UP में इन BJP सांसदों पर लटकी तलवार , कट सकता है टिकट

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लखनऊ। आगामी लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी के एक-तिहाई से अधिक सांसदों का टिकट कटना तय है। इस खतरे को भांपते हुए एक दर्जन से अधिक सांसदों ने एसपी-बीएसपी में अपनी संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। खासकर इन पार्टियों को छोड़कर आने के बाद टिकट पाने वाले नेता फिर वापसी के जुगाड़ में जुट गए हैं।

साल 2014 में मोदी लहर में कुछ ऐसे चेहरे भी सांसद बन गए, जिनकी अपनी कोई जमीन नहीं है। पार्टी ने 20 से अधिक टिकट ऐसे चेहरों को दिए थे जो एसपी, बीएसपी या कांग्रेस छोड़कर ताजा-ताजा भाजपाई बने थे। इनमें से बहुतों ने जीतने के बाद अपने क्षेत्र का रुख ही नहीं किया।

कुछ का अब तक बीजेपी कार्यकर्ताओं से या तो संघर्ष चलता आ रहा है या उन्होंने पार्टी के स्टैंड के खिलाफ अपना श्स्टैंडश् रखना शुरू कर दिया। अब इनका पत्ता कटना तय है। इसको देखते हुए इन्होंने एक बार फिर नई पार्टी तलाशनी शुरू कर दी है। एसपी और बएसपी में वरिष्ठ स्तर पर कुछ सांसदों की मुलाकातें भी शुरू हो चुकी हैं।

सावित्री बाई फुले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जिस आजमगढ़ में रैली हुई, उसके पास के क्षेत्र से जुड़े अति पिछड़ी जाति के एक सांसद एसपी के लगातार संपर्क में हैं। कुछ दिन पहले योगी सरकार के एक मंत्री के खिलाफ उनकी चिट्ठी भी वायरल हुई थी। अवध क्षेत्र की बात करें तो बहराइच की सांसद सावित्री बाई फुले पहले ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी हैं। वहीं, उनके पास की ही सीट के एक सांसद के सुर भी आजकल तल्ख हैं। उनके भी दल बदलने की चर्चा तेज है।

मोदी की संसदीय सीट वाराणसी के बगल के क्षेत्र के एक सांसद भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। वह भी दूसरे दलों में संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। मुलायम के गढ़ से आने वाले एक सांसद का भी पत्ता कटना तय है। जिस कुंभ की ब्रैंडिंग के जरिए बीजेपी यूपी में अपना भविष्य संवारने में लगी है, वहां के सांसद का भी बीजेपी में भविष्य असुरक्षित माना जा रहा है।

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वेस्ट यूपी में भी आगरा की पड़ोस की एक सीट के सांसद का भी टिकट कटना तय माना जा रहा है। पास की ही एक सीट के श्धनबलीश् सांसद को भी पार्टी दोबारा टिकट देने के मूड में नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चैपाल के दौरान भी कार्यकर्ताओं और जनता ने उनकी जमकर शिकायत की थी। ऐसे समय में इन लोगों ने दूसरी पार्टियों में जगह बनाने की जुगत तेज कर दी है।

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यूपी में बीजेपी के कुछ सांसदों को पार्टी मार्गदर्शक बनाकर सक्रिय राजनीति से किनारे करने का मन बना चुकी है। मसलन देवरिया से पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र, कानपुर से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की विदाई तय है। झांसी से उमा भारती भी चुनाव न लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। उन्नाव से साक्षी महाराज का भी टिकट कटना तय माना जा रहा है।

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इसी तरह फूलपुर सीट से उपचुनाव लड़ने वाले कौशलेंद्र सिंह पटेल और गोरखपुर सीट से प्रत्याशी रहे उपेंद्र दत्त शुक्ल को 2019 में भी मौका मिलेगा, इसकी तस्वीर साफ नहीं है। सुलतानपुर के सांसद वरुण गांधी भी इलाहाबाद में दो साल पहले हुई राष्ट्रीय कार्यसमिति के बाद  एकला चलो की राह पर हैं।

पार्टी की बैठकों और कार्यक्रमों से उनकी और उनके कार्यक्रमों से पार्टी की दूरी बनी हुई है। ऐसे में उनकी अगली दावेदारी को लेकर भी संशय के बादल हैं। स्थितियों को देखते हुए इन सीटों पर भी बीजेपी के अंदर दावेदारों ने अपनी दौड़ तेज कर दी है।

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