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  • राहुल गांधी की ताजपोशी पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी आज लेगी फैसला

    राहुल गांधी की ताजपोशी पर कांग्रेस वर्किंग कमेटी आज लेगी फैसला

     

     

    राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष कब बनेंगे, इसका ऐलान आज हो सकता है. कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने आज सुबह 10.30 बजे अहम मीटिंग बुलाई है. मौजूदा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के 10 जनपथ स्थित आवास पर ये मीटिंग होगी. संभावना है कि मीटिंग में राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने पर मुहर लग सकती है.

    बता दें कि कांग्रेस सेंट्रल इलेक्शन कमेटी ने सोनिया गांधी को चुनाव का प्रस्तावित शेड्यूल दे दिया था. इसपर उन्होंने विचार कर लिया है. अब कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में इसपर मुहर लगाई जाएगी. इसके बाद आज की मीटिंग में तय हो जाएगा कि राहुल गांधी की ताजपोशी कब होगी. सूत्रों का कहना है कि गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले ही राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं.

    आज होगा चुनाव के शेड्यूल का ऐलान
    कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग के बाद पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के शेड्यूल का ऐलान होगा, जो करीब 10 से 15 दिन का होगा. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए किसी अन्य नेता ने नॉमिनेशन फाइल नहीं किया, तो राहुल गांधी का अध्यक्ष बनना तय है.9 दिसंबर के पहले ही हो सकते हैं चुनाव
    संभावना ये ही जताई जा रही है कि राहुल के खिलाफ कोई भी नेता पार्टी अध्यक्ष के चुनाव में खड़ा नहीं होगा. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव 9 दिसंबर यानी गुजरात चुनाव के पहले ही कराए जा सकते हैं. बता दें कि 9 दिसंबर को गुजरात में पहले चरण के चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे.

    पार्टी अध्यक्ष बनने पर राहुल के लिए चुनौती होगा गुजरात चुनाव
    कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद गुजरात चुनाव राहुल गांधी की साख का सवाल हो जाएगा. ‘घर घर कांग्रेस’ कैंपेन के साथ कांग्रेस गुजरात चुनाव में भावनात्मक रूप से लोगों के साथ जुड़ने की पूरी कोशिश कर रही है. हालिया रैलियों में उन्होंने गुजरात में काफी माहौल बनाया है. उनकी छवि दिनोंदिन और बेहतर होती जा रही है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि राहुल गांधी इन चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं.

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  • आदी महोत्सव दिल्लीवासियों को जीवन के सरल तरीकों में झांकना देता है

    आदी महोत्सव दिल्लीवासियों को जीवन के सरल तरीकों में झांकना देता है

     

     

  • इस मामले में सोनिया से पीछे हैं उनकी सास इंदिरा गांधी

    इस मामले में सोनिया से पीछे हैं उनकी सास इंदिरा गांधी

     

     

    सास तो सास होती है. सास अक्‍सर बहुओं को सुनाती हैं कि उन्‍होंने जिंदगी में क्‍या-क्‍या पापड़ नहीं बेले, उन्‍होंने बहुओं से ज्‍यादा दुनिया देखी हैं. उन्‍होंने जिंदगी में जो झेला है, बहुए तो वो कर ही नहीं सकतीं. उलाहनों की इस रेस में शायद ही कोई बहू अपनी सास से आगे निकले, लेकिन देश की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी में से एक इंडियन नेशनल कांग्रेस (आईएनसी) की अध्‍यक्ष सोनिया गांधी एक मामले में अपनी सास इंदिरा गांधी से काफी आगे निकल गई हैं.

    4 दिसंबर को आईएनसी के अध्‍यक्ष पद पर होने जा रही राहुल गांधी की ताजपोशी के बाद सोनिया गांधी अध्‍यक्ष का पद छोड़ देंगी. सोनिया गांधी इस पद पर सबसे लंबे समय तक काबिज रहने वाली शख्सियत हैं.

    यही वजह है कि 19 साल तक पार्टी नेतृत्‍व करने वाली सोनिया गांधी ने कुल 6 साल आइएनसी का अध्‍यक्ष पद संभालने वाली अपनी सास और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ दिया है.

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    सोनिया गांधी और उनकी सास इंदिरा गांधी PHOTO_PTI

    इंदिरा गांधी ने अपने जीवन में तीन बार आईएनसी के अध्‍यक्ष का पदभार संभाला था. 1959 में एक साल विशेष सत्र में आईएनसी की अध्‍यक्ष रहने के साथ ही इंदिरा गांधी ने 1978-83 और फिर 1883-84 तक पदभार संभाला.

    जबकि इंदिरा गांधी से तीन गुना से ज्‍यादा समय तक उनकी बहू सोनिया गांधी ने कांग्रेस को एक सूत्र में पिरोने में योगदान दिया है.

     

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    बर्लिन में इंदिरा गांधी, Photo- PTI

    बता दें कि सोनिया गांधी 1998 में इंडियन नेशनल कांग्रेस की अध्‍यक्ष बनीं. तब से लेकर अब तक इं‍डियन  नेशनल कांग्रेस  के अध्‍यक्ष पद पर सोनिया गांधी को 19 साल हो गए हैं. सोनिया ने अपने अध्‍यक्षीय कार्यकाल के दौरान पार्टी को दो बार केंद्र की सत्‍ता तक पहुंचाने में अहम रोल निभाया है.

    पंडित नेहरू और महात्‍मा गांधी भी हैं सोनिया से पीछे

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    देश के पहले प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहरलाल नेहरू और राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी. Photo_PTI

    सोनिया गांधी ने नाना ससुर और राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी ने भी कांग्रेस की कमान संभाली. यहां तक कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कुल 8 साल तक इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद की जिम्‍मेदारी संभाली. पंडित नेहरू 1929-30 के बाद 1936, 37, 51-52, 53, 54 तक 6 बार अध्‍यक्ष बनाए गए. हालांकि उनका कार्यकाल एक-दो साल का ही रहा. वहीं महात्‍मा गांधी ने भी 1924 में इंडियन नेशनल कांग्रेस में अध्‍यक्ष रहते हुए सेवा की.

    सोनिया गांधी से ज्‍यादा लंबे समय तक कोई भी नेता अध्‍यक्ष पद पर नहीं रहा. ऐसे में इंदिरा गांधी, सरोजिनी नायडू, एनी बेसेंट महिला अध्‍यक्षों के अलावा पुरुषों में भी सोनिया ने ही सबसे ज्‍यादा समय तक जिम्मेदारी संभाली है.

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    सोनिया गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह, PHOTO- PTI

    सोनिया के नेतृत्‍व में दो बार केंद्र की सत्‍ता पर रहा कब्‍जा

    सोनिया गांधी के नेतृत्‍व में आम चुनाव लड़ने वाली इंडियन नेशनल कांग्रेस का दो बार केंद्र की सत्‍ता पर कब्‍जा हुआ. 2004-2014 तक केंद्र में दो बार कांग्रेस के नेतृत्‍व वाला गठबंधन, यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (यूपीए) सत्‍ता में रही. इसके साथ ही कई राज्‍यों में भी कांग्रेस ने कुर्सी पर कब्‍जा जमाया. अक्‍सर ही यह बात उठती है कि उस दौरान सोनिया गांधी चाहती तो पीएम की कुर्सी पर बैठ सकती थीं, लेकिन उन्‍होंने डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाया. वहीं खुद गठबंधन और पार्टी को मजबूती देने के साथ ही राजनीति में अहम भूमिका निभाती रहीं.

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    राहुल गांधी, अपनी मां सोनिया गांधी और बहन प्रियंका बाड्रा के साथ. PHOTO_PTI

    अब तक 59 रहे हैं कांग्रेस के अध्‍यक्ष

    बता दें कि 1885 से लेकर 2017 तक कांग्रेस के कुल 59 अध्‍यक्ष रहे हैं. लेकिन सोनिया के अलावा किसी ने 10 साल से अधिक कांग्रेस का नेतृत्‍व नहीं किया. आजादी से पहले इंडियन नेशनल कांग्रेस के सबसे पहले अध्‍यक्ष डब्‍ल्‍यू सी बनर्जी बने. वहीं अन्‍य लोगों के कुर्सी संभालने के कई सालों बाद सुभाष चंद्र बोस, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, राजीव गांधी आदि ने भी कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद की जिम्मेदारी ली. अब राहुल यह जिम्‍मेदारी उठाने वाले हैं.

  • देश में 7 फीसदी, दिल्‍ली में दिवाली के बाद दोगुना बढ़ा डेंगू

    देश में 7 फीसदी, दिल्‍ली में दिवाली के बाद दोगुना बढ़ा डेंगू

     

     

    डेंगू का डंक देशभर में बढ़ता ही जा रहा है. ताजा आंकड़ों में देश में डेंगू के मरीजों की संख्‍या पिछले साल के मुकाबले 7 फीसदी ज्‍यादा हो गई है. वहीं देश की राजधानी में डेंगू के मामले पिछले साल की तुलना में दोगुने हो गए हैं.

    डायरेक्‍ट्रेट जनरल ऑफ पब्लिक हेल्‍थ, मिनिस्‍ट्री ऑफ हेल्‍थ एंड फैमिली वेलफेयर के नेशनल वेक्‍टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक देशभर में इस साल कुल 140910 मामले सामने आए हैं. जबकि पिछले साल 129166 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी.

    बता दें कि दिल्ली में हर साल होने वाले डेंगू के विस्‍फोट के बावजूद हालात और भी खराब हैं. आंकड़े बताते हैं कि दिल्‍ली में इस बार 8549 रोगियों में डेंगू की पुष्टि हुई है. यह संख्‍या पिछले साल के 4431 मामलों से लगभग दोगुनी है. हालांकि मौतों का आंकड़ा पिछले साल के 10 के मुकाबले इस साल 4 है.

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    फाइल फोटो.

    दिल्‍ली सरकार की ओर से दिए गए स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के आश्‍वासन के बावजूद हालात संभलने का नाम नहीं ले रहे. हालांकि डेंगू से होने वाली मौतों में कुछ कमी आई है. इस साल देशभर में डेंगू से कुल 216 मौतें हुई हैं. जिनकी संख्‍या पिछले साल 245 थी.

    लगातार बढ़ रहे मामलों के बावजूद दिल्‍ली सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है. दिल्‍ली सरकार में एडिशनल डायरेक्‍टर जनरल पब्लिक हेल्‍थ एस एम रहेजा से दिल्‍ली में डेंगू के मरीजों की संख्‍या के आंकड़ों के बारे में बात की गई तो वे नाराज हो गए. उनका कहना था कि दिल्‍ली में चिकनगुनिया के आंकड़े क्‍यों नहीं दिखाए जा रहे जो कम हुए हैं. पिछले साल के डेंगू के 4431 मामलों के मुकाबले इस साल बढ़कर हुए 8549 मामलों पर उन्‍होंने कहा कि इनमें ज्‍यादातर बाहर के मरीज हैं. उनका कहना था कि दिल्‍ली के सिर्फ 4375 मरीज हैं तो फिर सभी मरीजों को दिल्‍ली का क्‍यों कहा जा रहा है.

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    दिल्‍ली में डेंगू से मौत

    रहेजा ने जोर देकर कहा कि दिल्‍ली में डेंगू के मरीजों की संख्‍या पिछले साल के मुकाबले कम हुई है. हालांकि दिल्‍ली सरकार के प्रतिनिधि की ओर से कही जा रही बात दिल्‍ली नगर निगम और नेशनल वेक्‍टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (मिनिस्‍ट्री ऑफ हेल्‍थ एंड फैमिली वेलफेयर) की ओर से जारी आंकड़ों से इत्‍तेफाक नहीं रखती.

    एमसीडी के स्‍वामी दयानंद अस्‍पताल के डॉ. ग्‍लैडविन त्‍यागी का कहना है कि डेंगू का जो समय होता था वो सितंबर होता था और दिवाली आते-आते डेंगू खत्‍म हो जाता था. लेकिन इस बार मौसम की वजह से और बारिश न होने से दिवाली के बाद का मौसम डेंगू के लिए अनुकूल रहा.

    इसके साथ ही जुलाई से सितंबर तक तो लोगों ने भी सफाई का ध्‍यान रखा, ब्रीडिंग नहीं होने दी. लार्वा नहीं पनपने दिया और सफाई रखी, लेकिन उसके बाद दिवाली आई और ये सफाई अभियान आदि बंद हो गए. तापमान कुछ ठंडा लेकिन मच्‍छरों के अनुकूल हो गया. यही वजह रही कि डेंगू ने बैक किया और दिवाली के बाद अचानक डेंगू का प्रकोप बढ़ गया. हालांकि चार-पांच दिन पहले फिर तापमान गिरने से डेंगू के मरीजों में कमी आई है.

    बता दें कि देशभर में इस साल डेंगू  के कुल 1 लाख 40 हजार 910 मामले सामने आए हैं.  इनमें सबसे ज्‍यादा मामले तमिलनाडू में 20141 मामले हैं, जबकि केरल में 19543, कर्नाटक में 15570 और पंजाब में 14049 डेंगू  के केस मिले हैं.

  • IFS अधिकारी का दावा, CVC ने बंद किए एम्स में भ्रष्टाचार के मामले

    IFS अधिकारी का दावा, CVC ने बंद किए एम्स में भ्रष्टाचार के मामले

     

     

    भ्रष्टाचार के मामलों के खुलासे के लिए रेमन मैग्सायसाय अवॉर्ड से नवाजे जा चुके भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने दावा किया है कि सीवीसी ने एम्स में भ्रष्टाचार के मामले बंद कर दिए हैं.

    संजीव ने कहा है कि केंद्रीय सतर्कता आयोग ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुए भ्रष्टाचार के कई ऐसे मामले बंद कर दिए जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर शामिल थे.

    केंद्रीय सतर्कता आयुक्त के. वी. चौधरी के खिलाफ जांच की मांग कर रहे संजीव ने अपने दावे के समर्थन में करीब 1,000 पन्नों के दस्तावेज हाल ही में राष्ट्रपति कार्यालय को भेजे हैं, उन्होंने राष्ट्रपति सचिवालय से सात मामलों का ब्यौरा साझा किया है. इन सात मामलों में एक उस वक्त का है जब एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) के पद पर संजीव की तैनाती के दौरान उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया जा रहा था.

    भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए सीवीसी की इकाई के तौर पर संजीव ने जुलाई 2012 से अगस्त 2014 तक एम्स में सीवीओ के रूप में सेवाएं दी थीं. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार के कई मामले सीबीआई के संज्ञान में लाए. गहन जांच के बाद सीबीआई ने सीवीसी की ओर से बंद किए जा चुके चार मामलों में विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की और उनमें अधिकारियों एवं वरिष्ठ शिक्षकों को नामजद किया. संजीव द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) के जरिए हासिल किए गए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है.सतर्कता नियमावली के मुताबिक, आपराधिक पहलू वाले भ्रष्टाचार के मामले संगठन के सीवीओ की ओर से पहले सीबीआई को भेजे जाते हैं. विभागीय कार्रवाई के मामलों पर सीवीसी के निर्देश के आधार पर कार्रवाई की जाती है. सीवीसी ने अपने जवाब में कहा कि हर मामले में रिपोर्ट का परीक्षण किया गया और उचित स्तर पर इसे तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया गया. अपनी प्रतिक्रिया में सीवीसी ने कहा, ऐसी रिपोर्टें गोपनीय दस्तावेज होती हैं और आयोग की ओर से सलाह दिए जाते वक्त उचित अधिकारी की राय पर गौर किया जाता है.

  • अचानक आई मुसीबत से इस तरह मिलेगा छुटकारा

    अचानक अगर आपके जीवन में मुसीबत आ जाएं तो इन मंत्रों से आप छुटकारा पा सकते हैं। नौकरी में अचानक मुसीबत आएं तो – अगर आपकी नौकरी में अचानक मुसीबत आ गई तो इसके लिए ‘ऊं गं गणपतये नमः’ , 3 दिनों तक सुबह और शाम इस मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से 7 दिनों कर करें। साथ ही गणेश जी को दूब अर्पित करें।

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    शादी फाइनल होने के बाद मुसीबत आ जाएं तो- अगर आपकी शादी तय हो गई और बाद में शादी होने में कोई मुसीबत आ जाएं तो ये उपाय करें दृ इसके लिए ‘ऊं ह्रीं गौर्ये नमरू मंत्र का जाप मां दुर्गा के सामने बैठकर तीन दिनों तक करें। मंत्र का 11 माला जाप करें। इस मंत्र का जाप लाल चंदन की माला से करें। साथ ही मां दुर्गा को लाल फूल अर्पित करें। मंत्र का जाप लाल कपड़े धारण करके करें।

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    अचानक शादीशुदा जीवन में परेशानी हो तो -स्त्रियों के लिए सर्वोत्त्म मंत्र होगा- ऊं पार्वतीपतये नमः, पुरुषों के लिए सर्वोत्तम मंत्र नमः शिवाय होगा। इस मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से 27 दिनों तक करें। मंत्र का जाप भगवान शिव के समक्ष करना चाहिए। भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें।
    धन के लेन-देन में समस्या- इसके लिए सर्वोत्तम मंत्र ऊं श्रीं श्रीयै नमरू होगा। इस मंत्र का जाप स्फटिक या मोती की माला से करें। मंत्र का जाप 11 माला करें। साथ ही मां लक्ष्मी को गुलाबी कपड़े में अक्षत अर्पित करें।
    वास्तु के हिसाब से घर में क्या होना चाहिए पेड़ पौधों का स्थान
    मुकदमे की मुसीबत से छुटकारा दृ इस मंत्र ‘ऊं नमो भगवते आन्जनेयाय महाबलाय स्वाहा’ का जाप करें। जिस दिन से इस तरह की समस्या आएं उसी दिन से इस मंत्र का जाप नौ माला करना शुरु कर दें। इस मंत्र का जाप हनुमान जी के सामने तुलसी की माला से करें। सेहत संबंधी समस्या हो तो – सेहत संबंधी समस्या के लिए ‘ऊं लक्ष्मणप्राणदात्रे नमः’ मंत्र का जाप करें। हनुमान जी के सामने अखंड दीपक जलाएं।

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  • डेंगू के इलाज का बिल 18 लाख रुपये, फिर भी नहीं बच सकी बच्‍ची

    डेंगू के इलाज का बिल 18 लाख रुपये, फिर भी नहीं बच सकी बच्‍ची

     

     

    डेंगू से पीड़ित सात साल की बच्ची के माता-पिता उस समय चौंक गए जब उनकी बेटी के इलाज के लिए डॉक्टरों ने उन्हें 18 लाख रुपए का बिल थमा दिया. ये मामला दिल्ली से सटे गुरुग्राम के फॉर्टिस हॉस्पिटल का है. हालांकि इसके बावजूद भी डॉक्टर आद्या नाम की इस बच्ची को बचा भी नहीं पाए.

    बच्ची के माता-पिता को जो बिल दिया गया वो करीब 19 पन्नों का था. इसमें 661 सीरिंज 2,700 दस्ताने और कुछ अन्य चीजों की कीमत शामिल थी जिसे कथित तौर पर इलाज के समय इस्तेमाल किया गया.

    दिल्ली के द्वारिका में रहने वाले बच्ची के पिता जयंत सिंह ने इलाज का खर्च एडवांस में दिया. हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में बिल की राशि बढ़ाई गई और मनमानी की गई. उन्होंने कहा इतने महंगे बिल के बाद भी आद्या की सेहत का ठीक तरह से ख्याल नहीं रखा गया.

    स्वास्थ्य मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासनइस घटना को संज्ञान में लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने ट्वीट किया कि कृपया घटना की सारी जानकारी मुझे hfwminister@gov.in पर दें. इस मामले में जरूरी कार्रवाई की जाएगी.

    इस मामले में अस्पताल प्रशासन ने किसी तरह की लापरवाही से इनकार किया. अस्पताल की ओर से कहा गया कि इलाज के दौरान मानक चिकित्सा प्रक्रिया का पालन किया गया.

    अपने बयान में अस्पताल ने कहा कि बच्ची को काफी गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. बच्ची के इलाज में सारे स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल और गाइडलाइंस का ध्यान रखा गया.

    बच्ची के पिता का बयान
    न्यूज 18 से बात करते हुए बच्ची के पिता ने बताया कि फोर्टिस में रुकना हमारे लिए शुरुआत से ही नर्क जैसा था. बच्ची को डेंगू टाइप IV हो गया है इसका पता चलने के बाद 31 अगस्त को फोर्टिस अस्पताल में शिफ्ट कराया गया था. द्वारका के रॉकलैंड अस्पताल के डॉक्टर्स ने उसे अस्पताल के पेडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट(पीआईसीयू) में शिफ्ट कराने के लिए कहा था.

    उन्होंने आगे बताया कि फोर्टिस आने पर काफी जोर देने पर आद्या को पीआईसीयू में भर्ती किया गया. उसे हर दिन 40 इंजेक्शन दिए जाने लगे. सस्ती दवाओं का विकल्प होने के बावजूद भी जानबूझकर बिल बढ़ाने के लिए उसे अस्पताल द्वारा महंगी दवाइयां दी गईं.

    फॉर्टिस का बयान
    इस मामले में फोर्टिस अस्पताल ने कहा कि आद्या डेंगू शॉक सिंड्रोम से जूझ रही थी. उसकी हालत को स्थिर बनाए रखने के लिए उसे लाइफ सपोर्ट पर रखा गया था.

    बच्ची के परिवार को उसकी गंभीर हालत के बारे में और ऐसी स्थिति में इलाज के बारे में बता दिया गया था. परिवार को हर दिन बच्ची की सेहत के बारे में जानकारी दी जा रही थी.

    अस्पताल की तरफ से बयान में कहा गया कि 14 सितंबर को परिवार ने मेडिकल सलाह के खिलाफ जाकर बच्ची को अस्पताल से ले जाने का फैसला लिया और उसी दिन बच्ची की मौत हो गई.

  • दिल्‍ली हाईकोर्ट के 5 जजों को भेजा ‘पैगाम-ए-मौत’

    दिल्‍ली हाईकोर्ट के 5 जजों को भेजा ‘पैगाम-ए-मौत’

     

     

    दिल्‍ली में हाईकोर्ट के पांच जजों को धमकी भरा पत्र भेजने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है. बिना तारीख के इस अंतर्देशीय पत्र में जजों से 80 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई है. पैसे न देने पर जजों की मौत की धमकी दी है.

    जजों को भेजे गए इस पत्र पर पैगाम-ए-मौत लिखा है. धमकी भरी चिठ्ठी पाने वाले इन पांच लोगों में एक महिला जज भी शामिल हैं. मामले की गंभीरता देखते हुए दिल्‍ली पुलिस ने थाना तिलक नगर में एफआईआर दर्ज कर ली है.

    एफआईआर में दर्ज जानकारी के मुताबिक दिल्‍ली हाईकोर्ट के जज जीएस सिस्‍टानी,  जस्टिस गीता मित्‍तल, जस्टिस रविंद्रन, जस्टिस संजीव खन्‍ना, जस्टिस मुरलीधर को पैगाम ए मौत और तुम्‍हारी मौत नाम से पत्र भेजे गए हैं.

    इन पत्रों में लिखा है कि 80 लाख रुपये की रकम धौला कुंआ गे पार्क में लेकर आएं अौर प्रमोद व राजेंद्र से मिलें. जस्टिस सिस्‍टानी को लिखा गया है कि वे रकम लेकर आएं, वरना मरने के लिए तैयार रहें. धमकी दी गई कि जस्टिस और उनके स्‍टाफ को जहर देकर मौत की नींद सुला दिया जाएगा.पुलिस ने आइपीसी की धारा 387/506/507 के तहत मामला दर्ज कर लिया है. इसके साथ ही मामले की जांच शुरू कर दी है. वहीं पुलिस धमकी भरे पत्रों में दिए गए दोनों नामों और नंबरों की भी जांच की जा रही है.

  • हैदराबाद: 26 लाख रुपये के साथ फर्जी CBI ऑफिसर गिरफ्तार

    हैदराबाद: 26 लाख रुपये के साथ फर्जी CBI ऑफिसर गिरफ्तार

     

     

    हैदराबाद के आरजीआई हवाई अड्डे पर पुलिस ने फर्जी सीबीआई अधिकारी मखनवाजुल्ला नागेश्वर राव को 26 लाख रुपए की नकदी के साथ गिरफ्तार किया है. आरोपी के पास से सीबीआई का फर्जी आईडी कार्ड भी बरामद हुआ है.

    आरोपी हैदराबाद से विजयवाड़ा जा रहा था, एयरपोर्ट में चेकिंग के दौरान उसके पास के 26 लाख रुपए की  नकदी मिली. पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि, उसका कोई जमीन विवाद है, जिसके लिए 26 लाख रुपयों की जरूरत है, इतना ही नहीं आरोपी ने पुलिस को सीबीआई का कार्ड दिखाकर रौब झाड़ने की कोशिश की और यही उसे महंगा पड़ गया.

    पुलिस ने सीबीआई डिपार्टमेंट से आरोपी के बारे में पूछा तो पता चला कि इस आईडी नंबर का कोई ऑफिसर नहीं है. तब पुलिस ने उन्हें रोककर आयकर विभाग के हवाले कर दिया.

    आरोपी ने इस फर्जी कार्ड के माध्यम से न सिर्फ पैसे कमाए, बल्कि पंचायत विभाग के कर्मचारी और आंध्रप्रदेश सचिवालय में भी काम किया. फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है.

  • गुजरात: टिकट बंटते ही पाटीदार नेताओं में फूट, कांग्रेस में भी उठापटक

    गुजरात: टिकट बंटते ही पाटीदार नेताओं में फूट, कांग्रेस में भी उठापटक

     

     

    गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस की पहली सूची जारी होने के साथ ही हंगामा और बवाल भी शुरू हो गया है. पाटीदार अनामत आंदोलन समिति(पास) के सदस्‍यों में फूट पड़ गई है. कांग्रेस ने ललित वसोया और अमित ठुम्‍मर सहित तीन लोगों को टिकट दिया है.

    सूरत में पाटीदारों ने कांग्रेस कार्यालय पर हंगामा किया और तोड़फोड़ की. सूरत की कामरेज सीट से पास संयोजक नीलेश कुम्‍भाणी को टिकट दिया गया है. पास कार्यकर्ताओं ने उन्‍हें टिकट दिए जाने का विरोध है.

    हंगामा बढ़ने के बाद पाटीदार नेता दिनेश बाभणिया ने प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष भरत सिंह सोलंकी से मुलाकात की है. उन्‍होंने बताया कि पास की अनुमति के बिना कोई भी संयोजक फॉर्म नहीं भरेगा.

    पाटीदार आंदोलन से जुड़े नेताओं को टिकट देने को लेकर रविवार शाम को कांग्रेस और पाटीदार नेताओं ने बैठक की थी.इधर, भरुच में किरण ठाकोर को टिकट मिलने पर युसूफ मलिक विरोध में उतर आए हैं, उन्‍होंने निर्दलीय को समर्थन देने का ऐलान किया है. भावनगर में भी पाटीदारों ने कांग्रेस कार्यालय पर हंगामा किया.

    बता दें कि कांग्रेस ने 77 उम्‍मीदवारों की पहली सूची जारी की है. इसमें सबसे ज्‍यादा 20 पटेलों को टिकट दिया गया है. इसके बाद ओबीसी का नंबर आता है इस वर्ग से 19 प्रत्‍याशी उतारे गए हैं.