‘डीयूएसयू के पास अपने निधियों तक कोई पहुंच नहीं है’
महिला का कहना है कि वह रैली में मुख्यमंत्री योगी को सुनने आई थीं. हमेशा बुर्का पहनकर ही बाहर निकलती हैं. आज तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी ने सबके सामने उनका बुर्का उतरवाया हो. इस घटना के बाद वह थोड़ी असहज हुईं.
मंगलवार को बलिया में मंगलवार की दोपहर सीएम योगी की रैली हुई. रैली ग्राउंड में सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे. इसी दौरान सायरा नाम की महिला बुर्के में वहां पहुंची.
महिला पुलिसकर्मियों ने बुर्के पर जताई थी आपत्तिउसे देखते ही तीन महिला पुलिस कर्मियों ने उसे रोक दिया. महिला पुलिसकर्मियों ने सायरा से बुर्का उतारने को कहा. इसपर सायरा ने बुर्के का ऊपरी हिस्सा उतार दिया और अपना सिर साड़ी के पल्लू से ढंक लिया.
दूसरी महिलाओं ने खींचकर उतारा बुर्का
इस पर एक महिला पुलिसकर्मी ने उसे पूरा बुर्का उतारने को कहा. सायरा का बुर्का फंस गया था. रैली में उनके पास बैठी दूसरी महिलाओं ने उनका बुर्का खींच कर उतारा.
पुलिस ने जब्त कर लिया बुर्का
महिला पुलिसकर्मियों ने उसे बुर्का अपने पास रखने को दे दिया, लेकिन इसी बीच वहां पहुंचे एक पुरुष पुलिसकर्मी ने बुर्का जब्त कर लिया.
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने की आलोचना
सायरा ने इस बात को ज्यादा तूल नहीं दी, लेकिन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस घटना पर आपत्ति जताई है. बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगीमहली ने कहा, “पूरी दुनिया में चाहे कितना भी आजाद ख्याल मुल्क क्यों न हो, हर एयरपोर्ट पर महिलाओं की तलाशी एक पर्दे वाले इनक्लोजर के अंदर होती है. रैली की भीड़ में किसी महिला का बुर्का उतरवा कर छीन लेना गैर कानूनी है. इसके लिए पुलिस वालों को सजा मिलनी चाहिए.’
ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री के ‘चायवाला’ MEME पर बुरी फंसी कांग्रेस
योगी सरकार के इस मंत्री ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें, खतरे में गठबंधन
अलाउद्दीन खिलजी ने अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी की हत्या कर गद्दी पाई थी. इसके अलावा सुल्तान बनते ही उसने सबसे पहले मुल्तान पर हमला किया और उसके सुल्तान, उसके पूरे परिवार, सारे ताकतवर अमीरों को जड़ से खत्म कर दिया. एक के बाद एक हमले कर रहे अलाउद्दीन खिलजी के लिए एक सशक्त सेना और संतुष्ट जनता रखना सबसे बड़ी जरूरत थी. इसके चलते उसने ऐसे कई सुधार किए जो अर्थव्यवस्था और सेना के लिए आज भी उदाहरण माने जाते हैं.
शासन, सेना और बाजार प्रणाली
इतिहासकार बरनी के अनुसार अपने साम्राज्य को बढ़ाने के लिए सबसे पहले खिलजी ने ही धर्म और शासन को अलग किया. उसने सेना और दरबार के पदों में सबसे पहले खानदान नहीं योग्यता के आधार पर लोगों को रखा.खिलजी ऐसा शासक था जिसने बाजार प्रणाली को कड़ाई से नियंत्रित किया और महंगाई को लंबे समय तक बढ़ने नहीं दिया. खिलजी की बनाई हुई मंडियों में अनाज तौलने के निश्चित बांट होते थे जिनकी हर साल जांच होती थी. मुनाफे की दर तय थी. मिलावट करने वालों को कड़ी सजा दी जाती थी. ये प्रणाली आज भी चल रही है.
खिलजी की सेना में सैनिकों का हुलिया लिखकर रखा जाता था. इसके साथ ही सेना के घोड़ों को दाग कर निशान लगाया जाता था. उससे पहले सैनिक अच्छी नस्ल के घोड़े सेना के अस्तबल से ले जाते और खराब घोड़े जमा करवा देते थे.
खिलजी पहला शासक था जिसने स्थाई सेना सालाना तन्ख्वाह पर रखी. इसके अलावा वो जीतने पर लूटे गए खजाने का भी एक निश्चित हिस्सा भी सैनिकों को देता था.
राशनिंग और डाक व्यवस्था के लिए मशहूर अलाउद्दीन खिलजी को दिल्ली के सीरी फोर्ट के लिए भी जाना जाता है. 1316 को ड्रॉप्सी, जलोदर के चलते खिलजी की मौत हो गई. खिलजी के करीबी माने जाने वाले मलिक काफूर ने इसके बाद गद्दी पर कब्जा कर लिया.
राजनीति में इतिहास का इस्तेमाल खतरनाक
कई इतिहासकार मानते हैं कि काफूर ने ही खिलजी को धीमा जहर दिया था. काफूर ने इसके बाद खिलजी के पूरे खानदान को खत्म करना शुरू किया. 36 दिन तक बादशाह रहे काफूर ने आदेश दिया कि शहजादों की आंखें तरबूज की तरह चीर कर निकालीं जाए. खिलजी के बेटों में एक मुबारक खिलजी इस बीच बच निकला. उसने अपने पिता के वफादार सैनिकों की मदद से सोते समय मलिक काफूर की गर्दन काट दी.
हमारे देश के इतिहास में सिर्फ रक्तपात के लिए ही आम लोगों के मानस में बसे खिलजी की खूबियां कम ही लोगों को याद होंगी. मुल्क हजारों सालों में बनते हैं. लेकिन जब इतिहास का इस्तेमाल राजनीति के लिए होता है तो शासकों और बादशाहों की सिर्फ गढ़ी हुई तस्वीरें ही याद रह जाती हैं.
(फर्स्टपोस्ट के लिए अनिमेष मुखर्जी)
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि भंसाली के एक प्रशंसक की ओर से बीजेपी हरियाणा इकाई के मुख्य मीडिया संयोजक अमू के खिलाफ शिकायत पर यहां सेक्टर 29 थाने में आईपीसी के तहत एक मामला दर्ज़ किया गया. हालांकि अमू अपने बयान पर कायम हैं और उन्होंने हरियाणा पुलिस को गिरफ्तार करने की चुनौती दी.
वहीं कारण बताओ नोटिस मिलने के बावजूद सूरजपाल अमू ने मंगलवार को कहा कि वो किसी को फिल्म ‘पद्मावती’ नहीं देखने देंगे. उन्होंने दावा किया कि रानी पद्मावती के किरदार को फिल्म में गलत तरीके से दिखाया गया है.
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘मैं फिल्म नहीं देखना चाहता और मैं किसी को भी इसे देखने नहीं दूंगा. अगर आप इसे गुंडागर्दी कहते हैं तो मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता.’ उन्होंने कहा, ‘फिल्म का ट्रेलर टेलीविजन और सिनेमा हॉल में दिखाया जा रहा है. ट्रेलर में जिस तरह का दृश्य मैंने देखा है, मुझे आपसे कहते हुए शर्म आती है.’उन्होंने कहा, ‘अगर फिल्म दिखायी गयी, आप जानते हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है. समूचा क्षत्रिय समाज देश के सभी सिनेमा हॉलों को बर्बाद कर देगा.’
(एजेंसी इनपुट के साथ)
लखनऊ। यूपी में निकाय चुनाव की बिसात बिछने के बाद हर प्रत्याशी अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए जनता से वादे कर रहा है। इसी बीत लखनऊ से बीएसपी की महापौर पद की प्रत्याशी बुलबुल गोदिया ने कहा कि अगर वो चुनाव जीतती हैं तो वो नवाबो के शहर लखनऊ में वाईफाई सुविधा के विस्तार के लिए कार्य करेंगी, साथ ही शहर में महिलाओं के लिए अलग से पिंक टॉयलेट्स का निर्माण करवाया जाएगा। आपको बात दें कि बीएसपी 17 साल बाद अपने चुनाव चिन्हा हाथी पर चुनाव लड़ रही है। बसपा की मेयर पद की प्रत्याशी ने कहा कि लखनऊ के कुछ पॉश इलाकों में तो वाईफाई की अच्छी स्पीड है, लेकिन शहर के कई इलाके ऐसे हैं जहां इसकी स्पीड कुछ खास नहीं हैं।
इस समस्या को लखनऊ निकाय में बसपा की सरकार बनने के बाद बदला जाएगा और वाईफाई की स्पीड बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि हमने केवल महिलाओं के लिए शहर में पिंक ऑटो रिक्शा को नवजीवन देने का भी फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार में शुरू हुए ये पिंक ऑटो रिक्शा महज शोपीस ही बनकर रह गए हैं और परिवहन साधन के रूप में उनकी कोई अहम भूमिका नहीं है। वहीं बसपा प्रत्याशी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि बीजेपी ने महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट्स की उनकी अवधारण की नकल की है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षा में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई.
विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वेतन में वृद्धि के संदर्भ में संसद में एक विधेयक पेश किया जायेगा.
उल्लेखनीय है कि साल 2016 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने इस बारे में सरकार को पत्र लिखा था और उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि की मांग की थी.उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को अभी वेतन और भत्ते से सभी तरह की कटौती के बाद प्रति माह 1.5 लाख रुपए प्राप्त होते हैं . प्रधान न्यायाधीश को थोड़ा अधिक वेतन प्राप्त होता है.
एमएसएमई सचिव एल. एन. गुप्ता को लिखे पत्र में उद्योग के निदेशक स्मृति रंजन प्रधान ने कहा कि ‘ओडिशा रसगुल्ला’ का पंजीकरण होने की संभावना बहुत अधिक नहीं है. पत्र में कहा गया है, ‘जब तक यह स्थापित नहीं हो जाता है कि ओडिशा के रसगुल्ला में कुछ विशिष्ट गुण, अभिलक्षण और ख्याति है और अनिवार्य रूप से यह ओडिशा राज्य से जुड़ा हुआ है, तब तक ओडिशा रसगुल्ला को जीआई पंजीकरण मिलना मुश्किल है.’
पत्र में कहा गया है कि चूंकि ओडिशा में तैयार किए जाने वाले बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के मीठे व्यंजन हैं, इसलिए इस मिठाई से जुड़े किसी निश्चित विशिष्टता की पहचान करना मुश्किल होगा, इसलिए ओडिशा रसगुल्ला नाम से आवेदन करने का कोई लाभ नहीं मिलेगा. इसलिए यह सिफारिश की जाती है कि प्राचीन जगन्नाथ रसगुल्ला की अनोखी पहचान के लिए जीआई टैग के लिए आवेदन किया जाए, क्योंकि यह ओडिशा की जगन्नाथ संस्कृति का एक प्रमुख अनुष्ठान भी है.
उद्योगों के निदेशक ने सुझाव दिया कि श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) या यहां तक कि सेवाकार संघ राज्य की ओर से भी जीआई टैग के लिए आवेदन दाखिल किया जा सकता है. एमएसएमई मंत्री प्रफुल्ल सामल ने कहा, ‘बंगाली रसगुल्ला पूरे देश का नहीं है. यह साबित करना जरूरी है कि रसगुल्ला का उद्गम भगवान जगन्नाथ के पवित्र गढ़ से है. इसलिए, मैं इतिहासकारों और शोधकतार्ओं से यह साबित करने के लिए अपील करता हूं कि रसगुल्ला की उत्पत्ति जगन्नाथ पीठ से हुई है. मेरा व्यक्तिगत विचार है कि रसगुल्ला ओडिशा का है.’कानून मंत्री प्रताप जेना ने कहा कि एमएसएमई विभाग को पुरी भगवान जगन्नाथ के रसगुल्ला के लिए जीआई टैग हासिल करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
जेना ने कहा कि इस हिसाब से एमएसएमई अधिकारियों ने पुरी में पहले ही एक निरीक्षण किया है. इसके अलावा, हमें जगन्नाथ मंदिर में रसगुल्ला के उपयोग की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जांच करने की आवश्यकता है. यह महाप्रभु की निलाद्रि शुभ अवसर पर प्रमुख भोग (दिव्य भेंट) है.
ये मिसाइल दुश्मन की सीमा में घुसकर लक्ष्य भेदने में सक्षम है. ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से करीब तीन गुना ज्यादा 2.8 मारक की गति से हमला कर सकती है. फाइटर जेट से मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल के इस परीक्षण को ‘डेडली कॉम्बिनेशन’ कहा जा रहा है.
Supersonic Cruise Missile #Brahmos Test Fired From #Sukhoi Fighter Jet For The First Time. Congrats All ???????? pic.twitter.com/TcE3AQCuZc
— Narendra Modi (@narendramodi177) November 22, 2017
ब्रह्मोस मिसाइल अंडरग्राउंड परमाणु बंकरों, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर और समुद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स को दूर से ही निशाना बना सकती है. इस मिसाइल का वजन 2.9 टन होता है, लेकिन जिस मिसाइल का परीक्षण हुआ, उसका वजन 2.4 टन था.
BrahMos supersonic cruise missile successfully tested from a Sukhoi-30MKI fighter jet pic.twitter.com/B4FqzX8jTA
— ANI (@ANI) November 22, 2017
सेना ने 290 किलोमीटर की रेंज में जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को पहले ही अपने बेड़े में शामिल कर लिया है. इस मिसाइल के लिए 27,150 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए गए हैं.
ये भी पढ़ें: ICJ में भंडारी के लिए सुषमा स्वराज ने किए 60 कॉल, ऐसे हुई ‘लॉबिंग’
लखनऊ। प्रदेश के गाजियाबाद जिले में अज्ञात बदमाशों की गोली से घायल सपा पार्षद रहे इस्लामुद्दीन से पुलिस ने बयान दर्ज कर लिया है। पुलिस की मानें तो सपा नेता पर गोली चलने का मामला संदिग्ध है और पुलिस मामलें की विवेचना करने बाद ही कुछ स्पष्ट रूप से कह सकती है।
जानकारी हो कि बीते मंगलवार की रात नौ बजे करीब दो अज्ञात बदमाशों ने अभी तक सपा पार्षद इस्लामुद्दीन पर गोली चला दी। गोली हाथ में लगी और वह घायल अवस्था में नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर गये। जहां से दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना की सूचना मिलने पर रात्रि 12 बजे तक परिवार के सदस्यों को पहुंचना हुआ और पुलिस विभाग के अधिकारियों की एक टीम भी पहुंची। इस्लामुद्दीन के उपचार के बाद उनका बयान पुलिस ने बुधवार को सुबह दर्ज किया।
बता दें कि लोनी बार्डर थाना के प्रभारी निरीक्षक अरूण कुमार ने बताया कि उक्त मामलें में पुलिस अपनी कार्यवाही कर रही है। घायल हुए पार्षद समाजवादी पार्टी से जुड़े हुए है। वहीं उनकी पत्नी शहनाज वार्ड चुनाव में प्रत्याशी के रूप में लड़ रही है। वह चुनाव कार्यालय से घर की ओर जाने के लिए निकले ही थे, तभी मोटरसाइकिल से आये दो बदमाशों ने उनका नाम पुकारते हुए गोली चला दी।
वहीं नगरीय निकाय चुनाव के दौरान हुई घटना की जांच की जा रही है। वैसे मामला संदिग्ध प्रतीत हो रहा है। फिलहाल जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है। सपा पार्षद इस्लामुद्दीन की पत्नी शहनाज ने मीडिया से वार्ता कर कहा है कि उनके पति को निशाना बनाकर गोली चलायी गयी है। चुनाव को कमजोर करने की यह साजिश हो सकती है। पुलिस को जांच कर हमलवरों को गिरफ्तार करने की वह मांग करती है।