CAA Protest: IIM बेंगलुरू के छात्रों ने प्रदर्शन करने का अहिंसक तरीका अपनाया। सभी ने तख्तियों पर नारे लिखे और अपने जूते -चप्पल कॉलेज के मुख्य गेट के बाहर रख दिया। इसके बाद छात्र और फैकल्टी वापस गेट के अंदर आकर खड़े हो गए।
छात्रों ने कैंपस के मैन गेट के बाहर अपने जूते-चप्पल रख दिए। खुद गेट की दूसरी ओर रहे। यानी कैंपस के अंदर। पुलिस का कहना था कि अगर वो बाहर आए तो उन्हें अरेस्ट कर लिया जाएगा। ऐसे में स्टूडेंट्स के चप्पल-जूतों ने विरोध की शक्ल ले ली।
One side of IIM-B are students , the other side are cops. Professors and students keep their footwear outside the gate as symbolic protest against Sec 144. Cops told them If you step out we’ll arrest you. Hence they remain inside and footwear out! pic.twitter.com/TaRhDsBH5b
— Nagarjun Dwarakanath (@nagarjund) December 19, 2019
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में धारा 144 लगने के बाद भी IIM के छात्रों ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालांकि उनका प्रदर्शन ऐसा था कि उससे पुलिस को कोई परेशानी नहीं हुई। नागरिकता संशोधन कानून को देश में हो रहे विरोध को देखते हुए सरकार ने बेंगलुरु में 19 दिसंबर को ही धारा 144 लागू कर दी थी। इस कानून के खिलाफ कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले हैं। यूपी के कई जिलों में हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए इंटरनेट की सेवाएं बंद कर दी गई हैं।
दरअसल IIM बेंगलुरू के छात्रों ने CAA और जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन शुक्रवार (19 दिसंबर) को हुए प्रदर्शन को देखते हुए बेंगलुरू के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने 19 दिसंबर की सुबह 6 बजे से 21 दिसंबर की आधी रात तक धारा 144 लगा दी।
यह शहर में होने वाले सभी प्रस्तावित प्रदर्शनों को देखते हुए किया गया था। जब IIM के छात्रों ने कॉलेज प्रशासन से प्रदर्शन में शामिल होने की इजाजत मांगी तो कॉलेज डीन ने यह कहते हुए मना कर दिया कि शहर में धारा 144 लागू है और कॉलेज कैंपस में किसी तरह के बड़े प्रोटेस्ट की इजाजत नहीं है। इसलिए हम किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन करने की इजाजत नहीं दे सकते है।
IIM बेंगलुरू के छात्रों ने प्रदर्शन करने का अहिंसक तरीका अपनाया। सभी ने तख्तियों पर नारे लिखे और अपने जूते -चप्पल कॉलेज के मुख्य गेट के बाहर रख दिया। इसके बाद छात्र और फैकल्टी वापस गेट के अंदर आकर खड़े हो गए।
यूपी के कई जिलों में नागरिकता कानून के विरोध के नाम पर हो रही हिंसा को ध्यान में रखकर लगाई धारा 144
Leave a Reply