President of India: द्रौपदी मुर्मू भारत की 15 वीं राष्ट्रपति बन गई है। द्रौपदी मुर्मू की जीत से पूरा भाजपा परिवार काफी खुश हैं। विपक्ष के राष्ट्रपति उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने द्रौपदी मुर्मू को जीत की बधाई देते हुए कहा था कि उम्मीद करता हूँ वह भारत के संवैधानिक पद पर बिना पक्षपात के काम करेंगी द्रौपदी मुर्मू संथाल जनजाति की महिला है। यह भारत की सबसे पुरानी ओर बड़ी जनजातीय समूह है।
भारत मे आजादी के बाद पहली बार इतने बड़े संवैधानिक पद पर कोई आदिवासी महिला पहुंची है। द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना वास्तव में मिशाल है। लेकिन द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना महज संयोग नही है। इसके पीछे बड़े राजनीति दाव पेज है। भारत मे संथाल जनजति की आबादी जनजति में सबसे अधिक है। साल 2011 में हुई जनगणना के अनुसार भारत मे संथाल जनजाति की आबादी 8 फीसदीं है। मिज़ोरम, नगालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में राज्य की जनसंख्या में इनकी हिस्सेदारी 40 फ़ीसदी से ज़्यादा है।
वही साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने को हैं। राजनीति विशेषज्ञयों का कहना है कि भाजपा की आदिवासी समुदाय पर पकड़ मजबूत नही थी। यह समाज भाजपा से रुष्ट था लेकिन अब द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने से आदिवासी समाज में भाजपा की उम्दा धाक बन रही है। आकड़े बताते हैं कि 2014 से आदिवासी समाज ने अपनेवोट बैंक और अपनी राजनीतिक में पकड़ को मजबूत किया है। यह हमेशा से कांग्रेस के पक्ष में रहे हैं कई बार भाजपा को इसके चलते मुह की खानी पड़ी है।
लेकिन समय से साथ परिस्थितियों में परिवर्तन हुआ। भाजपा ने कांग्रेस के आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाना शुरू किया। जिसके परिणामस्वरूप 2019 के लोकसभा चुनाव में एसटी के लिए आरक्षित 47 लोकसभा सीटों में बीजेपी को 31 सीटें मिली ओर 4 सींटो पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की। बाकी की बची हुई सींटें अन्य के पास गई। कहा जा रहा है द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाने के पीछे भाजपा की बड़ी राजनीति है।
भाजपा द्रौपदी मुर्मू के बलबूते पर महज 2024 नही भेदना चाहती है अपितु भाजपा की कोशिश है कि वह द्रौपदी के जरिए गुजरात मे रूठे आदिवासी समाज को अपने खेमे में कर ले। बता दे तापी नर्मदा प्रोजेक्ट के चलते गुजरात मे आदिवासी समाज भाजपा से रुष्ट है। इस साल के अंत मे गुजरात मे चुनाव होने को है ओर ऐसे में आदिवासी समाज का कांग्रेस के साथ खड़ा होना भाजपा के लिए बड़ा संकट बन सकता है भाजपा किसी भी कीमत पर गुजरात मे अपने 30 साल के विजय चक्र को नही तोड़ना चाहती है।
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