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  • धुएं के चैंबर में दिल्ली वाले जिएंगे तो कैसे?

    धुएं के चैंबर में दिल्ली वाले जिएंगे तो कैसे?

     

     

    सीने में जलन, आंखों में तूफान सा क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है…शहरयार की इन लाइनों को हम थोड़ा बदलकर आंखों में जलन, फेफड़ों में तूफान सा क्यों है कर देते हैं. दिल्ली में भयंकर प्रदूषण से सांसों पर लगी इमरजेंसी के हालात तो यही कह रहे हैं.

    दिल्ली में जारी जहरीले स्मॉग को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने रविवार तक सभी स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है. पूरी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र इस वक्त जहरीले धुंआ का चैंबर बन गया है. हर कोई यही कह रहा है कि आंखों में इतनी जलन क्यों है. दिल्ली वाले रहेंगे कैसे? सवाल वाजिब है, लेकिन सवाल हमें खुद से पूछना चाहिए कि आखिर ये हालात पैदा क्यों हो रहे हैं. हम खुद इसके लिए कितना जिम्मेदार हैं?

    इस धुंए में शामिल है ये
    पीएम यानी पर्टिक्युलेट मैटर, ये हवा में वो पार्टिकल होते हैं जिस वजह से प्रदूषण फैलता है. पर्टिक्युलेट मैटर में धूल, गर्द और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं. जो डस्ट, कंस्ट्रहक्शपन कार्य और कूड़ा व पुआल जलाने से ज्यादा बढ़ती है. ये कण आसानी से नाक और मुंह के जरिए बॉडी के अंदर तक पहुंच कर लोगों को बीमार बनाते हैं. इस समय यही हो रहा है. धूल और धुएं से हवा जहरीली हो गई है और यह आंखों और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रही है.

    केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एजेंसी सिस्टम ऑफ एअर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में पिछले 24 घंटों में पीएम 2.5 और पीएम 10 का औसत स्तर 406 और 645 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा. यह सुरक्षित स्तर 60 और 100 से कई गुना अधिक है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के कई निगरानी केंद्रों ने प्रदूषण के सभी स्तर को पार कर जाने के कारण काम करना बंद कर दिया.

    आंखों में जलन…वाले मरीज बढ़े 

    नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार के मुताबिक पिछले दो दिनों में आखों में जलन के करीब 30 फीसदी मामले बढ़ चुके हैं. लोग आंखों में एलर्जी होने की समस्या से परेशान हैं. ऐसे में जरूरी हो तभी बाहर निकलें, चश्मा लगाएं और ठंडे पानी से आंंख धोएं.

    दिल्ली सरकार ने बच्चों, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और दमा व हृदय से जुड़ी अन्य बीमारियों सहित ऐसे लोगों के लिए स्वास्थ्य परामर्श जारी किया है. इनके इससे प्रभावित होने का खतरा अधिक है.

  • मनमोहन सिंह से जबरन बातें कहलवाई जा रही हैं जो वो नहीं कहना चाहते: नकवी

    मनमोहन सिंह से जबरन बातें कहलवाई जा रही हैं जो वो नहीं कहना चाहते: नकवी

     

     

    केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने बुधवार को कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि
    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जबरन ऐसी बातें कहलवाई जा रही हैं जो वो कहना नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि
    नोटबंदी के मुद्दे पर मनमोहन के मुंह में शब्द डाले जा रहे हैं.

    नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर बीजेपी की ओर से आयोजित ‘काला धन विरोधी दिवस’ के अवसर पर नकवी पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे.

    केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया, ‘मेरा मानना है कि वो एक भद्र पुरुष हैं, एक अनुभवी नेता हैं, लेकिन समस्या ये है कि उनके मुंह में शब्द डाले जा रहे हैं.’ नकवी ने कहा, ‘जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तो कांग्रेस उन्हें सिखाया-पढ़ाया करती थी, वो उनका अनादर करती थी. सभी को याद होगा कि कैसे कांग्रेस के मौजूदा युवराज ने (दोषी सांसदों को अयोग्य करार होने से बचाने के लिए लाए गए) अध्यादेश को बकवास बताकर खारिज़ कर दिया था.’

    इससे पहले, नकवी ने कहा कि नोटबंदी ‘क्रांतिकारी कदम’ था जिससे आतंकवाद और नक्सली हिंसा में काफी कमी आई है.नकवी ने कहा, ‘आज देश की जनता समझ रही है कि नोटबंदी भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई है. नोटबंदी के फैसले को एक साल हो रहा है और इस एक साल में हमारी सरकार का फैसला पूरी तरह सही और सफल साबित हुआ है. लोग तकलीफ के बावजूद भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की इस लड़ाई में साथ खड़े रहे.’

    उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी अपने आप में एक क्रांतिकारी कदम था जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार पर प्रहार करना, कालेधन को उजागर करना, जाली नोटों पर रोक लगाना, आतंकवाद और नक्सलवाद की गतिविधियों की फंडिंग की कमर तोड़ना और देश के विकास के रास्ते में भ्रष्टाचार के रोड़े को हटाना रहा है.’ नकवी ने दावा किया, ‘नोटबंदी के चलते कश्मीर में पत्थरबाजी और आतंकी गतिविधियों में 75 फीसदी की कमी आई है. नक्सल हिंसा में 20 फीसदी से भी ज्यादा गिरावट हुई है. इसका असर आगे और दिखेगा.’

    उन्होंने कहा, ‘मोदी सरकार बदले की राजनीति नहीं बल्कि बदलाव की राष्ट्रनीति पर यकीन करती है. अपने तीन वर्ष के दौरान मोदी सरकार ने बदले की राजनीति नहीं बल्कि समावेशी विकास और रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म की राष्ट्रनीति के साथ काम किया है. एनडीए सरकार में सभी जांच एजेंसियों को पूरी स्वतंत्रता दी गई है ताकि वो अपना काम पूरी निष्पक्षता से बिना किसी दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के कर सके. जबकि कांग्रेस के समय में सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों का दुरूपयोग राजनीतिक प्रतिद्वंदियों को परेशान करने के लिए किया जाता था.’

    नकवी ने कहा, ‘भारत की अर्थव्यवस्था के प्रति दुनिया का विश्वास बढ़ा है. आज भारत निवेशकों के लिए एक सुरक्षित एवं सरल ठिकाना बनता जा रहा है. विमुद्रीकरण ने इसमें बड़ी भूमिका निभाई है. कर आधार बढ़ाने में नोटबंदी सफल रही है. नोटबंदी के बाद लगभग 57 लाख आयकरदाता बढ़ गए हैं. चालू वित्त वर्ष मे अप्रैल से अक्तूबर के दौरान लोगों और कंपनियों ने रिकॉर्ड 3 करोड़ 78 लाख रिटर्न दाखिल किए. आयकर विभाग की ई-फाइलिंग वेबसाइट पर अब तक 6 करोड़ 85 लाख करदाता पंजीकृत हो चुके हैं, जो एक रिकॉर्ड है.’

  • राहुल पहले देखा फैक्ट्रियों में काम फिर खाया ‘चीज लोचा’

    राहुल पहले देखा फैक्ट्रियों में काम फिर खाया ‘चीज लोचा’

     

     

    सूरत में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी में पूरा दिन काफी बिजी रहा. उन्होंने अगर फैक्ट्रियों में काम देखा और कारीगरों से मुलाकात की तो फिर दोपहर तक खाने में सूरत का मशहूर चीज लोचा खाया.

    राहुल इन दिनों गुजरात का सघन दौरा कर रहे हैं. लोगों से मिल रहे हैं. विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस का प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने नोटबंदी का एक साल पूरा होने पर मौजूदा सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार भी किया.

    कारीगरों से मिले
    राहुल गांधी का ये सूरत दौरा थोड़ा अलग था. उन्होंने सुबह से लूम फैक्ट्री में कारीगरों से मुलाकात की. बारीकी से उनके काम के बारे में जाना. इन फैक्ट्रियों में कैसे काम होता है और कारीगरों को किन हालात में काम करना होता है. इसे लेकर भी बात की.

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    राहुल गांधी सूरत में हीरा तराशने की कोशिश करते हुए

    हीरा भी घिसा
    सूरत हीरा तराशने का प्रमुख केंद्र है. लिहाजा राहुल गांधी वहां जाना भी नहीं भूले. वह केवल हीरा कारीगरों से मिले ही नहीं बल्कि खुद भी हीरा को घिसने के काम में उनका हाथ बंटाया. इसके बाद उनका अगला पड़ाव एंब्राडरी काम करने वाली महिलाओं से मिलने का था. वह वहां भी गए. महिलाओं से संवाद किया.

    व्यापारियों से मिले
    अगर राहुल ने मजदूरों और कारीगरों की परेशानी पूछी तो फुलपाड़ा निर्माण इंडस्ट्रिल एस्टेट में व्यापारियों से मुलाकात के दौरान मौजूदा एनडीए सरकार की आर्थिक नीतियों पर प्रहार किया, जिसने व्यापार और व्यापारियों को मुश्किल में डाल दिया है. उन्होंने कहा सूरत के व्यापारियों को सही बात कहने पर धमकाया जा रहा है.

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    राहुल गांधी सूरत में लूम फैक्ट्रियों में कारीगरों से मिलकर उनके काम के बारे में समझते हुए

    नोटबंदी और जीएसटी की आलोचना
    उन्होंने कहा कि नोटबंदी से लोगों को नुकसान हुआ है. राहुल ने जीएसटी में सुधार की जरूरत पर भी बल दिया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कई बार जेटली से मौजूदा प्रारुप में जीएसटी को लागू नहीं करने की अपील की थी लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया.

    केंद्रीय मंत्रियों का गुजरात दौरा
    गुजरात में बुधवार को दो केंद्रीय मंत्री भाजपा के गौरव महा संपर्क अभियान के सिलेसिले में पहुंचे. ये थे रेल मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान. पीयूष गोयल ने अहमदाबाद में डोर टु डोर अभियान चलाया और दसक्रोई विधानसभा के निकोल इकाले का दौरा किया.  उन्होंने नोटबंदी को सही फैसला बताया. धर्मेंद्र प्रधान ने भी नोटबंदी को सरकार का सही फैसला बताया. हमारी कोशिश ये है कि अगर केंद्र से एक रुपया भेजा जाए तो लाभार्थी को एक रुपया पूरा मिले.

  • न आंदोलन से उपजी यूकेडी जम पाई, न तीसरा विकल्प उभरा

    न आंदोलन से उपजी यूकेडी जम पाई, न तीसरा विकल्प उभरा

     

     

    उत्तराखण्ड में 17 सालों में सत्ता पर दो ही दलों का कब्जा रहा है. पहली कांग्रेस और दूसरी भाजपा. यहां क्षेत्रीय दल की संभावनाएं हर बार धुंधली होती जा रही है और तीसरा विकल्प किसी सपने सा रह गया है.

    राज्य आंदोलन के समय उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने जिस तरह से आंदोलन में अगवा की भूमिका निभाई थी उससे लग रहा था कि राज्य बनने के बाद भी वह कांग्रेस और भाजपा का विकल्प बन कर उभरेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

    साल 2002 में पहले विधानसभा चुनावों में जहां यूकेडी को 4 सीटें मिली थीं, वहीं 2007 के विधानसभा चुनावों में यह तीन सीटों पर सिमट गई. 2012 के चुनावों में इसे सिर्फ़ एक सीट मिली और 2017 आते-आते यह आंकड़ा शून्य हो गया.

    हाल ही में भाजपा छोड़कर फिर पार्टी में शामिल हुए मौजूदा अध्यक्ष दिवाकर भट्ट कहते हैं कि इसकी वजह सरकार बनाने के प्रति पार्टी की उदासीनता रही. वह कहते हैं कि हमने आंदोलन तो किया पर राज्य बनने के बाद सरकार बनाने पर कभी विचार नहीं किया.ऐसा नहीं है कि इन 17 सालों में यूकेडी ने सत्ता की मिठास न चखी हो लेकिन जब-जब उसके विधायक सरकार में शामिल हुए वह उसकी गोद में जा बैठे.

    दिवाकर भट्ट और ओम गोपाल रावत 2007 में खंडूड़ी सरकार का हिस्सा रहे और फिर भाजपा का दामन थाम लिया. प्रीतम सिंह पंवार 2012 में यमुनोत्री से चुनाव जीत कर आए तो उन्होंने पार्टी का साथ छोड़ दिया और निर्दलीय चुनाव लडा.

    चुनावों से ठीक पहले कई तरह के महागठबंधनों ने भी तीसरी ताकत बनने की कोशिश की लेकिन कोशिशें परवान नही चढ पाई. रक्षा मोर्चा ने तीसरी ताकत बनने के लिए मोर्चा तो खोला लेकिन विफल रहे.

    साल 2012 में उन्होंने 42 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीसरे नंबर की पार्टी बनी लेकिन पार्टी के अंदर की राजनीति इस कदर हावी रही कि 2017 आते-आते पार्टी सिर्फ दो ही उम्मीदवार चुनाव में उतार पाई.

    अब इंतजार इस बात का है कि क्या राष्ट्रीय पटल पर बनी नई पार्टियां जैसे आम आदमी पार्टी क्या तीसरा विकल्प बनती है. या फिर भाजपा और कांग्रेस की ही सत्ता एक दूसरे को बदलती रहेगी.

     

  • धुँधली की पकड़ में दिल्ली

    धुँधली की पकड़ में दिल्ली

     

     

  • दिल्ली में जहरीला स्मॉग, प्राइमरी स्कूल रविवार तक बंद

    दिल्ली में जहरीला स्मॉग, प्राइमरी स्कूल रविवार तक बंद

     

     

    दिल्ली में जारी जहरीले स्मॉग को देखते हुए केजरीवाल सरकार ने रविवार तक सभी स्कूल बंद करने का निर्णय लिया है. उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता है.

    इससे पहले प्रदूषण के जहरीले स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बुधवार को प्राइमरी स्कूल बंद करने का निर्णय लिया था.

    नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल (एनजीटी) ने कहा है कि दिल्ली में इमरजेंसी जैसी स्थिति है. एनजीटी ने दिल्ली के साथ-साथ पंजाब, हरियाणा और यूपी को भी प्रदूषण रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं. वहीं, ईपीसीए ने भी प्रदूषण के इस संकट से निबटने के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं.

    केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एजेंसी सिस्टम ऑफ एअर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में पिछले 24 घंटों में पीएम 2.5 और पीएम 10 का औसत स्तर 406 और 645 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा. यह सुरक्षित स्तर 60 और 100 से कई गुना अधिक है. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के कई निगरानी केंद्रों ने प्रदूषण के सभी स्तर को पार कर जाने के कारण काम करना बंद कर दिया.

  • एलजी और दिल्ली सरकार के बीच राय का अंतर तुच्छ या तुच्छ नहीं होना चाहिए: सीजीआई

    एलजी और दिल्ली सरकार के बीच राय का अंतर तुच्छ या तुच्छ नहीं होना चाहिए: सीजीआई

     

     

    दिल्ली सरकार के लेफ्टिनेंट गवर्नर (एलजी) प्रत्येक और किसी भी प्रशासनिक निर्णय के साथ अलग नहीं हो सकते। हालांकि हर प्राधिकरण को अलग-अलग होने के बावजूद, दिल्ली सरकार के साथ उनकी असहमति “तुच्छ या कुटीर नहीं होनी चाहिए, लेकिन मूल रूप से” होना चाहिए, भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने मंगलवार को मंगलवार को मनाया।

    केंद्र सरकार और एएपी सरकार के बीच सत्ता संघर्ष पर एक संविधान खंडपीठ द्वारा पूरी तरह से सुनवाई के दूसरे दिन मुख्य न्यायाधीश मिश्रा ने अधिकार के दुरुपयोग का ऐलान करते हुए सहायता और सलाह (दिल्ली सरकार की) को स्वीकार और सम्मानित किया जाना चाहिए। एलजी की प्रशासनिक शक्तियों पर

    “[एलजी के] हस्तक्षेप का मतलब यह नहीं है कि उनका टकराव होगा यह वास्तविक तथ्य होना चाहिए और उद्देश्य मानदंडों पर केंद्रित होना चाहिए, “मुख्य न्यायाधीश मिश्रा ने कहा।

    एलजी को अपने संवैधानिक कर्तव्यों को ध्यान में रखना चाहिए, जैसे कि वह एक “प्रधान प्रधान है, राष्ट्रीय राजधानी के रूप में दिल्ली की विशेष स्थिति को ध्यान में रखते हुए, संसद के 69 वें संवैधानिक संशोधन में क्या इरादा था सरंचनात्मक शासन के अनुच्छेद 23 9एए के संवैधानिक प्रावधान के इरादे को हराने और सबसे महत्वपूर्ण, नागरिकों का विश्वास, “मुख्य न्यायाधीश ने कहा।

    “वह (एलजी) प्रशासन को सुधार नहीं सकते,” न्यायमूर्ति डी.वाय. चंद्रचूड ने पीठ से मनाया

    न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने टिप्पणी की है कि यह संवैधानिक रूप से नहीं माना गया था कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक व्यक्ति की सहमति की आवश्यकता होगी और जो कुछ भी एक पूरे मंत्रालय करेगा।

    ‘एलजी, हालांकि, सब कुछ के साथ सहमत नहीं है’

    मुख्य न्यायाधीश मिश्रा ने देखा कि एलजी को सभी चीजों के साथ सहमत होने की जरूरत नहीं है। “लेकिन क्या मामलों पर राय के मतभेद हो सकते हैं?” उन्होंने कहा।

    अदालत ने कहा कि वह उन मापदंडों की परिकल्पना करना नहीं चाहता था, जिनमें मतभेद मत हो सकते थे।

    दिल्ली सरकार के वकील और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रह्मण्यम ने सहमति व्यक्त की कि “बड़ी परिस्थितियों में जहां प्राधिकरण का दमदार दुरुपयोग होता है, एलजी वास्तव में राष्ट्रपति के एक प्रतिनिधि के रूप में हस्तक्षेप कर सकता है।”

    श्री सुब्रमण्यम ने एलजी को वॉचडॉग के रूप में वर्णित किया। उन्होंने प्रस्तुत किया कि एलजी हस्तक्षेप कर सकती है, उदाहरण के लिए, दिल्ली सरकार की नीतियां राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को प्रभावित करती हैं।

    “वह हस्तक्षेप कर सकता है और असहमत हो सकता है कि दिल्ली सरकार की नीतियां अपराधों को प्रकट करने की राशि में हैं। उदाहरण के लिए, कुछ सामाजिक अवसरों के लिए पूरे स्मारकों का उपयोग ऐसे मामलों में एलजी अंदर कदम कर सकता है। वह है अभिभावक पैतृक , “श्री सुब्रमण्यम ने प्रस्तुत किया।

    लेकिन वर्तमान मामले में, श्री सुब्रमण्यम ने सौंपे, एलजी सरकार के रोज़गार में हस्तक्षेप कर रही है।

    एक वर्ष से अधिक समय के लिए लंबित फाइलें: वकील

    “दिल्ली सरकार के लिए वकील की नियुक्ति के लिए मोहाला क्लीनिकों के कामकाज से, उन्होंने हस्तक्षेप किया है। कुछ मामलों में, फाइल एक वर्ष से अधिक के लिए लंबित हो गई है, “उन्होंने प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “अधिकांश अहानिकर मुद्दों को दूर रखा गया है।”

    न्यायमूर्ति चंद्रचूड ने दिल्ली सरकार के बिजनेस नियमों के बारे में बताया कि कुछ प्रस्तावों को एलजी को अपनी सहमति के लिए “अनिवार्य रूप से प्रस्तुत” किया गया था, जबकि कुछ ऐसे समय लागू किए जा सकते हैं जब उन्हें एलजी को सूचित किया जाता है।

    श्री सुब्रमण्यम ने दिल्ली सरकार की स्थिति स्पष्ट कर दी, जिसमें कहा गया कि जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए कानून बनाने के लिए संसद की व्यापक वर्चस्व को स्वीकार किया जाता है, तो दिल्ली की लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार के कार्यकारी कार्यों को “ग्रहण” नहीं किया जा सकता है। दिल्ली सरकार इसकी अपनी विधायी संप्रभुता और समवर्ती कार्यकारी क्षमता थी

    कुछ क्षेत्रों में एलजी के विवेकाधिकार को छोड़कर, मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह उनके लिए बाध्यकारी थी, श्री सुब्रमण्यम ने कहा।

    उन्होंने अनुच्छेद 23 9 एए को एक “प्रावधान असाधारणता” कहा, जिसने राज्यपाल को अनुच्छेद 23 9 (1) के तहत राज्यपाल को शक्ति देने के लिए राष्ट्रपति की शक्ति को समाप्त कर दिया है, जहां तक ​​राष्ट्रीय राजधानी का संबंध है।

    “पुलिस, सार्वजनिक आदेश और एलजी के केंद्र में एक प्रतिनिधि के रूप में प्रशासन के विषयों के अलावा, शेष भागीदारी प्रशासन है,” उन्होंने कहा।

    एक बिंदु पर, न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी ने राष्ट्रपति की वास्तविक भूमिका के बारे में पूछा, जब एलजी उन्हें एक मुद्दा बताता है जिस पर दिल्ली सरकार के साथ मतभेद होते हैं।

    क्या राष्ट्रपति वास्तव में अपनी व्यक्तिगत क्षमता में या संघ की सहायता और सलाह पर काम करता है, न्यायमूर्ति सीकरी ने पूछा।

  • नौकरी की कमी के कारण जीएसटी के लिए मुख्यमंत्री ने नोट प्रतिबंध लगाया

    नौकरी की कमी के कारण जीएसटी के लिए मुख्यमंत्री ने नोट प्रतिबंध लगाया

     

     

    मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को “नौकरी की कमी” के लिए प्रदूषण और सामान और सेवा कर (जीएसटी) को दोषी ठहराया और विपक्ष द्वारा ‘काला दिन’ के अनुसूचित अनुरक्षण की पूर्व संध्या पर अर्थव्यवस्था “दुखी राज्य” पहुंच गई। प्रत्यावर्तन की पहली वर्षगांठ

    जीएसटी पर एक व्यापारियों की बैठक को संबोधित करते हुए, केजरीवाल ने मांग की कि केंद्र ने नए कर व्यवस्था में 28 और 18% कर स्लैब को खत्म कर दिया, जिसमें कहा गया कि प्रत्येक आइटम पर सिर्फ 12% स्लैब ही मौजूद होना चाहिए।

    नौकरी की कमी

    “नौकरी की कमी की स्थिति पैदा हो गई है क्योंकि अर्थव्यवस्था एक दुखद स्थिति में है और मंदी के कारण जगह ले ली है। हर कोई यह कह रहा है कि पिछले दो सालों में इसके पीछे दो कारण और जीएसटी हैं। ”

    आम आदमी पार्टी (एएपी) दिल्ली सरकार द्वारा ‘जीएसटी बाजार समर्थन समितियों’ के संबंध में आयोजित एक समारोह में व्यापारियों के साथ बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने बाजार संघों को अपने संबंधित क्षेत्रों में व्हाट्सएप समूह बनाने के लिए कहा, ताकि बाद में उनकी चिंताओं को साझा किया जा सके। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जीएसटी परिषद की बैठक में उठाए गए

    “हम दिल्ली में जीएसटी के कारण ट्रेडों को बंद नहीं करना चाहते मैं सरकार से संपर्क करने के लिए आपको (व्यापारियों) से पूछता हूं कि हम आपके लिए कुछ कर सकते हैं। उप मुख्यमंत्री आपके सभी मुद्दों को जीएसटी परिषद की बैठक में उठाएंगे, “उन्होंने आगे कहा।

    संशोधित कर स्लैब

    “मैं केंद्र से पूछता हूं कि केवल 12% कर स्लैब होना चाहिए 12% से, केंद्र और राज्य प्रत्येक आइटम पर 6% प्रत्येक को साझा कर सकते हैं, “उन्होंने कहा।

    जीएसटी संरचना में गड़बड़ी की जटिलता, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि व्यापारियों के मुद्दे को तुरंत संबोधित किया जाना चाहिए। “जीएसटी में बहुत जटिलता है यदि यह नहीं हटाया जाता है, तो हालात बिगड़ जाएंगे, “श्री सिसोदिया ने कहा, जो वित्त पोर्टफोलियो भी रखता है।

    उन्होंने आगे तर्क दिया कि यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता थी कि वार्षिक तिमाही के बावजूद जीएसटी रिटर्न को त्रैमासिक दाखिल करने की अनुमति दी गई, चाहे वह 1.5 करोड़ या इससे कम हो।

    इसके अलावा, उन्होंने मांग की कि खिलौने, चॉकलेट, सीमेंट, ऑटो पार्ट्स, टू-व्हीलर पार्ट्स, फ़र्नीचर, हार्डवेयर और बाथरूम फिटिंग जैसे दैनिक उपयोग के आलेखों को इलेक्ट्रिक आइटम 28% टैक्स की लक्जरी स्लैब श्रेणी से निकाल दिया जाए। कि वह इसे जीएसटी परिषद की बैठक में उठाएंगे।

  • जलते हाथी की इस फोटो को मिला वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी अवॉर्ड

    जलते हाथी की इस फोटो को मिला वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफी अवॉर्ड

     

     

    एक जलते हुए हाथी और आग से लिपटे उसके बच्चे की तस्वीर को इस साल का सैंक्चुअरी वाइल्ड लाइफ अवॉर्ड दिया गया है. यह तस्वीर पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले में ली गई है जिसमें हाथी और उसका बच्चा लोगों की भीड़ से बचकर भागते नजर आ रहे हैं.

    फोटोग्राफर बिप्लव हाज़रा ने इसे ‘हेल इज हेयर’ यानी ‘नर्क यहीं है’ टाइटल दिया है. इस फोटो में हाथी का बच्चा और उसकी मां भीड़ द्वारा फेंके जा रहे जलते टार बॉल्स की चपेट में आ गए हैं.

    सैंक्चुअरी एशिया नाम के एक फेसबुक पेज ने इस फोटो को शेयर करते हुए लिखा, “आग की गर्मी इनकी नाजुक चमड़ी को जला रही है. मां और उसका बच्चा भीड़ से बचकर भागने की कोशिश कर रहे हैं. हथिनी ने अपने कानों को ढंक लिया है क्योंकि वह हंसते-मजाक उड़ाती भीड़ की आवाज को इग्नोर करना चाहती है. पीछे उसका बच्चा डर और कन्फ्यूजन में चीख रहा है. वह आग की चपेट में आ गया है.”
    इस पोस्ट में आगे लिखा है कि भारत में एशियाई हाथी दुनिया में सबसे अधिक हैं. यहां दुनिया के 70 प्रतिशत एशियाई हाथी पाए जाते हैं. लेकिन यह उपलब्धि खोखली है क्योंकि हाथियों के रहने के स्थान लगातार बर्बाद किए जा रहे हैं. ज्यादातर जगहों पर हाथी और इंसानों के बीच द्वंद्व जारी है. सदियों से इस क्षेत्र में रह रहे इस स्मार्ट, जेंटल और सोशल एनिमल के लिए अब नर्क यहीं है.”सैंक्चुअरी वाइल्ड लाइफ अवॉर्ड सैंक्चुअरी नेचर फाउंडेशन की तरफ से दिया जाता है. इस अवॉर्ड के लिए इस साल पूरे एशिया से 5000 से ज्यादा एंट्रीज आई थीं.

    (news18.com के लिए अनुराग वर्मा)

  • स्मॉग से 41 ट्रेनें लेट और 10 कैंसिल, दिल्ली मेट्रो ने लिया ये फैसला

    स्मॉग से 41 ट्रेनें लेट और 10 कैंसिल, दिल्ली मेट्रो ने लिया ये फैसला

     

     

    दिल्ली-एनसीआर में जहरीले स्मॉग का असर गुरुवार को भी देखने को मिला. चारों तरफ स्मॉग बना हुआ है और लोगों को सांस लेने में परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है. स्मॉग का असर रेल सेवाओं पर भी पड़ा है. वहीं, सड़कों पर भी गाड़ियों की रफ्तार धीमी पड़ गई है.

    स्मॉग की वजह से दिल्ली पहुंचने वाली 41 ट्रेनें लेट हैं. वहीं 10 ट्रेन को कैंसिल किया गया है. जबकि 9 ट्रेनों के समय में परिवर्तन किया गया है. वहीं, दिल्ली मेट्रो ने ऐलान किया है कि गुरुवार को वह सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा फेरे लगाएगी.

    बताया जा रहा है कि दिल्ली में प्रदूषण को देखते हुए केजरीवाल सरकार इस साल भी ऑड-ईवन फॉर्मूला ला सकती है. इसके लिए तैयारियों का जायजा लिया जा रहा है. पर्यावरण प्रदूषण कंट्रोल अथॉरिटी (ईपीसीए) भी इस पर गुरुवार को विचार करेगी.

    दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को ही राज्य के सभी स्कूल को रविवार तक बंद करने का फैसला ले लिया है. उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.