बिजनौर। कोरोना वायरस की वजह से देश में लॉकडाउन चल रहा है। उधर, उत्तर प्रदेश के नौतनवा से विधायक अमनमणि त्रिपाठी समेत 7 लोगों को बिजनौर में गिरफ्तार कर लिया गया है। अमनमणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वर्गीय पिता के पितृ कार्य संबंधी चीजों का हवाला देकर उत्तराखंड में बदरीनाथ और केदारनाथ जाने के लिए पास बनवाया था।
अपराधी पिता का अपराधी पुत्र, बाप अमरमणी भी ऐसा ही था, वो हत्यारा था बेटा भी उसी के पदचिन्हों पर है । इससे पहले अमनमणि त्रिपाठी को साथियों समेत उत्तराखंड में रोक लिया गया। उनको गिरफ्तार कर लिया गया, फिर निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया था। इसके बाद उन्हें और साथियों को यूपी बॉर्डर पर लाकर छोड़ दिया गया। इन सबके बीच हैरान करने वाली बात तो यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि अमनमणि त्रिपाठी को उत्तराखंड जाने के लिए अधिकृत ही नहीं किया गया था। ऐसे में सवाल यह है कि ये पास कहां से उन्हें मिले।
गाड़ी में ये लोग भी थे सवार
नजीबाबाद के प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार शर्मा ने बताया, ‘4 मई को मुझे सूचना मिली कि अमनमणि त्रिपाठी अपने साथ कुछ व्यक्तियों को लेकर दो लग्जरी गाड़ियों में लॉकडाउन का उल्लंघन करके बेवजह घूम रहे हैं। सूचना पर पुलिस बल के सहयोग से कोटद्वार रोड पर गाड़ियां रोककर तलाशी ली गई। इस दौरान गाड़ी में अमनमणि त्रिपाठी के अलावा माया शंकर निवासी गोरखपुर, रितेश यादव निवासी गोरखपुर, संजय कुमार सिंह निवासी गोरखपुर, ओम प्रकाश यादव निवासी गोरखपुर, उमेश चौबे निवासी महाराजगंज, मनीष कुमार निवासी गोरखपुर मिले।’
सभी सात लोगों को किया गया अरेस्ट
प्रभारी निरीक्षक ने बताया, ‘इन लोगों से पास मांगा गया तो ये नहीं दिखा सके। इसके बाद इन सभी लोगों को गिरफ्तार करके गाड़ियों को कब्जे में लेकर कार्रवाई की जा रही है।’
सीएम योगी के भाई ने जाहिर की नाराजगी
वहीं, उत्तराखंड में अमनमणि ने जो पास दिखाए उनमें लिखा है विधायक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वर्गीय पिता के पितृ कार्य के लिए बदरीनाथधाम जाएंगे। इसके बाद यहां से श्री केदारनाथधाम भी जाएंगे। इस बात की जानकारी के बाद योगी के भाई महेंद्र सिंह बिष्ट बहुत गुस्से में हैं। महेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है, ‘आखिर अमनमणि त्रिपाठी होते कौन हैं, जो पितृ पूजन करेंगे।’ महेंद्र बिष्ट ने साफ कहा, ‘हमने एक दिन पहले ही अपने पिता का अस्थि विसर्जन किया है। हम तीन भाई हैं। आखिर अमनमणि को ये हक किसने दिया कि वह हमारे पिता का पितृ पूजन करें।’
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