बेटी की इज्जत बचाने के लिए रातोंरात लोगों ने छोड़ दिया पूरा गांव, आज बना खंडर

 

डेस्क। वैसे तो इस दुनिया में रहस्यों से भरी कई जगहें है जिन्हे देकर वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं। कई ऐसे भी रहस्य है जिसपर से पर्दा हटाने में हम खुद को असमर्थ पाते हैं। इसी कड़ी में भारत में भी कई जगहें बेहद रहस्यत्मक है जैसे अगर भारत के रहस्मयी गांवों की बात करें तो राजस्थान में स्थित कुलधरा गांव का नाम इस सूची में सबसे ऊपर आता है।

कुलधरा गांव जैसलमेर से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बता दें कि कुलधरा गांव पिछले 200 सालों से वीरान पड़ा हुआ है। रेगिस्तानी क्षेत्र में स्थित कुलधरा गांव एक समय में काफी खूबसूरत गांवो में से एक हुआ करता था लेकिन रातोंरात यहां रहने वाले सभी लोग गांव छोड़कर चले गए और फिर कभी वापस लौटकर नहीं आए।

क्यों हो गया गांव वीरान

जानकर बताते है कि करीब 200 साल पहले कुलधरा गांव में पालीवाल ब्राह्मण रहते थे। लोग बताते हैं कि यह गांव जैसलमेर रियासत का सबसे खुशहाल गांव हुआ करता था। रियासत में सबसे ज्यादा रेवन्यू इसी गांव से आया करता था क्योंकि यहां कई तरह के उत्सव, पारंपरिक नृत्य और संगीत समारोह आयोजित किए जाते थे। बता दें कि वर्तमान समय में यह गांव पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। 

ऐसा कहा जाता हैं कि गांव में एक लड़की की शादी होने वाली थी, जो बेहद सुंदर थी। उसकी सुंदरता देख लड़की पर जैसलमेर रियासत के दीवान सालिम सिंह की नजर पड़ गई और उसकी सुंदरता में मोहित होकर उन्होंने उस लड़की से शादी करने का प्रस्ताव रखा।

इतिहास की माने तो सालिम सिंह बेहद ही अत्याचारी व्यक्ति था और उसकी क्रूरता की कहानियां दूर-दूर तक मशहूर थी। इसी वजह से कुलधरा के लोगों ने सालिम सिंह के प्रस्ताव को ठुकरा दिया और उसके साथ लड़की की शादी करने से इनकार कर दिया। 

शादी का प्रस्ताव ना मानने के बाद सालिम सिंह ने गांव वालों को सोचने के लिए कुछ दिनों का समय दिया पर फिर भी गांव वाले नहीं माने और उन्होंने मना कर दिया। गांव वाले इस बात से परिचित थे की सालिम के प्रस्ताव को ठुकराने का अंजाम बहुत बुरा होगा।

इसके बाद गांव के लोगों ने अपनी बेटी और अपने गांव के सम्मान को बचाने और अपनी सुरक्षा को देखते हुए हमेशा के लिए कुलधरा गांव को छोड़ने का निर्णय लिया। पंचायत कर पूरे गांववालों ने एक साथ कुलधरा गांव छोड़ने का फैसला कर लिया और अपना सारा सामान लेकर हमेशा के लिए कहीं चले गए और फिर कभी वापस नहीं लौटें। जैसलमेर के दीवान सालिम सिंह की हवेली आज भी यहाँ पर मौजूद है लेकिन उसे देखने के लिए कोई नहीं जाता। वहीं कुलधरा गांव में बने मकान अब धीरे-धीरे खंडर में तब्दील हो गए हैं।

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