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  • सेना प्रमुख ने किए काशी विश्वनाथ के दर्शन, भारतीय सेना की सुरक्षा की मांगी दुआ

    सेना प्रमुख ने किए काशी विश्वनाथ के दर्शन, भारतीय सेना की सुरक्षा की मांगी दुआ

     

     

    वाराणसी। केंद्रीय मंत्री और सेना प्रमुख बिपिन रावत उत्तर प्रदेश की धर्म नगरी काशी के दौर पर गए हुए हैं। वाराणसी के अपने दौरे के दौरान सेना प्रमुख ने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए और अपने परिवार के साथ पूरे रस्मो-रिवाज के साथ भगवान विष्णु की पूजा की। पूजा करने के बाद मंदिर से बाहर आए रावत पत्रकारो से मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि मैंने पूजा के दौरान देश के जवानों के लिए भगवान शिव से प्राथर्ना की है। उन्होंने कहा कि मैंने सेना के जवानों की सुरक्षा और उनके बचाव के लिए भगवान शिव के समक्ष अरदास लगाई।

    बिपिन रावत ने सेना के पास हथियारों की कमी वाले सवाल पर कहा कि सेना के पास हथियारों की कोई कमी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सेना के हथियारों को बदलते वक्त के अनुरूप और बेहतर किया जा रहा है। इस तर्ज पर सेना को नई तकनीक से बने हथियारों से लैस करना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि हम दुश्मन देश पर विजय प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि हमारी सेना हर मोर्चे से दुश्मन के दांत खंटे करने में सक्षम है और युद्ध की स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार है। रावत ने कहा कि देश के किसी भी नागरिक को दुश्मन के किसी भी हमले से डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हमारी सेना पूरी तरह से तैयार है।





  • नाम में से यूनिवसिर्टी शब्‍द हटाएं ‘डीम्‍ड यूनिवर्सिटीज’: यूजीसी

    नाम में से यूनिवसिर्टी शब्‍द हटाएं ‘डीम्‍ड यूनिवर्सिटीज’: यूजीसी

     

     

    देशभर में ‘डीम्‍ड टू बी यूनि‍वर्सिटीज’ के बजाय ‘डीम्‍ड यूनिवर्सिटी’ शब्‍द का उपयोग कर रहे उच्‍च शिक्षण संस्‍थानों को अपने नाम के आगे से यूनिवर्सिटी शब्‍द हटाना होगा. इसके लिए यूजीसी ने हाल ही में सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए हैं.

    बता दें कि देशभर के 123 उच्‍च शिक्षण संस्‍थान अपने नाम में डीम्‍ड यूनिवर्सिटी शब्‍द का उपयोग कर रहे थे, जबकि उन्‍हें डीम्‍ड टू बी यूनिवर्सिटी (डीम्‍ड होने वाली या प्रस्‍तावति यूनिवर्सिटी) शब्‍दों का उपयोग करना चाहिए था. ऐसे में यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन ने 10 नवंबर को सर्कुलर जारी कर निर्देश दिए हैं.

    सर्कुलर में कहा गया है कि 3 नवंबर को आए सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर का हवाला देते हुए यूजीसी के सचिव पी के ठाकुर ने कहा है कि ऐसे शिक्षण संस्थान एक महीने के भीतर अपने नाम से विश्वविद्यालय शब्‍द हटा लें.  इसके स्‍थान पर ये शिक्षण संस्थान ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का उपयोग कर सकते हैं.

    सर्कुलर के अनुसार इस निर्देशों का पालन न  करने वाले शिक्षण संस्‍थानों के खिलाफ यूजीसी (इंस्टिट्यूशन्स डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटीज) रेगुलेशन्स, 2016 के तहत कार्यवाई करेगी.इसके साथ ही कुछ संस्‍थानों को हिदायत भी भेजी गई है. इनमें दिल्ली स्थित इंडियन ऐग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (पूसा), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरन ट्रेड, इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर ऐंड बिलियरी साइंस, जामिया हमदर्द, नैशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, करनाल, फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, देहरादून, बीआईटी मेसरा, रांची, क्राइस्ट युनीवर्सिटी, बेंगलुरु, सिंबायसिस युनीवर्सिटी, पुणे, BITS पिलानी, देहरादून एंड गुरुकुल विश्‍वविद्यालय, हरिद्वार आदि शिक्षण संस्थान शामिल हैं.

    हालांकि इस सर्कुलर के जवाब में कई शिक्षण संस्‍थानाें की ओर से कहा गया है कि वे  पहले से ही ‘डीम्स टू बी यूनिवर्सिटी’ शब्‍द का उपयोग कर रहे थे.

  • क्यों अजीब-यहां तक ​​कि जब 99 अन्य दिशानिर्देश हैं: एनजीटी

    क्यों अजीब-यहां तक ​​कि जब 99 अन्य दिशानिर्देश हैं: एनजीटी

     

     

    राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने शनिवार को पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम और नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) द्वारा प्रदान किए गए कई दिशानिर्देशों में से एक को चुनने और कार-राशन योजना के कार्यान्वयन की घोषणा करने के लिए दिल्ली सरकार को फटकार दिया।

    एनजीटी के अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार कुमार की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा, “ईपीसीए द्वारा जारी 99 अन्य दिशानिर्देश थे, लेकिन आपने एक का चयन करने का निर्णय लिया है? क्या यह सरकार के एक विशेष अधिकारी की लहर होगी या क्या हम यह मानते हैं कि एनसीटी दिल्ली सरकार ने भी अजीब योजना को लागू करने का फैसला किया है? ”

    आपातकालीन उपाय

    ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा था कि शहर की खराब परिवेश वायु गुणवत्ता के सामने आने के 48 घंटे पहले आकस्मिक उपायों को अपनाया जाता है एक व्यवहार्य विकल्प नहीं था। “हम यह निर्देश देते हैं कि औसत प्रदूषक मूल्यों को निर्धारित करने के लिए 48 घंटों प्रासंगिक हो सकते हैं, लेकिन विशेष रूप से जब यह 700 घन मीटर प्रति घन मीटर पार हो जाए तो आकस्मिक उपायों के लिए नहीं।”

    केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरणीय आपात स्थिति के मामलों में प्रदूषक को कम करने में पानी छिड़काव प्रभावी होगा, बेंच ने कहा, “हम यह निर्देश देते हैं कि भविष्य में बिना किसी डिफ़ॉल्ट और बिना देरी के भी लागू किया जाएगा मौसम विज्ञान विभाग की रिपोर्टों के अनुसार आने वाले हफ्ते के दौरान जब तक कि कल या दिन बाद तक बारिश नहीं होती है। ”

    ‘कोई आधार नहीं’

    “लेकिन हम इसे स्पष्ट करते हैं कि यदि पानी की छिड़काव के लिए कोई आर्थिक बाधाएं या जमीन का बचाव नहीं किया जाता है, तो प्रदूषण का स्तर प्रधानमंत्री के लिए 700 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और पीई 2.5 के लिए 400 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक बढ़ जाता है।” ।

    हरी पैनल ने यह भी पाया कि उचित दिशा-निर्देश पारित होने के बावजूद राजधानी में “बड़े पैमाने पर निर्माण” किया जा रहा था।

    “राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अक्षरधाम के पास सीडब्ल्यूजी परिसर के पार होने पर भारी धरती और निर्माण कार्य कर रहा है। किडवाई नगर में एनबीसीसी परियोजना पर निर्माण कार्य चल रहा है। हम इन दोनों संगठनों के लिए शो-कारण बताते हैं कि उन पर अनुकरणीय ठीक क्यों लगाया जाना चाहिए। ”

    पार्किंग की कीमतें

    इसके अलावा, दिल्ली सरकार को पार्किंग की कीमतों में वृद्धि के बारे में अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का निर्देश देते हुए, ट्राइब्यूनल ने नागरिक निकायों और अन्य अधिकारियों से कहा कि पार्किंग में विसंगतियों को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जो अक्सर प्रमुख ट्रैफिक ब्लॉकों के लिए आगे बढ़ते हैं।

    हरी पैनल ने एक समिति का गठन भी किया है, जो अगले 10 दिनों के लिए पीक घंटों के दौरान परिवेश वायु की गुणवत्ता के लिए डेटा एकत्र करता है।

  • यूपी के पूर्व सीएम तिवारी की हालत में सुधार, ब्लड प्रेशर के चलते करवाया गया था अस्पताल में भर्ती

    यूपी के पूर्व सीएम तिवारी की हालत में सुधार, ब्लड प्रेशर के चलते करवाया गया था अस्पताल में भर्ती

     

     

    लखनऊ। यूपी और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी को बिमारी के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन अब धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार आ रहा है। तिवारी राज्य के मुखिया उस समय पर थे जब उत्तराखंड और उत्तरप्रदेश एक राज्य हुआ करता था। मिली जानकारी के मुताबिक एन.डी तिवारी को ब्लड प्रेशर बढ़ने के चलते अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, लेकिन अब धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार आ रहा है।

    92 वर्षिय तिवारी को पिछले महीने भी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पिछले महीने उन्हें लखनऊ के मैक्स सूपर स्पेशिएलिटी अस्पताल में 26 अक्टूबर को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती करवाया गया था। उस समय वो बुखार और निमोनिया से जुझ रहे थे।  बताते चलें कि एनडी तिवारी ना सिर्फ उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे बल्कि केंद्र में भी मंत्री रह चुके थे। वे कांग्रेस की कई सरकार में मंत्री रह चुके हैं साथ ही वे आंध्र प्रदेश के राज्यपाल भी रह चुके हैं। उनका इलाज वरिष्ठ न्यूरोसर्जन जेटी मुखर्जी और कॉर्डियोलोजिस्ट सुमित सेठ की देखरेख में चल रहा है।





  • करंसी में ‘महात्मा’ शब्द के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका मद्रास हाईकोर्ट में खारिज़

    करंसी में ‘महात्मा’ शब्द के इस्तेमाल के खिलाफ याचिका मद्रास हाईकोर्ट में खारिज़

     

     

    मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार को वो जनहित याचिका खारिज़ कर दी जिसमें भारत संघ को भारतीय
    करंसी में ‘महात्मा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था.

    मुख्य न्यायाधीश इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति एम सुंदर की पीठ ने याचिका खारिज़ करते हुए याचिकाकर्ता पर 10,000 रुपए का जुर्माना लगाया और ये राशि उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार में जमा करने का निर्देश दिया.

    याचिकाकर्ता एस मुरुगनाथम ने भारत में सभी तरह की करंसी में एमके गांधी के नाम के आगे ‘महात्मा’ लगाने की संवैधानिक वैधता का मुद्दा उठाया था. मुरुगनाथम कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में रिसर्च स्कॉलर हैं.

    उन्होंने करंसी नोट, सिक्कों और डाक टिकटों में ‘महात्मा’ शब्द का इस्तेमाल नहीं करने का सरकार निर्देश देने की मांग की थी. पीठ ने याचिका खारिज़ करते हुए कहा कि इसमें कोई जनहित नहीं है.

  • मार्टिना गुप्ता मार्डर की उलझी गुत्थी : जानिये किसने किया मार्डर ?

    लखनऊ । प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खलबली मचाने वाले मार्टिना गुप्ता हत्याकांड की गुत्थी उलझती जा रही है। अब यह मामला ऑनर किलिंग का बन गया है। लखनऊ के एसजीपीजीआई थाना क्षेत्र के उद्यान-दो में दो दिन पहले प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही मार्टिना गुप्ता की उसके घर में ही संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मार्टिना की इस मौत को पहले आत्महत्या बताने का प्रयास किया गया। उसके शव में पांच गोलियां लगने के मामले में आत्महत्या की थ्योरी को खारिज कर दिया। कल मार्टिना के पिता राकेश बाबू गुप्ता को उसकी हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया। राकेश बाबू गुप्ता के खिलाफ तहरीर उनकी पत्नी मालती ने ही दी थी। पुलिस ने कल राकेश गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था। आज राकेश बाबू के दो पुत्रों अजीत गोयल व यश गोयल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। माना जा रहा है कि मार्टिना गुप्ता की उनके किसी रिश्तेदार से बढ़ती नजदीकी पिता तथा भाइयों को पसंद नहीं थी। यह लोग मार्टिना की शादी तय कर रहे थे। मार्टिना के शादी से मना करने पर परसों पिता ने उसकी गोली मारकर की हत्या कर दी थी। कल पुलिस ने पिता राकेश बाबू गुप्ता को गिरफ्तार करने के साथ ही उसकी लाइसेंसी पिस्टल को भी अपने कब्जे में ले लिया था। चर्चित मार्टिना गुप्ता हत्याकांड मामले में पिता राकेश बाबू गुप्ता को गिरफ्तार करने के बाद आज पुलिस ने राकेश के दो पुत्रों दीपक और यश गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया है। मार्टिना गुप्ता के पिता से पूछताछ में बेटों की भी घटना को अंजाम देने में संदिग्ध भूमिका की पुलिस पड़ताल कर रही है। पुलिस ने इन सभी को गुमराह करने के मामले में गिरफ्तार किया है।

    माना जा रहा है कि परिवार की महिलाओं को भी हिरासत में लिया जा सकता है।
    पुलिस का कहना है कि पूछताछ में यह सामने आया है कि करीब एक सप्ताह से मार्टिना व उसके पिता के बीच कहासुनी चल रही थी। राकेश बाबू ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि वह मार्टिना की शादी करना चाहते थे, लेकिन वह बार-बार इन्कार कर दे रही थी। शुक्रवार शाम को भी दोनों में बहस हुई थी। शनिवार सुबह बातचीत के दौरान अचानक दोनों में कहासुनी हो गई। गुस्से में आकर राकेश ने बेटी को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। सूत्रों का कहना है कि गुस्से में बेटी की छाती में तीन गोली उतारने के बाद राकेश वहीं पर बैठ गए थे। इसके बाद परिवार में कोहराम मच गया था। सोच विचार करने के बाद कुछ भी समझ में नहीं आने पर एक रिश्तेदार डॉक्टर को इलाज के लिए बुलाया गया था। पुलिस को संदेह है कि हत्या को आत्महत्या साबित करने के लिए मार्टिना की कनपटी के पास दो गोलियां मारी गई थीं। पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आरोपित ने हत्याकांड को उलझाने के लिए ऐसा किया होगा। यही कारण है कि शनिवार को परिवारीजन लगातार बयान बदल रहे थे। फिलहाल पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है। 

    एसएसपी के मुताबिक पूरे मामले में परिवारीजनों ने घटना के बाद से पुलिस को गुमराह किया है। लगातार बयान बदलने एवं पुलिस की जांच भटकाने के आरोपितों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस परिवार के सभी सदस्यों के बयान दर्ज करेगी। वारदात में जो भी शामिल होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
    लोगों ने हत्या के पीछे ऑनर किलिंग को वजह बताई है। एएसपी उत्तरी का कहना है कि पुलिस हत्या के पीछे के हर बिंदुओं पर छानबीन कर रही है। मार्टिना की कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है। ऑनर किलिंग की दिशा में भी जांच की जा रही है। इस हत्याकांड में अगर राकेश के अलावा उनके परिवार के किसी अन्य सदस्य की भूमिका उजागर होती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि एल्डिको उद्यान-दो, अभिषेक 4/89 निवासी स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त राकेश बाबू गुप्ता की बेटी मार्टिना (28) का शव शनिवार सुबह घर में गोलियों से छलनी मिला था। मार्टिना को पांच गोलियां मारी गई थीं, जिसे परिवारीजन आत्महत्या बता रहे थे। करीब छह घंटे बाद पुलिस को घटना की जानकारी हुई थी।

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  • क्या रविशंकर पर लगेगा 5 करोड़ जुर्माना ?

    श्री श्री रविशंकर की संस्घ्था आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यक्रम से यमुना को हुए नुकसान और संस्घ्था पर पांच करोड़ जुर्माना लगाए जाने के मामले पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुनवाई पूरी कर ली है। सोमवार को एनजीटी की विशेष बेंच ने आर्ट ऑफ लिविंग मामले की सुनवाई कर फैसला सुरक्षित रख लिया है। हालांकि इस मामले में एनजीटी कब फैसला सुनाएगा यह साफ नहीं किया है। बता दें कि बीते 11 से 13 मार्च के बीच दिल्ली में यमुना तट पर आर्ट ऑफ लिविंग के स्घ्थापना दिवस के मौके पर विश्व संस्कृति महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया था।
    इस आयोजन को लेकर आर्ट ऑफ लिविंग के श्री श्री रविशंकर को बड़े विवाद का सामना करना पड़ा। कड़े विरोध और विवाद पैदा होने के बावजूद आर्ट ऑफ लिविंग ने तीन दिनों तक यमुना के तट पर कार्यक्रम का आयोजन किया। उस दौरान एनजीटी ने कार्यक्रम के आयोजन से यमुना और पर्यावरण को नुकसान की बातें कहीं। एनजीटी ने कहा था कि दिल्ली में यमुना तट पर विश्व संस्कृति महोत्सव आयोजन करने की वजह से यमुना तट को जो नुकसान हुआ है उसे दोबारा तैयार करने में 42.02 करोड़ रुपए लग जाएंगे। कार्यक्रम से यमुना तट को हुए नुकसान के लिए एनजीटी ने श्रीश्री रविशंकर की संस्घ्था आर्ट ऑफ लिविंग पर 5 करोड़ रुपये का जुमार्ना भरने का आदेश दिया। एनजीटी के आदेशों की अवहेलना कर आर्ट ऑफ लिविंग ने जुमार्ना नहीं भरा। पिछले साल से शुरु हुए इस विवाद में वघ्शिेषज्ञों ने एनजीटी को बताया कघ् िइस समारोह के आयोजन से यमुना तट को 13.29 करोड़ का नुकसान हुआ। बता दें कि यह समारोह पिछले साल 11 से 13 मार्च के बीच आयोजित किया गया था। अब एनजीटी ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। रविशंकर को 5 करोड़ का जुमार्ना देना होगा यह एनजीटी के फैसले के बाद साफ हो पाएगा।

    यह भी पढ़ेे: प्याज की बढ़ती कीमत से सरकार चिंतित, आयात करने के दिए आदेश

  • रवींद्रनाथ टैगोर के लंदन का घर खरीदना चाहती हैं ममता बनर्जी

    रवींद्रनाथ टैगोर के लंदन का घर खरीदना चाहती हैं ममता बनर्जी

     

     

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंदन में उस मकान को खरीदना चाहती हैं जहां नोबेल पुरस्कार विजेता साहित्यकार रवींद्रनाथ ठाकुर रहे थे.

    वह इस मकान को ठाकुर की याद में संग्रहालय-सह-स्मारक में तब्दील करना चाहती हैं. ठाकुर 1912 में कुछ महीनों के लिए उत्तरी लंदन के नबर-3 हीथ विलाज में रहे थे.

    ममता ने कल ब्रिटेन में भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के साथ मुलाकात के दौरान इस मकान को खरीदने का इरादा जाहिर किया. दोनों के बीच बातचीत से अवगत एक सूत्र ने बताया, ‘इस मकान का बहुत ऐतिहासिक महत्व है और मुख्यमंत्री इसे ठाकुर के स्मारक के तौर पर बदलने को उत्सुक हैं.’ कुछ साल पहले इस संपत्ति की कीमत 27 लाख पाउंड थी.

    साल 2015 में ममता के लंदन दौरे के समय भी इस मकान को लेकर चर्चा हुई थी. इस मकान पर पहले से ही नीले रंग की एक पट्टिका लगी हुई है जिस पर लिखा है कि यहां भारतीय कवि रवींद्रनाथ ठाकुर रहे थे.ये भी पढ़ें: सुरक्षा कारणों से राष्ट्रपति की बेटी अब करेंगी एयर इंडिया की ग्राउंड ड्यूटी

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  • जैसा कि एनजीटी योजनाओं के उपाय, भल्सा लैंडफिल जलता है

    जैसा कि एनजीटी योजनाओं के उपाय, भल्सा लैंडफिल जलता है

     

     

    उत्तर-पश्चिम दिल्ली के भल्सा में लैंडफिल साइट ने शनिवार की दोपहर को फिर से आग लगा दी और शहर में पहले से ही उच्च स्तर के प्रदूषण को जोड़ा। लैंडफिल ने कथित तौर पर अनुमेय ऊंचाई से 30 मीटर ऊँचा किया है।

    एक आधिकारिक अधिकारी के मुताबिक, उन्हें करीब 1 बजे सतर्क कर दिया गया था और छह फायर टेंडर को मौके पर पहुंचा दिया गया। “यह हमें फैलाने के लिए लगभग छह घंटे तक आग लगा दी थी क्योंकि यह फैल रहा था। अब तक आग का कारण पता नहीं चला है। ”

    उत्तर दिल्ली नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि मीथेन की अत्यधिक रिहाई के कारण लैंडफिल पर आग लग जाती है। “पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार साइट ने न्यूनतम 30 मीटर तक अनुमेय ऊंचाई को पार कर लिया है। कचरा एक दैनिक आधार पर यहां फेंक दिया जाता है क्योंकि लोगों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है “।

    उसी दिन लैंडफिल में आग लग गई क्योंकि एनजीटी ने सभी नागरिक निकायों और डीडीए को सभी जमीनफिल स्थलों पर विशेष बल पोस्ट करने के लिए निर्देशित किया ताकि वहां आग की रोकथाम सुनिश्चित हो सके।

    एनजीटी के अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार कुमार की अगुवाई में एक पीठ ने कहा, “यदि कोई आग या अपशिष्ट जलाया जा रहा है, तो विशेष रूप से लैंडफिल साइटों के संबंध में, ट्रिब्यूनल के नोटिस में लाया जाता है, संबंधित हर अधिकारी प्रभारी के अनुसार उत्तरदायी होगा। कानून। ”

  • असम में पंचायत प्रमाणपत्र वाले भी एनआरसी में शामिल हों: येचुरी

    असम में पंचायत प्रमाणपत्र वाले भी एनआरसी में शामिल हों: येचुरी

     

     

    सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने असम में
    राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) अपडेट करने का काम जल्द पूरा करने की मांग करते हुए सोमवार को कहा कि नागरिकों की सूची में उन सभी लोगों को शामिल किया जाना चाहिए जिनके पास पंचायत की ओर से दिए गए प्रमाणपत्र हैं.

    ‘डेल्ही एक्शन कमिटी फ़ॉर असम’ (डीएसीए) की ओर से एनआरसी के मुद्दे पर आयोजित एक कार्यक्रम में येचुरी ने कहा, ‘असम में एनआरसी का काम जल्द पूरा होना चाहिए. 31 दिसंबर की समयसीमा की बात की गई है और ऐसे में इस समयसीमा के भीतर ये काम पूरा हो जाना चाहिए.’

    उन्होंने कहा, ‘लाखों लोग ऐसे हैं जिनके पास पंचायत की ओर से दिए गए प्रमाणपत्र हैं. बताया गया है कि इनमें से ज्यादातर महिलाएं हैं. हमारी मांग है कि सूची में पंचायत के प्रमाणपत्र वालों को भी शामिल किया जाना चाहिए.’ डीएसीए के अनुसार असम में ऐसे 27 लाख लोग हैं जिनके एनआरसी से बाहर रहने का ख़तरा है. उसका कहना है कि इनके पास पंचायत के मुखिया की ओर से दिया गया प्रमाणपत्र है और इनमें अधिकतर महिलाएं हैं.

    इस कर्यक्रम में स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा, ‘जिस तरह ये देश विविधताओं से भरा है, उसी तरह असम भी है. ये सिर्फ असम का मुद्दा नहीं है. धर्म या भाषा के नाम पर किसी को अलग नहीं किया जा सकता. इसको लेकर उन सभी लोगों को चिंतित होना चाहिए जो ‘आइडिया ऑफ इंडिया’ में विश्वास करते हैं.’ गौरतलब है कि एनआरसी और नागरिकता का ये मुद्दा उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है.असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने हाल में कहा था कि एनआरसी को अपडेट करने का काम साल के आखिर तक पूरा हो जाएगा और किसी भी वास्तविक नागरिक को परेशानी नहीं होगी.