गुजरात: इस साल दिसंबर में गुजरात मे विधानसभा चुनाव होने को है। पक्ष विपक्ष दोनो गुजरात फतेह करने की कवायद में जुटे हुए हैं। दिल्ली से जहां केजरीवाल गुजरात मे अपना झंडा गाढ़ने की योजना बना रहे हैं। वही सत्ताधारी दल भाजपा और कांग्रेस में हर बार की तरह कांटे की टक्कर है। भाजपा जो गुजरात मे अपनी जीत का रिकॉर्ड खत्म नही करना चाहती है वही कांग्रेस अपने 27 साल के वनवास को खत्म कर गुजरात की सत्ता में वापसी करने की योजना बना रही है।
कांग्रेस की गुजरात मे एक विशेष वोट बैंक पर अच्छी धमक बनी हुई है। गुजरात मे मुस्लिम और आदिवासी समाज कांग्रेस के पक्ष में खड़ा है। वही अगर हम बात गुजरात की संतरामपुर विधानसभा की करे तो अब तक यहां भाजपा को सिर्फ 2 बार जीत हासिल हुई है। यह आदिवासी बाहुल्य सीट है और भाजपा का इस सींट पर कई सालों बाद साल 2017 में आधिपत्य स्थापित हुआ। इस सींट पर भाजपा ने साल 2002 और 2017 में जीत हासिल की। इससे पहले हर बार इस सींट पर कांग्रेस की जीत हुई।
वही अब साल 2022 में भाजपा के सामने यह सींट चुनौती बनकर खड़ी है। भाजपा को यह सींट बचानी है लेकिन कांग्रेस इसपर अपनी नजर गढ़ाए हुए हैं। यह सीट पुनः भाजपा का जीतना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इस सींट का वोटर भाजपा से गुस्सा है और आदिवासी का समर्थन न मिलना भाजपा के गले की फांस बन सकता है।
इस सींट पर अगर हम भाजपा और कांग्रेस की तुलना करें तो यह सींट कांग्रेस के हिस्से में ज्यादा दिखाई दे रही है। इस सींट पर आदिवासी वोट बैंक है जो कांग्रेस के पक्ष में खड़ा है। जानकारी के लिए बता दें संतरामपुर विधानसभा सीट पर 2017 में भाजपा प्रत्याशी कुबेर भाई मनसुख भाई ने जीत दर्ज की थी।
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