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  • पप्पू यादव को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी

    पप्पू यादव को फोन पर मिली जान से मारने की धमकी

     

     

    जन अधिकार पार्टी के संरक्षक और मधेपुरा से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को उनके मोबाइल फोन पर फोन कर जान से मारने की धमकी दी गई है.

    जन अधिकार पार्टी के प्रधान महासचिव एजाज अहमद ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया कि किसी अनजान व्यक्ति ने सुबह सांसद के निजी फोन पर कॉल कर उनके साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी भी दी.

    उन्होंने बताया कि सांसद पप्पू यादव को धमकी देने वाला व्यक्ति स्वयं को चर्चित धार्मिक गुरु जीयर स्वामी का शिष्य बता रहा था. फोन करने वाले व्यक्ति ने करीब पांच मिनट तक सांसद के साथ अभद्र भाषा में बातचीत की. सांसद ने बातचीत का ऑडियो अपने फोन में रिकॉर्ड भी कर लिया है. अहमद ने बताया कि सांसद इस घटना के बाद काफी सदमे में हैं.

    उन्होंने बताया कि सांसद के निजी सचिव ने नई दिल्ली के तिलक मार्ग थाने में इसकी एक प्राथमिकी दर्ज दर्ज कराई है.उल्लेखनीय है कि पप्पू यादव ने बुधवार को फेसबुक के अपने वॉल पर जीयर स्वामी के भूत और वर्तमान की जांच कराने की मांग करते हुए अपनी बात पोस्ट की थी. जीयर स्वामी ने कुछ माह पहले ही आरा में बहुत बड़ा धार्मिक अनुष्ठान कराया था, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हुए थे.

  • अब सरकारी विभाग भी डेंगू व मलेरिया बचाव में निभाएंगे भूमिका

    अब सरकारी विभाग भी डेंगू व मलेरिया बचाव में निभाएंगे भूमिका

     

     

    दादरी जिले में मौजूदा हालातों को देखते हुए डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से निपटने व जागरुकता के लिए सरकारी विभागों का सहारा लिया जाएगा. इसके लिए सरकारी विभागों की जिम्मेदारियां भी फिक्स की गई हैं.

    उपायुक्त विजय कुमार सिद्प्पा ने नवगठित दादरी जिले पहली निगरानी कमेटी की मीटिंग में ही अपने कड़े तेवर दिखाते हुए निर्देश जारी किए हैं. इस दौरान उपायुक्त ने अस्पताल का निरीक्षण भी किया.

    उपायुक्त ने कहा कि डेंगू की जांच के लिए जिले में ही मशीन उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी से मंजूरी मिलने पर जल्द उपलब्ध करवाया जाएगा. इसके अलावा जिले में डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया से निपटने के लिए सरकारी विभागों के अधिकारियों की भी मदद ली लाएगी. साथ ही निर्देश दिए कि वे इस संबंध में अपने अधिनस्थ कर्मचारियों व क्षेत्र में लोगों को जागरूक करें.

    उपायुक्त ने बताया कि जिले में इस वर्ष 15 डेंगू केस सामने आए हैं. डेंगू से बचने के लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को घर-घर पहुंचकर जागरूक करने व अन्य बचाव संबंधि निर्देश जारी किए. वहीं जिला चिकित्सा अधिकारी डा. रणदीप पुनिया के नेतृत्व में जागरूक अभियान चलाने की कमेटी का भी गठन किया.

  • अब सरकारी विभाग भी डेंगू व मलेरिया बचाव में निभाएंगे भूमिका

    अब सरकारी विभाग भी डेंगू व मलेरिया बचाव में निभाएंगे भूमिका

     

     

    दादरी जिले में मौजूदा हालातों को देखते हुए डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया से निपटने व जागरुकता के लिए सरकारी विभागों का सहारा लिया जाएगा. इसके लिए सरकारी विभागों की जिम्मेदारियां भी फिक्स की गई हैं.

    उपायुक्त विजय कुमार सिद्प्पा ने नवगठित दादरी जिले पहली निगरानी कमेटी की मीटिंग में ही अपने कड़े तेवर दिखाते हुए निर्देश जारी किए हैं. इस दौरान उपायुक्त ने अस्पताल का निरीक्षण भी किया.

    उपायुक्त ने कहा कि डेंगू की जांच के लिए जिले में ही मशीन उपलब्ध करवाने के लिए सरकारी से मंजूरी मिलने पर जल्द उपलब्ध करवाया जाएगा. इसके अलावा जिले में डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया से निपटने के लिए सरकारी विभागों के अधिकारियों की भी मदद ली लाएगी. साथ ही निर्देश दिए कि वे इस संबंध में अपने अधिनस्थ कर्मचारियों व क्षेत्र में लोगों को जागरूक करें.

    उपायुक्त ने बताया कि जिले में इस वर्ष 15 डेंगू केस सामने आए हैं. डेंगू से बचने के लिए उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को घर-घर पहुंचकर जागरूक करने व अन्य बचाव संबंधि निर्देश जारी किए. वहीं जिला चिकित्सा अधिकारी डा. रणदीप पुनिया के नेतृत्व में जागरूक अभियान चलाने की कमेटी का भी गठन किया.

  • लखनऊ: राम मंदिर निर्माण को लेकर श्री श्री ने की सीएम योगी से मुलाकात

    लखनऊ: राम मंदिर निर्माण को लेकर श्री श्री ने की सीएम योगी से मुलाकात

     

     

    लखनऊ। यूपी की धर्म नगरी अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक और अध्यातमिक गुरु श्री श्री रविशंकर सीएम से मिलने लखनऊ पहुंचे। रविशंकर ने यहां सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ से राम मंदिर निर्माण को लेकर मुलाकात कर चर्चा की। दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत चलती रहीं, हालांकि दोनों में क्या बातचीत हुई इसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि मंदिर निर्माण को लेकर रविशंकर अब कुछ ही देर में पंडित अमरनाथ मिश्रा के आवास पर कुछ मुस्लिम संगठनों के प्रथिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। बता दें कि अध्यातमिक गुरु 16 नवंबर को अयोध्या जाएंगे और वहां जाकर मंदिर निर्मण से जुड़े पक्षकरों से भी मुलाकात करेंगे।

    हिंदू और मुस्लिम पक्षकरों से मिलकर श्री श्री के अयोध्या जाने के बारे में बताया जा रहा है कि वे अयोध्या पहुंचते ही सीधा मणिराम छावनी जाएंगे और राम जन्मभूमि न्यास अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात करेंगे। इसी के साथ वो न्यास के सदस्यों डॉ. रामविलास वेदांती, मस्जिद के पैरोकार स्वर्गाीय हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी से मुलाकात करेंगे। रविशंकर ने अयोध्या जाने को लेकर कहा कि वो अयोध्या विवाद में अपनी इच्छा से एक मध्यस्थ के तौर पर शामिल हैं और वो सभी हितधारकों से मिलने के लिए 16 नवंबर को अयोध्या की यात्रा करेंगे । कांग्रेस ने पिछले महीने रविशंकर को सरकार का एक एजेंट करार दिया था।

     

    गौरतलब है कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल अयोध्या में राम मंदिर की संभावनाओं पर कहा था कि रायपुर भगवान राम का ननिहाल है, यहां राम मंदिर का निर्माण हुआ तो आगे का रास्ता भी अपने आप ही निकल जाएगा। सीएम ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मान्यता है कि भगवान राम के ननिहाल में मंदिर बनेगा तो आगे का रास्ता इपने आप ही निकल आएगा। बताते चलें कि पांच दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट मंदिर निर्माण को लेकर सुनवाई करेगा।  यूपी सरकार इसमें पार्टी नहीं है ये मानकर चलिए, जो होगा अच्‍छा होगा और अच्‍छी दिशा में होगा।





  • दिल्ली-मेरठ 7 लेन एक्सप्रेस वे के पहले चरण का 75 फीसदी काम पूरा: नितिन गडकरी

    दिल्ली-मेरठ 7 लेन एक्सप्रेस वे के पहले चरण का 75 फीसदी काम पूरा: नितिन गडकरी

     

     

    नई दिल्ली। दिल्ली से मेरठ के बीच बनने वाले एक्सप्रेस वे का पहला चरण दिसम्बर तक पूरा होने का अनुमान केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लगाते हुए कहा है कि यह देश का पहला ऐसा राष्ट्रीय राजमार्ग होगा जो कि 14 लेन का होगा, इसके साथ ही इस एक्सप्रेस वे पर ढाई मीटर का चौड़ा साइकिल पथ भी बनाया जायेगा।

     

     

    इस एक्सप्रेस वे के निर्माण की निर्धारित अवधि 30 माह की है लेकिन विभाग इसे 14 माह में पूरा करेगा। केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि इस एक्सप्रेस वे के निर्माण के बाद से 3 से 4 घंटे में तय होने वाला मेरठ का सफर मात्र 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इस परियोजना पर 7566 करोड़ रूपए के खर्च होने का अनुमान है। इस परियोजना का शिलान्यास साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था।

    केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि पहले चरण में निजामुद्दीन से उत्तर प्रदेश की सीमा तक का 75 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। इस एक्सप्रेस वे की खासियत है कि 6 लेन का ये एक्सप्रेस वे बीच में होगा और 4 लेन का राजमार्ग किनारे पर इसके बनने के बाद यातायात के साथ दिल्ली एनसीआर में जाम और प्रदूषण को भी कम करने में मदद मिलेगी।





  • ‘पद्मावती’ रिलीज का मामला पहुंचा दिल्ली हाई कोर्ट

    ‘पद्मावती’ रिलीज का मामला पहुंचा दिल्ली हाई कोर्ट

     

     

    फिल्म पद्मावती की शूटिंग से शुरू हुई परेशानी अब रिलीज पर आकर अटक गई है. देश के कई राज्यों में इस फिल्म की रिलीज को रोकने के लिए डायरेक्टर और एक्टर को धमकियां दी जा रही हैं.

    अब फिल्म की रिलीज को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है. आरएन सिंह नाम के वकील ने यह याचिका दायर की है.

    इसमें कहा गया है कि फिल्म की रिलीज से देश में लॉ एंड आर्डर की समस्या हो सकती है. इस याचिका में यह भी कहा गया है कि इस मामले में एक कमेटी का गठन किया जाए जिसकी अध्यक्षता हाई कोर्ट के जज करें.

    इतिहास विषय के एचओडी अलग-अलग विश्व विद्यालयों से राजस्थान, मुंबई और दिल्ली से इस कमिटी में होंगे. इसके अलावा फिल्म जगत से भी जुड़े कुछ लोग कमिटी में हो, ये सारे लोग मिलकर फिल्म को देखें फिर तीन इतिहासकारों की राय ली जाए. जिसके बाद हाई कोर्ट के जज तय करेंगे कि फिल्म को रिलीज करने की इजाजत दी जाए या नही.याचिका में  यह भी कहा गया है कि इससे लोगों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं. जितनी जल्दी हो कमिटी के गठन किया जाए.

    ये भी पढ़ें: हिमाचल : ‘पद्मावती’ का विरोध, राजपूत सभा ने कहा-नहीं होने देंगे रिलीज

    अजमेर दरगाह दीवान बोले- ‘पद्मावती’ का विरोध करें मुसलमान

  • केंद्र ने 2018 से दिल्ली में बीएस -6 ईंधन को लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है

    केंद्र ने 2018 से दिल्ली में बीएस -6 ईंधन को लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है

     

     

    राष्ट्रीय राजधानी में महत्वपूर्ण प्रदूषण की स्थिति से निपटने के लिए एक बोली में, पेट्रोलियम मंत्रालय ने अप्रैल 1, 2020 की मूल अंतिम तिथि के बजाय दिल्ली से 1 अप्रैल, 2018 तक बीएस -6 ईंधन के रोलआउट की तिथि को आगे बढ़ाया है।

    “दिल्ली और आस-पास के इलाकों में गंभीर प्रदूषण के स्तर को ध्यान में रखते हुए, पेट्रोलियम मंत्रालय ने सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों के साथ परामर्श किया है, उन्होंने 1 अप्रैल 2018 की बजाय 1 अप्रैल 2018 को दिल्ली के एनसीटी में बीएस-छठी श्रेणी के ऑटो ईंधन के पूर्व-पूर्व के लिए तैयारी का फैसला किया है। , 2020. 1 अप्रैल, 201 9 से पूरे एनसीआर क्षेत्र में बीएस -6 ऑटो ईंधन की शुरूआत की संभावनाओं की जांच के लिए ओएमसी को भी कहा गया है, “एक मंत्रालय के बयान में कहा गया है।

    इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआइएएम) की ऑटो मैन्यूफैक्चरिंग थैरेशियल बॉडी सोसाइटी ने कहा कि दिल्ली में बीएस -6 ईंधन की चालें वाहनों के मौजूदा बेड़े के कण उत्सर्जन को कम कर सकती हैं, सरकार को और अधिक कदम उठाए जा सकते हैं, जैसे कड़े तौर पर लागू होते हैं। एनसीआर क्षेत्र में चलने से बीएस द्वितीय और पुराने विंटेज वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश

    हालांकि, उद्योग के खिलाड़ियों ने हालांकि कहा है कि दिल्ली में उच्च मानक ईंधन के रोलआउट का यह मतलब नहीं है कि 2020 की निर्धारित समय सीमा से पहले बीएस -6 के अनुरूप वाहन भारतीय बाजार में प्रवेश करेंगे।

    “बीएस -6 ईंधन की शुरुआती शुरूआत ऑटो उद्योग को आत्मविश्वास देती है कि 1 अप्रैल, 2020 से बीएस -6 ईंधन देश भर में उपलब्ध होगा, जब ऑटो इंडस्ट्री पूरी तरह से केवल बीएस -6 के अनुरूप वाहनों को एक पैन भारतीय आधार, “अभय फिरोदिया, सियाम के अध्यक्ष ने एक नोट में कहा।

    महिंद्रा ऐंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने कहा, “दिशात्मक रूप से, हमें लगता है कि यह दिल्ली में प्रदूषण से लड़ने के लिए सही दिशा में एक कदम है।” “हालांकि, जहां तक ​​ऑटोमोबाइल उद्योग का सवाल है, हम पहले से ही अप्रैल 2020 तक बीएस बीएस वाहनों को लॉन्च करने के लिए एक विस्तृत समय सीमा पर काम कर रहे हैं।”

    “बीएस -6 के वाहनों को केवल दिल्ली के लिए शुरू करना संभव नहीं है क्योंकि ईंधन राजधानी के बाहर उपलब्ध नहीं होगा और बीएसआईवी ईंधन पर बीएसआईवी वाहन चलाए नहीं जा सकते हैं” श्री गोयंका ने कहा।

    उद्योग के खिलाड़ियों का कहना है कि दिल्ली में बीएस -6 ईंधन का रोलआउट ऑटो निर्माताओं के लिए अच्छी तरह से काम करता है क्योंकि वे ईंधन के उपयोग से अपने वाहनों का परीक्षण कर सकते हैं और यह बीएस -7 से बीएस -4 में पूरे देश को स्थानांतरित करने के पहले चरण के रूप में कार्य करता है। ।

    “यह 2020 की समयसीमा तक तैयार होने के लिए चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में बीएस -6 ईंधन को चलाने की प्रक्रिया का हिस्सा है,” आर.सी. मारुति सुजूकी एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष भार्गव ने द हिंदू को बताया। “इन दो वर्षों में, उन्हें देश में पर्याप्त ईंधन का उत्पादन करना पड़ता है, पेट्रोल और डीजल दोनों। देश भर में ईंधन होने पर बीएस -6 के अनुरूप वाहनों को ही शुरू किया जा सकता है। ”

    “अप्रैल 2018 से दिल्ली में बीएस -6 ईंधन की उपलब्धता भी ऑटो उद्योग द्वारा विकसित बीएस -6 वाहनों का परीक्षण और मान्य करने के लिए इस क्षेत्र के वाहन निर्माताओं के लिए एक अवसर देता है ताकि 2020 की अंतिम तिथि के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें। “श्री फिरोदिया ने कहा।

  • 2 पूर्व विधायकों समेत 14 नेताओं ने थामा बीजेपी का दामन

    लखनऊः यूपी निकाय चुनाव सिर पर है और ऐसे में राजनीतिक दल एक कूनबा छोड़ दूसरे को पकड़ने में जुटे हुए है। इसी क्रम शुक्रवार को 14 विपक्षी पार्टी के नेताओं ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। जिसमें 2 पूर्व विधायक भी शामिल है।
    पार्टी मुख्यालय पर पूर्व विधायक पीके राय और चंद्रा रावत समेत 14 अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इन सभी लोगों को प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्रनाथ पांडेय ने पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर पूर्व विधायक पीके राय ने कहा कि समाजवादी पार्टी में प्रजातंत्र नहीं है बल्कि एकतंत्र है। जिसकी वजह से उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया है। उन्होंने कहा देशहित व समाजहित में, विकास और भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति करने वाली कोई पार्टी है तो वह है बीजेपी।

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    राय ने कहा कि 3 साल से केंद्र में मोदी की सरकार है, लेकिन किसी भी तरह के घोटाला या हवाला की चर्चा नहीं हुई। उसी तरह योगीजी के दामन पर भी एक छोटा सा दाग नहीं है।वहीं महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि बीजेपी में कार्यकर्ताओं का सम्मान है, इसीलिेए लोग लगातार बीजेपी की तरफ अलग-अलग पार्टियों से आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “बीजेपी देश, प्रदेश ही नहीं विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। उत्तर प्रदेश सहित देश के जनभावनाओं की सच्ची पार्टी है, इसलिए भी लोग बीजेपी में शामिल हो रहे हैं।”

  • रामजन्मभूमि मसले का क्या हल निकलेगा श्री श्री रविशंकर के संवाद से

    रामजन्मभूमि मसले का क्या हल निकलेगा श्री श्री रविशंकर के संवाद से

     

     

    अयोध्या। अच्छन मियां के फूल चढ़े हैं मंदिर मंदिर द्वार पर भोलानाथ की अगरबत्तियां जलती हर मजार पर…राम करे इस देश में दोनों की यारी बनी रहे जले बत्तियां भोला की अच्छन की बगिया हरी रहे। ये बात रामनगरी अयोध्या की है…जहां पर 16 नवम्बर को श्री श्री रविशंकर जी रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद से जुड़े पक्षकारों से मुलाकात और बातचीत कर इस मुद्दे का हल ढूंढने का प्रयास करेंगे।

    मुस्लिम पक्षकारों की राय

    बीते 21 मार्च के बाद ये प्रयास लगातार किए जा रहे हैं, दोनों पक्षकार कई बार साथ इस मुद्दे पर बैठ चुके हैं। लेकिन इसका कोई सार्थक हल भी तक नहीं निकल कर आया है। इस मामले से जुड़े पक्षकारों में मुस्लिम पक्षकार मरहूम हाशिम अंसारी के पुत्र इकबाल का कहना है कि श्री श्री का स्वागत है, लेकिन इस मामले में सरकार की ओर से कोई मध्यस्थ होना चाहिए।

    वहीं इसी मामले से जुड़े दूसरे मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब का कहना है कि इस मामले में श्री श्री रविशंकर जी ने पहल की है ये स्वागत योग्य है। हम भी चाहते हैं कि इस मसले का कोई हल निकल जाये। लेकिन हालात 1992 जैसे ना दोहराए जायें और दूसरा इस मामले से पहले राजनीतिक दल और इस मुद्दे पर राजनीतिक की बिसात बिछाने वाले किनारे हटें।

    हिन्दू पक्षकारों की राय

    इस मामले में जहां मुस्लिम पक्षकारों ने अहने मनसूबे साफ कर दिए हैं, वहीं हिन्दू पक्षकारों में इस बार की ओढ़ मची है कि कौन इस मुद्दे को कैश कराता है। हांलाकि इस मामले में निर्मोही अखाड़ा के साथ विराजमान रामलला है। जहां निर्मोही अखाड़े की ओर से महंत रामदास का मानना है कि यहां पर भगवान रामलला के भव्य मंदिर के निर्माण के अलावा किसी पर समझौता नहीं हो सकता वहीं इसी बात पर दूसरे पक्षकार महंत धर्मदास भी अड़े हैं। लेकिन धर्मदास और महंत रामदास के विचार से परे है विश्व हिन्दू परिषद उसका कहना है कि अधिग्रहित भूमि पर समूचा राम मंदिर बने और मस्जिद बनाने का सवाल ही नहीं है। ये बात भाजपा के फायर ब्रॉड नेता और राज्यसभा सांसद विनय कटियार के अलावा सुब्रमण्यम स्वामी भी कह चुके हैं।

    क्या होगा बातचीत से हल ये मुद्दा

    इस मामले को लेकर पहले भी कई बार बातचीत और बहस की जा चुकी है। लेकिन अयोध्या की आम जनता की राय माने तो इस मामले को सरकार बेवजह तू देकर बढ़ा रही है। इस मामले की सरगर्मी के चलते आये दिन रामनगरी में रोजगार धन्धे चौपट हो जाते हैं। कुछ लोगों की माने तो भाजपा में आपसी मतभेद के चलते यहां पर हो रहे नगर निगम चुनाव में अन्तिम दौर में प्रत्याशियों का चयन नहीं बेहतर हो पाया और भाजपा ने एक डमी प्रत्याशी मैदान में उतार दिया है। इसीलिए सीएम योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से नगर निकाय चुनाव का प्रचार अभियान शुरू करना पड़ा है। अब इसी के चलते भाजपा इस मामले को बढ़ा रही है। भाजपा हर चुनाव के पहले राम मंदिर का कार्ड खेलती है।

    क्या होगा श्री श्री रविशंकर के संवाद से हल

    बीते 8 अगस्त को इस मामले में एक नया पेंच शिया वक्फ बोर्ड ने एक हलफनामा देकर फंसा दिया है। इसके साथ ही शिया वक्फ बोर्ड का दावा है कि वह विवादित हिस्सा जिस पर शुरूआत से सुन्नी वक्फ बोर्ड अपना दावा बता रहा है वास्तव में उसका है ही नहीं है। इस पर मालिकाना हक शिया वक्फ बोर्ड का है। लेकिन मस्जिद के निर्माण के पहले वहां मंदिर था ये बता भी सच है। इसलिए इस जमीन को हिन्दुओं को देकर वहां राम का भव्य मंदिर बनाना चाहिए ।

    इस हलफनामे के बाद से अब कोर्ट को इस पहलू पर भी विचार करना होगा कि क्या इस मामले में कोई नया रूख आ सकता है।  देश की सर्वोच्च अदालत में अभी इस देश का सबसे गम्भीर मुद्दा सुनवाई में पड़ा हुआ। इस मामले को लेकर 21 मार्च को कोर्ट ने एक बड़ा आदेश देते हुए कहा था कि कि दोनों पक्ष आपसी सुलह समझौते के जरिए इस मामले मे पहल करें कोर्ट मध्यस्तता करने को तैयार है। लेकिन इस मामले में कोई सार्थक हल नहीं हो पाया था। लेकिन जब शिया बोर्ड का हलफनामा सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर पहुंचा तो रामनगरी में इसको लेकर पक्षकारों में कदमताल तेज हो गई।

    मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब और इकबाल अंसारी ने इस पूरे प्रकरण पर सरकार से अनुरोध करते हुए कहा कि ये मामला ऑउट ऑफ कोर्ट सुलझ सकता है। अगर प्रधानमंत्री मोदी इस मामले में मध्यस्थता करें तो। हम लोग बातचीत कर इस मुद्दे को सुलझाना चाहते हैं। हम किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाने का कोई मकसद रखते हैं। अगर पीएम मोदी पहल करेंगे तो ये मुद्दा निश्चित तौर पर सुलझ जायेगा।

    हांलाकि आज तक कई बार कई कोशिशें हुई हैं। माना जा रहा है कि इस मामले के दो अहम पक्षकारों हाजीमहबूब और धर्मदास के बीच किसी मसौदे पर इस मुद्दे का हल तय हो चुका है। लेकिन ये किसी बड़े चेहरे की मध्यस्थता में इस समझौते के मसौदे को सार्वजनिक करना चाह रहे हैं। अब देखना होगा कि इस मुद्दे को लेकर शिया वक्फ बोर्ड और श्री श्री रविशंकर की पहल कितना असर डाल पायेगी। लेकिन ये साफ है कि राम जन्मभूमि मामला इतना पेचीदा बन गया है कि कोर्ट को भी एक बार इस मामले में फैसला लेने में एक लम्बा वक्त लग सकता है।





  • उत्तराखंड में विकास ‘छुट्टी पर चला गया’: हरीश रावत

    उत्तराखंड में विकास ‘छुट्टी पर चला गया’: हरीश रावत

     

     

    उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मजाक उड़ाते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश में विकास ‘छुट्टी पर चला गया’ है क्योंकि बीजेपी सरकार राज्य में काम करने में असफल रही है. अपने आरोपों को पुष्ट करने के लिए कांग्रेस नेता ने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान भूमिगत सीवेज नालियों के लिए शहर में सड़कों की खुदाई की गई थी लेकिन उनकी मरम्मत अभी तक नहीं हुई. पहाड़ों में स्कूल बंद पड़े हैं.

    रावत ने संवाददाताओं से कहा, ‘सरकार का कोई भी विभाग कुछ नहीं कर रहा है. चाहे वह शिक्षा, सिंचाई, जन कार्यों या कोई अन्य विभाग क्यों ना हों. सभी विभाग में कामकाज ठप पड़ा है. वास्तव में उत्तराखंड में विकास छुट्टी पर चला गया है.’ उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने राज्य के कोष में कम से कम चार महीनों की जरूरत का धन छोड़ा था. रावत ने आरोप लगाया कि इस अवधि के दौरान वर्तमान सरकार ने कोई नया राजस्व संग्रह नहीं किया है.

    90:10 के अनुपात से राज्य को राशि दिए जाने के नियम के बावजूद उत्तराखंड को केंद्र के अनुदान में कमी को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस मुद्दे पर लोगों को स्पष्टीकरण देना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘हमने उत्तराखंड को 90:10 के अनुपात में अनुदान देने के लिए केंद्र से संघर्ष किया था. हमारे प्रयासों से केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने धन आवंटन की इस व्यवस्था को लागू किया था.’

    रावत ने कहा, ‘लेकिन अभी यह काफी चौंकाने वाला है कि राज्य को मिलने वाले केंद्रीय अनुदान में काफी हद तक कमी आई है. यह क्यों हो रहा है? राज्य के लोगों को यह जानने का हक है और मुख्यमंत्री को इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए.’ उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार राज्य के वित्तीय प्रबंधन में असफल रही है.