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  • Gujarat Elections : भाजपा में घमासान, टिकट न मिलने से पार्टी में इस्तीफे का सिलसिला शुरू

    गांधीनगर। गुजरात चुनाव के पहले भाजपा की मुश्किलें बढ़ गयीं हैं. गठबंधन, सहयोग और जोड़-तोड़ के घटनाक्रमों के बीच अब बहस टिकट बंटवारे तक पहुंच चुकी है. शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी ने उम्मीवारों की पहली लिस्ट जारी की जिसके बाद पार्टी के भीतर से बगावत के सुर उठने लगे.।

    कई नेता टिकट न मिलने से बेहद नाराज नजर आये. इन नेताओं की नाराजगी का आलम यह था कि उन्होंने पार्टी प्रदेश अध्यक्ष जीतू वाघानी को तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा पकड़ा दिया जिसके बाद नाराज पार्टी नेताओं को मनाने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सामने आना पड़ा. अमित शाह शुक्रवार देर रात तक गुजरात भाजपा कार्यालय में मौजूद रहे. बताया जा रहा है कि इस दौरान वह डैमेज कंट्रोल की हर मुमिकन कोशिश करते दिखे हालांकि, उनकी कोशिश क्या रंग लायी, ये अभी साफ नहीं हो पाया है. यहां आपको बता दें कि पहली सूची आने के बाद शुक्रबवार शाम तक ही पार्टी में इस्तीफे का सिलसिला शुरू हो गया था. इनमें अंकलेश्वर विधानसभा सीट पर भाई ने ही अपने भाई के टिकट का विरोध किया.।

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    टिकट की घोषणा होने के बाद भरुच जिला पंचायत के सदस्य वल्लभ पटेल ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने वाले वल्लभ पटेल, ईश्वर पटेल के अपने भाई हैं. अंकलेश्वर सीट से वल्लभ पटेल ने भी पार्टी से टिकट मांगा था. दशरथ पुवार ने जिला भाजपा महामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. वड़ोदरा में भी दिनेश पटेल को टिकट दिये जाने से पार्टी में बगावती सुर खड़े होने शुरू हो गये हैं. पादरी जिला पंचायत और तहसील पंचायत के नेता कमलेश पटेल ने भी पार्टी छोड़ दिया है. वहीं वडोदरा जिला महामंत्री चैतन्य सिंह झाला ने भी पार्टी को इस्तीफा पकड़ा दिया है.।

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    पिछले दिनों ही कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए भोलाभाई गोहिल भी नाराज नजर आ रहे हैं. उन्होंने जसदण सीट से टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने उनपर भरोसा नहीं दिखाया जबकि वो इस सीट से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं. इतना ही नहीं गोहिल ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने की हिम्मत जुटायी थी, लेकिन इस सीट से भरत बोगरा को टिकट दिया गया. बताया जा रहा है कि नाराज गोहिल शनिवार को जीतु वाघानी से मुलाकात कर अपनी बात रख सकते हैं. ।
    भाजपा ने इस बार 70 में से मात्र चार महिलाओं को ही उम्मीदवार बनाया है. घ्टिकट लेने में जो कामयाब रहीं उनमें से सूरत की लिंबायत सीट से विधायक संगीता बेन पाटिल, वडोदरा सुरक्षित सीट से मनिषाबेन वकील, भावनगर पूर्व से विभावरीबेन देव और खेडब्रह सीट से रमीला बेन बेचर शामिल हैं. भाजपा ने पार्टी ने सुरेंद्र नगर जिले से विधायक वर्षा बेन दोशी का टिकट काटा है. वह वढवाण विधानसभा सीट से अपनी दो बार से विधायक हैं. उनका टिकट काट कर धनजीभाई पटेल को टिकट दिया है.
    जिस गोधरा कांड से गुजरात में 2002 के दंगे हुए. उस गोधरा विस सीट पर भाजपा को लगातार हार झेलनी पड़ती थी. कांग्रेस के सीके राऊलजी की छवि को इस बार भाजपा ने भुनाने के लिए उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है.। लोजपा ने गुजरात में भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की है. शुक्रवार को लोजपा की कोर कमेटी की बैठक में यह फैसला हुआ. संसदीय दल नेता चिराग पासवान ने बैठक के बाद निर्णय लिया कि गुजरात में भाजपा को समर्थन दिया जाये.।

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  • निकाय चुनाव की समीक्षा के दौरान मायावती ने कहा, गठबन्धन से गुरेज नहीं

    निकाय चुनाव की समीक्षा के दौरान मायावती ने कहा, गठबन्धन से गुरेज नहीं

     

     

    लखनऊ। बसपा की राष्ट्रीय राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश में शहरी निकाय के लिये हो रहे चुनाव के सम्बंध में चल रही तैयारियों की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को विपक्षियों के हथकण्डे से होशियार रहने की नसीहत दी है। मायावती ने कहा कि भाजपा किसी भी स्तर से चुनाव जीतने के लिए साम, दाम, दण्ड भेद का प्रयोग कर सकती है। साथ ही उन्होंने 2019 के चुनाव में गठबन्धन करने की हामी भरी।

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    उनका कहना है कि सेक्यूलर पार्टियों के साथ गठबन्धन करके चुनाव लड़ने का सवाल है तो बीएसपी इसके खिलाफ नहीं बल्कि इसकी पक्षधर है, परन्तु सम्मानजनक तरीके से तथा सम्मानजनक सीटों के आधार पर ही गठबन्धन मन्जूर होगा। पिछले अनुभव के साथ-साथ वर्तमान का अनुभव काफी खराब व कड़वा रहा।

    वहीं कांग्रेस पार्टी ने हिमाचल में 68 में से अपनी हारी हुई 10 सीट व गुजरात में 182 में से हारी हुई 25 सीट भी देने को तैयार नहीं हुई है, जो गठबन्धन के सम्बन्ध में इनकी नीयत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि बसपा पूरी तरह से अम्बेडकरवादी सोच की पार्टी है तथा समाजवादी पार्टी व कांग्रेस आदि की तरह परिवारवादी पार्टी नहीं है और ना ही कभी बन सकती है।





  • मुकुल की फोन टैपिंग की शिकायत की जांच कर रहा है केंद्र: राजनाथ

    मुकुल की फोन टैपिंग की शिकायत की जांच कर रहा है केंद्र: राजनाथ

     

     

    गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बीजेपी नेता मुकुल रॉय को उनकी इस शिकायत की जांच करके उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया कि पश्चिम बंगाल सरकार उनकी गतिविधियों पर नजर रख रही है.

    बता दें, पिछले महीने राजनाथ सिंह को लिखे पत्र में हाल में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए मुकुल रॉय ने आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा उनके फोन कॉल्स को ‘गैरकानूनी तरीके से टैप’ किया जा रहा है.

    केंद्रीय गृहमंत्री सिंह ने रॉय को लिखे पत्र में कहा, ‘मुझे आपका तीन अक्टूबर 2017 तारीख का पत्र मिला, जो राज्य प्रशासन द्वारा आपकी गतिविधियों की कथित निगरानी से संबंधित है. उचित कार्रवाई के लिए इस मामले की जांच की जा रही है.’ मुकुल रॉय को आज राजनाथ सिंह का जवाब प्राप्त हुआ है.

    गौरतलब है कि बीजेपी नेता मुकुल रॉय ने कथित तौर पर अपने फोन टैपिंग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी और उनकी सरकार कई महीनों से उनका फोन टैप करवा रही है. हालांकि संबंधित जज के कोर्ट में मौजूद न होने की वजह से इस मामले की सुनवाई को 20 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया.रॉय के वकील दुष्यंत सिंह ने कोर्ट को बताया कि पश्चिम बंगाल में कई लोग जो बनर्जी की पार्टी से जुड़े हुए नहीं हैं, उन्होंने भी फोन टैपिंग की आशंका जताई है. याचिका में कहा गया कि इससे पहले भारी उद्योग और लोक उपक्रम राज्य मंत्री बाबुल सुप्रियो ने भी आरोप लगाया था कि पश्चिम बंगाल में कुछ चुने हुए लोगों के फोन टैप किए जा रहे हैं.

  • सीएम योगी के अस्पतालों का बुरा हाल

    सीएम योगी के अस्पतालों का बुरा हाल

     

     

    औरेया। प्रदेश में निजाम बदलने के बाद भी जिले में स्वास्थ सेवाओं में सुधार नही दिखाई दे रहा है।जिले के सीएचसी अस्पताल का क्या हाल है ये हम आपको दिखाते है।पहले की तरह आज भी स्वास्थ सेवाएं बदहाल है। जिले के सहार ब्लॉक में स्थित सीएचसी अस्पताल पहले जिस स्थति में था आज भी वही तस्वीर उसकी बरकार है।प्रदेश में योगी सरकार की तरफ से जनता को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं को लेकर काफी चहल कदमी की जा रही है।

    सरकार के मंत्री व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अधिकारियो से मिलकर स्वास्थ व्यवस्था को चाक चौबंद करने की बात कर रहे है लेकिन औरैया के सहार ब्लॉक का सीएचसी असप्ताल इस कदर बीमार है कि प्रदेश में शायद ही कोई अस्पताल इस हालत में होगा।इसकी चिंता न ही स्वास्थ विभाग के अधिकारियो को है और न ही जनपद के जिला धिकारी जय प्रकाश सगर इसका संज्ञान ले रहे है ।योगी सरकार के प्रदेश में आने के बाद से सभी जनपदों में अस्पतालों में प्रसाशन व विधायको द्वारा लगातार निरिक्षण किये जा रहे है । लेकिन इसके बावजूद भी कोई असर देखने को नही मिल रहा है।

    वही बात करे सीएचसी सहार में आने वाले डॉक्टरों की तो डॉक्टर कोई समय से नही पंहुचा और न ही मरीजो का इलाज हो पाता है जिससे दूर -दूर से इलाज के लिए आये मरीजो को वापस भटकना पड़ता है। अब सवाल उठता है कि सरकार से हर महीने लाखो की सैलरी लेने वाले डॉक्टर सिर्फ अस्पताल में खाना पूर्ती के लिए आते है। और वही कुछ डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस में लगे रहते है अस्पताल में वैसे भी डॉक्टरों की भारी कमी रहती है और जो है भी वो भी अगर गायब रहे तो सोचिये मरीज कहा जाए।और इन की सुध लेने वाला कोई नही है।तो वही सरकार के बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा के तमाम बड़े बड़े दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।

    आपात स्थिति में स्वास्थ सेवाएं मुहैया कराने वाली 108 एम्बुलेंस करीब 3 साल बीतने के बाद डगमगाने लगी है।मेंटेनेंस समस्या के चलते चाहे जब एम्बुलेंस खड़ी हो जा रही है और इसका खामियाजा पीड़ितों को भुगतना पड़ रहा है ।एम्बुलेंस ख़राब हो जाने पर 108 नम्बर डायल करने पर वाहन नही मिल पाता या फिर वाहन होते हुए भी समय से पीड़ित के पास नही पहुच पाता।निजी वाहन के भरोसे मरीजो को अस्पताल पहुचना पड़ता है। सबसे खराब स्थिति सहार ब्लॉक सीएचसी के 108एम्बुलेंस की है की है जो आये दिन ख़राब हो जाती है ।इसे धक्का मारकर स्टार्ट करना पड़ता है ।दरअसल यह समस्या एम्बुलेंस की बैटरी व सेल्फ ख़राब होने से सामने आ रही है।

    वही अस्पताल में सुरक्षा की बात की जाए तो यह अस्पताल आवारा कुत्तों का अड्डा बन गया है ।यहाँ पर 24 घण्टे आवारा कुत्ते बैठे रहते है। अस्पताल सुरक्षा जमीनी तौर पर फेल होतो नजर आ रही है।यकीन नही आता तो दिखिए कि किस तरह अस्पताल के अंदर आवारा कुत्ते टहल और आराम फरमा रहे है। कभी भी बड़ी घटना अंजाम दे सकते है ।लेकिन जिला प्रसासन और अस्पताल प्रसासन क्या तभी कोई एक्शन लेंगे जब कोई कोई बड़ी घटना घटेगी।वही जब हमने इस को लेकर सीएमओ औरैया ए के राय से बात की तो उन्होंने गोल मोल जबाब देते हुए। अस्पताल में सभी कुछ ठीक ठाक बताकर अपनी ही पीठ थपथपाते नजर आये।और अपना काम पूरा कर दिया। ।





  • Gujrat Election : ‘‘सुशासन संकल्प-भाजपा विकल्प’’ के साथ भाजपा ने जारी की 70 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट

    अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ने 70 उन्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। भाजपा की पहली लिस्ट में जिन प्रमुख उम्मीदवारों के नाम का ऐलान हुआ है उनमें मुख्यमंत्री विजय रुपाणी राजकोट पश्चिम सीट से चुनाव मैदान में उतर रहे हैं। उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल मेहसाणा से और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जीतुभाई वाघानी भावनगर पश्चिम से चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमाएंगे। बीजेपी की इस सूची में ज्यादातर पुराने नेताओं के नाम देखने को मिले हैं, साथ ही पटेल समुदाय के भी 17 उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है।
    उल्लेखनीय है कि राज्घ्य की 182 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे। इसके तहत पहले चरण में 89 सीटों पर नौ दिसंबर और दूसरे चरण में 93 सीटों पर 14 दिसंबर को मतदान होगा। दोनों चरणों के मतदान के बाद 18 दिसंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

    वहीं राज्य में चुनाव के लिए निर्वाचन आयोग की तरफ से दोनों चरणों के मतदान के लिए कुल 50,128 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। इन पर राज्य के 4.33 करोड़ मतदाता वीवीपेट युक्त ईवीएम के जरिये मतदान कर सकेंगे। आयोग द्वारा राज्य में पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित 182 मतदान केंद्र भी बनाए जाएंगे।

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  • कर्नाटक विधानसभा ने SC/ST प्रमोशन बिल किया पारित

    कर्नाटक विधानसभा ने SC/ST प्रमोशन बिल किया पारित

     

     

    कर्नाटक विधानसभा ने राज्य में सिविल सेवा पदों में आरक्षण के आधार पर प्रोन्नति हासिल करने वाले सरकारी सेवकों की वरिष्ठता के निर्धारण से संबंधित प्रावधान वाले विधेयक को शुक्रवार को सर्वसम्मति से पारित कर दिया. इस विधेयक को आम तौर पर एससी-एसटी प्रोन्नति विधेयक कहा जाता है.

    विधेयक पर हुयी चर्चा का जवाब देते हुए कानून और संसदीय कार्य मंत्री टी बी जयचंद्र ने कहा कि कानूनी विशेषज्ञों के साथ मशविरा कर यह विधेयक लाया गया है. मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने भी कहा कि यह विधेयक एससी और एसटी समुदायों के हितों की रक्षा के लिए लाया गया है. यह विधेयक 14 नवंबर को विधानसभा में पेश किया गया था.

  • भ्रष्टाचार खत्म करने का दम भर रही योगी सरकार को उन्ही के विधायकों ने दिखाया ठेंगा

    भ्रष्टाचार खत्म करने का दम भर रही योगी सरकार को उन्ही के विधायकों ने दिखाया ठेंगा

     

     

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद भी सूबे में भ्रष्टाचार कम नहीं हो रहा है। भ्रष्टाचार राज्य में उसी तरह से अपने चरम पर बना हुआ जैसा की अखिलेश सरकार में हुआ करता था। दरअसल प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र व्यक्तियों को मकान देने में कोताही बरती जा रही है। सरकार की तरफ से सूबे में किए जा रहे सभी अच्छे कामों को योगी सरकार के विधायक ही ठेंगा दिखा रहे हैं। भ्रष्टाचार को सूबे से जड़ से खत्म करने का दावा करने वाली योगी सरकार के नाक के नीचे उन्ही की पार्टी के एक विधायक ने सरकार के कामों की पोल खोली है।

    सूबे में भ्रष्टाचार की ये बयानगी पेश की है लखीमपुर खीरी की पलिया सीट से बीजेपी के विधायक रोमी साहनी ने। उसने अपनी सरकार को ही ठेंगा दिखाते हुुए जिलों में सरकारी तंत्र की कार्यशैली और योजनाओं का हाल जानने के लिए गठित विधायकों के कोर ग्रुप की 21 सितंबर को हुई बैठक में ये फीडबैक दिया। साहनी ने फीडबैक तब दिया जब योगी सरकार छह महीने की अपनी उपलब्धियों का बखान कर राज्य में हो रहे निकाय चुनाव में जीत दर्ज करने का दम भर रही है। गौरतलब है कि भ्रष्टाचार खत्म करने का दम भरने वाली योगी सरकार को साहनी के अलावा योगी के तीन और विधायकों ने राज्य में पहले भ्रष्टाचार से अवगत कराया है।

    मुजफ्फरनगर के चरथावल क्षेत्र के विधायक विजय कश्यप ने बताया कि उनके जिले में पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार व्याप्त है। भ्रष्टाचार के कारण थानों में पुलिस विधायकों की नहीं सुनती है। जौनपुर के बदलापुर क्षेत्र के विधायक रमेश चंद्र मिश्र ने बताया कि जिले में ग्राम्य विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत अधिकारी व थानों में तैनात सिपाही पांच साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात होने के कारण क्षेत्रीय जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। जिले में बिजली आपूर्ति मात्र चार-पांच घंटे से अधिक नहीं हो पा रही है। कुशीनगर के विधायक रजनीकांत मणि त्रिपाठी ने भी बिजली संकट को गंभीर बताते हुए इसके शीघ्र निदान पर जोर दिया।

     

     





  • ‘बिंदी, काजल में कोई जीएसटी नहीं है, सैनिटरी नैपकिन क्यों नहीं?’

    ‘बिंदी, काजल में कोई जीएसटी नहीं है, सैनिटरी नैपकिन क्यों नहीं?’

     

     

    यदि बिंदी, सिंधुर और काजल को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा जाता है, तो क्यों नहीं एक आवश्यक वस्तु, एक आवश्यक वस्तु, छूट दी जा सकती है, दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को केंद्र से पूछा।

    कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी। हरि शंकर के खंडपीठ ने कहा कि सैनिटरी नैपकिन की आवश्यकता है और उन पर कर लगाने और अन्य मदों की श्रेणी में उन्हें आवश्यक वस्तुओं की श्रेणी में लाने के लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता है।

    जेएनयू विद्वान द्वारा मर्जी

    “आपने बिंदी, काजल और सिंदूर को छूट दी है। लेकिन आप सैनिटरी नैपकिन कर देते हैं यह एक ऐसी आवश्यकता है क्या इसके लिए कोई स्पष्टीकरण है, “पीठ ने पूछा। अदालत ने 31 सदस्यीय माल और सेवा कर (जीएसटी) परिषद में किसी भी महिला की अनुपस्थिति के बारे में भी दुःख व्यक्त किया।

    “क्या आपने यह करने से पहले महिला और बाल विकास मंत्रालय के साथ चर्चा की है या आपने आयात और निर्यात शुल्क को देखा है? यह बड़ी चिंता को ध्यान में रखते हुए किया जाना है, “उसने कहा और इस मामले को 14 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया।

    अदालत ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अफ्रीकी अध्ययन में पीएचडी विद्वान हैं, जो ज़र्मिना इस्सर खान द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो सैनिटरी नैपकिन पर 12% जीएसटी लगाने के लिए चुनौती थी। दलील ने इसे अवैध और असंवैधानिक करार दिया है।

    केंद्र सरकार के स्थायी वकील संजीव नरुला ने कहा कि यदि वे कर से सैनिटरी नैपकिन छूट देते हैं, तो उत्पाद की लागत बढ़ेगी।

    “सैनिटरी नैपकिनों पर जीएसटी की दर शून्य से कम करने के परिणामस्वरूप, सैनिटरी नैपकिन के घरेलू निर्माताओं को इनपुट टैक्स क्रेडिट के पूर्ण रूप से इनकार किया जाएगा, जबकि शून्य रेटिंग आयात यह घरेलू रूप से निर्मित सैनिटरी नैपकिन को भारी नुकसान में आयात कर देगा, जो कि शून्य रेटेड होगा, “केंद्र द्वारा दायर काउंटर एफ़ेडेविट ने कहा।

    ‘सरकार आंकड़ों के साथ खेल रहा है’

    इसके लिए, पीठ ने कहा कि ये तकनीकी और सांख्यिकीय कारण हैं और सरकार आंकड़ों के साथ खेल रही है। केंद्र के हलफनामे में कहा गया है कि सैनिटरी नैपकिन के निर्माण के लिए कच्चे माल 18 या 12% जीएसटी को आकर्षित करते हैं, यहां तक ​​कि सैनिटरी नैपकिन पर 12% जीएसटी के साथ भी, जीएसटी दर संरचना में उलटा होता है।

    यह कहा गया था कि टैक्स की दर न तो मनमानी थी, न ही संविधान में स्वीकार किए जाने वाले संवैधानिक गारंटियों का उल्लंघन, जैसा कि प्रक्रिया ने विभिन्न घोषणाओं के जरिए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित संवैधानिक परीक्षणों के साथ मिलते हैं।

    अदालत ने पहले याचिका पर वित्त मंत्रालय और जीएसटी परिषद की प्रतिक्रियाएं मांगी थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि सामान्य रूप से महिलाओं के लाभ के लिए याचिका दायर की गई है, खासकर उन लोगों के लिए जो निम्न आर्थिक स्तर की हैं।

    याचिका में सैनिटरी नैपकिन पर 12% जीएसटी लागू करने की मांग को खारिज करना और उन्हें ‘शून्य’ दर या कम दर के लिए जिम्मेदार घोषित करना था।

  • शादी के लिए प्रेमी के घर पर प्रेमिका का धरना देखें वीडियो

    शादी के लिए प्रेमी के घर पर प्रेमिका का धरना देखें वीडियो

     

     

    हरदोई। प्रेमी से शादी करने की कई कोशिशों के बाद भी जब वह नहीं माना तो प्रेमिका अपने रंग में आ गई,और लड़के के घर पर बैठ कर धरना देना शुरू कर दिया। मामला हरदोई के बघौली क्षेत्र के फत्तापुर का है। जहां प्रेमिका अपने प्रेमी के घर पर शादी कराने को लेकर धरना पर बैठी है। बघौली थाना क्षेत्र के फत्तापुर निवासी आदित्य का गांव की लड़की से प्रेम प्रसंग था। 2 महीने पहले लड़की की शादी होनी थी, प्रेमी आदित्य के कहने पर उसने शादी नहीं की। अब आदित्य शादी से मना कर रहा तो वह उसके घर पर पहुंच गईं।

    गांव वालों की पंचायत हो रही और मामला निपटाने की कोशिश की जा रही है।प्रेमी के परिजनों ने प्रेमिका को काफी समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रेमिका की जिद है कि उसके परिजन शादी करने के लिए सहमत हो जाये, लेकिन बात बनती नहीं दिख रही है। लड़की का गांव के ही आदित्य से चार वर्ष पहले से प्रेम प्रसंग चल रहा था। मामला प्रेम विवाह तक भी पहुंच गया। इसी बीच लड़की की शादी तय हो गयी और लेकिन प्रेमी ने धमकाया तो लड़की ने शादी करने से मना कर दिया। अब प्रेमी भी शादी से कतरा गया तो उसकी प्रेमिका अपने प्रेमी के घर पहुंच गयी। प्रेमिका घर में ही धरना देने बैठ गयी।

    प्रेमिका ने साफ कह दिया कि वह विवाह उसी से करेगी। इस मामले की जानकारी मिलते ही प्रेमी घर से भाग निकला। प्रेमी के घर वाले प्रेमिका को अपने घर वापस जाने को कह रहे लेकिन वह जाने को तैयार नहीं है। अब पूरे मामले में ग्राम प्रधान के साथ ही प्रेमी व प्रेमिका के परिवार के लोग वार्ता करके मामले को सुलझाने के प्रयास में लग गए हैं। मामले की पुलिस को सूचना भी नहीं है। दोनों के परिवार के लोग दुहाई दे रहे हैं और कहते नजर आए कि जब बात नहीं बनेगी तब पुलिस के सामने जाएंगे। फिलहाल सुलह के प्रयास लगातार चल रहे हैं।





  • दिल्ली का प्रदूषण देख नेहरा ने छोड़ा शहर

    दिल्ली का प्रदूषण देख नेहरा ने छोड़ा शहर

     

     

    देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों प्रदूषण से त्रस्त है. दिल्ली का प्रदूषण इन दिनें चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है. हाल ही में दिल्ली के रहने वाले भारतीय कप्तान विराट कोहली ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर प्रदूषण को लेकर एक वीडियो पोस्ट किया. इस वीडियो में वह दिल्ली वासियों से प्रदूषण कम करने में अपना सहयोग देने का आग्रह कर रहे हैं.

    लेकिन एक नवंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ दिल्ली में पहले टी-20 के रूप में अपना अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले तेज गेंदबाज आशीष नेहरा तो और भी एक कदम आगे निकल गए. इस प्रदूषण की वजह से उनके परिवार को मुंबई में शरण लेने को मजबूर होना पड़ा.

    इस समय भारत और श्रीलंका के बीच कोलकाता में खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में कमेंट्री कर रहे आशीष नेहरा ने टेलीग्राफ से कहा, ‘इस समय दिल्ली एक शहर नहीं बल्कि गैस चैंबर ज्यादा बना हुआ है. यह वाकई में बेहद खराब है और इससे समस्या बढ़ती जा रही है. अफसोस की बात है कि इस समस्या से निपटने के लिए कुछ खास नहीं हो रहा है.’

    नेहरा ने कहा, ‘प्रदूषण की समस्या सालों साल और बिगड़ती जा रही है, लेकिन इस हद तक नहीं पहुंची थी. इन दिनों चिकित्सा जगत भी इसको लेकर चिंतित है. अपने बच्चों (बेटा आरुष और बेटी आरियाना) के स्वास्थ्य की वजह से पत्नी रुश्मा और मैं करीब एक सप्ताह पहले मुंबई शिफ्ट हो गए थे. हमने एक अपार्टमेंट किराए पर लिया है, जिसमें इस माह के अंत तक रहेंगे. इस दौरान जहीर खान की शादी के फंक्शन भी खत्म हो जाएंगे. ‘