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  • 1000 करोड़ के एविएशन घोटाले से जुड़ा दिग्विजय सिंह का नाम

    1000 करोड़ के एविएशन घोटाले से जुड़ा दिग्विजय सिंह का नाम

     

     

    यूपीए सरकार के दौरान हुए 1000 करोड़ के एविएशन घोटाले में सीनियर कांग्रेस लीडर दिग्विजय सिंह का भी नाम जुड़ गया है. इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच में सामने आया है कि एविएशन फिक्सर दीपक तलवार ने दिग्विजय सिंह और उनके परिवार के लिए फ्लाइट की टिकटें बुक की थीं.

    आईटी की जांच में सामने आया है कि दीपक तलवार की वेव हॉस्पिटलिटी एमिरेट्स फर्म ने दिग्विजय और उनके परिवार के लिए 1.25 करोड़ की टिकटें खरीदी थीं, जिनमें से 60 लाख की टिकट दिग्विजय और उनकी पूर्व पत्नी के लिए खरीदी गई थी.

    ये टिकटें तब खरीदी गई थीं जब दिग्विजय सिंह कांग्रेस पार्टी के महासचिव थे.

    इस मामले में दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनकी पत्नी आशा और बेटी का ह्यूस्टन में कैंसर का इलाज चल रहा था. ह्यूस्टन के लिए उन्होंने सभी की टिकटें खुद ही खरीदी थीं. उन्होंने कहा कि टिकटों को दीपक तलवार की फर्म ने अपग्रेड किया था.दीपक तलवार को एक बड़ा कॉर्पोरेट लॉबिस्ट और राजनेताओं का करीबी माना जाता है. उन्हें 2 नवंबर को दिल्ली के 30 हजारी कोर्ट ने नोटिस जारी कर आय के स्रोतों के संबंध में जवाब मांगा था. आयकर विभाग तलवार से 1000 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति के संबंध में पूछताछ कर रहा है.

    (CNN-News18 के लिए आशीष महर्षि की रिपोर्ट)

  • घटेंगे जीएसटी स्लैब, 80 फीसदी चीज़ें होंगी सस्ती!

    घटेंगे जीएसटी स्लैब, 80 फीसदी चीज़ें होंगी सस्ती!

     

     

    बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने जीएसटी को लेकर अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े प्रतिनिधियों से बुधवार को उनके सुझाव सुने.

    बिहार चैम्बर ऑफ कॉमर्स में राज्य के विभिन्न व्यावसायों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बिहार एक उपभोक्ता राज्य है.

    उन्होंने कहा कि जीएसटी काउंसिल की आगामी बैठक में 28 फीसदी टैक्स दायरे में शामिल 227 वस्तुओं में से 80 फीसदी पर टैक्स घटकर 18 फीसदी होने की संभावना है.

    सुशील मोदी ने कहा कि जीएसटी कमेटी ने भी 18 फीसदी टैक्स वाले कई वस्तुओं की कर दर को घटाकर 12 फीसदी करने की अनुशंसा की है. अभी तक 100 से ज्यादा वस्तुओं पर टैक्स की दर कम की जा चुकी है.उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार में अगस्त महीने में जहां 58 फीसदी 3 बी रिटर्न दाखिल किया गया था, वहीं सितंबर में मात्र 46.4 फीसदी ही दाखिल हुआ.

    सुशील मोदी ने कहा कि व्यापारियों को क्या दिक्कत है इसे जानने के लिए सभी डीलरों के सर्वे का निर्देश दिया गया है.

    उन्होंने चैम्बर के सभागर में आयोजित बैठक में खाद्यान्न, सर्राफा, कपड़ा, किराना, रीयल एस्टेट आदि से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों से उनके सुझावों को सुनने के बाद कहा कि नोटबंदी और जीएसटी का अन्योन्याश्रय संबंध है.

    उन्होंने कहा कि नोटबंदी की तरह ही जीएसटी का लक्ष्य स्वच्छ, पारदर्शी और ईमानदार अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना है.

    सुशील मोदी ने कहा कि आम लोग का जीएसटी से कभी विरोध नहीं रहा है बल्कि इसकी प्रक्रिया की जटिलता से थोड़ी परेशानी है. व्यापारियों की नई पीढ़ी तेज़ी से डिजिटल की ओर बढ़ रही है.

    उन्होंने कहा कि नौजवान अब कच्चे बिल के साथ काम करने को तैयार नहीं हैं. वो व्यापार के पुराने तरीके को बदलना चाहते हैं.

  • हैदराबाद पुलिस ने शहर की सड़कों पर भीख मांगने पर रोक लगायी

    हैदराबाद पुलिस ने शहर की सड़कों पर भीख मांगने पर रोक लगायी

     

     

    हैदराबाद पुलिस ने ये कहते हुए सड़क की शहरों पर भीख मांगने पर रोक लगा दी है कि इससे यातायात एवं पैदल चलने वाले लोगों की आवाजाही बाधित होती है और उनपर ख़तरा पैदा होता है.

    28 नवंबर से यहां आयोजित होने वाले तीन दिन के आठवें वार्षिक ग्लोबल आंट्रप्रेनोरशिप (जीईएस) 2017 से पहले ये आदेश दिया गया है. सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इंवाका ट्रम्प के शामिल होने की संभावना है.

    मंगलवार रात जारी की गयी अधिसूचना में हैदराबाद पुलिस आयुक्त एम महेंद्र रेड्डी ने कहा कि भिखारियों के कारण मुक्त आवाजाही में बाधा पैदा हो रही है, यातायात एवं राहगीरों पर ख़तरा पैदा हो रहा है और सार्वजनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है.

    अधिसूचना के अनुसार सार्वजनिक स्थलों एवं शहर की मुख्य सड़कों के चौराहों पर भीख मांगने पर बुधवार सुबह से सात जनवरी 2018 तक के लिए रोक लगा दी गयी है.अधिसूचना के अनुसार आदेश का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति आईपीसी की धारा 188 (सरकारी कर्मचारी द्वारा जारी किए गए आदेश की अवहेलना), एवं हैदराबाद शहर पुलिस अधिनियम के सम्बद्ध प्रावधानों, तेलंगाना भीखमंगी रोकथाम अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम, 2000 के तहत सज़ा का पात्र होगा.

  • मोदी की करूणानिधि से मुलाकात को राजनीतिक रंग न दें: BJP

    मोदी की करूणानिधि से मुलाकात को राजनीतिक रंग न दें: BJP

     

     

    भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्रमुक प्रमुख एम करूणानिधि से चेन्नई में मुलाकात करने के कोई राजनीतिक मायने नहीं हैं. उन्होंने इसे शिष्टाचार मुलाकात बताया. केंद्रीय राज्यमंत्री पी.

    राधाकृष्णन ने यहां संवाददाताओं को बताया कि देश के प्रधानमंत्री मोदी कल अपने चेन्नई दौरे के दौरान बीमार चल रहे करूणानिधि से मिलकर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना चाहते थे और उनकी सेहत संबंधी हालचाल जानना चाहते थे.

    मोदी ने करूणानिधि को नयी दिल्ली स्थित अपने आवास पर आमंत्रित किया. इस मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री के साथ राधाकृष्णन भी थे.

    उन्होंने कहा कि इस तरह की मुलाकातों को भी महत्व देना आजकल चलन बन गया है, जिसमें प्रधानमंत्री ने उन्हें हार्दिेक शुभकामनाएं दी. करूणानिधि को देखकर मोदी भावुक हो गए. इसमें वहीं देखा जाना चाहिए था.

    मोदी ने 93 वर्षीय नेता से उनके गोपालपुरम स्थित आवास पर मुलाकात की. द्रमुक प्रमुख अब व्हीलचेयर तक सीमित हैं. सोमवार को शहर के एकदिवसीय दौरे पर आए मोदी ने इस दौरान समय निकालकर उनसे मुलाकात की. इस दौरान वह तमिलनाडु के दैनिक दीना थानाथी की 75 वर्षगांठ के उपलक्ष्य में हुए समारोह में भी शामिल हुए. मोदी के मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात है.

    द्रमुक ने भी इसे शिष्टाचार मुलाकात ही बताया. पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा कि मोदी उनके पिता से मुलाकात करने किन्ही राजनीतिक इरादों से नहीं आए थे, उन्होंने राजनीति के बारे में बात भी नहीं की. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने केवल कलाईगनर की सेहत के बारे में जानकारी ली. उन्होंने यह भी कहा कि केवल मीडिया ही इस मुलाकात के राजनीतिक मायने निकाल रहा है.

  • थॉमस चांडी के कारण केरल सरकार की अदालत में हुई खिंचाई

    थॉमस चांडी के कारण केरल सरकार की अदालत में हुई खिंचाई

     

     

    केरल के परिवहन मंत्री थॉमस चांडी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किए जाने पर
    केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को सरकार की खिंचाई की. आरोप है कि थॉमस चांडी की कंपनी ने अलपुझा जिले में धान के खेत के बीच से उनके स्वामित्व वाली एक लेक रिजॉर्ट तक सड़क निर्माण के लिये कथित रूप से नियमों का उल्लंघन किया था.

    न्यायमूर्ति पी एन रवींद्रन और न्यायमूर्ति देवन रामचंद्रन की खंडपीठ ने चांडी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज़ करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या मंत्री को कोई विशेष महत्व दिया जा रहा है.

    अदालत ने टिप्पणी की कि अगर ये कोई आम नागरिक करता तो बुलडोजर का इस्तेमाल करने के कारण उसे बेदखल कर दिया गया होता. अदालत ने कहा कि कानून के सामने सभी बराबर हैं. ये याचिका सुनवाई के लिए आने पर सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया कि वो मंत्री के खिलाफ मामलों की जांच कर रही है.

    उन्होंने कहा कि कोई रिपोर्ट दायर करने से पहले इस मुद्दे पर मंत्री के मुहैया कराए गए दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता जांचनी होगी. सरकार ने ये भी दलील दी कि चांडी को कोई विशेष महत्व नहीं दिया गया.

  • कमल हसन: सिनेमा से सियायत की ओर…..

    विवादास्पद बयान इसी की भूमिका हैं?

    एक-दूजे के लिए, सदमा, सागर जैसी हिन्दी फिल्मों से अपनी खास पहचान बनानेवाले कमल हासन इन दिनों अपने विवादास्पद बयानों के लिए चर्चाओं में हैं… वे इन दिनों सिनेमा से सियायत की ओर कदम बढ़ा रहे हैं तो जाहिर है कि उन्हें एक बड़ा वोट बैंक चाहिए… क्या ये विवादास्पद बयान इसी की भूमिका हैं?
    बीसवीं सदी में तमिलनाडु में जिस तरह की धार्मिक-सामाजिक सोच प्रभावी रही है, कमल हासन उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन शायद वे नहीं जानते कि इस सदी में बहुत कुछ बदल गया है और बीसवीं सदी के राजनीतिक अस्त्र-शस्त्र इस सदी में बेकार साबित हो सकते हैं, बल्कि यों कहें कि उल्टे भी पड़ सकते हैं!कमल हासन की ऐसी सोच इसलिए भी है कि उन्हें राजनीतिक मैदान में भाजपा से मुकाबला करना है, लेकिन… उन्होंने इससे कई गैरराजनीतिक लोगों और संगठनों की भी नाराजगी मौल ले ली है!
    कमल हासन ने एक तमिल पत्रिका में अपने साप्ताहिक लेख में हिंदू आतंकवाद का मुद्दा उठाया, उन्होंने लिखा… आप ये नहीं कह सकते कि हिंदू आतंकवाद नहीं है. पहले हिंदू कट्टरपंथी बातचीत करते थे, अब वे हिंसा करते हैं… अब सत्यमेव जयते से लोगों का विश्वास उठ गया है… सत्य की ही जीत होती थी, लेकिन अब ताकत की ही जीत होती है, ऐसा बन गया है… इससे लोग अमानवीय हो गए हैं! कमल हासन की इस टिप्पणी पर कई तीखी प्रतिक्रियाएं हुई है।
    आइए, देखते हैं तमिलनाडु की राजनीतिक झलक… तमिलनाडु में पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का निधन हो गया है तो डीएमके नेता करूणानिधि लंबे समय से अस्वस्थ हैं, नतीजा… कोई लोकप्रिय सितारा इनदिनों तमिलनाडु की राजनीति में नहीं चमक रहा है, मतलब… दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार कमल हासन के लिए राजनीति में प्रवेश का यह बेहतर समय है!
    खबर है कि… जहां इसे लेकर कमल हासन, अखिल भारतीय हिंदू महासभा के निशाने पर तो हैं ही वहीं कुछ मुस्लिम नेता भी उनसे नाराज नजर आ रहे हैं… अलीगढ़ मुस्लिम यूथ एसोसिएशन के मोहम्मद आमिर रशीद का कहना है कि कमल हासन, हिन्दू और मुस्लिमों में दरार पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं! उनका कहना है कि… यदि हिन्दू चरमपंथी हो गए तो कोई भी दूसरा समुदाय सुरक्षित नहीं रहेगा!
    इस मुद्दे पर साध्वी ऋतंभरा ने कहा… हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकते, वे केवल आतंकवादियों का शिकार होते हैं. यही कारण है कि आतंकवाद लगातार बढ़ता रहा क्योंकि हिंदू हमेशा इसका शिकार होता रहा है तो भाजपा नेता विनय कटियार ने कहा कि… कमल हासन को कश्मीर में जाकर देखना चाहिए, तब उनको समझ में आएगा कि आतंकवाद क्या होता है?

    इसे भी पढ़े: आलोचना नहीं सह पाने वाले अब मेरी जान लेना चाहते हैं: कमल हासन

  • ट्रक ने मारी टक्कर, एक बच्चे की मौत 3 अस्पताल में भर्ती

    ट्रक ने मारी टक्कर, एक बच्चे की मौत 3 अस्पताल में भर्ती

     

     

    मालाड इलाके के मार्वे रोड पर एक ट्रक ने 4 बच्चों को टक्कर मार दी. इस हादसे में एक बच्ची की जान चली गयी और तीन बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बॉलीवुड फिल्मों में अक्सर देखा जाता है कि हादसा होने के बाद मौका-ए-वारदात पर पुलिस हमेशा देर से पहुंचती है. कुछ ऐसा ही इस घटना में भी हुआ.

    इस खतरनाक हादसे में एक ट्रक ड्राइवर ने बेरहमी की इंतहा पार कर स्कूल जा रहे 4 बच्चों को टक्कर मार दी. इस हादसे में एक 13 वर्षीय बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. मृतक बच्ची का नाम मुस्कान मेमन बताया जा रहा है. मंगलवार सुबह करीब 7.45 बजे हुए इस हादसे के समय उस रोड पर कुछ लोग जॉगिंग कर रहे थे जो तुरंत पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए.

    इन लोगों ने ना सिर्फ बच्चों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की बल्कि पुलिस को फोन कर हादसे की जानकारी दी. साथ ही इन लोगों ने ट्रक ड्राइवर को भी पकड़ने की कोशिश की लेकिन वो भागने में कामयाब रहा. इस हादसे की जानकारी मिलने के एक घंटे बाद भी पुलिस मौका-ए-वारदात या अस्पताल तक नहीं पहुंची.इस हादसे का शिकार हुए एक बच्चे से बात करने पर 12 वर्षीय मासूम कमल मनाली ने बताया कि वो चारों स्कूल के लिए घर से निकला था. लेकिन स्कूल के शुरू होने में वक़्त था इसीलिए वो इधर-उधर घूम रहे थे. और फिर अचानक एक ट्रक ने उनको पीछे से टक्कर मार दी. पीड़ित कमल को सबसे कम चोट आयी, लेकिन वह अब तक इस हादसे के सदमे और डर से बाहर नहीं आ पाया है. जबकि दो बच्चों को आईसीयू में भर्ती किया गया है, दोनों गंभीर रूप से घायल हैं. बताया जा रहा है कि एक को सिर पर गहरी चोट लगी है और दूसरे बच्चे का पैर पर फ्रैक्चर हो गया है. इस हादसे के शिकार 4 बच्चों में से दो बच्चे कमल के भाई 9 साल का भूपेंद्र मेनाली और 13 साल की बहन नेहा मेनाली है. यह दोनों गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं.

    इन चार बच्चों के अलावा एक रिक्शा भी ट्रक के चपेट में आ गया. दरअसल रिक्शा चालक रामअवतार कुशवाहा अपना रिक्शा रोड के एक कोने में लगाकर पेशाब करने के लिए झाड़ियों में गया था और उसी वक्त ट्रक ने चार मासूम बच्चों के साथ उसके रिक्शे को भी टक्कर मार दी. इस हादसे में उसके रिक्शे को काफी नुकसान पहुंचा है.

    फिलहाल देर से पहुंची पुलिस ट्रक के मालिक से पुलिस स्टेशन बुलाकर पूछताछ कर रही है. फरार आरोपी ड्राइवर के मोबाइल के जरिए उसकी लोकेशन को ट्रेस करने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस को यह भी पता चला है कि ट्रक में ड्राइवर के साथ क्लीनर भी मौजूद था. फिलहाल दोनों की तलाश जारी है. इस मामले में आईपीसी धारा 304, 279 और 338 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.

    चूंकि पीड़ित के परिवार वालों की आर्थिक स्थिति कमजोर है इसलिए लोकल एमएलए पीड़ितों के इलाज में मदद के लिए आगे आएं है.

    बताया जा रहा है कि आईसीयू में एडमिट दो बच्चों को जल्द आगे के इलाज के लिए केईएम अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा. परिवार वालों से पता चला है आईसीयू में एडमिट दो बच्चों में से एक बच्चे को लिवर कैंसर है और पिछले एक साल से उसका इलाज चल रहा है.

  • आडवाणी ने नेत्रहीन बच्चों के साथ मनाया अपना 90वां जन्मदिन

    आडवाणी ने नेत्रहीन बच्चों के साथ मनाया अपना 90वां जन्मदिन

     

     

    भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने नेत्रहीन बच्चों के साथ अपना 90वां जन्मदिन मनाया और उनके साथ जलपान किया.

    भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं एवं मंत्रियों ने आडवाणी के आवास पर जाकर उन्हें जन्मदिन की बधाई दी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट करके आडवाणी को शुभकामनाएं दी. प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि पूर्व उपप्रधानमंत्री ने अपने कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देकर विशिष्ट स्थान बनाया .

    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू एवं जदयू के बागी नेता शरद यादव ने आडवाणी को स्वयं जाकर बधाई दी .

    आडवाणी को बधाई देने के लिए पृथ्वीराज मार्ग स्थित उनके आवास पर सबसे पहले पहुंचने वालों में गृह मंत्री राजनाथ सिंह थे.

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    8 नवंबर को 90 साल के हुए लालकृष्ण आडवाणी.

    आडवाणी ने आज अपना जन्मदिन मनाने के लिये अपने आवास पर विशेष अतिथि के रूप में नेत्रहीन बच्चों को आमंत्रित किया और उनके साथ जलपान किया. लोधी रोड नेत्रहीन स्कूल के 90 छात्र आडवाणी के जन्मदिन के अवसर पर उनके आवास आए थे.

    आडवाणी को घर जाकर बधाई देने वालों में केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, रविशंकर प्रसाद, अनंत कुमार, जयंत सिंह शामिल थे .

    कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आडवाणी को ट्वीट कर जन्मदिन की बधाई दी. उन्होंने कहा, ‘‘जन्मदिन की बधाई. आपका दिन बेहतरीन हो.’’ तृणमूल प्रमुख ममता ने इस अवसर पर ट्वीट कर कहा, ‘‘लालकृष्ण आडवाणीजी को जन्मदिन की बहुत बहुत शुभकामनाएं. उनका स्वस्थ एवं प्रसन्नतापूर्ण लंबा जीवन हो.’’ राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भाजपा के वरिष्ठ नेता को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. साथ ही उन्होंने यह नसीहत भी दी कि यदि उनका कोई शिष्य बागी भी हो जाए तो उन्हें चिंता नहीं करनी चाहिए.

  • नोटबंदी के कारण लोगों को हुई भारी परेशानी: सर्वेक्षण

    नोटबंदी के कारण लोगों को हुई भारी परेशानी: सर्वेक्षण

     

     

    नोटबंदी के एक साल पूरा होने की पूर्व संध्या पर मंगलवार को जारी किए गए एक देशव्यापी सर्वेक्षण में 63 फीसदी प्रतिभागियों ने सरकार के पिछले साल
    8 नवंबर को एकाएक की गई नोटबंदी के कारण ‘गंभीर परेशानियां’ उठाने की बात कही, जबकि 65 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने नोटबंदी के कारण शादियां स्थगित होते देखीं.

    ‘अनहद’ समेत 32 अन्य नागरिक संगठनों के किए गए इस सर्वेक्षण में उन लोगों के नाम भी शामिल हैं, जो बैंकों की कतार में और नोटबंदी से जुड़े अन्य कारणों से मारे गए.

    इस सर्वेक्षण में ज्यादातर प्रतिभागियों (55 फीसदी बनाम 26.6 फीसदी) ने इस बात से असहमति जताई कि इस कदम से काला धन हमेशा के लिए मिट सकता है. इसके साथ ही 48.2 फीसदी लोगों ने इस पर भरोसा नहीं किया कि नोटबंदी के कारण आंतकवादियों के वित्त पोषण में किसी प्रकार की कमी आई है. 20 फीसदी लोगों का ये मानना था कि इस कदम से आम आदमी को फायदा होगा.

    राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में 71.8 फीसदी प्रतिभागियों ने कहा कि उन्होंने लोगों को नोटबंदी के कारण ‘भारी परेशानी’ का सामना करते देखा. यहां तक कि गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को इलाज नहीं मिल रहा था, क्योंकि वो ‘नोटबंदी’ के बाद नई मुद्रा में भुगतान करने में असमर्थ थे.सर्वेक्षण में शामिल 50 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके जानने वालों में से किसी ना किसी की नौकरी नोटबंदी की वजह से चली गई.

    65 फीसदी प्रतिभागियों का कहना था कि उन्होंने किसी नेता या अमीर आदमी को किसी बैंक की लाइन में या एटीएम की लाइन में खड़े नहीं देखा. उनका कहना था कि उन्हें ऐसा नहीं लगा कि नोटबंदी के कारण अमीरों को कोई परेशानी हुई हो.

    सर्वेक्षण में 96 प्रश्न शामिल किए गए थे और ये 2016 के दिसंबर से 2017 के जनवरी के बीच 21 प्रमुख राज्यों में किया गया, जिसमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं.

    सर्वेक्षण के इन नतीजों को सामाजिक कार्यकर्ता जॉन दयाल, गौहर रज़ा, पी वी एस कुमार और सुबोध मोहंते ने नोटबंदी के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर मंगलवार को जारी किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल 8 नवंबर को नोटबंदी की घोषणा की थी.

    वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और इस रिपोर्ट के लेखकों में से एक गौहर रज़ा ने कहा, ‘इन आंकड़ों को 2016 के दिसंबर और 2017 के जनवरी के बीच संग्रहित किया गया था, जब लोगों की भावनाएं नियंत्रित मीडिया चैनलों की ओर से की जा रही चारों तरफ की बमबारी से अत्यधिक प्रभावित थीं.’

    रजा ने कहा, ‘झूठी कहानी रचकर लोगों को जमीनी सच्चाई से काटने की हर संभव कोशिश के बावजूद उन शुरुआती दिनों में एकत्र किए गए आंकड़े भी काफी कुछ कहानी बयान करते हैं. अगर ये सर्वेक्षण अभी किया जाता है तो परिणाम में इसकी भयंकर भर्त्सना देखने को मिलेगी.’

    इस रिपोर्ट में उन 90 लोगों की सूची दी गई है जो बैंक की लाइन में या नोटबंदी से जुड़े अन्य कारणों से मारे गए.

    उदाहरण के लिए जम्मू के सांबा जिले के दूंगा गाव का 8 वर्षीय बच्चे की तब मौत हो गई, जब नोटबंदी के कारण उसके पिता नए नोट नहीं होने के कारण उसका इलाज नहीं करवा पाए. एक अखबार के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि अपने बच्चे को 50 किलोमीटर दूर के अस्पताल में पैदल चलकर ले जाने से पहले उसने लगातार तीन दिनों तक 29,000 रुपए के पुराने नोट जमा कर नए नोट लेने की कोशिश की थी.

    इसी प्रकार 50 वर्षीय बाबूलाल की मौत अलीगढ़ में तब हार्ट अटैक से हो गई, जब वो अपने परिवार में शादी के लिए समय पर नोट नहीं बदलवा सके. इसी प्रकार की कई अन्य दिल दहलानेवाली कहानियां नोटबंदी से जुड़ी हैं.

    सीएसआईआर के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और रिपोर्ट के लेखकों में से एक पी वी एस कुमार ने कहा कि ये सूची अभी अधूरी है. अभी तक हमें नोटबंदी के शिकार पीड़ितों की सही संख्या की जानकारी नहीं है.

  • इस शहर में हर शख्‍स परेशान सा क्‍यों है

    इस शहर में हर शख्‍स परेशान सा क्‍यों है

     

     

    त्रिपर्णा मित्रा

    एक शहर में असीम संभावनाएं होती हैं. इसके कई छोटे इतिहास इसके भूगोल को व्यापक बनाते हैं. अत्यधिक काम से जूझ रही बेचैन आत्माओं, शहर के लाखों बाशिंदों के लिए शहर भौतिक रूप से मोक्ष पाने की एक जगह है. अनुशासित मोक्ष के लिए आपको एकांत चाहिए लेकिन शहर की हलचल में ऐसा संभव नहीं.

    ऐसे में शहर रसिक को खुशी और उदास शख्स को एकांत देता है. मगर आजकल दिन धुएं और आलस से भरे हैं, जिनसे रंगीनमिजाज लोग भी उदास हैं और व्हाट्सएप-फेसबुक पर क्लिक कर-करके चिंता से मायूस हो रहे हैं.

    ऐसे में शहर मशहूर जादूगर हुडिनी की तरह बर्ताव करने लगता है. इसकी कई इमारतें कई घंटों के लिए गायब हो जाती है. शहर पर जादू सा छा जाता है और बुराई इस कदर इसे मोहित करती है कि शहर पूरी तरह थम जाता है. उस वक्त शहर बेड़ियां में बंधा भीमकाय जीव भर रह जाता है, जिसमें सब कुछ छिपा होता है. सब पहचान खो चुके होते हैं.

    अमेरिकन स्ट्रीट लाइफ के महान फोटोग्राफर विवियन मेयर कई शानदार तस्वीरें खींचने के बाद अपने घर में छिपे रहने की आदत नहीं छोड़ पाईं. अगर वह दिल्ली में होतीं, तो तस्‍वीर लेतीं और 100 मीटर बाद ही हवा में कहीं गायब हो जातीं. यहां हर कोने में गुमनामी मौजूद है. पलक झपकते ही गायब!

    शुरुआत में शहरयार की जिस पंक्ति का जिक्र हुआ है वह हमारे दूसरे महानगर जैसे मुंबई की चिंता को बड़े सारगर्भित रूप से दर्शाती है. यह आसानी से धुंध में लिपटे, सांस लेने को जूझते, आंखों की जलन, मानसिक स्थिति से परेशान भारत के नए महानगर का प्रतीक है.

    70 के दशक में जब शहरयार ने ये लाइनें लिखी थीं तब मुंबईवासी दिल्ली को गंवार, पाकिस्तान से आए पंजाबी प्रवासियों के निम्न वर्ग समूह और बिहारी देहातियों के आने वाली जगह भर समझते थे. वे अभी भी ऐसा ही सोचते हैं हालांकि उसकी कहानी अलग है. इस पर धुंधरहित दिनों में लिखा जाएगा.

    गार्सिया लोर्का ने कहा है कि किसी यात्री को बड़े शहरों में वास्तुकाल और तेज रफ्तार दिखाई देती है. उन्होंने आगे ज्‍यामिति और तड़प को भी इसमें जोड़ दिया. अगर गार्सिया को फासीवादियों ने मारा न होता तो उन्‍हें दिल्‍ली में ज्‍यामिति के बजाय गाजीपुर जैसे पीड़ा के ढेर पूरे शहर में दिखाई देते. यहां तक कि कोई भारतीय बर्नम (अमेरिकी राजनेता और कारोबारी थे जो बड़ी हस्तियों का छलावा बढ़ाने का काम करते थे) भी गार्सिया को दिल्‍ली में कोई ज्‍यामिति नहीं दिखा पाता.

    हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पे दम निकले…कभी दिल्ली के शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ये लाइनें लिखीं थीं. तब शायद दिल्ली में धुंध के बिना साफ़ चाँद दिखाई पड़ता होगा. अगर उन्हें मालूम होता कि इसी दिल्ली में कभी लोगों के दम ख्वाहिशों पर नहीं बल्कि एक-एक साँस लेने में निकलेंगे तो वे क्या लिखते.

    आज वही चांदनी चौक एक चलते-फिरते डरावने सपने में बदल गया है. आज ग़ालिब होते तो वे अपनी कलम नीलाम कर चुके होते या मेरठ या कहीं और निकल जाते. इन सबके बाद, आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक… आज अगर इस शहर के हालात देखें, जहाँ बिन धुंध के इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती, वहाँ एक उम्र मिलने की उम्मीद! तो ग़ालिब आज अपने अकेलेपन और अपनी शराब के साथ बल्लीमारान की गलियां छोड़ चुके होते.

    मौजूदा वक्त बेमतलब की नारेबाज़ियों, राजनीतिक द्वेष, तकनीकी दासता और प्रदूषित दिनों से भरा हुआ है. आजकल वह समय है जब राजनेता हर मुद्दे पर बेतुकी बात करते हैं. गठिया पीड़ित घुटने हिलाते हुए सुर्खियां बटोरने वाले आदेश जारी करते हैं. इसे बंद कर दो, उसे बंद कर दो, कारों पर पाबंदी लगाओ, नकाब निकाल लो, बीजिंग बना दो, पुराने मसलों पर मिट्टी डालो.

    उनकी असंयमी बातें शहर को लपेटे हुए जहरीली धुंध की मोटी परतों में शामिल हो जाती है. होलोकास्‍ट पर बनी क्‍लाउड लेंज़मेन की फिल्‍म ‘शोह’ गैस चैंबर शब्‍द को एक भयावह रूप देती है. इस फिल्‍म में मशीनी निर्दयता और अनवरत क्रूरता को शानदार तरीके से दिखाया गया है. सामूहिक श्मशान से निकली राख मिला धुआं उन कस्‍बों के ऊपर फैल जाता है जहां नाज़ी यहूदियों को गैस चैंबर में खत्‍म कर रहे होते थे. इसलिए एक शहर को गैस चैंबर कहकर क्‍या हम अपने खात्‍मे का मनहूस इशारा कर रहे हैं. अनजाने में ही सही लेकिन फिर भी…!

    मशहूर लेखक गार्सिया मार्खेज़ ने कहा था कि आपके साथ क्या हुआ ये मायने नहीं रखता. मायने रखता है तो केवल ये कि आप क्या और उसे कैसे याद रखते हैं. ज़रा सोचिए दिल्ली के लोग इन दिनों को कैसे याद रखेंगे? और क्या वो उन्हें वाकई याद रखना चाहेंगे? रात को मोबाइल पर प्रदूषण से जुड़ा डरावना डेटा, सुबह व्हाट्सऐप ग्रुप में बार-बार आते एक्यूआई नंबर्स. कुछ याद रखने के लिए समय ही कहां है. पिछले साल के मीम्स धड़ल्ले से शेयर हो रहे हैं.

    शहर, एक विशाल जानवर की तरह हर पल बदल रहा है. अगर पिछले साल के मीम्स इस साल भी जीवंत हो रहे हैं तो सोचने की बात है कि क्या वाकई शहर थोड़ा भी बदला है? क्या यह जानवर नींद की दवा के असर में है? तब तो कहना गलत नहीं होगा कि नींद की दवा एल्प्राजोलाम जीत गई है. शहर सो रहा है. उसकी धुंध की यादें, याद नहीं रखी जातीं क्योंकि कई कोहरे से भरी सर्दियां दस्तावेज़ों में दर्ज हो चुकी हैं. तब अब बन जाता है और अब तब में बदल जाता है.

    अमेरिकी लेखिका सूज़न सॉन्टाग ने कहा है कि तस्वीरें हक़ीक़त क़ैद करने का एक ज़रिया है, पर हक़ीक़त के लिए तस्वीर तो मिल सकती है, लेकिन कोई वर्तमान को क़ैद नहीं कर सकत. जो क़ैद होता है, वह बीता हुआ कल बन जाता है.

    जिस तरह दिल्ली का धुंध भरा खोखला कल धुंध से भरे वर्तमान से मिल रहा है, उसकी हक़ीक़त भी उसी तरह धुंधली हो रही है. बीता कल आसानी से आज में समा रहा है. तस्वीरें बीते हुए कल को मानों आज दिखा रही हैं.

    मशहूर अंग्रेज़ कवि फिलिप लार्किन ने ब्रिटेन के उपनगरीय इलाक़ों पर मार्मिक ढंग से लिखा था कि एक शाम आ रही है, जो किसी दीये को रौशन नहीं करती. दिल्ली में शाम छोड़िए, एक सुबह आ रही है, जिसमें न रौशनी है और न आराम. धुएं में डूबी शामों पर बहस करते हुए ही हमारी सुबहें ज़ाया हो जाती हैं.

    दिल्ली ने अपने लंबे, बेतरतीब इतिहास में कई चीज़ें देखी हैं. इन धुंध भरे, ख़तरनाक दिनों को अगर डेडली (Deadlhi) कहें, तो ग़लत नहीं होगा.