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  • 2022 तक भ्रष्टाचार और गरीबी मुक्त हो जाएगा भारत, बशर्ते….

    2022 तक भ्रष्टाचार और गरीबी मुक्त हो जाएगा भारत, बशर्ते….

     

     

    सरकार को सलाह देने वाली संस्था नीति आयोग ने साल 2022 तक गरीबी, गंदगी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, जातिवाद और सांप्रदायिकता मुक्त नए भारत की परिकल्पना की है. नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने गवर्नर्स कॉन्फ्रेंस में न्यू इंडिया @ 2022 डॉक्युमेंट पेश किया.

    इसके मुताबिक अगर भारत 8 प्रतिशत की वृद्धि दर से आगे बढ़ना जारी रखता है तो 2047 तक विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में होगा. इसके साथ ही हम साल 2022 तक ‘कुपोषण मुक्त भारत’ का सपना भी पूरा कर लेंगे.

    दस्तावेज में दिखाया गया है कि सरकार 2019 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 500 से अधिक आबादी वाले (विशेष इलाकों में 250 से अधिक की आबादी वाले) गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ सकती है. साथ ही, 2022 तक भारत में 20 विश्वस्तरीय उच्च शिक्षण संस्थानों की परिकल्पना की गई है.

    इसमें डॉक्युमेंट कहा गया है कि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना (पीएमएजीवाई) के तहत चयनित सभी गांव 2022 तक आदर्श गांव का दर्जा प्राप्त कर सकते हैं, साथ ही यह भी कहा गया है कि हमें 2022 तक भारत को गरीबी मुक्त बनाने का संकल्प लेना चाहिए.

  • क्या शहीद BSF कमांडर दीपक मंडल हुए साजिश का शिकार !

    क्या शहीद BSF कमांडर दीपक मंडल हुए साजिश का शिकार !

     

     

    यह कुछ ऐसे सवाल हैं जिन पर न्यूज़ 18 इंडिया के टीम की रिपोर्ट का ताना बाना बुना गया है…न्यूज़ 18  इंडिया यह अपने आप नहीं कह रहा है, बल्कि शहीद दीपक मंडल के घरवालों के आरोप और सबसे जरूरी त्रिपुरा पुलिस की इस मामले में खुफिया जांच रिपोर्ट के आधार पर कह रहा है.

    क्या है यह पूरा मामला ये हम आपको आगे बताएंगे लेकिन सबसे पहले हम त्रिपुरा पुलिस कि वह खुफिया जांच रिपोर्ट के बारे में आपको बताते हैं, जो शहीद दीपक मंडल की हत्या के मामले में ये शक जाहिर करती है. त्रिपुरा पुलिस की रिपोर्ट यह कहती है की हत्या की नियत से तस्कर आए थे उन्होंने भारत बंग्लादेश सीमा पर त्रिपुरा में ड्यूटी के दौरान दीपक मंडल पर गाड़ी चढ़ाने की कोशिश की. पहली कोशिश में वह सफल नहीं हुए और दूसरी कोशिश में वो अपनी इस हत्या की कोशिश में कामयाब हुए.

    यानी भारत बांग्लादेश सीमा पर मौजूद तस्करों ने एक सोची समझी साजिश के तहत एक जांबाज अधिकारी को अपना निशाना बनाया था.

    क्या था पूरा मामलादरअसल, भारत-बांग्लादेश सीमा पर त्रिपुरा में बीएसएफ की 145 वीं बटालियन में तैनात दीपक मंडल पिछले 5 सालों से उस इलाकों में लगातार तस्करों से लोहा ले रहे थे. 16 अक्टूबर को रात में ड्यूटी के दौरान उन्होंने एक बार फिर तस्करों से लोहा लिया लेकिन इस बार उनकी कोशिश अंतिम कोशिश साबित हुई, तस्करों को रोकने की कोशिश में दीपक मंडल बुरी तरीके से जख्मी हो गए और 4 दिन बाद यानी 20 अक्टूबर को जिंदगी और मौत से जंग लड़ने के बाद वह शहीद हो गए.

    बीएसएफ यूनिट कमांडर की शहादत से ये सवाल उठता है कि भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्कर क्या इतने मजबूत हो गए हैं कि वो लगातार वहां पर तैनात बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल जवानों पर हमला करते रहते हैं. और कई वजहों से चाह कर भी हमारे देश के जवान उनके हमलों उचित जवाब नहीं दे पाते. नतीजा यह होता है कि बीएसएफ को भारी नुकसान पहुंचता है और उनके जवान या तो घायल हो जाते हैं, या फिर शहीद होते हैं. रही सही कसर बीएसएफ यानी जिस फोर्स में वह तैनात हैं वो पूरा कर देती है क्योंकि तस्करों के खिलाफ ऑपरेशन को वो नियमित मुठभेड़ मानती है जबकि शहीद के परिजन और ऐसी रिपोर्ट इस बात की ओर इशारा करते हैं कि तस्कर साजिशन फोर्स के जवानों और अधिकारियों को अपना निशाना बनाते हैं.

    बीएसएफ का कहना है दीपक की शहादत तस्करों के साथ मुठभेड़ की वजह से हुई, इस बाबत बीएसएफ ने ट्वीट भी किया था 20 अक्टूबर को जब दीपक मंडल शहीद हो गए थे. बीएसएफ के रुख से और सरसरी तौर पर इस घटना को देखकर दीपक मंडल की शहादत एक मुठभेड़ ही लग रही थी लेकिन न्यूज 18 इंडिया दीपक की शहादत के बाद बंगाल के नादिया जिले के उस गांव में गया जहां उनके परिजन हैं.

    यहां भी कहानी ने कुछ दूसरा रुख लिया. उनके परिजनों का कहना है कि दीपक की शहादत महज एक मुठभेड़ नहीं है. बल्कि उन्हें तस्करों मे सोची समझी साजिश के तहत निशाना बनाया, दीपक के भाई दिलीप मंडल कहते हैं कि जैसे निशान दीपक के शरीर पर निशाना थे उससे तो उनके मौत की वजह की दलील पर यकीन कर पाना मुश्किल है फिलहाल. बात करते-करते शहीद के परिजनों की आंखों में आंसू आ जाते हैं, और वजहें भी हैं इसके पीछे.

    अब नजर डालते हैं शहीद दीपक मंडल के इस सर्विस रिकॉर्ड पर. पिछले 6 साल से इस दुर्दांत इलाके में दीपक मंडल तैनात थे और कई बार तस्करों से उन्होने लोहा लिया, तस्करों को धूल चटाई और काफी हद तक इस इलाके में उन पर काबू पाया. मंडल के परिजन यह आशंका जता रहे हैं क्यों मंडल की ही मौत हुई जबकि उनके साथ उनकी टीम के बाकी के सदस्य थे. अगर उनकी मौत में कुछ गड़बड़ है तो कसूरवारों को सजा मिले. शहीद दीपक की पत्नी सुदेशना यह कहती है कि जो भी कसूरवार है उसे जल्द पकड़ा जाए और सजा मिले.

    क्या है परिवारवालों को शक
    उनके घरवाले कहते हैं कि दीपक के शरीर पर चार निशान थे दाहिनी आंख के ऊपर, चिन के नीचे, कोहनी पर और हाथ पर इसके अलावा उनके पैर पर भी चोट के निशान थे. घर वालों का यह सवाल है कि अगर बीएसएफ का जवान जूता पहनता है तो उसके पैर में कैसे चोट आती है जब वह गाड़ी से कुचला जाता है क्योंकि गाड़ी के कुचले जाने से इतनी हल्की चोटें नहीं आती. परिजनों ने ये बातें स्थानीय सांसद को भी इस चिट्ठी के जरिए बताई हैं जो कि बीएसएफ पर तो सवाल उठा ही रहे हैं साथ ही आनेवाले दिनों में इसे प्रदेश की मुख्यमंत्री, गृह मंत्रालय और संसद में इसे उठाएंगे. तपश मोंडल जो कि नादिया से सांसद हैं, वो कहते हैं कि बीएसएफ की कहीं न कहीं गलती है. मुझे लग रहा है कि कुछ छुपाया जा रहा है.

    बीएसएफ खामोश है
    बीएसएफ यानी सीमा सुरक्षा बल जिसका ये अधिकारी था हमने उस फोर्स के अधिकारियों से इन आरोपों और इस पूरे प्रकरण के बारे में पूछा तो उनकी ओर से हमें कोई जवाब नहीं मिला, इस बारे में हमने बीएसएफ को ईमेल किया लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला. अब सवाल ये उठता है कि दीपक मंडल की शहादत क्या तस्करों के एक बड़े सिंडिकेट का तो हिस्सा नहीं है. क्यों खामोश है बीएसएफ, क्यों लगातार उसी इलाके में अधिकारियों की जान जाती रहती है. ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब सबको चाहिए आनेवाले दिनों में. हम आपको ये भी बता दें कि शहीद दीपक मंडल की शहादत का ये अकेला मामला नहीं है हम आगे आपको बताएंगे कि इसी इलाके में तैनात रहे और शहीद हो चुके कुछ और जांबाजों की दास्तान.

    और भी शहीद बीएसएफ जांबाजों के परिजनों का यही है आरोप
    अगर शहीद दीपक मंडल इस जगह कुछ दिनों पहले तैनात थे तो करीब 4 साल पहले यानी 2014 में इसी जगह भारत बंग्लादेश सीमा पर त्रिपुरा में से कुछ ही दूरी पर तैनात थे बीएसएफ के डिप्टी कमांडेंट फूलचंद. उनके परिजनों के मुताबिक 25 अक्टूबर 2014 को ड्यूटी के दौरान उनकी तस्करों से मुठभेड़ हुई, जिसके बाद वो बुरी तरीके से घायल हो गए. एक महीने तक अस्पताल में जिन्दगी और मौत से जंग लड़ने के बाद उन्होने दम तोड़ दिया. उनके परिजनों का आरोप है कि भारत बंग्लादेश सीमा पर मौजूद तस्करों ने उनकी हत्या की है. इस बाबत उन्होने बीएसएफ और गृह मंत्रालय में शिकायत भी की है लेकिन अभी तक उनकी मांगों को नहीं सुना गया.

    BSF के जांबाजों के लिए नासूर बन चुके भारत-बांग्लादेश सीमा पर मौजूद तस्कर बेहद खतरनाक है, कम से कम आंकड़े तो इस बात का गवाह है किस तैयारी से वह आते हैं कैसे वह अपने काम को अंजाम देते हैं और क्यों सरकारी नीतियों की वजह से हमारे जवान उन पर उन्हीं के अंदाज में कार्यवाही नहीं कर पाते हैं या यूं कहें कि पुख्ता कार्यवाही नहीं कर पाते.

    क्या कहते हैं आंकड़े
    इस साल 66 बार तस्करों ने BSF की फोर्स पर भारत-बांग्लादेश सीमा में हमला किया है, जिसमें 88 जवान घायल हुए हैं जबकि दो जवानों की मौत हुई है. यह केवल इस साल का आंकड़ा नहीं है पिछले 4 सालों के अगर बात करें तो यही कहानी नजर आती है. 2013 में जहां 112 जवान घायल हुए थे तस्करों के हमलों में और 3 जवानों की मौत हुई थी, तो 2014 में 88 जवान घायल हुए थे जबकि एक की मौत हुई थी, वहीं 2015 में 102 जवान घायल हुए थे जबकि दो जवानों की मौत हुई थी.

    हालांकि 2016 में एक भी जवान की मौत नहीं हुई थी लेकिन इस साल भी तस्करों के हमले जारी रहे और 109 जवान घायल हुए, इस फोर्स से जुड़े पूर्व अधिकारी भी मानते हैं कि बहुत कुछ हो वहां पर ऐसे हालात होते हैं कि चाह कर भी हमारे देश के जवान तस्करों पर उन्हीं के अंदाज में उनको जवाब नहीं दे पाते.

    जे पी सिन्हा, पूर्व बीएसएफ आईजी यह मांगते हैं कि उन जगहों पर देश के जवान उन्हीं तस्करों के अंदाज में जवाब नहीं दे पाते. तस्कर तस्करी का सामान अवैध तरीके से भारत की सीमा से बंगलादेश में ले जाते हैं और बांग्लादेश की सीमा में भारत से लाते हैं. पूरी तैयारी इनकी होती है, ये अपने साथ डंडे, ईंट पत्थर और घातक हथियार लेकर आते हैं. सरकारी नीतियों की वजह से फोर्स के जवान इन पर कड़ा प्रहार नहीं कर पाते हैं जबकि यह मौका पाते ही कड़े से कड़ा प्रहार करने से नहीं चूकते. इन जांबाजों की शहादत से ये उम्मीद की जानी चाहिए कि हालात में कुछ सुधार हो.

  • तीन दशक में अपर मिडिल क्लास वालों का देश होगा भारतः विश्व बैंक

    तीन दशक में अपर मिडिल क्लास वालों का देश होगा भारतः विश्व बैंक

     

     

    देश में प्रति व्यक्ति आय में हो रही वृद्धि की तारीफ करते हुए विश्व बैंक की CEO क्रिस्टलीना जॉर्जिया ने शनिवार को कहा कि उन्हें इसमें कोई शक नहीं दिख रहा है कि भारत 2047 तक उच्च मध्यम आय वाला देश होगा. उस वक्त वह अपनी आजादी की सौंवीं वर्षगांठ मना रहा होगा.

    प्रवासी भारतीय केंद्र में इंडियाज बिजनेस रिफॉर्म्स सम्मेलन में जॉर्जिया ने कहा कि पिछले तीन दशकों से भारत की प्रति व्यक्ति आय चार गुना बढ़ गई है. इसमें कोई शक नहीं है कि 2047 में जब भारत अपनी स्वतंत्रता का शताब्दी समारोह मना रहा होगा, उस समय वह एक उच्च-मध्य आय वाला देश होगा.

    जॉर्जिया ने भारत में व्यापार करने की आसानी के मामले में 30 पायदान की छलांग की भी तारीफ की.  उन्होंने कहा कि हम यहां एक बहुत प्रभावशाली उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए हैं. पिछले 15 सालों में व्यापार करने में आसानी के मामले में अचानक महज एक साल में 30 पायदान की छलांग बहुत दुर्लभ है. जैसे कि क्रिकेट में शतक लगाना मुश्किल है.

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के लिए उनकी प्रशंसा की, जिसके कारण व्यापार करने की आसानी में भारत की रैंकिंग बढ़ी है. विश्व बैंक की CEO ने कहा, “आज गुरु नानक की जयंती भी है, जो मुझे उनके शब्दों की याद दिलाता है. जो बीज बोया जाता है, उसी का पौधा उगता है.”यह भी पढ़ें-
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  • लोकायुक्त एजेंसी है सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में

    लोकायुक्त एजेंसी है सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में

     

    लखनऊ। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि लोकायुक्त एजेंसी ‘सूचना के अधिकार अधिनियम 2005’ के दायरे में आती है। गौरतलब है कि पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी की सरकार ने तीन अगस्त 2012 को एक अधिसूचना जारी कर लोकायुक्त एजेंसी को सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर कर दिया था। न्यायालय ने सरकार के इस कृत्य को अवैध एवं अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर जारी की गयी अधिसूचना बताते हुए गुरूवार को इसे रद्द कर दिया और प्रदेश के कथित भ्रष्ट तंत्र पर जोरदार हमला किया।

    न्यायालय ने कहा कि समय आ गया है कि सरकार गलत तरीके से कमायी गयी सम्पत्ति को जब्त करने का प्रावधान बनाकर उसे सख्ती से लागू करे। यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति वीरेंद्र कुमार द्वितीय की खंडपीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए पारित किया। याची ने तीन अगस्त 2012 की उक्त अधिसूचना को चुनौती देते हुए कहा था कि राज्य सरकार का आदेश अवैध एवं मनमाना है और इसे रद्द किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आरटीआई अधिनियम की धारा 24 के तहत लोकायुक्त एजेंसी खुफिया या सुरक्षा संगठन की परिभाषा के दायरे में नहीं आती, लिहाजा सरकार उसे आरटीआई के दायरे से बाहर नहीं कर सकती है।

    उन्होंने कहा कि लोकायुक्त के समक्ष नौकरशाह एवं बड़े बड़े अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले भी जांच के लिए आते है और जांच की प्रगति या अन्य कार्रवाई की सूचना अगर आम जनता को मिले तो हर्ज क्या है? दूसरी ओर सरकारी वकीलों ने याचिका का पुरजोर विरोध करते हुए दलील दी कि सरकार की अधिसूचना उचित एवं कानूनसम्मत है। अदालत ने सरकारी वकीलों की दलील नकारते हुए कहा कि अधिसूचना में लोकायुक्त एजेंसी को आरटीआई के दायरे से बाहर करने के पक्ष में कोई कारण नहीं दिया गया है जो समझ से परे है। अदालत ने कहा कि आरटीआई अधिनियम की धारा 24 के तहत लोकायुक्त एजेंसी को खुफिया या सुरक्षा संस्थान मानने से इनकार किया गया है ताकि उसे आरटीआई के दायरे से बाहर रखा जा सके।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब कोई प्रावधान जनता के हित के लिए बनाया गया हो तो उसे केवल इसलिए दरकिनार नहीं किया जा सकता कि ऐसा करने का सरकार को हक है। उक्त अधिसूचना केवल संविधान प्रदत्त मूलभूत अधिकारों का हनन है। अदालत इस बात को संज्ञान में ले सकती है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में भ्रष्टाचार के मामले सामने आये हैं, लेकिन ऐसा विरले ही देखा गया है कि उसकी प्रभावकारी जांच हुई हो या मुकदमा चलाया गया हो।

  • VIDEO: बेगूसराय भगदड़ में 4 लोगों की मौत, गंगा स्नान करने पहुंचे थे 10 लाख लोग

    VIDEO: बेगूसराय भगदड़ में 4 लोगों की मौत, गंगा स्नान करने पहुंचे थे 10 लाख लोग

     

     

    बिहार के बेगूसराय में सिमरिया में भगदड़ मचने से चार लोगों की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक़ कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ गंगा स्नान के लिए उमड़ी थी. इसी दौरान अफ़वाह फैलने से भीड़ में भगदड़ मच गई. और लोग एक दूसरे को कुचलकर भागने लगे. पुलिस ने इस भगदड़ में चार लोगों की मौत की पुष्टि की है.

    दरअसल सिमरिया में आज कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर भारी भीड़ गंगा स्नान के लिए उमड़ गई. गंगा स्नान करने लगभग 10 लाख लोग पहुंचे थे. इसी दौरान भीड़ में किसी बात को लेकर अफवाह फैली और भगदड़ मच गई. प्रशासनिक स्तर पर भी भीड़ को देखते हुए कोई खास इंतजाम नहीं थे. इसी का नतीजा था कि भगदड़ में 4 लोगों ने अपनी जान गंवा दी. मृतकों में 2 बुजुर्ग महिलाएं भी शामिल हैं. चश्मदीदों के मुताबिक पुलिस की लचर व्यवस्था के चलते ही इतना बड़ा हादसा हो गया.

  • एनटीपीसी विस्फोट: घायलों को एम्स, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया

    एनटीपीसी विस्फोट: घायलों को एम्स, सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया

     

    नयी दिल्ली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली में एनटीपीसी संयंत्र में हुए विस्फोट में गंभीर रूप से झुलसे 15 लोगों को बेहतर इलाज के लिए यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से छह को एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है जबकि नौ लोगों को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। एम्स में भर्ती लोगों में से अधिकतर के चेहरे गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं। एम्स के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने कहा, ‘‘उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया है। उनमें से एक का चेहरा 60 प्रतिशत तक झुलस गया है, वहीं बाकी 25 से 50 प्रतिशत के बीच झुलसे हुए हैं।’’

    गंभीर रूप से झुलसे लोगों को एयर बस से दिल्ली लाया गया। इनकी गंभीर हालत को देखते हुए आईजीआई हवाईअड्डे से एम्स ट्र्रॉमा सेंटर तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था। सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ राजेंद्र शर्मा ने कहा, ‘‘पांच रोगियों की हालत बेहद नाजुक है। उनमें से तीन लोग करीब 80 फीसदी झुलसे हुए हैं, जबकि दो लोग 60 से 70 फीसदी झुलसे हुए हैं।’’ शर्मा ने कहा कि चार अन्य लोग 25 से 45 फीसदी झुलसे हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमने इंतजाम कर रखे हैं, अधिक रोगियों के आने की स्थिति में भी हम उन्हें रख सकते हैं।’’

    स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने गुरुवार रात अस्पताल का दौरा किया, ताकि विस्फोट से झुलसे लोगों को सर्वश्रेष्ठ इलाज एवं देखभाल सुनिश्चित हो सके। एनटीपीसी के ऊंचाहार संयंत्र में हुए विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर 32 तक पहुंच गई है। रायबरेली और लखनऊ के अस्पतालों में 85 से अधिक लोगों का इलाज चल रहा है। एनटीपीसी ने विस्फोट का कारण पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है।

  • किरण बेदी ने किया इस्तीफे की अफवाहों का खंडन

    किरण बेदी ने किया इस्तीफे की अफवाहों का खंडन

     

     

    पुडुचेरी की उपराज्यपाल किरण बेदी ने केन्द्र शासित राज्य में नए मुख्य सचिव की तैनाती से नाराज़ होकर अपने पद से इस्तीफा देने की अफवाहों का ज़ोरदार खंडन किया है.

    बेदी ने सोशल मीडिया और अन्य मीडिया रिपोर्टों में उनके इस्तीफे की आशंकाओं को गलत बताते हुए कहा कि वो पुडुचेरी में व्यवस्थागत सुधारों के अपने अभियान में शिद्दत से जुटी हैं. बेदी ने बताया कि वो शनिवार को आईआईटी दिल्ली में उन्हें सम्मानित करने के लिए आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने आयी हैं. उन्होंने पुडुचेरी में नए मुख्य सचिव की तैनाती का स्वागत करते हुए कहा कि ये बदलाव राज्य के हित में किया गया है.

    बेदी ने कहा, ‘हमें एक ऐसे मुख्य सचिव की ज़रूरत है जो तटस्थ हो, सभी की बात सुनता हो और अधिकारी तंत्र के बीच सामंजस्य बढ़ाने वाला हो. जो हालात को सुधारने में यकीन करता हो, बिगाड़ने में नहीं. मैं नए मुख्य सचिव की नियुक्ति का स्वागत करती हूं.’ उल्लेखनीय है कि केन्द्र सरकार ने दिल्ली सरकार में लोक निर्माण सचिव अश्विनी कुमार को पुडुचेरी का मुख्य सचिव नियुक्त किया है.

    कुछ मीडिया रिपोर्टों में कुमार की तैनाती से किरण बेदी के नाराज़ होने का हवाला देते हुए उनके इस्तीफे की आशंका जताई गयी थी. हालांकि बेदी ने शनिवार सुबह आईआईटी दिल्ली में उन्हें सम्मानित करने की तस्वीरें ट्वीट कर इस सम्मान के लिए खुशी का इज़हार भी किया था.

    देर शाम इस्तीफे की आशंकाओं का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि वो नहीं जानतीं कि ये अफवाहें कौन फैला रहा है. उन्होंने कहा, ‘मैं आईआईटी में सम्मान ग्रहण करने दिल्ली आयी हूं. कल वापस पुडुचेरी जा रही हूं. मैं पुडुचेरी में व्यवस्थागत खामियों को दूर करने का हर संभव प्रयास कर रही हूं और इस काम में हर तरह के सकारात्मक सहयोग का स्वागत है.’

  • चिदंबरम को देखने के लिए कांग्रेस ने आप को नीचे खींच लिया

    चिदंबरम को देखने के लिए कांग्रेस ने आप को नीचे खींच लिया

     

     

    कांग्रेस ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से दिल्ली सरकार के पीएम चिदंबरम को पेश करने के निर्णय पर केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई करने का आरोप लगाया था।

    श्री चिदंबरम, पूर्व केंद्रीय वित्त और गृह मंत्री, इस मामले में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील के बीच है, जिसमें सुनवाई गुरुवार को शुरू हुई। आम आदमी पार्टी (एएपी) और केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ रहे कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

    2012 में भ्रष्टाचार के चिदंबरम पर आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने ट्वीट किया था कि दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने ट्वीट किया था: “बधाई हो! । @PChidambaram_IN – आपके एक बार समीक्षक द्वारा आपको बहिष्कृत कर दिया गया है @अरविंद केजरीवाल और आप! आप ने अब माफी मांगी? (Sic) “।

    श्री माकन ने 25 नवंबर, 2014 को मुख्यमंत्रियों के मीडिया सलाहकार, नगन्द्र शर्मा द्वारा एक और ट्वीट का हवाला देते हुए कहा कि, जबकि दिल्ली कांग्रेस के नेताओं ने बीएसईएस बिजली संकट के खिलाफ कार्रवाई की थी, श्री चिदंबरम और पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया सुप्रीम कोर्ट में कंपनी की ओर से

    चिपचिपा स्थिति

    दिल्ली कांग्रेस प्रवक्ता शर्मिला मुखर्जी ने कहा कि श्री चिदंबरम ने दिल्ली सरकार की अदालत में प्रतिनिधित्व किया, “उन्होंने केजरीवाल और आप के पाखंड को उजागर किया”।

    “यह एएपी में प्रतिभा की कमी को दिखाता है कि उन्हें मदद के लिए कांग्रेस नेता के पास आना है। जब श्री चिदंबरम बीएसईएस या निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, एक पेशेवर के रूप में उनकी क्षमता में, आप ने इसे राजनीति में डाला, “सुश्री मुखर्जी ने कहा।

    हालांकि, दिल्ली कांग्रेस के नेताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए, यह पार्टी को एक चिपचिपा स्थिति में भी डाल दिया क्योंकि श्री चिदंबरम दिल्ली सरकार की रक्षा करेंगे, जिसने यह सुनिश्चित किया है कि केंद्र ने लेफ्टिनेंट-गवर्नर के जरिए इसे ठीक से कार्य करने की अनुमति नहीं दी है।

    हालांकि, कांग्रेस ने बार-बार कहा है कि केंद्र में भाजपा सरकार के बावजूद दिल्ली में उनकी सरकार काम करने में सक्षम थी।

    जब श्री चिदंबरम ने संभावित रूप से कांग्रेस के खिलाफ एक स्टैंड का बचाव करने के बारे में पूछा, तो सुश्री मुखर्जी ने कहा: “कोई विरोधाभास नहीं है यह एक पेशेवर मामला है। ”

    ‘अनुभवी वकील’

    दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि श्री चिदंबरम को शामिल करने का निर्णय कानूनी टीम ने अपने अनुभव को ध्यान में रखते हुए लिया था।

    वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व मंत्री होने के नाते, श्री चिदंबरम संविधान के अनुच्छेद 23 9एए में अच्छी तरह से वाकिफ हैं, जो दिल्ली के विशेष दर्जा देता है, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम और व्यापार नियमों का लेन-देन – चालू मामला , अधिकारी ने कहा।

    वास्तव में, अधिकारी ने कहा, श्री चिदंबरम जनवरी से दो मामलों में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

    आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने कहा कि यह दिल्ली सरकार का फैसला है और पार्टी के पास इसके बारे में कुछ नहीं कहना है।

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    बधाई! @ पीसीिदंबरम_आइ -आपके एक बार आलोचक @ अरविंद केजरीवाल और आप ने बंदी बना दी है! आप ने अब माफी मांगी? (Sic)

    अजय माकन

    दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष

    श्री चिदंबरम को शामिल करने का निर्णय कानूनी टीम द्वारा अपने अनुभव को ध्यान में रखते हुए लिया गया था … वह संविधान के अनुच्छेद 23 9 एए के साथ अच्छी तरह से वाकिफ हैं, जो दिल्ली के विशेष दर्जा देता है; राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली अधिनियम की सरकार; और व्यापार नियमों का लेनदेन – चल रहे मामले में सभी केंद्रीय

    दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारी

    यह दिल्ली सरकार का निर्णय था और आम आदमी पार्टी के पास इसके बारे में कुछ नहीं कहना है

    सौरभ भारद्वाज

    आप के प्रवक्ता

  • 8 नवंबर को ‘एंटी ब्लैक मनी डे’ मनाएगी बीजेपी, मंत्रियों पर होगी मुहिम की जिम्मेदारी

    8 नवंबर को ‘एंटी ब्लैक मनी डे’ मनाएगी बीजेपी, मंत्रियों पर होगी मुहिम की जिम्मेदारी

     

     

    8 नवंबर को नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर बीजेपी देशभर में एंटी ब्लैक मनी डे मनाने की तैयारी कर रही है. देश भर में काले धन के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए मोदी कैबिनेट के मंत्रियों की ड्यूटी लगाई गई है. जिनमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह हिमाचल में, सुषमा स्वराज भोपाल में, अरुण जेटली गुजरात में, तो नितिन गडकरी मुंबई में रहेंगे. इसके अलावा रविशंकर प्रसाद, जेपी नड्डा, उमा भारती और मेनका गांधी समेत लगभग सभी मंत्री देश के अलग – अलग शहरों में काला धन विरोधी दिवस के कार्यक्रम में शामिल होंगे.

    सुरेश प्रभु जयपुर, नरेन्द्र तोमर गुजरात, डॉ. हर्षवर्धन चंडीगढ में रहेंगे. बीजेपी ने इस कार्यक्रम को 8 नवंबर तक सीमित न रखकर इसे एक कैंपेन की तरह चलाने का फैसला लिया है.

    गृहमंत्री राजनाथ सिंह हिमाचल प्रदेश में रहेंगे तो विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भोपाल में. अरुण जेटली गुजरात में तो गडकरी मुंबई में लोगों से सीधा संवाद कायम करेंगे.

    रविशंकर प्रसाद दिल्ली, जेपी नड्डा हिमाचल, अनंत कुमार विजयवाडा, उमा भारती रोहतक में रहेंगी. मेनका गांधी अमृतसर, सुरेश प्रभु जयपुर, नरेन्द्र तोमर गुजरात, जुएल ओराम इंफाल, ङर्षवर्धन चंडीगढ में रहेंगे. जावडेकर बैंगलुरु, धर्मेन्द्र प्रधान रायपुर, अनंत गीते रायगढ, हरसिमरत कौर भटिंडा, पासवालन हाजीपुर में रहेंगे.ये कार्यक्रम सिर्फ 8 नवंबर तक सीमित नहीं रहेंगे. पार्टी ने इसे एक कैंपेन की तरह चलाने का फैसला लिया है. 8 नवंबर को बीजेपी देश भर में मना रही है एंटी ब्लैक मनी डे. 8 नवंबर को पूरा हो रहा है नोटबंदी का एक साल. जबकि कांग्रेस ने किया है 8 नवंबर को काला दिवस मनाने का ऐलान और देश भर में निकालेगी कैंडल लाईट मार्च. बीजेपी ने तमाम मंत्रियों की लगायी ड्यूटी. देश के कोने कोने मे जाकर करेंगे सरकार के काम काज का प्रसार किया जाएगा.

    जनता को ये बताया जाएगा कि कैसे मोदी कैबिनेट की पहली बैठक में 27 मई 2014 को काले धन पर एसआईटी का गठन किया गया. 14 फरवरी 2015 को कोयले का ऑनलाईन ऑक्शन शुरु किया गया. डीबीटी यानि डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर योजना शुरु की गयी ताकि बोगस राशन कार्ड की छुट्टी के सात साथ सरकार की सब्सिडी भी बचे. 1 जून 2016 को इनकम डिस्क्योजनर स्कीम लागू हुआ जिसमें लोगों को अपने छिपे धन की घोषणा करने का मौका दिया गया. 1 नवंबर 2016 को बेनामी प्रोपर्टी ट्रंजैक्शन एक्ट लागू हुआ और 8 नवंब 2016 को पीएम मोदी ने अब तक का सबसे बड़े फैसले यानि नोटबंदी का ऐलान किया. दावा ये किया गया कि इससे आतंकी, नक्सल, नकली नोट के साथ साथ काले धन पर भी लगाम लगेगी. मॉरिशस, सिंगापुर और साइप्रस के साथ समझौते कर काले धन को वापस लाने के धंधे पर रोक लगाई. और पिछले महीने ही नकली शेल कंपनियों के रजिस्ट्रेशन रद्द किए गए.

  • 500 लोगों ने सामूहिक आत्मदाह करने का दिया अल्टीमेटम, जानिये क्या है वजह !

    उत्तर प्रदेश के मेरठ का मामला है । पौने दस एकड़ में बनाए गए सभी अवैध निर्माणों को गिराने का इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। इसी आदेश के अनुसार कैंट बोर्ड ने पिछले साल अवैध काॅम्प्लेक्स गिराया था, जिसके मलबे में चार लोगों की दबकर मौत हो गई थी। कैंट बोर्ड ने यहां के बिजली-पानी के कनेक्शन काटने का निर्णय लिया। गुरुवार को कैंट बोर्ड की टीम ने मुख्य गेट के पास पानी के कनेक्शन काटने के लिए गड्ढा खोदना शुरू ही किया था, इतने में बंगला 210 बी के निवासी यहां पहुंच गए और बोर्ड की टीम का जबरदस्त विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर बोर्ड ने आगे कोई कार्रवाई की तो यहां के 500 लोग सामूहिक आत्मदाह कर लेंगे, इसकी सारी जिम्मेदारी कैंट बोर्ड की होगी। इतना सुनने के बाद कनेक्शन काटने आयी बोर्ड की टीम दबे पांव वहां से वापस लौट गई। यहां के लोगों की मांग है कि पहले हाईकोर्ट उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। जिनके कार्यकाल में बंगला 210 बी में अवैध निर्माण हुए। हाईकोर्ट ने भी इन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दे दिए थे। कैंट बोर्ड के नोटिस दिए, लेकिन यहां अवैध निर्माण जारी रहे। पौने दस एकड़ में यहां करीब 62 कोठियां व मकान और दुकानें बनी हैं। यहां अवैध काॅम्प्लेक्स भी बनाया गया था। करीब तीन साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस बंगले में बने सभी अवैध निर्माण ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। आबूलेन और बाॅम्बे बाजार के पास इस बंगले के प्लाॅट काटने का काम बिल्डर आनन्द प्रकाश अग्रवाल ने किया था। पिछले साल यहां के अवैध काम्प्लेक्स को कैंट बोर्ड ने गिराया था। इसका विरोध करने वाले चार लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। इसके बाद यहां हुए हंगामे के दौरान सीईई अनुज सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। अब कैंट बोर्ड ने यहां के बिजली-पानी के कनेक्शन काटने का निर्णय लिया, जिससे इस बंगले में रहने में रहने वाले यहां छोड़कर चले जाएं। सुबह जब कैंट बोर्ड के जेई अरविन्द गुप्ता ने टीम लेकर सर्रकुलर रोड पर गेट के सामने कनेक्शन काटने के लिए गड्ढा खुदवाना शुरू किया, तो यहां के निवासियों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि पहले बोर्ड के उन अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जिनके बारे में हाईकोर्ट ने आदेश दे रखे हैं। काफी हंगामे के बाद कनेक्शन टीम दबे पांव वापस लौट गई। यहां के लोगों का कहना है कि बिजली-पानी उनका मौलिक अधिकार है और इसका बिल भरते आ रहे हैं। अगर बोर्ड ने अवैध निर्माण माना था, तो बिजली-पानी के कनेक्शन क्यों दिए और क्यों बिल वसूल करता आया है। यहां के लोगों ने चेतावनी दी है कि बंगले में 500 से ज्यादा लोग रहते हैं, अगर बोर्ड अपनी हरकतों से बाज नहीं आया तो 500 लोग सामूहिक आत्मदाह करेंगे।