रद्द हुई तापी नर्मदा परियोजना के पीछे है भाजपा का बड़ा राजनीतिक दांव

Gujarat election:- इस साल के अंत मे गुजरात में विधानसभा चुनाव होने को है। सभी दलों के मध्य आपसी घमासान मचा है। सत्ताधारी दल और विपक्ष में शाब्दिक कटाक्ष जारी है। वही हर कोई इस समय गुजरात में आदिवासी वोट बैंक को साधने की फिराक में है। प्रत्येक दल की नजर गुजरात के आदिवासी समाज पर है क्योंकि गुजरात मे यह समाज एक ऐसा समाज है जिसे निर्णायक समाज कहा जाता है और इसी से राजनीति दल की हार जीत तय होती है। 

पिछले कई वर्षों से भाजपा को इस समाज का समर्थन प्राप्त है। भाजपा लगातार इस समाज के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी जीत का लक्ष्य भेदती है। लेकिन वर्ष 2017 में हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में स्थित कुछ बदली दिखी और गुजरात मे इस समाज का काफी हद तक समर्थन कांग्रेस को प्राप्त हुआ इसके समर्थन से गुजरात मे कांग्रेस एक बडी पार्टी के रूप में उभर कर आई वही अब इस बार के चुनाव में हर किसी की नजरें आदिवासी समाज पर टिकी हुई है। 

तापी नर्मदा प्रोजेक्ट का चुनावी कनेक्शन:-

अगर हम भाजपा की बात करें तो पिछले चुनाव में कांग्रेस की शानदार धमक के चलते भाजपा को इस समाज से कोई खास समर्थन नहीं प्राप्त हुआ था। वही अब भाजपा ने इस समाज को तोड़ने और अपने खेमे की रणनीति तैयार कर ली। वही अब इस बीच केंद्र सरकार की तापी नर्मता लिक परियोजना को चुनावी सरगर्मी के चलते सत्ताधारी सरकार ने रद्द कर दिया। इस परियोजना के अगर हम राजनीतिक परिपेक्ष्य को समझे तो इसको लेकर विपक्ष हमेशा राज्य और केंद्र की मोदी सरकार को घेरती रही है विपक्ष गुजरात मे इस परियोजना के नाम पर आदिवासी वोट बैंक के बीच बड़ा दांव खेल सकती थी।
विपक्ष के मुद्दे को विफल करने और अपनी आदिवासी समाज मे उम्दा छवि स्थापित करने के उद्देश्य से गुजरात सरकार ने यह निर्णय लिया है। हालांकि गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस बात की घोषणा करते हुए कहा है कि आदिवासी समाज भाजपा और भाजपा की नीतियों पर विश्वास करता है उन्हें पता है भाजपा उनके विरोध में कोई नीति नहीं लागू करेगी।

जाने क्या था तापी नर्मदा प्रोजेक्ट:-

अगर हम तापी नर्मदा प्रोजेक्ट की बात करें तो इस प्रोजेक्ट के माध्यम से सौराष्ट्र और कच्छ में पानी की कमी को पूरा किए जाने की योजना थी। लेकिन आदिवासी समाज इस प्रोजेक्ट के विरोध में खड़ा था। आदिवासियों का मानना था कि इस प्रोजेक्ट की वजह से कई आदिवासी विस्थापित हो जायेगे और 60 से ज्यादा गांव पानी से डूब जाएंगे। आदिवासी समाज सरकार का इस परियोजना को लेकर खूब विरोध करते दिखी और विपक्ष ने भी इस मुद्दे को खूब तूल पकड़ाई और भाजपा सरकार की जमकर आलोचना की।
वही अब जब गुजरात मे चुनाव नजदीक है तो भाजपा सरकार ने बड़ा दांव खेला है और खुद को आदिवासी हितैषी बताते हुए तापी नर्मदा परियोजना को रद्द कर दिया है। भाजपा इस योजना को रद्द कर आदिवासी वोट बैंक के।साथ अपनी सांठ गांठ करना चाहती है लेकिन अब गुजरात मे विपक्ष भाजपा की नीतियों पर हावी है जिससे भाजपा इतनीं आसानी से आदिवासी समाज को नहीं लुभा पाएगी।

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