बिहार: बिहार की राजनीति में मची सियासी हलचल के बीच नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना सभी को खूब खटक रहा है। इस समय हर कोई यही जानना चाह रहा है कि ऐसा क्या हुआ कि इस समय की सबसे सम्रद्ध पार्टी भाजपा के साथ से नीतीश कुमार ऊबने लगे और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और राज्यपाल के सामने नई सरकार बनाने का दावा पेश किया। तो आइये जानते हैं इन सावालो के जवाब और समझते हैं कि आखिर क्यों नितीश कुमार ने अपने पद से दिया इस्तीफा…
सबसे पहला कारण स्वतंत्रता रहा। बिहार में साल 2017 में विधानसभा चुनाव हुए। भाजपा ने इस चुनाव में 75 सीटें हासिल कीं, तो वहीं जदयू महज 43 सीट पर ही सीमित हो गई। भाजपा ने इस स्थिति का फायदा उठाया और नीतीश कुमार के साथ मिलकर बिहार में सरकार बना ली। भाजपा ने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाया। लेकिन भाजपा ने अपना नियंत्रण बरकरार रखने के लिए दो डिप्टी सीएम- तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी भी उनके साथ रखे।
भाजपा की इस रणनीति ने नीतीश कुमार पर लगामा लगाने जैसा काम किया। नीतीश कुमार सरकार पर अपना नियंत्रण नही रख पा रहे थे। उनके पास निर्णय लेने की आजादी नही थी। जिसके बाद भाजपा से नीतीश कुमार व उनके नेताओ को समस्या होने लगी और आज नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया है।
वही अगर हम बात भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की करे तो जेपी नड्डा के बयान ने बिहार की राजनीति में बड़ा हंगामा मचा दिया। 31 मार्च को जेपी नड्डा ने बिहार में कहा कि आने वाले समय मे बिहार की स्थानीय पार्टियों का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। नड्डा के इस बयान ने हलचल मचा दी।
उन्होंने जैसे ही बयान दिया मैं बार-बार कहता हूं कि देखो अगर ये विचारधारा नहीं होती तो हम इतनी बड़ी लड़ाई नहीं लड़ सकते थे। सब लोग (अन्य राजनीतिक दल) मिट गए, समाप्त हो गए और जो नहीं हुए वे भी हो जाएंगे। रहेगी तो केवल भाजपा ही रहेगी। भाजपा के विरोध में लड़ने वाली कोई राष्ट्रीय पार्टी बची नहीं। हमारी असली लड़ाई परिवारवाद और वंशवाद से है। नड्डा के बयान ने कही न कही नीतीश कुमार को झझकोर दिया और आज उसका परिणाम यह हुआ है कि अब भाजपा और JDU का गठबंधन टूट गया है।
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