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  • कमल हासन जनवरी तक शुरू कर सकते हैं पार्टी, कहा- हिंदू विरोधी नहीं हूं

    कमल हासन जनवरी तक शुरू कर सकते हैं पार्टी, कहा- हिंदू विरोधी नहीं हूं

     

     

    अभिनेता कमल हासन ने मंगलवार को संकेत दिया कि वह जनवरी तक अपने नए राजनीतिक दल के नाम की घोषणा कर सकते हैं. उन्होंने साथ ही यह साफ करने का प्रयास किया है कि वह हिंदू विरोधी नहीं हैं और ना ही उन्होंने जानबूझकर उनकी भावनाओं को चोट पहुंचाई है.

    अपने 63वें जन्मदिन पर यहां संवाददाता सम्मेलन में कमल हासन ने ‘माइयमव्हिसल’ (केंद्र सीटी) और ‘ददीथीरेपॉम्वा’ (हमें खोजें और हल करें) जैसे कई लिंक के साथ ‘केएच’ नामक एक एप लॉन्च किया. यह लोगों के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करेगा जिस पर वह कमल हासन के साथ बातचीत और शिकायत कर पाएंगे.

    कमल हासन ने कहा कि मैं लोगों तक पहुंचने के लिए तमिलनाडु की यात्रा करने की योजना बना रहा हूं. यात्रा की तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी. संवाददाता सम्मेलन के शुरू में ही उन्होंने खुद ही अपने राजनीतिक दल की शुरुआत के मुद्दे पर कहा कि बहुत सारी तैयारियां की जा रही हैं. मैं विशेषज्ञों और दोस्तों से परामर्श कर रहा हूं और उचित समय आने पर इसकी घोषणा करूंगा.

    एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि उनके डिजिटल प्लेटफॉर्म के एक लिंक की तरह वह भी ‘ना ही लेफ्ट जाएंगे ना ही राइट.’ यह पूछे जाने पर कि हाल ही में उनके बयानों के कारण उन्हें हिंदू विरोधी के रूप में देखा जा रहा है, कमल ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि वह हिंदू चरमपंथ के बारे में बात कर रहे थे न कि हिंदू आतंकवाद के बारे में.हिंदुओं को दुख पहुंचाने के लिए पार्टी शुरू नहीं कर रहा
    कमल ने कहा कि मैं हिंदुओं को दुख पहुंचाने के लिए पार्टी शुरू नहीं कर रहा हूं. मैं एक हिंदू परिवार से आता हूं और मैं अपने परिवार के स्नेह को कभी नहीं खोना चाहता. मैं हिंदुओं को दुख नहीं पहुंचाना चाहता, लेकिन जब गलतियां होंगी तब मैं आवाज उठाऊंगा. कमल ने कहा कि मैं जब हिंसा पर बोलता हूं तब मैं सिर्फ वास्तविक स्थिति के बारे में बात करता हूं. किसी को भी ऐसी हिंसा में सम्मलित नहीं होना चाहिए. यह हिंदू और मुस्लिम दोनों पर लागू होता है. जब मैं चरमपंथ कहता हूं तो इसका मतलब आतंक नहीं बल्कि हिंसा है.

    सच बोलने के लिए दंड दिया जाता है तो मैं इसके लिए तैयार हूं
    कुछ हिंदुत्ववादी तत्वों द्वारा उन्हें जाने से मारने की धमकी के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न पर कमल ने कहा कि मैं हमेशा केवल सच बोलता हूं. अगर इसके लिए दंड दिया जाता है तो मैं इसके लिए तैयार हूं. कमल ने कहा कि मेरे मित्र और रिश्तेदार हर समुदाय में हैं, हालांकि कुछ लोग मुझे हिंदू विरोधी कह रहे हैं. मैं ब्राह्मणों के मूल तत्वों से ऊपर उठ चुका हूं. यह एक खोज है. इसमें कोई गर्व या शर्म नहीं है. धर्म में आस्था रखने वाले मुझे नास्तिक कह रहे हैं लेकिन मैं एक तर्कवादी हूं.

    यह पूछने पर कि वह अपनी राजनीतिक योजनाओं के बारे में विस्तार से बताने की स्थिति में क्यों नहीं हैं, कमल हासन ने कहा कि आपको मुझे घोषणापत्र, एक नाम के साथ सामने आने के लिए समय देना होगा. मैं इसके संरचनात्मक भाग पर काम कर रहा हूं. मैं जल्दबाजी में नहीं हूं, जल्दबाजी करने की कोई जरूरत नहीं है, मुझे आपके समर्थन की जरूरत है.

    अशोक चक्र से लिया एप का नाम
    एप के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका नाम अशोक चक्र से लिया गया है. यह एक धार्मिक चक्र है जोकि एक दुष्चक्र बन गया है. वह चाहते है कि लोग विसलब्लोअर बनें. उन्होंने कहा कि कल मुझे शायद कुछ राजनीतिक जिम्मेदारी भी मिले, ऐसे में व्हिसल मेरे खिलाफ भी बजनी चाहिए. मुझसे भी प्रश्न किया जाना चाहिए.

    यह पूछे जाने पर कि वह अपने संगठन से दागी लोगों और धन को कैसे दूर रखेंगे, कमल ने कहा कि वह इस पर भी काम कर रहे हैं. कमल ने कहा कि यहां तक कि उनके फिल्मी करियर में कभी काला धन नहीं रहा है. उन्होंने कहा कि पहले से ही लोगों ने, खासकर गरीबों ने उनके प्रशंसकों के संघ को 30 करोड़ रुपये का योगदान दिया है जिसको ऑडिट किया जा चुका है.

  • LED बल्ब: रोशनी का काला धंधा

    सतीश सिंह
    भले ही देश में लाइट एमिटिंग डियोड्स (एलईडी) बल्ब का बाजार दस हजार करोड़ रुपये से ऊपर चला गया है, लेकिन धीरे-धीरे यह काले कारोबार में तब्दील हो रहा है, जो निश्चित रूप से चिंता की बात है.मौजूदा समय में एलईडी बल्ब का बाजार नकली उत्पादों से भरा पड़ा है. कंपनियां इसे मुनाफा कमाने का एक बड़ा साधन मानकर चल रही हैं. इलेक्ट्रिक लैंप एंड कंपोनेंट मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन (एलकोमा) की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2010 में एलईडी लाइटिंग का भारतीय बाजार महज 500 करोड़ रु पये का था, जो अब बढ़कर 10 हजार करोड़ रु पये का हो गया है. यह 22 हजार करोड़ रु पये की पूरी लाइटिंग इंडस्ट्री का लगभग 45 प्रतिशत से भी ज्यादा है. दरअसल, एलईडी बल्ब में विद्युत ऊर्जा की कम खपत होती है और इसकी रोशनी पारंपरिक बल्ब से ज्यादा होती है.

    इसे भी पढ़े: LED बल्ब पर भी लगेंगे बिजली बचत के सितारे, जनवरी से अमल

    1000-500 के पुराने नोट रखने वालों पर सरकार नहीं करेगी कार्रवाई

    फिर भी यह आंखों को नहीं चुभती है, जिसके कारण इसकी लोकप्रियता में तेजी से इजाफा हो रहा है. वैश्विक स्तर की ख्यातलब्ध एजेंसी नीलसन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि घरेलू बाजार में उपलब्ध एलईडी बल्ब के 76 और एलईडी डाउनलाइटर के 71 प्रतिशत ब्रांड सुरक्षा मानकों के अनुकूल नहीं हैं. गौरतलब है कि ये मानक भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रसारण मंत्रालय ने तैयार किए हैं. नीलसन ने अपने सर्वेक्षण में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और हैदराबाद में बिजली के उत्पादों की खुदरा बिक्री करने वाली 200 दुकानों के एलईडी बल्बों को नमूने के तौर पर शामिल किया था. एलकोमा के अनुसार बीआईएस मानकों के उल्लंघन के सबसे ज्यादा मामले दिल्ली में देखे गए हैं. एलकोमा की मानी जाए तो अधिकृत मापदंडों पर खरा नहीं उतरने वाले उत्पादों से उपभोक्ता गंभीर रूप से बीमार हो सकते हैं. अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) द्वारा 14 जून 2016 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार एलईडी द्वारा निकलने वाली रोशनी मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. नकली उत्पाद से जोखिम की गंभीरता और भी ज्यादा बढ़ जाती है.।
    दूसरी तरफ नकली उत्पादों को बेचने से सरकार को भारी-भरकम राजस्व का नुकसान हो रहा है. देखा जाए तो नकली एलईडी बल्ब के कारोबार से सरकार के श्मेक इन इंडिया्य संकल्पना को भी नुकसान हो रहा है. उल्लेखनीय है कि अगस्त, 2017 में बीआईएस ने एलईडी बल्ब निर्माताओं को उनके उत्पाद के सुरक्षा जांच के लिए बीआईएस में पंजीकृत कराने का निर्देश दिया था, लेकिन कंपनियां इस आदेश की अनदेखी कर रही हैं. एलईडी बल्ब के काले कारोबार में बढ़ोतरी का एक बहुत बड़ा कारण भारतीय बाजार का चीन के उत्पादों से भरा हुआ होना भी है. आज की तारीख में एलईडी बल्ब बड़े पैमाने पर चीन से भारत गैर कानूनी तरीके से लाई जा रही है.

    सर्वेक्षण के मुताबिक एलईडी बल्ब के 48 प्रतिशत ब्रांडों पर बनाने वाली कंपनी का पता दर्ज नहीं है, जबकि 31 प्रतिशत ब्रांडों की पैकिंग पर कंपनी का नाम नहीं लिखा है. साफ है, इनका निर्माण गैर-कानूनी तरीके से किया जा रहा है. इसी तरह एलईडी डाउनलाइटर्स के मामले में भी 45 प्रतिशत ब्रांडों की पैकिंग पर निर्माता का नाम दर्ज नहीं है और 51 प्रतिशत ब्रांडों के उत्पादों पर कंपनी का नाम नहीं लिखा हुआ है. नीलसन के रिपोर्ट के अनुसार सर्वे में शामिल दिल्ली में बिकने वाली एलईडी बल्ब की तकरीबन तीन-चैथाई ब्रांड बीआईएस मानकों के अनुरूप नहीं हैं. एलईडी डाउनलाइटर्स के मामले में भी लगभग ऐसी ही स्थिति है. वर्तमान में घर, बाजार और दफ्तर में धड़ल्ले से एलईडी बल्ब का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसी वजह से रोशनी के बाजार में इसकी हिस्सेदारी बढ़कर आज 50 प्रतिशत हो गई है.
    हाल ही में सरकार ने “उजाला” योजना के तहत देशभर में 77 करोड़ पारंपरिक बल्बों की जगह एलईडी बल्ब इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा है. इस आलोक में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) ने आपूर्ति करने वाले निर्माताओं या डीलरों को श्स्टार रेटिंग्य वाले एलईडी बल्ब की आपूर्ति करने का निर्देश दिया है, ताकि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़े. कहा जा सकता है कि मौजूदा परिदृश्य में सरकार को नकली एलईडी बल्बों के प्रसार को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने चाहिए. खास करके चीन से गैरकानूनी तरीके से आने वाली नकली एवं बिना ब्रांड वाले उत्पादों पर. नकली या बिना ब्रांड वाले एलईडी बल्ब ईमानदार कारोबारियों, सरकार एवं उपभोक्ताओं सभी के लिए नुकसानदेह है, क्योंकि कारोबारियों एवं सरकार को तो इससे सिर्फ आर्थिक नुकसान ही हो रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य इससे खतरे में है.

  • शरद पवार के दांव से फंसी शिवसेना, CM फडणवीस ने दी चेतावनी

    शरद पवार के दांव से फंसी शिवसेना, CM फडणवीस ने दी चेतावनी

     

     

    महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल आ गया है. न्यूज 18 इंडिया के इंटरव्यू में सीएम देवेन्द्र फडणवीस ने कहा था कि शिवसेना तय कर ले कि उसे साथ रहना है या अपोजिशन में. तो दूसरे ही दिन शरद पवार ने खुलासा कर दिया कि उद्धव ठाकरे उनसे मिलने आये थे और वो सरकार से खुश नहीं है. पवार की इस चाल से शिवसेना फंस गयी है. जाहिर है पवार पर भरोसा करके शिवसेना ने बड़ी गलती कर दी है.

    मुख्यमंत्री ने न्यूज 18 इंडिया के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि शिवसेना एक साथ दो नांव में सवार होना चाहती है. वो विपक्ष की भी भूमिका निभाना चाहती है और सरकार में भी रहना चाहती है. मेरी बतौर एक मित्र शिवसेना और उद्धव ठाकरे को सलाह है कि वो कम से कम ये तय कर लें कि उन्हें सरकार के साथ रहना है या विपक्ष के साथ.

    सीएम ने तो शिवसेना के मुखपत्र सामना में छपी बातों को सिरे से नकारते हुए कहा था कि सामना देखता कौन है. सीएम के हमले से शिवसेना उबर पाती कि शरद पवार ने बड़ा खुलासा कर दिया. पवार ने कह दिया कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे मुझसे मिलने आये थे और सरकार में रहने की उनकी मानसिकता नहीं लगती है. शरद पवार ने कहा कि उद्धव ठाकरे उनके घर पर आए थे और उन्होंने उनसे मुलाकात की. मुलाकात में लगा कि वो अब सरकार के साथ नहीं रहना चाहते हैं.

    वहीं दूसरी तरफ पवार के इस दांव पर शिवसेना ने ये कहते हुए बात करने से मना कर दिया कि ये गलत खबर है और शरद पवार से उद्धव ठाकरे नहीं मिले. इस पर बीजेपी को शरद पवार के खुलासे के बाद बैठे बिठाए शिवसेना को घेरने की मुद्दा मिल गया. बीजेपी नेता माधव भंडारी ने कहा कि शिवसेना की हताशा है. पहले कहा जाता था कि जिसको मिलना है मातोश्री मिलो अब खुद साहब को मिलने जाना पड़ रहा है.पवार ने ये खुलासा जानबूझकर किया है क्योंकि अब तक शिवसेना प्रमुख खुलकर एनसीपी को गरियाते रहे हैं. लेकिन पवार ने गेम का खुलासा कर उद्धव का गेम फंसा दिया. अब शिवसेना चाहे भी तो पवार के साथ नहीं जा सकती. इतना ही नहीं सीएम ने इंटरव्यू में ये भी खुलासा किया कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है और पवार तो कभी बीजेपी के साथ भी रहे हैं. जाहिर है महाराष्ट्र की राजनीति में अब नये समीकरण बनेंगे.

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  • सात दिवसीय यात्रा पर भारत आए बेल्जियम के राजा-रानी

    सात दिवसीय यात्रा पर भारत आए बेल्जियम के राजा-रानी

     

     

    बेल्जियम के राजा फिलिप और रानी मैटहिलडे भारत की सात दिवसीय यात्रा पर रविवार रात यहां पहुंचे. इस शाही दंपति की भारत यात्रा का मकसद दोनों देशों के बीच समग्र सहयोग बढ़ाना है, जिसमें व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करने पर खासा जोर रहेगा.

    साल 2013 में शासन की कमान संभालने के बाद राजा फिलिप की यह भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है. बेल्जियन दूतावास के एक अधिकारी के मुताबिक, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हवाई अड्डे पर दंपति का स्वागत किया.

  • नोटबंदी के विरोध में ममता ने ट्विटर अकाउंट की तस्वीर काली की

    नोटबंदी के विरोध में ममता ने ट्विटर अकाउंट की तस्वीर काली की

     

     

    नोटबंदी के विरोध में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्विटर अकाउंट की अपनी डिस्प्ले तस्वीर काली कर दी है. आठ नवंबर को नोटबंदी की पहली वर्षगांठ है.

    उन्होंने कहा है कि नोटबंदी किसी तबाही से कम नहीं थी. हम आठ नवंबर के दिन को काला दिवस के रूप में मनाएंगे. इसका विरोध करेंगे, इसने इकोनॉमी को तबाह कर दिया. उन्होंने दूसरों से भी ऐसा ही करने को कहा है.

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    ममता ने नोटबंदी का अपने तरीके से किया विरोध

    तृणमूल निकालेगी विरोध रैलियांतृणमूल कांग्रेस ने अपने कार्यकर्ताओं से नोटबंदी और जीएसटी के विरोध में विरोध रैलियां आयोजित करने को कहा है, उसका कहना है कि इसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी हो रही है.
    जीएसटी यानि ग्रेट सेल्फिस टैक्स
    ममता ने एक दिन पहले अपने ट्विटर अकाउंट पर जीएसटी को ग्रेट सेल्फिस टैक्स भी बताते हुए कहा था, इसकी वजह से लोगों की नौकरियां जा रही हैं, बिजनेस बर्बाद हो रहा है और इकोनॉमी को धक्का पहुंचा है. केंद्र सरकार जीएसटी से उपजी समस्याओं से निपटने में नाकाम रही है.

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    ममता ने लोगों से नोटबंदी का विरोध करने के लिए कहा है

    ममता नोटबंदी की मुखर आलोचक
    पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर की आधी रात से नोटबंदी को लागू करने की घोषणा की थी, तब से ममता इसकी मुखर आलोचक रही हैं.मोदी ने जब आठ नवंबर से 1000 और 500 रुपए के पुराने नोटों पर रोक लगाकर काला धन पर सख्ती की बात की थी, तब ममता ने इसके खिलाफ राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा था.
    जीएसटी का भी विरोध
    नोटबंदी के बाद मोदी सरकार ने अगले बड़े आर्थिक सुधारों के तौर पर गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) को लागू किया, इसका भी ममता ने विरोध किया, जब एक जुलाई को मोदी सरकार इसे लागू करने के लिए आधी रात को संसद का विशेष सत्र बुलाया तो ममता की पार्टी ने इसका बहिष्कार किया था.
    कांग्रेस का रुख
    कांग्रेस और अन्य पार्टियों का भी कहना है कि नोटबंदी और जीएसटी के चलते देश के आर्थिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ा है. जून में खत्म हुई तिमाही में विकास दर तीन साल में सबसे कम 5.7 रही. जीएसटी को लेकर कांग्रेस का कहना है कि जुलाई से इसको लागू करने के बाद से देशभर में कन्फ्यूजन का माहौल बना हुआ है.
    मनमोहन सिंह ने कहा
    पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी एक दिन पहले कहा है कि मोदी को अब मान लेना चाहिए कि नोटबंदी लागू करके उन्होंने देश के साथ एक बड़ी गलती की थी.

  • दिल्ली से हवाई सफर करने वालों के लिए बुरी खबर, महंगा किराया-लेट फ्लाइट!

    दिल्ली से हवाई सफर करने वालों के लिए बुरी खबर, महंगा किराया-लेट फ्लाइट!

     

     

    इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) हवाई अड्डे पर एक हवाई पट्टी की रखरखाव के लिए अगले तीन दिन तक बंद किया जा रहा है. इससे दिल्ली आने या यहां से बाहर जाने वाले यात्रियों को खुद को ज्यादा किराये, कम उड़ान विकल्पों तथा उड़ानों में देरी के लिए तैयार रखना होगा.

    पिछले सप्ताह दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लि. (डायल) ने सूचित किया था कि रनवे 11-29 को रखरखाव के लिए 6 नवंबर की आधी रात से 10 नवंबर सुबह सात बजे तक बंद रखा जाएगा. इस हवाई पट्टी का बोझ दो अन्य पट्टियां 10-28 और 09-27 उठाएंगी.

    एक सूत्र ने बताया कि अगले तीन दिन तक हवाई अड्डा अपनी 70 प्रतिशत क्षमता पर काम करेगा. यहां से इन दिनों में प्रतिदिन 800 उड़ानों का परिचालन होगा. आमतौर पर हवाई अड्डे से रोजाना 1,100 उड़ानों का परिचालन होता है.

    यात्रा.कॉम के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) शरत ढल ने कहा कि दिल्ली से और दिल्ली को कम उड़ानों की वजह से यात्रियों के पास चयन का विकल्प कम होगा. इससे मांग बढ़ेगी और किरायों में भी बढ़ोतरी होगी. व्यस्त घंटों में उड़ानों में विलंब हो सकता है.विभिन्न ट्रैवल पोर्टलों को देखने के बाद पता चलता है कि इन तीन दिनों के लिए दिल्ली आने और दिल्ली से जाने वाली उड़ानों का किराया सामान्य से डेढ़ से दोगुना कर दिया गया है. उदाहरण के लिए दिल्ली से मुंबई की उड़ान का किराया सामान्य तौर पर 4,000 से 5,000 रुपये के बीच होता है. अब यह 7,300 से 8,400 रुपये के बीच है. वापसी उड़ान में भी ऐसा ही रुख देखने को मिल रहा है.

    इसी तरह दिल्ली से अहमदाबाद के लिए सस्ती उड़ानों की किराया दर इन तीन दिन के दौरान 7,400 से 7,700 रुपये होगी. वहीं दिल्ली से हैदराबाद की उड़ान का किराया 7,300 से 8,600 रुपये के बीच है. शुक्रवार से किरायों में कमी का रुख देखने को मिलेगा. उस दिन यह पट्टी फिर खुल जाएगी.

    विलंब और उड़ान रद्द होने की संभावना के मद्देनजर इंडिगो ने अपने यात्रियों को बिना कोई शुल्क लिए यात्रा में बदलाव की अनुमति दी है. एक एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि हवाई पट्टी के बंद होने की वजह से यात्रियों को इस बारे में ईमेल, कॉल और एसएमएस के जरिये पहले ही सूचित कर दिया गया है.

    जेट एयरवेज के सूत्र ने कहा कि उसने अपनी उड़ानों में बदलाव किया है. स्पाइसजेट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की.

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  • विधानसभा चुनाव 2017: वोट डालने के लिए FB करेगा मैसेज

    विधानसभा चुनाव 2017: वोट डालने के लिए FB करेगा मैसेज

     

     

    गुजरात और हिमाचल प्रदेश में होने जा रहे विधानसभा चुनावों से पहले सोशल मीडिया साइट फेसबुक ने दोनों राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के साथ तालमेल किया है. ताकि लोगों को आगामी चुनावों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा सके .

    एक प्रेस रिलीज में बताया गया कि इस तालमेल के तहत फेसबुक लोगों के न्यूज फीड में मतदान के तीनों दिन – नौ नवंबर, नौ दिसंबर और 14 दिसंबर – संदेश भेजेगा ताकि हिमाचल और गुजरात के लोगों को चुनावों में मदद मिले और इसमें भागीदारी के लिए प्रोत्साहित हों .

    फेसबुक इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी नितिन सलूजा ने बताया कि इस तालमेल से हिमाचल और गुजरात के लोगों को राज्य के चुनावों में भागीदारी में मदद मिलेगी.

  • VIDEO: रिक्शेवाला ऐसे बना बॉडी-बिल्डर

    VIDEO: रिक्शेवाला ऐसे बना बॉडी-बिल्डर

     

     

    शराब, गांजा और सिगरेट पीकर मस्‍त रहने वाला रिक्‍शा-चालक आज बॉडी-बिल्‍डर है. सड़कों पर रिक्‍शा खींचकर शाम को फुटपाथ पर रात गुजारने वाला शख्‍स न केवल दो बार मिस्‍टर दिल्‍ली में टॉप 5 में रह चुका है बल्कि मिस्‍टर नॉर्थ इं‍डिया में भी अपनी बॉडी से लोगों को अचंभित कर चुका है.

    कितना दिलचस्‍प है न? बेशक. लेकिन इससे भी ज्‍यादा दिलचस्‍प है रिक्‍शेवाले आनंद सिंह के बॉडी-बिल्‍डर आनंद सिंह बनने की कहानी. दिल्‍ली में रहने वाले आनंद सिंह आज एक बेहतर जिंदगी जी रहे हैं.

    अाइए सुनिए रिक्‍शेवाले से बॉडी-बिल्‍डर बने आनंद सिंह की कहानी, उन्‍हीं की जुबानी….

    2006 की बात है. किसी बात पर झगड़ा हुआ और मैं गुस्‍से में घर छोड़कर भाग गया. साउथ एक्‍सटेंशन पहुंचा. कोई रहने की जगह नहीं थी तो सड़क को ही सहारा बना लिया. रात हो गई थी वहां सिर्फ रिक्‍शेवाले थे. मैंने रिक्‍शेवालों से पूछा कि कितना कमा लेते हो. उन्‍होंने कहा कि गुजर हो जाती है. रिक्‍शे का किराया भी ज्‍यादा नहीं है. सिर्फ 30 रुपये देना होगा.

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    2006 में घर में हुए झगड़े के बाद आनंद सिंह ने घर छोड़ दिया और फुटपाथ पर रहकर रिक्‍शा चलाया. इस दौरान वे बुरी लतों में भी पड़ गए.

    मैं राजी हो गया. किराए पर रिक्‍शा ले लिया और चलाने लगा. रिक्‍शेवालों के साथ में ही सड़क पर रहता था. वे लोग शराब-बीड़ी पीते थे. कुछ चरस गांजा भी लेते थे. मैंने भी पीना शुरू कर दिया. सिगरेट, शराब, चरस और गांजे में पूरी दिहाड़ी उड़ा देता. महीनों यही चलता रहा.

    दिन में कई सौ कमा लेता था. सब नशे में खर्च हो जाते. न घरवालों की खबर ली, न अपनी उनको दी. फुटपाथ ही घर था. लेकिन इन सबके बावजूद एक शौक था बॉडी बनाने का. उस दौरान जब भी मैं लोगों को जिम जाते देखता था तो मुझे भी मन करता. अब पैसे भी आ चुके थे तो वहीं एक जिम में पसीना बहाने लगा. लेकिन आदतें खराब थीं तो जिम करने के बाद नशा करने पर सब बराबर हो जाता था. जिंदगी ऐसे ही चल रही थी.

    रिक्‍शा चलाने के साथ ही मैंने बर्तन भी धोए, वेटर का भी काम किया, कपड़े भी बेचे, कुछ साल मजदूरी और ढाबे में काम भी किया. लेकिन 2013 में अचानक एक दिन सुमित सर मिले. इन्‍होंने मुझे जिम करते देखा था. फिर मेरे बारे में पता किया. मुझसे आकर मिले और बोले कि बॉडी बनाओगे? सरकारी नौकरी करोगे? बॉडी-बिल्‍डर बनोगे. सर की बॉडी देखकर मैं एक्‍साइटेड भी हुआ. लेकिन डर भी लगा. पर मैंने हां बोल दी.

    सुमित कुमार सर ने सबसे पहले तो मेरी शराब छुड़ाई, सिगरेट छुड़ाई और सब नशे की लतें छुड़ाईं. इसके बाद उन्‍होंने मुझे जिम में ट्रेनिंग दी. मुझे ये अच्‍छा भी लगता था, लेकिन शराब की तलब भी लगती थी. एक दो बार बीच में शराब पी आया, तो सुमित सर ने पीटा भी था. फिर समझाया.

    मैंने नशे छोड़ने का फैसला किया और कुछ अच्‍छा करने की ठान ली. जिम, कसरत और मेहनत को लेकर पहले से ही जुनून था. धीरे-धीरे शरीर बनने लगा तो मैं सकारात्‍मक होता गया. मेरे भीतर बहुत परिवर्तन आ गया और मैं एक अच्‍छा इंसान भी बनता गया.

    रिक्‍शेवाले आनंद से बना हैंडसम आनंद
    छह महीने तक खुद को नशे से दूर रखते हुए मैंने ईमानदारी से मेहनत की और रिक्‍शेवाले आनंद सिंह से एक जेंटलमेन और हैंडसम आनंद में बदल गया. नशे से दूर हुआ तो घरवालों की याद आई. घरवालों से मिलने पहुंचा तो पहचान ही नहीं पाए. रिश्‍तेदार भी नहीं पहचान पाए.

    मैंने घरवालों को बताया कि घर से भागने के बाद मैं बिगड़ा था, लेकिन अब में रिक्‍शेवाला और मजदूरी करने वाला आनंद नहीं रहा. मुझे बदला हुआ देखकर सभी बहुत खुश थे.

    किताबों को देखकर आते थे चक्‍कर, आज कर रहा हूं पढ़ाई

    मैं पढ़ा-लिखा नहीं था. बस हिंदी पढ़ लेता था. जब सुमित सर मिले और बॉडी बनाई तो इन्‍होंने मुझसे कहा कि बॉडी बनाने से कुछ नहीं होता, पढ़ाई-लिखाई भी जरूरी है. इसके बाद किताबों से दोस्‍ती की. लेकिन पढ़ते ही नींद आती थी. कुछ समझ नहीं आता था. धीरे-धीरे पढ़ना अच्‍छा लगने लगा. मैंने 10वीं अौर 12वीं ओपन स्‍कूल से कर लीं. आज मैं पढ़ता हूं और ग्रेजुएशन करने जा रहा हूं.

    मुझे आज लगता है कि पढ़ाई बेहद जरूरी है. बिना पढ़े न शरीर भी काम नहीं आता. आज जब भी मैं किसी जिम में ट्रेनिंग देता हूं तो वह पढ़ाई ही काम आती है. कई बार लोग कम पढ़े-लिखे लोगों से जिम में ट्रेनिंग लेना भी पसंद नहीं करते.

    बेहतर जिंदगी जी रहा हूं, मां-पिता भी खुश

    जब मैं बॉडी-बिल्डिंग करने के बाद घर पहुंचा तो सभी हैरान थे. रिश्‍तेदार तो पहचान ही नहीं पाए. मां हैरान थी. मुझमें इस बदलाव को देखकर आज सब खुश हैं. अब मुझे लगता है कि मैं एक बेहतर इंसान बनने जा रहा हूं.

    सड़क से उठाकर 20 युवकों को बॉडी-बिल्‍डर बना चुके हैं आनंद के गुरु सुमित
    रिक्‍शा चलाने वाले आनंद को बॉडी-बिल्‍डर बनाने वाले सुमित कुमार आनंद जैसे 20 युवाओं को बॉडी‍-बिल्‍डर और जिम ट्रेनर बना चुके हैं. सड़क से उठाए गए इन 20 लोगों में भिखारी, ढाबे पर बर्तन धोने वाला, रिक्‍शेवाला शामिल थे. सुमित खुद भी दो बार मिस्‍टर दिल्‍ली और एक बार मिस्‍टर नॉर्थ इंडिया रह चुके हैं. सुमित का कहना है कि वे आगे भी ऐसे ही युवाओं को आगे लाते रहेंगे.

  • IBN लोकमत अब हुआ News18 लोकमत

    IBN लोकमत अब हुआ News18 लोकमत

     

     

    देश, दुनिया की हर छोटी बड़ी खबरें मराठी में आप तक सबसे पहले पहुंचाने वाला IBN Lokmat मीडिया में आठ साल पूरे कर चुका है. अपने इतने सालों के शानदार प्रदर्शन के बाद आपका IBN लोकमत अब  News18 लोकमत हो रहा है.

    IBN Lokmat की डिजिटल मीडिया पर काफी अच्छी पकड़ रही है.  वेबसाइट ने इन सालों में कई मुकाम हासिल किए और कभी भी अपने पाठक को निराश नहीं किया. ग्रामीण महाराष्ट्र से खबरें हों या देश-विदेश की ताज़ा खबरें. IBN Lokmat वेबसाइट ने वास्तविक समय की गति के साथ सही ढंग से रिपोर्ट किया है और यह अभी भी जारी है.

    IBN Lokmat के सोशल मीडिया प्लेटफार्मों ने तेज प्रतिस्पर्धा के बावजूद, अपनी खुद की एक पहचान बनाई है. वेबसाइट के फेसबुक पेज पर 21 लाख, ट्विटर पर एक लाख से अधिक और YouTube पर 6 करोड़ सो भी ज्यादा फॉलोवर हैं.

    वॉट्सऐप बुलेटिन के जरिए हर मिनट की खबरों को आप तक पहुंचाने की चैनल की पूरी कोशिश रहती है. यह IBN Lokmat लोकप्रियता, सटीक और तेज खबरें ही हैं जिनके चलते मराठा मार्च के दिन यूट्यूब पर हमारी रैंकिंग नम्बर वन रही.बप्पा मोरया रे (गणेश त्योहार के लिए तैयार एक पृष्ठ), नवरात्रि और दीपोत्सव (सभी दीवाली संबंधी समाचारों के लिए समर्पित एक पृष्ठ) जैसी हमारी विशेष पहल के रूप में हमारी वेबसाइट और फेसबुक पेज को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली.

    क्षेत्रीय मीडिया अंतरिक्ष में समाचार कवरेज की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, IBN Lokmat की वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम किया है. ताकि सही तरीके से रिपोर्ट कर सकें.

    वेबसाइट रिपोर्टिंग शैली गैर-पक्षपाती और निष्पक्ष है. अब एक नए कलेवर में वेबसाइट की मूल आत्मा को बनाए रखने और डिजिटल मीडिया की दुनिया में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए News18 लोकमत तैयार है.

  • CM ममता बनर्जी ने कमल हासन को दी जन्मदिन की बधाई

    CM ममता बनर्जी ने कमल हासन को दी जन्मदिन की बधाई

     

     

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को तमिल फिल्म अभिनेता कमल हासन को जन्मदिन की बधाई दी. वह कुछ दिन पहले ही राजनीति में आने की पुष्टि कर चुके हैं.

    ममता ने ट्वीट किया, कमल हासन को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई.

    उल्लेखनीय है कि 10 नवंबर को कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के 23वें संस्करण के उद्धघाटन समारोह में कमल अतिथि के रूप में उपस्थित होंगे.

    राजनीति में करियर के बारे में कमल हासन ने मंगलवार को कहा कि इस दिशा में पहले कदम के तहत मंगलवार को एक मोबाइल सॉफ्टवेयर एप लॉन्च होगा, क्योंकि इससे वह प्रशंसकों के संपर्क में रह सकेंगे.

    कमल राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर राजनीतिक हालात पर टिप्पणियों के साथ सक्रिय रहे हैं. वह अक्सर सत्ता पक्ष की आलोचना करते रहे हैं.