राजनीति:- हिमाचल प्रदेश में इस साल के अंत मे विधानसभा चुनाव होने हो है। यह वैसे तो छोटा राज्य है लेकिन भाजपा के लिए यहां अपनी जीत कायम रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है। क्योंकि हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का गढ़ माना जाता है। लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस बार हिमाचल को जीतने की कवायद में लगी हुई है। कांग्रेस की रणनीति भाजपा को सत्ता से बाहर कर राजनीति में अपना पुनः वर्चस्व स्थापित करने की है। कांग्रेस अपनी जीत सुनिश्चित करने की कवायद में जुट गई है लेकिन भाजपा भी इस मामले में पीछे नहीं है।
अगर हम हिमाचल प्रदेश में होने वाले चुनाव की बात करे तो दोनो पार्टी अपना अपना वोट बैंक मजबूत करने के लिए जनता को साधने लगी है ओर जनता से जुड़कर राजनीति कर रही है। हिमाचल में इस समय भाजपा की सत्ता है। वही इस बार का चुनाव भाजपा के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के लिए काफी अहम माना जा रहा है। क्योंकि साल 2017 में हिमाचल में भाजपा ने चुनाव प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में लड़ा था। लेकिन विधानसभा चुनाव में उन्हें हार मिली जिसके बाद हिमाचल प्रदेश की बागडोर को भाजपा ने जयराम ठाकुर को सौंपी।
जब जयराम ठाकुर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उनके बाद जेपी नड्डा को भाजपा अध्यक्ष का पद मिला। वही अब इस बार के चुनाव में हिमाचल विजय का सारा बोझ इन दोनों के कंधे पर है। हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य को समझे तो यहां ज्यादा आबादी सवर्ण जाति की है यह राजपूत बाहुल्य राज्य है। वही राजपूत के बाद यहां दलित समाज की बहुलता है। हिमाचल में 32 फीसदीं राजपूत और 25 फीसदीं दलित समाज है। इसके अलावा यहां 18 फीसदी ब्राह्मण ओर 14 फीसदीं पिछड़ा वर्ग है। हिमाचल की राजनीति में राजपूत समाज की अहम भूमिका है यह काफी सक्रियता से राजनीति में भागीदारी करते हैं।
हिमाचल प्रदेश की 48 सींटो में से 33 विधायक है जो राजपूत समाज से है। इनमें भाजपा के 18, कांग्रेस के 12, दो निर्दलीय और एक माकपा विधायक शामिल । अब आकड़ो को देखकर स्पष्ट है कि हिमाचल में भाजपा ओर कांग्रेस दोनो राजपूत समाज को आकर्षित करने की रणनीति तैयार कर रही है ओर इन्ही पर वह अपना दाव खेलगे। जानकारी के लिए बता दें कांग्रेस ने हाल में भाजपा के पूर्व मंत्री खीमी राम शर्मा को अपने पाले में कर लिया। वही सूत्रों का कहना है कि अभी भाजपा के कई अन्य नेता कांग्रेस परिवार का हिस्सा बनेंगे। अब अगर वास्तव में ऐसा होता है तो हिमाचल में भाजपा को अपनी विजय का बगुल फूंकना आसान नहीं होगा।
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