तहस नहस करने में लगे हुए हैं। आज उस धर्म को कई भागों में विभक्त कर दिया गया है। लोगों ने एकता को जातियों के नाम पर बांट दिया है और अपनी स्वार्थ सिद्ध के लिए वह वेद के ज्ञान को भ्रामक बता रहे हैं और सनातन से ऊपर जातीय धर्म को रख रहे हैं। कई लोग हिन्दू धर्म के संस्थापक को लेकर भी हिंदुओं के बीच मतभेद पैदा करने की योजना बनाते हैं। हिन्दू धर्म वह धर्म है जिसका कोई संस्थापक नहीं है क्योंकि इसकी स्थापना स्वयं ब्रह्मा विष्णु और महेश में की है।

ब्रह्म पुराण में लिखा है कि जब इस सृष्टि का निर्माण हुआ था उससे कई वर्ष पूर्व ही हिन्दू धर्म की स्थापना की गई थी। विष्णु से ब्रह्मा, ब्रह्मा से 11 रुद्र, 11 प्रजापतियों और स्वायंभुव मनु के माध्यम से इस धर्म की स्थापना हुई। इस धर्म की स्थापना के बाद सृष्टि का निर्माण हुआ क्योंकि यह धर्म एकता का प्रतीक था जो लोगो को एकजुट होकर रहना सिखाता था। लेकिन व्यापार के ठेकेदारो ने अपनी स्वार्थ सिद्धि हेतु इसपर सवाल खड़े किए और हिन्दू को जातियों में विभक्त किया जातियों को राजनीति स्वार्थ के लिए उपयोग कर यह सभी हिंदुओं को अलग थलग करने में कामयाब हुए और आज हिन्दू जातिय धर्म की बेड़ियों में जकड़ गया है।

 

अब हिन्दू को क्यों देना चाहिए एकता का परिचय:-

पूरे विश्व का 90 फीसदी हिन्दू भारत मे निवास करता है भारत हिन्दू बाहुल्य देश है। लेकिन विश्व तक इस बात का प्रचलन है की भारत मे जो हिन्दू है उसमें एकता की कमी है उन्हें तोड़ना आसान है। क्योंकि भारतीय हिन्दू सनातन या धर्म से नहीं अपितु एक नए धर्म जातिय धर्म की बेड़ियों में जकड़ा हुआ है। जो एकता का नहीं अपितु संघर्ष का प्रतीक है। वही भारत में हिंदुओं के बीच पड़ी इस फुट का फायदा कई बार भारत के दुश्मन देशो को भी प्राप्त होता है।

उदाहरण के तौर पर यदि हम पाकिस्तान का जिक्र करें तो पाकिस्तान जो की मुस्लिम बाहुल्य देश है। लेकिन उसमें मुस्लिमों के मध्य एकता है। यदि पाकिस्तान पर कोई संकट आता है तो सभी मुस्लिम बिना किसी द्वेष के एकजुट होकर उस समस्या से लड़ने के लिए खड़े हो जाते है।

वही जब हम भारत की बात करे  तो यह हिन्दू बाहुल्य देश होकर एक ही देवी देवताओं की पूजा करके, एक ही धार्मिक ग्रन्थ पढ़कर अपने धर्म का विरोध महज इस लिए करता है क्योंकि वह जातिय धर्म की बेड़ियों में विभक्त है। यहां यदि ब्राह्मण पर कोई आंच आती है तो उसके लिए संघर्ष करने हेतु हिन्दू नहीं बल्कि जातिय हिन्दू आगे आता है और अपने जातिय धर्म का रक्षण करता है। वही यदि दलित पर आक्रमण होता है तो उसकी रक्षा उसकी जाति का हिन्दू करता है न कि उनके समर्थन के लिए सम्पूर्ण हिन्दू खड़ा होता है।

इसलिए यदि हम आज के परिदृश्य की बात करे तो आज हिन्दू का एकजुट होना सुरक्षा के संदर्भ से भी अत्यधिक आवश्यक है। पूरे विश्व मे हम देख रहे हैं लोग कोई मौका नहीं छोड़ते दूसरे देश पर आक्रमण करने का। अभी हाल ही में युक्रेन और रूस के मध्य जारी युद्ध इसका उदाहरण है कि भारत मे हिंदुओं का एकजुट होना क्यों आवश्यक है। क्योंकि भारत हिन्दू बाहुल्य देश है वही यदि भारत का हिन्दू एकजुट हो गया तो किसी भी दुश्मन गद्दार की हिम्मत नहीं होगी की वह भारत की ओर आंख उठाकर देखे और भारत की एकता पर सवाल उठाए। क्योंकि जब लकड़ियों का गठ्ठर एकजुट होता है तो उसे कोई नहीं तोड़ सकता वही जब वह अलग अलग होता है तो उसे तोड़ना सरल होता है।

इसलिए हिन्दू जब जातिय धर्म को त्याग कर सनातन संस्कृति परंपरा को स्वीकार कर पुनः हिन्दू धर्म मे एकता आखण्डता और समरूपता का परिचय देगा। तो सम्पूर्ण विश्व मे भारत सर्वश्रेष्ठ देश के रूप में खड़ा होगा और हर और भारत की संस्कृति का ध्वज लहराएगा। भारत मे जातिय समीकरण का नाश होगा और पुनः भारत भगवामय होगा।

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