क्या हिंदुओ के साथ पक्षपात का ये एक्ट जल्द केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा खत्म

Places Of Worship Act : क्या हिंदुओं के साथ सबसे ज्यादा अन्याय करने वाला वर्शिप एक्ट जल्दी ही भारत सरकार के द्वारा खत्म किया जाने वाला है। वहीं मोदी सरकार ने ऐसे संकेत भी दिए हैं कि हिंदुओं के साथ अन्याय करने वाले कानून के चैप्टर को बंद करने की पूरी तैयारी की जा रही है।
दरअसल वर्शिप एक्ट के खिलाफ दी गई याचिकाओं पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और इन याचिकाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस देकर 2 हफ्तो में यानि की 31 अक्टूबर तक जवाब भी मांगा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 14 नवंबर को इस मामले की सुनवाई करने का दावा भी पेश किया है। वहीं इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बहुत बड़ी टिप्पणी की और इस वर्शिप एक्ट को लेकर सरकार की मंशा क्या है इसके संकेत भी दिए। 
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील देकर कहा कि ‘अयोध्या केस का जिक्र यहां उचित नहीं है…अयोध्या जजमेंट में प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट पर टिप्पणी एक अलग संदर्भ में दी गई थी।’ ज्ञानवापी का मुद्दा हो या फिर मथुरा विवाद हो, मुस्लिम पक्ष बार-बार प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 की दुहाई देता आया है। इस एक्ट के तहत सिर्फ राम मंदिर विवाद मामले को इससे अलग रखा गया था।
इस एक्ट को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट इस एक्ट की वैधानिकता पर विचार विमर्श करने में लगा है वहीं अगर आज सॉलिसिटर जनरल ने जो टिप्पणी की उसके क्या मायने हो सकते हैं यह भी जानना बहुत जरूरी है। वहीं केंद्र की ओर से दायर की गई टिप्पणी पर गौर करें तो क्या इस एक्ट में बदलाव या एक्ट खत्म करने का शुरुआती संकेत भी दिया गया हैं। साथ ही सरकार नहीं मानती कि वर्शिप एक्ट को छुआ नहीं जा सकता। साथ ही हर केस में वर्शिप एक्ट लागू हो, ये सरकार नहीं मानती है।
ऐसे में सवाल यह हैं क्या प्रधानमंत्री मोदी बड़ा फैसला लेंगे और वर्शिप एक्ट को भी खत्म करेंगे? देश सेक्युलर तो फिर हिंदुओं के साथ ‘अन्याय’ वाला एक्ट क्यों? ऐसे कई सवाल लोगो के मन में हैं।

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