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  • गुजरात चुनाव: BJP के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस को हार्दिक की ‘हां’

    गुजरात चुनाव: BJP के खिलाफ लड़ाई में कांग्रेस को हार्दिक की ‘हां’

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर पाटीदार अनामत आंदोलन समिति की कांग्रेस को समर्थन देने की चर्चा कई दिनों से हो रही है. बुधवार को हार्दिक पटेल ने भी इसपर मुहर लगा दी. हार्दिक ने गुजरात विधानसभा चुनाव में साफतौर पर कांग्रेस को समर्थन देने की बात तो नहीं कही. लेकिन, इतना जरूर कहा कि उनकी लड़ाई बीजेपी की नीतियों के खिलाफ है.

    हार्दिक पटेल ने कहा, ‘हम सिर्फ बीजेपी के खिलाफ हैं. इसे आप अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को समर्थन देना कह सकते हैं.”

    ढाई साल तक कोई पार्टी ज्वॉइन नहीं करेंगे हार्दिक
    हार्दिक ने ये बातें अहमदाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही. अपने चुनाव लड़ने की अटकलों को लेकर हार्दिक ने कहा, “मैं कई बार साफ कर चुका हूं कि अगले ढाई साल तक कोई भी पार्टी नहीं ज्वाइन करूंगा.”गुजरात में सरकार बनने पर कांग्रेस लाएगी आरक्षण बिल
    पाटीदार आरक्षण को लेकर हार्दिक पटेल का कहना है कि कांग्रेस ने उनकी सारी बातें मान ली हैं. गुजरात में सरकार बनने के बाद कांग्रेस आरक्षण बिल पेश करेगी.

    आरक्षण पर कांग्रेस का फॉर्मूला मंजूर
    पाटीदार आरक्षण को लेकर हार्दिक ने कहा कि हमने कांग्रेस का फॉर्मूला मान लिया है. उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण हैं. ऐसे में कांग्रेस ने उसी तर्ज पर हमें आरक्षण देने की बात कही है.

    ‘मैं कांग्रेस का एजेंट नहीं’
    हार्दिक पटेल ने कहा, “मुझे अक्सर कांग्रेस का एजेंट बताया जाता है. मैं कांग्रेस का कोई एजेंट नहीं हूं. मैं जनता का एजेंट हूं.” उन्होंने बताया, “बीजेपी ने मुझे खरीदने की कोशिश की थी. कई सौ करोड़ रुपये ऑफर भी किए थे. लेकिन, मैं बिकाऊ नहीं हूं.”

    हमने कांग्रेस से नहीं मांगा टिकट
    हार्दिक पटेल ने टिकट बंटवारे के बाद अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झपड़ पर भी बात की. उन्होंने कहा कि हम लोगों ने कांग्रेस से एक भी टिकट नही मांगा. हम सिर्फ युवा नेतृत्व चाहते हैं.
    पिछले 7 से 8 दिन से टिकट बंटवारे में जो माहौल बनाया गया, जो गलत था. टिकट को लेकर अंदरुनी बवाल है. साजिश के तहत ऐसा किया जा रहा है.

    बीजेपी की नीतियों के खिलाफ है लड़ाई
    हार्दिक पटेल ने कहा कि हमारी लड़ाई बीजेपी के खिलाफ नहीं, बल्कि इसकी नीतियों के खिलाफ है. बीजेपी ने पाटीदारों के स्वाभिमान पर हमला किया है. ये उड़ाई उसके खिलाफ है.

    24 नवंबर को राहुल गांधी का गुजरात दौरा
    दरअसल, राहुल गांधी 24 नवबंर को गुजरात में चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं. कांग्रेस इस कोशिश में लगी है कि राहुल की यात्रा से पहले हार्दिक और कांग्रेस के बीच तस्वीर साफ हो जानी चाहिए.

  • Ayodhya में मस्जिद नहीं बचाते तो… मुलायम ने अपने 79वें जन्मदिन पर किया खुलासा

    लखनऊ । समाजवादी पार्टी (सपा) संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने अपनी पार्टी को आज भी मुसलमानों का समर्थन हासिल होने का दावा करते हुए कहा कि अगर वह अयोध्या में मस्जिद नहीं बचाते तो ठीक नहीं होता क्योंकि उस दौर में कई नौजवानों ने हथियार उठा लिये थे. मुलायम ने अपने 79वें जन्मदिन पर सपा राज्य मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि मुसलमानों ने सपा का साथ नहीं छोड़ा है. पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के नेता उनका वोट नहीं डलवा सके. अगर वोट डलवा दें तो मुसलमान सपा को उसी तरह का वोट दे रहा है, जितना पहले दे रहा था. जिन मुसलमानों ने वोट दिया उनमें से 90 प्रतिशत नेसपा को ही दिया. इस कार्यक्रम में पार्टी अध्यक्ष अखिलेख यादव भी मौजूद थे. उन्होंने कहा आमतौर पर मुसलमान आज भी सपा के साथ सहानुभूति रखता है, लेकिन (मौजूदा हालात को) आप कैसे ठीक करोगे, बूथ कैसे चलवाओगे. उनकी मुसीबत में साथ देकर. सपा संस्थापक ने कहा, 1990 में अपने मुख्य मंत्रित्व काल में देश की एकता के लिये कार सेवकों पर गोलियां चलवायीं. उसमें 28 लोग मारे गये. अगर और मारने होते तो हमारे सुरक्षा बल और मारते. उन्होंने दावा किया आज हम आपको गोपनीय बात बता रहे हैं. अगर हम मस्जिद नहीं बचाते तो, उस दौर के कई मुस्लिम नौजवानों ने हथियार उठा लिये थे. (उन्होंने) कहा कि जब हमारा पूजा स्थल नहीं रहेगा तो देश हमारा है कैसे? इन सवालों को आपको जानना होगा. उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में सपा को महज 47 सीटें मिलने को शर्म की बात करार देते हुए उन्होंने कहा कि अयोध्या में गोली चलवाने के बाद भी 1993 के विधानसभा चुनाव में सपा 105 सीटें जीत गयी थी और फिर उसकी सरकार बन गयी थी। उस वक्त सपा के नौजवान कार्यकर्ता जैसे थे, आज उन जैसे नौजवानों की कमी है. कई तो अपने गांव के बूथ नहीं जीता सकते. उन्होंने कहा कि यहां एक नेता ऐसे बैठे हैं, जिनके गांव के बूथ पर सपा हार गयी, तब भी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उन्हें कितना सम्मानजनक पद दे दिया. उन्होंने कहा, हम खुलकर बोल रहे हैं कि हम पार्टी को कमजोर नहीं देखना चाहते. मैंने अकेले यह पार्टी बनायी थी. सब मिलकर समाज को एक करके समता और सम्पन्नता के लक्ष्य को ले कर चलेंगे तो सपा पहले जैसी मजबूत हो जायेगी. मुलायम ने कहा, एक बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लोकसभा में कहा था कि अयोध्या में गोली चलने से 56 लोगों की मौत हुई थी. हमने कहा कि अगर आप 56 की सूची हमें दे दे तो मैं पैर छूकर माफी मागूंगा. उनके पास सूची नहीं थी. सच्चाई यह थी कि 28 लोग मरे थे, उनमें से जो 12 उपेक्षित रह गये थे, उनके परिजन की मैंने चुपचाप मदद कर दी थी. सपा संस्थापक ने कहा कि आज उनका जन्मदिन भव्य तरीके से मनाया जा रहा है लेकिन आज भी 35 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जो दिन में दो बार अरहर की दाल के साथ खाना नहीं खा सकते. उन्होंने कार्यकर्ताओं को ताकीद की हमारा जन्मदिन मनाना तब सफल होगा, जब संकल्प करके जाना कि जहां पर जो भी व्यक्ति अभाव में हो, उसका साथ दो. चुपचाप मदद करो ताकि उसे हासिल करने वाले व्यक्ति की बदनामी ना हो.
    मुलायम ने पार्टी कार्यकर्ताओं को नसीहत दी कि वे समाजवाद के प्रणेता राम मनोहर लोहिया की सात क्रांतियों का अनुसरण करें। वे भाषा, क्षेत्रीयता, जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव ना होने दें. देश को जोड़ने के लिये सब एक हों। कार्यकर्ताओं को लोहिया के विचारों को पढ़कर उन्हें अपने आचरण में उतारना होगा, गरीबों और वंचितों की मदद करनी होगी, तभी जनता के मन में उनकी और सपा की छवि अच्छी होगी. उन्होंने कहा , आज भी 65 प्रतिशत किसान अपने हाथ से खेती करते हैं. इसके अलावा 35 प्रतिशत ऐसे हैं जिनके पास खेती तो है लेकिन ना बैल है और ना हल. हम बार-बार कहते हैं कि जब तक किसान सम्पन्न नहीं होगा, देश सम्पन्न नहीं होगा. पूर्व रक्षा मंत्री ने भाजपा पर निशान साधते हुए कहा भाजपा झूठ बोलकर सत्ता में आ गयी है. उसने हर नागरिक को 15 लाख रुपये देने की बात कही थी. कई बार खजाने में कमी पड़ती है. अगर एक साथ नहीं दे सकते तो तीन-चार बार में दे दो. पांच साल में 15 लाख दे दो. एक साल में तीन लाख, दो साल में तीन लाख. कम से कम वादा तो पूरा होगा. वादाखिलाफी भ्रष्टाचार होता है. जो काम कर सकते हो, सिर्फ वही बोलना चाहिए. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि आज के दिन वह किसी को बुरा-भला नहीं कहेंगे.।

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  • RSS का फिल्म फेस्टिवल: संस्कारी फिल्मों के लिए इंडस्ट्री में एंट्री करेगा संघ

    RSS का फिल्म फेस्टिवल: संस्कारी फिल्मों के लिए इंडस्ट्री में एंट्री करेगा संघ

     

     

    संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती पर उपजे विवादों के बीच आरएसएस अब फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आने की तैयारी कर रहा है. संघ का मानना है कि फिल्म समाज का आईना है और सामाजिक और बौद्धिक बदलाव इससे लाया जा सकता है. साथ ही साथ फिल्म ही वह सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए आज की युवा पीढ़ी में बेहतर सामाजिक मूल्य और संस्कार भी विकसित किए जा सकते हैं. इसलिए अब संघ इस दिशा में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है.

    ऐसा नही है कि संघ की तरफ से पहली बार इस ओर रुझान दिखाया गया है. समय-समय पर संघ की तरफ से फिल्मों पर टिप्पणी की जाती रही है. हालांकि, इस क्षेत्र में पदार्पण का फैसला पहली बार किया गया है. मई 2017 में बीजेपी नेता और अभी गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा की किताब के आधार पर एक राजमाता विजया राजे सिंधिया पर फिल्म बनाई गई थी.

    ‘एक थी रानी ऐसी भी’ नाम की फिल्माई गई इस फिल्म को राजमाता सिंधिया की जीवनी को बड़ी ही खूबसूरती से उकेरा गया था. इसमें बीजेपी सांसद हेमा मालिनी और दिवंगत नेता और अभिनेता विनोद खन्ना मुख्य भूमिका में थे. इस फिल्म को संघ परिवार ने हाथों हाथ लिया था.

    चित्र साधना के जरिए शुरुआतअब संघ बॉलीवुड में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए आगे आ रहा है. इस ओर पहले कदम के तौर पर संघ फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करेगा. संघ के इस फिल्म फेस्टिवल में तड़क-भड़क वाली मुंबइया फिल्मों को नहीं, बल्कि संस्कार और भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाली फिल्मों को ज्यादा तवज्जो दी जाएगी. फिल्म फेस्टिवल के आयोजन के लिए संघ ने भारतीय चित्र साधना नाम से एक विशेष संगठन बनाया है. इस संगठन का कार्य देश के अलग-अलग हिस्सों में फिल्म फेस्टिवल का आयोजन कर बॉलीवुड में पैठ बनाना रहेगा.

    नंद कुमार को मिली जिम्मेदारी
    इसके लिए संघ ने नंद कुमार को नई जिम्मेदारी दी है. नंद कुमार संघ के तेज तर्रार स्वंयसेवक हैं और अभी प्रज्ञा प्रवाह के प्रमुख के रुप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. उनके साथ दिल्ली प्रांत के सह प्रांत संघ चालक आलोक कुमार को बतौर सह संयोजक के रूप में जोड़ा गया है. इसके अलावा जिन शहरों या प्रांतों में फेस्टिवल का आयोजन होगा, वहां राज्य और स्थानीय समिति बनाई जाएगी. इस तरह का पहला आयोजन दिल्ली में 19 दिसंबर को होगा.

    इससे पहले भी हो चुका है प्रयोग
    इससे पहले ऐसा प्रयोग इंदौर में किया गया था. लेकिन आयोजन को उतनी सफलता नही मिली. इसलिए संघ ने भारतीय चित्र साधना के बैनर तले इसका आयोजन दिल्ली में करने का निर्णय लिया है. इसके लिए दिल्ली में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है. इस समिति में बंगाली एक्टर सुदीप्तो सेन, ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर की पत्नी आयुषी केतकर, अरुण कुमार और आदित्य झा को रखा गया है.

    कई शहरों में होगा आयोजन
    दिल्ली विश्वविद्यालय की राजनीति में रहे आदित्य झा अभी दिल्ली बीजेपी में राजनीति कर रहे हैं तो अरुण कुमार पर दिल्ली में संघ के सह प्रचार प्रमुख का दायित्व है. सूत्र बताते हैं कि दिल्ली के अलावा संघ मुंबई, कोलकाता, जयपुर और दक्षिण के शहरों में फिल्म फेस्टिवल का आयोजन करेगा.

  • गुजरात चुनाव: जब 15 किलो सिक्के लेकर नामांकन के लिए पहुंचा प्रत्याशी

    गुजरात चुनाव: जब 15 किलो सिक्के लेकर नामांकन के लिए पहुंचा प्रत्याशी

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. बीजेपी, कांग्रेस और दूसरी पार्टियों सहित निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन भरना शुरू कर दिया है. इस बीच इलेक्शन डिपॉजिट (चुनावी जमानत राशि) को लेकर दो प्रत्याशियों की चुनाव अधिकारियों से नोकझोंक हो गई. दोनों प्रत्याशी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेश इकोनॉमी का हवाला दे रहे थे. एक ने इसके पक्ष में बात की तो दूसरे ने विरोध स्वरूप पांच हजार रुपये फुटकर जमा करवाए.

    बता दें कि नामांकन के समय कैंडिडेट को कैश या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) से बना ड्राफ्ट डिपॉजिट करना होता है.

    नवसारी विधानसभा से निर्दल प्रत्याशी ने रिटर्निंग अफसर से मांग की है कि उसका पेमेंट चेक से स्वीकार किया जाए. इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैशलेस इकॉनमी का हवाला दिया. वहीं, जलालपुर से बीएसपी के कैंडिडेट 5000 रुपये फुटकर के रूप में जमा करना चाहते थे.

    मंगलवार को निर्दल प्रत्याशी क्रुतिका वैद्य नामांकन फाइल करने पहुंचे. इस दौरान जब रिटर्निंग अफसर ने उनसे डिपॉजिट जमा करने को कहा तो उन्होंने चेक दे दिया. इस पर दोनों में बहस शुरू हो गई. रिटर्निंग अफसर ने नामांकन को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने वैद्य को कहा कि वह डिपॉजिट चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक ही जमा करें.जब रिटर्निंग अफसर ने इस पर सहूलियत देने से इनकार कर दिया तो वैद्य के वकील कुनुभाई सुखड़िया बात को आगे कैशलेस ट्रांजेक्शन की तरफ ले गए. इस दौरान अफसर और वकील के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई. इसके बाद वकील को नामांकन की जगह से लगभग बाहर कर दिया गया. हालांकि, मामला बढ़ता देख प्रत्याशी ने कैश जमाकर स्थिति संभाल ली.

    सुखड़िया ने कहा, आज हम कैशलेस इकॉनमी की बात कर रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि यह सरकार की प्राथमिकता है. इसे ही देखते हुए वैद्य चेक से डिपॉजिट जमा करना चाह रहे थे. लेकिन रिटर्निंग अफसर ने इसे स्वीकार करने से मना कर दिया. नरेंद्र मोदी ने कैशलेस इकॉनमी का नारा दिया है, लेकिन जमीन पर अधिकारी इसे फॉलो नहीं कर रहे हैं.

    दूसरी तरफ जलालपुर विधानसभा से बहुजन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार गुनवंत राठौर ने कैशलेस इकॉनमी का अलग ही तरीके से विरोध किया. सरकार की तरफ से कैशलेस इकॉनमी के लिए दबाव डाले जाने पर राठौर पांच हजार रुपये का फुटकर लेकर पहुंचे.

    राठौर के पास 1 रु, 2 रु और 5 रु के सिक्के थे. सभी सिक्कों का वजन 15 किलोग्राम था. तकनीकी तौर पर राठौर गलत नहीं थे, क्योंकि वह कैश में पेमेंट कर रहे थे. इसलिए उनका नामांकन वैध करार दिया गया. हालांकि, रिटर्निंग अफसर को उनके दिए पैसे को गिनने के लिए अलग से स्टाफ लगाना पड़ा.

  • गांगुली के घर डेंगू लार्वा मिलने पर नोटिस भेजेगा कोलकाता नगर निगम

    गांगुली के घर डेंगू लार्वा मिलने पर नोटिस भेजेगा कोलकाता नगर निगम

     

     

    कोलकाता नगर निगम ने
    टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के घर डेंगू फैलाने वाले मच्छरों का लार्वा पाए जाने के बाद उन्हें नोटिस भेजने का फैसला किया है.

    सौरव के बड़े भाई और पूर्व रणजी खिलाड़ी स्नेहाशीष को डेंगू हुआ है और उनका अभी शहर के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है.

    निगम की मेयर परिषद (स्वास्थ्य) के सदस्य अतिन घोष ने बताया, ‘हमें 19 नवंबर को जांच के दौरान बेहाला स्थित गांगुली के घर से डेंगू के मच्छरों का लार्वा मिला था और हमने उनसे जगह को साफ रखने को कहा.’ लेकिन गुरुवार के निरीक्षण में केएमसी के अधिकारियों ने उस बड़े परिसर में डेंगू के मच्छरों के लार्वा देखे.

    घोष ने बताया कि इसलिए नियमों के मुताबिक हम उन्हें नोटिस भेजेंगे.उधर अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक स्नेहाशीष गांगुली को बुधावार को तेज़ बुखार के साथ शरीर में दर्द की शिकायत के बाद वहां भर्ती कराया गया. टेस्ट के बाद पाया गया कि उन्हें डेंगू है और फिलहाल उनका इलाज चल रहा है.

    राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जनवरी से अब तक पश्चिम बंगाल में डेंगू संबंधित 35 मौतें हुई हैं.

  • कौन संभालेगा जयललिता की विरासत? 21 दिसंबर को वोटर्स करेंगे फैसला

    कौन संभालेगा जयललिता की विरासत? 21 दिसंबर को वोटर्स करेंगे फैसला

     

     

    तमिलनाडु के आरके नगर विधानसभा सीट पर 21 दिसंबर को उपचुनाव होगा. 24 दिसंबर को वोटों की गिनती होगी. चुनाव आयोग ने तारीखों की घोषणा कर दी है. बता दें कि इस सीट से पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता चुन कर आती थीं. उनके निधन के बाद यह सीट खाली है.

    माना जा रहा है कि यह चुनाव जयललिता की विरासत के लिए लड़ा जाएगा. एक तरफ जेल की सजा काट रही शशिकला की भतीजे दिनाकरन हैं तो दूसरी तरफ काफी विवाद के बाद एक हुए ई पलानीस्वामी और पन्नीरसेल्वम का गुट है.

    हालांकि, ईपीएस-ओपीएस कैंप को बुधवार को पहली जीत मिल गई है, जब चुनाव आयोग ने ‘दो पत्ती’ चुनाव चिन्ह उनके गुट को आवंटिट कर दिया.

    बता दें कि पहले 12 अप्रैल को यहां उप चुनाव होने थे. लेकिन चुनाव आयोग ने वोटर्स को पैसे देने के मामले को संज्ञान में लेते हुए चुनाव कैंसिल कर दिया था. तमिलनाडु के स्वास्थ्य मंत्री के यहां रेड मारा गया था और वहां से 89 करोड़ रुपये बरामद हुए थे. आरोप था कि ये पैसे वोटर्स को देने के लिए वहां रखे गए थे.

  • गाजियाबाद निकाय चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी की जीत मानी जा रही है पक्की, डूब सकती है विरोधियों की लुटिया

    गाजियाबाद निकाय चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी की जीत मानी जा रही है पक्की, डूब सकती है विरोधियों की लुटिया

     

     

    गाजियबाद। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में गाजियाबाद निकाय से बीजेपी की जीत पक्की मानी जा रही है। गाजियाबाद से बीजेपी प्रत्याशी आशा शर्मा के प्रचार को देखकर बाकि पार्टियों के उम्मीदवारों ने अपने हथियार मतदान से पहले ही डाल दिए हैं। दिल्ली से जुड़े होने के कारण गाजियाबाद का चुनावी समिकरण दिल्ली पर भी अपना असर डाल रहा है। गाजियाबाद से बीजेपी ने आशा शर्मा, बसपा से मुन्नी चौधरी और सपा ने राखी गर्ग को अपना उम्मीदवार बनाया है। इनमे से आप प्रत्याशी डोली शर्मा और राखी चौधरी पहली बार राजनीति में हाथ अजमा रही है, जबकि आशा शर्मा बीजेपी संगठन से जुड़ी हुई है।

    बीजेपी  प्रत्याशी के पति ग़ाज़ियाबाद स्थित एक निजी कम्पनी में वरिष्ठ अधिकारी थे साथ सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काफ़ी लोकप्रिय है। आशा शर्मा को अपने राजनीतिक अनुभव और आपने पति कि सामाजिक छवि का विशेष लाभ मिल रहा, बीजेपी संगठन के अलावा कई सामाजिक संस्थाएँ व ट्रान्स हींडन में कई रेज़िडेंट वेल्फ़ेर असोसीएशन चुनाव प्रचार में लगी हुई है। बीजेपी की परम्परागत सीट है, बीजेपी अपने बुरे वक़्त में भी यहाँ से जीती है।

    शहर के लोगों का मानना है की यदि बीजेपी का प्रत्याशी यहाँ से जीतता है तो देश व प्रदेश में बीजेपी की सरकार होने का लाभ ग़ाज़ियाबाद को मिल सकता है। अधिकतर मतदाताओं का मानना है कि कोंग्रेस का संगठन है ही नहीं सिर्फ़ पिता और बेटी चुनाव लड़ रहे है, बसपा के अधिकतर लोग या तो पार्टी छोड़ चुके है या निष्क्रिय है,सपा प्रत्याशी स्थानीय संगठन की पसन्द का ना होने के कारण संगठन रुचि नहीं ले रहा, इसलिए लोग बीजेपी की जीत यहाँ से निश्चित मान रहे है।





  • 1 साल में आतंकवाद से 340 लोगों ने गंवाई अपनी जान

    1 साल में आतंकवाद से 340 लोगों ने गंवाई अपनी जान

     

     

    ग्लोबल टेररिज़्म रिपोर्ट 2017 के मुताबिक भारत आतंकवाद से प्रभावित दुनिया के शीर्ष 10 मुल्कों में शुमार है. बीते साल 2016 में भारत में 929 आतंकी हमले हुए जिनमें 340 लोगों को जान गंवानी पड़ी.

    ग्लोबल टेररिज़्म इंडेक्स 2017 के हिसाब से 10 के स्कोर के साथ इराक दुनिया में सबसे ज़्यादा आतंकवाद से जूझने वाला मुल्क है. ऐसे शीर्ष 5 मुल्कों में इराक के अलावा अफ़गानिस्ता, नाइजीरिया, सीरिया और पाकिस्तान शामिल हैं. रैंकिंग के मामले में भारत आठवें नंबर पर है.  नज़र डालिए रिपोर्ट पर और समझिए कि दुनिया में कैसे तबाही मचा रहा है आतंकवाद?

    पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की बात करें तो वो दुनिया में आतंकवाद से सबसे प्रभावित पांचवां देश है. स्कोर के मामले में पाकिस्तान जहां 8.40 पर है तो वहीं भारत 7.53 पर मौजूद है. बीते साल भारत में 340 लोगों ने आतंकवाद के चलते अपनी जान गंवायी वहीं पाकिस्तान में ऐसे पीड़ितों की संख्या 956 थी. साल 2000 से 2016 के दौरान की बात करें तो आतंकवाद का शिकार बनने वालों की कुल तादाद 8238 थी.

    दुनिया के सबसे ख़तरनाक आतंकी संगठन
    वैसे तो दुनिया में सैकड़ों की संख्या में आतंकी संगठन हैं लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक 4 संगठन सबसे ज़्यादा मानवता के लिए ख़तरा बने हुए हैं. जो चार आतंकी संगठन सबसे ज़्यादा ख़तरा हैं, उनमें ISIS, बोको हरम, तालिबान और अल कायदा शामिल हैं.

    इस्लामिक स्टेट की इराक, जॉर्डन, सीरिया, तुर्की, यमन, बेल्जियम, जॉर्जिया जैसे मुल्कों में मौजूदगी है. बोको हरम कैमरून, नाइजीरिया और निगर जैसे मुल्कों में हिंसा फैला रहा है. आतंकी संगठन तालिबान की बात करें तो उसकी गतिविधि अफगानिस्तान और पाकिस्तान में मौजूद है. आखिरी संगठन अल कायदा की बात करें तो वो अल्जीरिया, बांग्लादेश, केन्या, माली, निगर, पाकिस्तान, रूस, सीरिया, युगांडा, यमन और बुर्किना फासो में मौजूद है.

    1 साल में आतंक की भेंट चढ़े हज़ारों
    बीते एक साल में आतंकवाद के चलते दुनिया में हज़ारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी. आतंकवाद से त्रस्त शीर्ष 10 देशों की बात करें तो उनकी तादाद करीब 22 हज़ार है. सबसे ज़्यादा 9765 जान इराक में गई. वहां घायलों की तादाद 13314 है. आतंकियों के निशाने पर लोगों की बात करें तो रिपोर्ट के मुताबिक पहले नंबर पर आम लोग और निजी संपत्ति थे. उसके अलावा पुलिस, अज्ञात, सरकार और अन्य लोग शामिल है.

  • मतदान के दिन बन्द रहेंगे दुकान एवं वाणिज्यक अधिष्ठान : डी0 एम0

    ब्यूरो चीफ कामेश्वर पांडेय, रिपोटर-मन्नान अहमद
    देवरिया, । जिला मजिस्ट्रेट/जिला निर्वाचन अधिकारी (नगर निकाय) सुजीत कुमार ने जनपद में स्थित दुकान और वाणिज्य अधिष्ठानों के स्वामियों को मतदान के दिन 26 नवंबर को दुकान एवं वाणिज्यक अधिश्ठान बन्द करने क निर्देश दिया है। उन्होने कहा है कि यदि उनके क्षेत्र में बन्दी का दिन नही है तो उक्त दिनांक को अपना सप्ताहिक बन्दी दिवस मानकर प्रतिष्ठान को बन्द रखेगें। उक्त आदेश का अनुपालन न करने वाले स्वामियोंध्सेवायोजकों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जायेगी।

  • J&K: पहली बार पथराव करने वालों के खिलाफ FIR वापस लेने की घोषणा

    J&K: पहली बार पथराव करने वालों के खिलाफ FIR वापस लेने की घोषणा

     

     

    जम्मू-कश्मीर की
    मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पहली बार
    पथराव करने में संलिप्त रहे युवाओं के खिलाफ मामले वापस लेने की बुधवार को घोषणा की. महबूबा ने ट्वीट कर कहा कि ये इन युवा लड़कों और उनके परिवार के लिए आशा की एक किरण है.

    केंद्र के विशेष प्रतिनिधि दिनेश्वर शर्मा के सुझाव पर विचार करते हुए ये फैसला लिया गया. महबूबा ने कहा कि विश्वास बहाली का ये कदम सतत वार्ता के लिए माहौल बनाने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है.

    उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘मेरी सरकार ने पिछले साल मई में प्रक्रिया शुरू की थी लेकिन अशांति के चलते इसे रोक दिया गया था.’