क्या उप-राष्ट्रपति चुनावों में नज़र आएंगे मुख्तार अब्बास नकवी? पीएम से मुलाकात कर कैबिनेट से दिया अचानक इस्तीफा

 नकवी ने क्यों दिया कार्यकाल पूरा होने से एक दिन पहले इस्तीफा

 

 पार्टी ने क्यों नकवी को दोबारा नहीं दिया राज्यसभा आने का मौका

इस्तीफे से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने की जमकर तारीफ

डेस्क। भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख अल्पसंख्यक नेताओं की सूची में मुख्य मुख्तार अब्बास नकवी ने कल अपने राज्यसभा के कार्यकाल के समाप्त होने से एक दिन पहले बुधवार शाम अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है।

इसे पहले एक बैठक में, पीएम मोदी ने एक मंत्री के रूप में नकवी की देश और लोगों के लिए उनके योगदान के लिए सराहना भी की। पीएम ने नकवी के साथ रामचंद्र प्रसाद सिंह की भी उनके योगदान के लिए जमकर तारीफ की। बता दें राज्यसभा के इन दोनों सांसदों का कार्यकाल कल खत्म होने जा रहा है।

बैठक के तुरंत बाद, मुख्तार अब्बास नकवी ने राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी मुख्यालय में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात भी की। और उन्होंने अपना इस्तीफा भी दे दिया।

बता दें कि नकवी भाजपा के कोटे से झारखंड से राज्यसभा सांसद हैं। हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में नकवी को पार्टी ने दोबारा मौका नहीं दिया। आज की कैबिनेट की बैठक से ये संकेत दिया गया कि यह दोनों नेताओं की मंत्री के रूप में अंतिम बैठक भी रही। 

आपको याद होगा कि शुरू में चर्चा थी कि रामपुर सीट पर उपचुनाव के लिए उन्हें वहां से उम्मीदवार बनाया जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ। उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया गया। जानकारी के लिए आपको बता दें कि दोनों सदनों का नेता रहे बिना कोई भी मंत्री पद पर छह महीने तक रह सकता है पर इससे ज्यादा नहीं। कैबिनेट में रहने के लिए संसद का सदस्य होना अनिवार्य है।

मुख्तार नकवी के लिए सरकार में आगे कौन सी भूमिका मिलेगी, इस बारे में अभी कुछ भी स्पष्ट कह पाना तो मुश्किल है, पर कयास लगाया जा रहा है कि उपराष्ट्रपति चुनावो में भाजपा उनको उतार सकती है। इसी के साथ कयास ये भी है कि उनको किसी केंद्रशासित प्रदेश का लेफ्टिनेंट गवर्नर बनाया जा सकता है। 

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