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  • 80 बार जेल जाने वाले राजनारायण, जिनसे डर गईं थीं इंदिरा

    80 बार जेल जाने वाले राजनारायण, जिनसे डर गईं थीं इंदिरा

     

     

    उम्र 69 साल. जेल गए 80 बार. जेल में बिताए कुल 17 साल, जिसमें तीन साल आजादी से पहले और 14 साल आजादी के बाद. इतने साल तो गांधीजी ने भी जेल में नहीं बिताए होंगे. वही शख्स, जिससे लौह महिला इंदिरा गांधी बुरी तरह डर गईं थीं. इतनी आतंकित हो गईं कि इमरजेंसी लगा दी. वो राजनारायण थे. जिनकी इस साल जन्मशती है. इसी महीने में जन्मदिन लेकिन किसी को वो याद नहीं. वो ऐसी शख्सियत भी हैं, जिसके कारण केंद्र में गैरकांग्रेसी सरकारें बननीं शुरू हुई.

    आजाद भारत में समता, बंधुत्व, और सदभाव की खातिर कम लोगों ने जीवन में इतनी प्रताड़ना सही होगी. जो राजनीति के फक्कड़ नेता थे. वह राममनोहर लोहिया के साथ सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापकों में थे. हर किसी के लिए उपलब्ध और हर किसी के मददगार. हालांकि बाद के बरसों में उन्हीं के सियासी साथियों ने उनसे दूरी बना ली और उन्हें भारतीय राजनीति का विदूषक भी कहा जाने लगा.

    विपक्ष कमजोर हाल में था
    60 के दशक के खत्म होते होते इंदिरा मजबूत प्रधानमंत्री बन चुकी थीं. कांग्रेस के ताकतवर नेता उनके सामने पानी मांग रहे थे. विपक्ष बहुत कमजोर स्थिति में था. ऐसे में जब इंदिरा गांधी ने वर्ष 1971 में दोबारा चुनाव जीतकर आईं तो किसी बड़े नेता में उनसे टकराने की हिम्मत नहीं थी.ऐसे में राजनारायण ना केवल उनसे भिड़े बल्कि विपक्ष को एक करने की जमीन भी बनाई. अगर वह इंदिरा को मुकदमे में टक्कर नहीं देते तो ना जयप्रकाश नारायण संपूर्ण क्रांति का आंदोलन कर पाते, ना आपातकाल लगता और ना ही 1977 के चुनावों में इंदिरा गांधी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ता.

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    राजनारायण, जिनसे घबरा उठी थीं इंदिरा गांधी

    जन्म राजसी परिवार में
    राजनारायण का जन्म बनारस के उस जमींदार परिवार में हुआ था, जो वहां के राजघराने से जुड़ा माना जाता था. बहुतायत में जमीनें थीं. लंबी चौड़ी खेती. रसूख और रूतबा. वह अलग मिट्टी के बने थे.

    समाजवाद में तपे और ढले हुए. उनके खास सहयोगी रहे क्रांति प्रकाश कहते हैं कि उन्होंने अपने हिस्से की सारी जमीन गरीबों को दे दी. उनके खुद के परिवार में बहुत विरोध हुआ. भाइयों ने बुरा माना. वह टस से मस नहींं हुए. यहां तक कि अपने बेटों के लिए कोई संपत्ति नहीं छोड़ी.

    इंदिरा के खिलाफ हर जगह लड़े
    बहुत पहले डॉ. युगेश्वर कल्हण की किताब छपी थी, ‘आपातकाल का धूमकेतु: राजनारायण.’ तब राजनारायण और इंदिरा गांधी दोनों जीवित थे. वो किताब कुछ सालों पहले फिर प्रकाशित हुई. किताब में कहा गया, राजनारायण ने इंदिरा गांधी के खिलाफ लड़ाई हर जगह लड़ी. संसद में और सड़क पर भी.

    चुनाव के मैदान में और अदालत में भी. कोई मोर्चा छोड़ा नहीं. 1969 में जिन समाजवादियों को लगता था कि इंदिरा सही काम कर रही हैं, उनका मोहभंग हो चुका था. 1971 के चुनावों में रायबरेली से इंदिरा के खिलाफ मजबूत उम्मीदवार खड़ा किया जाना था. कोई तैयार नहीं था. न चंद्रभानु गुप्ता तैयार हुए और न चंद्रशेखर की हिम्मत हुई . न किसी अन्य दिग्गज नेता की. ऐसे में राजनारायण सिंह संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार बने.

    चुनाव हारे और अदालत में चुनौती
    राजनारायण 1971 का चुनाव हार गए. चुनाव जीतीं इंदिरा गांधी. राजनारायण ने चुनाव जीतने के लिए इंदिरा के सारे गलत हथकंडों पर नजर रखी. उसे संवैधानिक और असंवैधानिक रूप दिया. उनके एक–एक भ्रष्टाचार को गिनते रहे. चुनाव खत्म होते ही न्यायालय पहुंचे. उन्होंने सात आरोप लगाए. मुकदमा शुरू हुआ. लंबा चला. एक समय ऐसा भी आया जब इंदिरा गांधी को खुद अदालत में हाजिर होना पड़ा. सफाई देनी पड़ी. उनसे छह घंटे तक पूछताछ हुई.

    इंदिरा के खिलाफ फैसला
    आखिरकार पांच साल बाद फैसला आया. इंदिरा गांधी ने उस दौरान जजों को भयभीत कर रखा था. इसके बाद भी इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जगमोहन लाल सिन्हा ने इंदिरा के प्रभाव की कोई परवाह नहीं की. खुफिया ब्यूरो (आइबी) के एक अफसर को इलाहाबाद में इस काम में लगाया गया था कि वह बता सके कि फैसला क्या आने वाला है.

    जज ने टाइपिस्ट को घर बुलाया. फैसला लिखवाया. उसे तभी जाने दिया, जब फैसला सुना दिया गया. उन्होंने इंदिरा गांधी के रायबरेली चुनाव को अवैध घोषित कर दिया. उन पर छह सालों तक चुनाव लड़ने पर रोक लग गई. पुपुल जयकर ने इंदिरा की जीवनी में लिखा कि इंदिरा को आशंका थी कि फैसला उनके खिलाफ आ सकता है. 12 जून 1975 को फैसला आया. इसके 14वें दिन इंदिरा ने देशभर में आपातकाल लगा दिया.

    सबसे पहले राजनारायण की गिरफ्तारी
    आपातकाल लगने के कुछ ही घंटों के अंदर सबसे पहले राजनारायण को गिरफ्तार किया गया. उसी दिन जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, सत्येंद्र नारायण सिन्हा और अटलबिहारी वाजपेयी की गिरफ्तारी हुई. देशभर में हजारों लोग जेलों में डाले गए. यकीनन राजनारायण वो शख्स थे, जिन्होंने इंदिरा को बुरी तरह आतंकित कर दिया था कि उन्होंने ये कदम उठाना पड़ा. लेकिन इसने विपक्ष को साथ आने का मौका दिया.

    वर्ष 1977 में पहली बार केंद्र में कांग्रेस के अलावा दूसरी पार्टी सत्तारुढ़ हुई. बेशक जनता पार्टी की सरकार अपने अंतरविरोधों की वजह से जल्दी ढह गई लेकिन देश में गैरकांग्रेसी आंदोलन को नई ऑक्सीजन मिली. 1977 में जब इंदिरा गांधी ने आपातकाल हटाकर चुनाव कराया तो रायबरेली पर उनके खिलाफ फिर राजनारायण सामने थे. इस बार उन्होंने इंदिरा को बुरी शिकस्त दी. अपने पूरे राजनीतिक करियर में इंदिरा ने सही मायनों में एक ही शख्स से शिकस्त पाई. वो राजनारायण थे.

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    राजनारायण

    वो काम किए जो किसी ने नहीं किए थे
    हाल ही में राजनारायण की स्मृति में उनके समर्थकों ने दिल्ली में एक सेमीनार कराया. जिसमें सभी लोगों ने लोकबंधु को याद किया. उनके व्यक्तित्व और काम पर चर्चा हुई. क्रांति प्रकाश बताते हैं कि जब जनता पार्टी के शासनकाल में राजनारायण स्वास्थ्य मंत्री बने तो उन्होंने तुरंत गरीबों को इलाज और ऑपरेशन के लिए आर्थिक मदद शुरू कराई. दिल्ली के सरकारी अस्पतालों के नाम बदल दिए गए.

    लोहिया से संबंध बिगड़े
    वह ताजिंदगी समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के करीबी रहे. उनके प्रिय पात्र. एक बार संबंधों में खटास आई. उसे राजनारायण ने खास अंदाज में दूर किया. राजनारायण 1962 में विधानसभा के चुनावों में हार गए. वर्ष 52 से पहली बार वह विधानसभा से बाहर थे. पांच साल ये स्थिति बनी रहनी थी.

    ऐसे में लोहिया के नहीं चाहने के बाद भी वह 62 में राज्यसभा चुनाव के लिए लड़े. जीत भी गए. लोहिया को ये अच्छा नहीं लगा. उन्होंने माना कि राजनारायण ने सिद्धांतों के खिलाफ गलत काम किया है. उनसे बातचीत बंद कर दी. घर आना बंद करा दिया. ये जगजाहिर था कि लोहिया अगर किसी से एक बार संबंध तोड़ लेते हैं तो फिर जोड़ते नहीं.

    इस तरह लोहिया को मनाया
    राजनारायण ने भरसक कोशिश की लेकिन लोहिया टस से मस नहीं हुए. उन्होंने खास तरीका निकाला. वह अगले कुछ महीनों तक राज्यसभा से निकलकर उस गेट पर धरना देकर बैठ जाते थे, जिससे लोहिया जी निकलते थे.

    जब वह लगातार ये करते रहे तो लोहिया जी को झुकना पड़ा. संबंध फिर बहाल हो गए. लोहिया पर रामकमल राय ने अपनी किताब ‘राम मनोहर लोहियाः आचरण की भाषा’ में कहा है कि लोहिया जी अक्सर कहते थे जब तक राजनारायण जिंदा हैं, देश में लोकतंत्र मर नहीं सकता.

    काशी विश्वनाथ मंदिर का दरवाजा दलितों के लिए खुलवाया
    लोकनीति अभियान से जुड़े और अधिवक्ता संजीव उपाध्याय याद करते हैं कि किस तरह नेताजी यानि राजनारायण दलितों के प्रेमी थे. उनकी अगुवाई में बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में दलितों औऱ अनुसूचित जाति के प्रवेश के लिए आंदोलन हुआ. उनके दरवाजे हमेशा जरूरतमंदों के लिए खुले होते थे.

    वह दिल्ली में जब रहते थे तो कोई खाली हाथ नहीं लौटता था. किसी के पास किराया नहीं होता था तो किसी के पास भोजन-हर किसी की वह मदद करते थे. क्रांति प्रकाश कहते हैं, उनका जीवन हमेशा सादगी से भरा रहा.साधारण कपड़ा पहनते थे. जीवन में कोई लग्जरी नहीं थी. हां, बस वह खाने के शौकीन थे. उनके पास जो भी पैसा आता था, वो जरूरतमंदों में बंट जाता था. कभी अपने लिए एक पैसा नहीं जुटाया.

    पासवान को खुद टिकट देने गए
    राजनारायण को लेकर और भी कुछ कहा जाता है. अगर 1977 के चुनावों में वह रामविलास पासवान समेत तीन नेताओं का टिकट कटने पर उन्हें खुद विमान से टिकट देने गए तो जनता पार्टी की टूट के लिए भी उन्हें कसूरवार ठहराया जाता है.

    जनता पार्टी टूटने पर वह पहले चरण सिंह के मददगार बने और बाद में उन्हीं के खिलाफ ताल ठोंककर चुनावों में कूद पड़े. बाद में उन्हीं के सियासी साथी उनसे परहेज करने लगे.

    उन्हीं साथियों ने उन्हें भारतीय राजनीति का विदूषक भी करार दिया. लेकिन ये बात सही है कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए उन्होंने कभी कोई समझौता किया ही नहीं. राजनारायण फकीर की भांति दुनिया से विदा हुए. 31 दिसंबर 1986 को उनका निधन हो गया. न मकान, न जमीन, न बैंक–बैलेंस.

  • बसपा के नगर अध्यक्ष सहित दो पदाधिकारी पार्टी से निष्कासित

    बसपा के नगर अध्यक्ष सहित दो पदाधिकारी पार्टी से निष्कासित

     

     

    हमीरपुर। स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी के खिलाफ कार्य करने और अनुशासनहीनता बरतने के आरोप में बसपा के नगर अध्यक्ष सहित दो पदाधिकारियों को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। बसपा के जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र अहिरवार ने कहा कि निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ भितरघात करने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नही जायेगा।

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    बता दें कि बसपा जिलाध्यक्ष राघवेन्द्र अहिरवार ने शनिवार को बताया कि राठ विधानसभा क्षेत्र के मेहेर किशोर लोधी एवं नगर अध्यक्ष दिनेश प्रताप लोधी स्थानीय निकाय चुनाव में पार्टी की नीतियों के खिलाफ लगातार काम कर रहे थे। उन्हें कई बार समझाया भी गया था, मगर यह लोग अनुशासनहीनता करते रहे।

    वहीं उन्होंने उनका कहना है कि इन दोनों पदाधिकारियों को बसपा से बाहर का रास्ता दिखाया गया है। उनके स्थान पर विधानसभा अध्यक्ष पद जयसिंह राजपूत एडवोकेट व बृजगोपाल वर्मा को नगर अध्यक्ष पद पर नियुक्ति कर दी गयी है।





  • ASEAN : सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिये फिलीपीन रवाना हुए PM

    ASEAN : सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिये फिलीपीन रवाना हुए PM

     

     

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फिलीपीन के लिये रवाना हुए जहां वह भारत-आसियान शिखर सम्मेलन समेत विभिन्न द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे.

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया, रचनात्मक प्रतिबद्धताओं के दौरे की शुरुआत. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मनीला में आयोजित आसियान और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फिलीपींस रवाना हो रहे हैं.

    पिछले 36 सालों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली फिलीपींस यात्रा है. इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1981 में फिलीपींस का दौरा किया था. मोदी मनीला में मंगलवार को 15वें भारत-आसियान शिखर सम्मेलन और 12वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.

    यह दौरा इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस साल भारत-आसियान संवाद साझेदारी की 25वीं वर्षगांठ है और आसियान (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) के गठन की स्वर्ण जयंती है.

    ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम आसियान के सदस्य हैं. मोदी दोनों सम्मेलनों में भाग लेने से पहले सोमवार को फिलीपींस के राष्ट्रपति रॉबटरे दुतेर्ते से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे.

  • हरदोई: आयोग ने निर्दलिय प्रत्याशियों को बाटे सिम्बल, किसी को मिला स्कूटर तो किसी को मिली शहनाई

    हरदोई: आयोग ने निर्दलिय प्रत्याशियों को बाटे सिम्बल, किसी को मिला स्कूटर तो किसी को मिली शहनाई

     

     

    हरदोई। उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव में मतदान का दिन निर्धारित होने के बाद सूबे में एक बार फिर सात महीने बाद चुनाव का माहौल बन गया है। राज्य में बीजेपी, कांग्रेस, बीएसपी, सपा में सीधी टक्कर है। जहां एक तरफ इन चुनावों में योगी के सात महीने के कामों की परीक्षा है, तो वहीं विधानसभा चुनाव में सुपड़ा साफ होने के बाद कांग्रेस,सपा और बीएसपी के लिए उत्तर प्रदेश में अपनी जमिन बचाए रखने का एक और मौका है। इसके अलावा इस चुनाव में बड़े पैमाने पर निर्दलिय प्रत्याशी भी चुनाव में उतर रहे हैं, खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की भतीजा बहु बीजेपी से टिकट न मिलने को लेकर कानुपर से निर्दलिय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहीं हैं।

    वहीं अगर ताजा आकड़ों की माने तो सबसे ज्यादा निर्दलिय प्रत्याशी हरदोई सीट पर खड़े हो रहे हैं। हरदोई के इन  प्रत्याशियों में अच्छा चुनाव चिन्ह पाने के लिए होड़ मच गई है। वहीं चुनाव आयोग तो चुनाव आयोग है वो अपने हिसाब से सबकों चुनाव चिन्हा महैया करवाएगा , जिनमें से आधो को चुनाव आयोग ने चुनाव चिन्ह दे भी दिए है। इन निर्दलिय प्रत्याशियों  को आयोग ने चुनाव चिन्हा के तौर पर किसी को शहनाई दी है तो किसी को बजाज का स्कूटर, किसी को चमक्ता सितारा तो किसी को उगता सूरज आयोग ने चुनाव चिन्हा के तौर पर दिया है। वहीं जिन्हे अभी आयोग ने चिन्ह नहीं दिया है उनके लिए आयोग ने लकी ड्रा का नया हथकंड़ा अपनाया है।





  • Akhilesh ने कहा-भाजपा की हार से बदलने लगा हवा का रुख

    नई दिल्ली. मध्यप्रदेश के चित्रकूट विधानसभा उप-चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को मिली हार के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने निशाना साधा है। अखिलेश ने कहा कि विधानसभा उप-चुनाव में बीजेपी की हार हवा के बदलते रुख को बता रही है. उन्होंने कहा कि नोटबंदी और गुड्स एंड सर्वसेज टैक्स (जीएसटी) का सच देश की जनता को समझ में आने लगा है और बीजेपी की हार की हवा अब गुजरात तक भी पहुंचेगी.। समाजवादी पार्टी सुप्रीमो ने कहा, श्चित्रकूट विधानसभा उप-चुनाव में भाजपा की हार, हवा के रूख को बता रही है. नोटबंदी और ळैज् का सारा सच अब जनता को समझ आने लगा है. ये परिणाम जनता के मन में भाजपा के प्रति बढ़ते अविश्वास और विरोध का प्रतीक है. भाजपा की हार की हवा, अब गुजरात तक भी जाएगी। अखिलेश का यह बयान वैसे समय में सामने आया है, जब मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने चित्रकूट उप-चुनाव के नतीजों को राज्य की जनता के बदलते मिजाज के संकेत के तौर पर देखे जाने की बात को सिरे से खारिज कर दिया है.। गौरतलब है कि गुजरात में कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी नोटबंदी और जीएसटी को मुद्दा बना रहे हैं.। बीजेपी की हार को स्वीकार करते हुए शिवराज ने कहा, चित्रकूट उपचुनाव में जनता के निर्णय को शिरोधार्य करता हूँ. जनमत ही लोकतंत्र का असली आधार है. जनता के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता हूँ. चित्रकूट के विकास में किसी तरह की कमी नहीं होगी. प्रदेश के कोने-कोने का विकास ही मेरा परम ध्येय है.। चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार नीलांशु चतुर्वेदी ने बीजेपी के शकंर दयाल त्रिपाठी को 14,100 मतों से शिकस्त दी है. इस सीट पर 9 नवंबर को विधानसभा के उप-चुनाव हुए थे.ं।

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  • प्रद्युम्‍न मर्डर : फिंगरप्रिंट्स मिटाना सीख चुका था आरोपी छात्र

    प्रद्युम्‍न मर्डर : फिंगरप्रिंट्स मिटाना सीख चुका था आरोपी छात्र

     

     

    रायन इंटरनेशनल मर्डर मामले में सीबीआई ने बड़ा खुलासा किया है. सीबीआई ने कहा है कि आरोपी छात्र ने जहर की किस्मों के साथ ही हथियार से अंगुलियों के निशान मिटाने के बारे में काफी जानकारी इकठ्ठा की थी.

    फर्स्‍टपोस्‍ट की खबर के मुताबिक, सितंबर में हुई प्रद्युम्‍न ठाकुर की हत्‍या की जांच कर रही सीबीआई का कहना है आरोपी के लैपटॉप और मोबाइल फोन की इंटरनेट सर्च हिस्ट्री से ये पता चला है.

    हत्या से पहले की थी तैयारी
    आरोपी छात्र को रिमांड पर लेने के बाद सीबीआई ने कहा है कि उसने प्रद्युम्‍न की हत्‍या से पहले काफी तैयारी की थी. सीबीआई के अधिकारियों को संदेह है कि प्रद्युम्‍न का गला काटने के बाद आरोपी छात्र ने चाकू को टॉयलेट के कमोड में फेंक दिया था.बता दें कि शनिवार को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी छात्र को 22 नवंबर तक निगरानी-गृह में रखा है. यह छात्र रायन इंटरनेशनल गुरुग्राम में 11 वीं का छात्र है. सीबीआई का दावा है कि छात्र ने पिता और एक स्‍वतंत्र गवाह के सामने अपराध कुबूल किया है.

    पूछताछ पूरी
    इससे पहले सीबीआई ने स्‍कूल में क्राइम सीन तैयार किया था. एक डमी के माध्‍यम से मर्डर सीन को दोबारा प्रस्‍तुत किया गया. फर्स्‍टपोस्‍ट की रिपोर्ट में बताया गया है कि सीबीआई ने आरोपी को हिरासत में लेने के बाद सवाल-जवाब की कार्रवाई पूरी कर ली है.

    ऐसे में जेजेबी को दी गई एप्‍लीकेशन में स्‍पष्‍ट है कि सीबीआई छात्र की अब और कस्‍टडी नहीं चाहती है. फिलहाल वह निगरानी-गृह में है. हालांकि सीबीआई की इस रिपोर्ट पर आरोपी छात्र के पिता ने विरोध दर्ज कराया है.

    पिता ने कहा – बेटे को टॉर्चर किया
    आरोपी के पिता का कहना है कि सीबीआई ने उनके बेटे को टॉर्चर किया है. जबकि वह निर्दोष है. हालांकि पिता के इन आरोपों पर जुवेनाइल कोर्ट ने एक वेलफेयर ऑफिसर नियुक्‍त किया है जो आरोपी छात्र से किसी भी प्रकार के सवाल-जवाब के दौरान हमेशा मौजूद रहेगा और पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा.

    हालांकि इस पूरे मामले में सीबीआई ने हरियाणा पुलिस पर लापरवाही बरतने और सबूत मिटाने का आरोप लगाया है. वहीं दवाब बनाने पर हरियाणा पुलिस ने अपनी गलतियां स्‍वीकार भी की हैं.

  • टीडीपी सरकार नहीं दे रही आंध्र विधानमंडल के सदस्यों के सवालों के जवाब

    टीडीपी सरकार नहीं दे रही आंध्र विधानमंडल के सदस्यों के सवालों के जवाब

     

     

    आंध्र प्रदेश विधानमंडल के सदस्य आजकल काफी व्यथित नजर आ रहे हैं और सत्ता पक्ष और विपक्षी पार्टियों के विधायक मौजूदा स्थिति के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.

    एक तरफ विधानमंडल के सत्र साल के कुछ ही दिन आयोजित किए जा रहे हैं और दूसरी तरफ विधानसभा और विधान परिषद में सदस्यों की ओर से उठाए जाने वाले मुद्दों पर सरकार एक तरह से कोई जवाब नहीं दे रही. साल 2014 से अब तक 14वीं विधानसभा के नौ सत्रों में सदन की कार्यवाही महज 80 दिन चली है. 10वां सत्र अभी जारी है और यह 10 दिनों के लिए होगा.

    सत्ताधारी तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पर आरोप लगा रही है कि वह नियमित तौर पर सदन की कार्यवाही बाधित करती है, जबकि वाईएसआर कांग्रेस का कहना है कि तेदेपा सरकार अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है. बहरहाल, मौजूदा सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही बाधित नहीं होगी, क्योंकि जगनमोहन रेड्डी की अगुवाई वाली विपक्षी पार्टी ने सदन से दूरी बना ली है.

    पिछले कुछ सत्रों से दोनों सदनों के सदस्यों की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब कई कारणों से नहीं मिल पा रहे हैं. विधानमंडल के सूत्रों ने बताया कि विधानसभा में सदस्यों की ओर से किए गए करीब 296 सवालों पर सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया.विधान परिषद में अनुत्तरित सवालों की संख्या करीब 603 है जबकि उच्च सदन की कार्यवाही तुलनात्मक रूप से सुचारू ढंग से चलती है. लोक लेखा समिति के अध्यक्ष बुग्गना राजेंद्रनाथ रेड्डी ने आरोप लगाया, ‘इस सरकार में कोई जवाबदेही नहीं है और जैसे सदन को चलाया जाना चाहिए, वैसे नहीं चलाया जा रहा है. सरकार नियमों एवं जिम्मेदारियों से भाग रही है.

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  • रयान मामले: किशोर को 22 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया

    रयान मामले: किशोर को 22 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया

     

     

    यहां भोंडीसी में रयान इंटरनेशनल स्कूल के सात साल के स्कूल के शौकीन की कथित हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किशोर को शनिवार को 22 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। उसे एक अवलोकन गृह में रखा जाएगा।

    सीबीआई ने 16 साल की उम्र में जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) बोर्ड के न्यायिक मजिस्ट्रेट (फर्स्ट क्लास) से पहले देवेंद्र सिंह को पेश किया था।

    अभियुक्त के वकील संदीप अनेजा ने कहा, “जे जे बोर्ड ने 22 नवंबर तक फरीदाबाद में एक अवलोकन गृह को किशोर भेजने का आदेश दिया”। श्री अनीजा ने कहा कि सीबीआई को आगे की हिरासत की मांग के लिए जे जे बोर्ड से पहले आवेदन लेना होगा और उन्हें इसके बारे में सूचित किया जाएगा।

    ‘सीबीआई ने आदेश का उल्लंघन किया’

    इस बीच, किशोर के पिता, बीच में, जे जे बोर्ड के साथ एक आवेदन ले गए, जांच अधिकारी और सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने बोर्ड के आदेश का उल्लंघन किया है कि पूछताछ केवल 10 बजे और 6 बजे के बीच आयोजित की जाती है। तीन दिनों के लिए।

    बाद में, मीडिया से बात करते हुए, पिता ने आरोप लगाया कि सीबीआई ने अपने बेटे को यातना के द्वारा स्वीकार कर लिया है।

    उन्होंने कहा कि परिवार ने एक दिन से सीबीआई से सहयोग किया था, लेकिन एजेंसी ने अपने बेटे को फंसाया था।

    “सीबीआई ने हमें 24 सितंबर को पहली बार बुलाया। हम जब भी हमें फोन करते थे, हम उनसे गए। लेकिन अंत में, उन्होंने हमारे पर पूरे दोष लगा दिया और मेरे बेटे को तैयार किया, “पिता ने कहा।

    उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी ने उन्हें फोन करने के बाद 8 नवंबर को अपने बेटे के साथ सीबीआई मुख्यालय तक पहुंचे।

    “उन्होंने मेरे बेटे को लगभग 3 बजे अंदर ले लिया। और उसने मुझे लगभग छह घंटे तक उससे मिलने नहीं दिया जब मुझे 9 बजे अंदर की अनुमति दी गई, मुझे पता चला कि उसकी आँखें और चेहरे लाल थे उन्होंने उसे मार डाला, “पिता ने न्याय की मांग करते हुए कहा उन्होंने कहा कि सीबीआई ने अपने बेटे को उल्टा लगा दिया और उसे मार दिया।

    वीडियो रिकॉर्डिंग

    पिता, अपने आवेदन में सलाहकार सी के माध्यम से चले गए। शर्मा और विशाल गुप्ता ने कहा कि यह गंभीरता से गिरफ्तार किया गया था कि जांच एजेंसी “किशोरों को गलत तरीके से फंसाने और गिरफ्तार करने की उनकी कार्रवाई का औचित्य साबित करने के लिए” कच्चे पैडिंग / गलत साक्ष्य बना रही थी। ”

    आवेदन ने कहा कि 9 नवंबर को सोहना के कई दर्शकों द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग ने दिखाया कि किशोर वहाँ 6:15 बजे उपस्थित थे। यह कहा गया है कि सेवा कुटीर, नई दिल्ली के किंग्सवे कैंप का रजिस्टर भी इस तथ्य की पुष्टि करता है।

    इससे पहले दिन में, किशोर को रयान इंटरनेशनल स्कूल के पास दोपहर के पास ले जाया गया था ताकि अपराध स्थल को पुनः बनाया जा सके। उसे एक दुकान पर ले जाया गया जहां से उसने कथित लड़के को मारने के लिए चाकू खरीदी थी। जांच के सिलसिले में सीबीआई टीम भी अपने घर गई।

  • बड़ा खुलासा: डेढ़ करोड़ में प्रश्नपत्र खरीदकर बन गई जज एग्जाम की टॉपर

    जरा सोचिए, अगर देश में इस तरह से जजों की नियुक्ति की जाती रही तो यहां की न्याय व्यवस्था की क्या स्थिति होगी। करोड़ों में बिक रहे पेपर खरीदकर जज बनने वाले लोग फरियादियों के साथ कैसा न्याय करेंगे, यह बड़ा सवाल उठता है ?

    (हरियाणा ब्यूरो )
    नई दिल्ली। देश में जजों की भर्ती कराने में बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है। इस रैकेट का संचालन परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी उठाने वाले रजिस्ट्रार ही जब करने लगें तो फिर इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा। एचसीएस जैसी बड़ी परीक्षा में भी रैकेट की सेंधमारी का बड़ा खुलासा हुआ है। सिविल सर्विसेस ज्यूडिशियल ब्रांच पेपर लीक मामले में पुलिस ने टॉपर रही सुनीता को दिल्ली के नजफगढ़ से अरेस्ट कर लिया। कोर्ट ने उसे 3 दिन की रिमांड पर भेजा है। आरोप है कि रैकेट ने पेपर लीक किया, फिर उसे डेढ़-डेढ़ करोड़ में अभ्यर्थियों को बेचा। सुनीता को पहले ही प्रश्नपत्र मिल गया तो अच्छे से तैयारी कर वह टॉपर बन गईं। कुछ अभ्यर्थियों की शिकायत पर संदेह के घेरे में आई इस परीक्षा को पहले ही हरियाणा हाईकोर्ट रद्द कर चुका है।
    परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने में रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रार डॉ. बलविंदर शर्मा की भूमिका सामने आ रही है। पुलिस जांच में पता चला कि रजिस्ट्रार से सुनीता का 760 बार संपर्क हुआ। अब पुलिस सुबूत के तौर पर सुनीता के मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क रिकवर करने की कोशिश में जुटी है। पुलिस ने कोर्ट में बताया कि सुनीता को क्वेश्चन पेपर पहले ही मिल गया था, इसलिए वह टॉप कर पाई।
    हाईकोर्ट तक पहुंची शिकायत पर पेपर लीक का खुलासा हुआ। पिंजौर की वकील सुमन ने हाईकोर्ट में पिटीशन दायर कर कहा था कि परीक्षा का पेपर डेढ़ करोड़ में बिका। उसे भी गिरोह ने पेशकश की थी। सुमन के मुताबिक उसने परीक्षा में बैठने वाली सुशीला नाम की एक लड़की से लेक्चर की ऑडियो क्लिप मंगाई थी। लेकिन सुशीला ने गलती से सुनीता से अपनी बातचीत की ऑडियो क्लिप सेंड कर दी। जिसमें पेपर में आने वाले प्रश्नों पर हुई बातचीत रिकॉर्ड थी। सुशीला वही लड़की है, जिसने जज एग्जाम में रिजर्व कैटेगरी में टॉप किया। पिटीशन पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अपने लेवल पर जांच शुरू की, जिसमें सामने आया कि हाईकोर्ट के ही रिक्रूटमेंट रजिस्ट्रार डॉ. बलविंदर शर्मा के मोबाइल फोन से सुनीता के फोन पर सालभर में 760 बार कॉन्टैक्ट हुआ था। बाद में सुनीता ही एक्जाम में टॉपर रही।
    पुलिस ने सुनीता को कोर्ट में पेश किया। यहां सुनीता ने बिना किसी वकील के खुद जिरह की। पुलिस ने मेडिकल कराने के बाद सुनीता की पेशी की तो बात कही तो उसने कहा-पुलिस झूठ बोल रही है। फर्जी ढंग से मेडिकल कराकर उसे कोर्ट में पेश किया गया। सुनीता ने कहा कि मेरी पीठ की हड्डी में प्रॉब्लम है। डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कहा था, लेकिन इस मामले की वजह से मैं अपना ऑपरेशन भी नहीं करवा पाई।
    मैं तीन-चार घंटे से ज्यादा बैठ या खड़ी नहीं रह सकती। मैं अकेली रहती हूं। पुलिस ने कोर्ट से रिमांड मांगा। कोर्ट ने कहा-रिमांड क्यों चाहिए। पुलिस ने कहा-ताकि मोबाइल और हार्ड डिस्क बरामद हो सके। इस पर सुनीता ने कहा कि- मैं तो काफी समय पहले ही मोबाइल फोन नष्ट कर चुकी हूं। मुझे गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद जज ने तीन दिन की पुलिस रिमांड देते हुए कहा, ‘अगर सुनीता को इलाज की जरूरत हो तो उसे तुरंत मुहैया कराया जाए। ऑर्थोपेडिक के बड़े डॉक्टरों से भी बात की जाए।’

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  • मेट्रो ट्रैक पर चली बिना ड्राइवर वाली ट्रेन

    मेट्रो ट्रैक पर चली बिना ड्राइवर वाली ट्रेन

     

     

    आपने बिना ड्राइवर की कारों के बारे में सुना है. पर किसी ऐसी ट्रेन के बारे में सुना है जो ड्राइवर के बगैर चल रही हो. राजधानी दिल्ली में पिछले एक साल से एक ट्रेन ड्राइवर बिना दौड़ रही थी.

    इस ट्रेन को भारतीय रेलवे नहीं बल्कि दिल्ली मेट्रो चला रहा है. यह मेट्रो ट्रेन दिन में कई बार कालकाजी से बॉटेनिकल गार्डन रूट पर आती-जाती थी. उसमें ड्राइवर तो होता था, पर वह कुछ करता नहीं था.

    यह है देश की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो. इसकी सुरक्षा से जुड़ी आखिरी परीक्षा 13 से 15 नवंबर तक चलेगी. सब कुछ सही चला तो पहले बॉटेनिकल गार्डन नोएडा (यूपी) से कालकाजी मंदिर (दिल्ली) तक का रूट खोला जाएगा. ट्रेन के रूट पर सीएमआरएस (कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी) तीन दिन तक इंस्पेक्शन करेंगे.

    सामान्य मेट्रो ट्रेनों का सेफ्टी ट्रायल ज्यादातर 4 माह में पूरा होता है पर इसका एक साल तक चला.दिल्ली मेट्रो के पीआरओ मोहिंदर यादव के मुताबिक़ देश में पहली बार ड्राइवरलेस (अनअटैंडेड ट्रेन ऑपरेशन) मेट्रो का ट्रायल पूरा हो गया है.

    बिना ड्राइवर इसे चलाने में कम से कम एक साल और लगेगा. टेक्नोलॉजी नई है इसलिए शुरू में ट्रेन में ड्राइवर रहेगा फिर धीरे-धीरे इसे ऑटोमेशन की ओर ले जाया जाएगा.

    बताया गया है कि लंदन में जब पहली बार ऐसी मेट्रो चली तो यात्रियों के दबाव में उसे वापस लेना पड़ा था. धीरे-धीरे वह ऑटोमेशन मोड में आई. फिलहाल दिल्ली में मेट्रो फेज तीन की दो प्रमुख लाइनों, 58.59 किलोमीटर लंबी पिंक लाइन (मजलिस पार्क से शिव विहार) और 34.27 किलोमीटर की मजेंटा लाइन (जनकपुरी पश्चिम से बॉटेनिकल गार्डन) पर ऐसी ट्रेनें चलेंगी.

    ड्राइवरलेस ट्रेन की खासियत

    इन ट्रेनों के स्टार्ट, स्टॉप और डोर ओपन-क्लोज करने में किसी भी ड्राइवर के मौजूद रहने की जरूरत नहीं है. इमरजेंसी सर्विस समेत हर तरह के ऑपरेशन को रिमोट कंट्रोल से ऑपरेट किया जा सकता है. 50 मीटर दूर ट्रैक पर कोई वस्तु है तो इसमें ब्रेक लग जाएगा. यानी पहले से सुरक्षित होगी.

    जिन स्टेशनों से यह ट्रेन गुजरेगी उन प्लेटफॉर्म पर स्क्रीन डोर मिलेंगे. सुरक्षा के लिहाज से ये स्क्रीन डोर लगाए गए हैं ताकि कोई ट्रैक पर न जा सके. यह डोर तभी खुलेंगे जब प्लेटफॉर्म पर मेट्रो ट्रेन आकर खड़ी हो जाएगी.

    यात्रियों के लिए खास

    इसमें ड्राइवर केबिन निकाल देने के बाद ज्यादा यात्री सफर कर पाएंगे. छह डिब्बों वाली ट्रेन में पहले की तुलना में 240 यात्री ज्यादा (कुल 2280 पैसेंजर) आएंगे. 20 फीसदी ऊर्जा कम खपेगी और 10 फीसदी स्पीड बढ़ जाएगी.

    ड्राइवरलेस ट्रेन का कंट्रोल रूम बाराखंभा रोड स्थित मेट्रो भवन में होगा. परेशानी के वक़्त यात्री अलार्म बटन दबाकर ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर से जुड़ सकते हैं. इसके अंदर-बाहर दोनों ओर सीसीटीवी कैमरे हैं. अलग-अलग जगह पांच कैमरे ट्रेन के बाहर होंगे. यात्रियों को वाई-फाई सुविधा मिलेगी.

    विकलांगता के शिकार लोगों के लिए यह मेट्रो ज्यादा आरामदायक होगी. व्हीलचेयर वाले हिस्से में पीठ को सहारा देने के लिए विशेष बैकरेस्ट है. खड़े होकर यात्रा करने वालों के लिए पोल व ग्रैब रेल को दोबारा डिजाइन किया गया है.

    महिलाओं एवं बुजुर्गों की सीटों को अलग रंग में रखा गया है. कुल 81 (486 कोच) ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेनें दिल्ली मेट्रो ने खरीदी हैं. इसमें 20 ट्रेनें दक्षिण कोरिया में बनी हैं.