नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट में हिंसा को लेकर पुलिसकर्मी और वकीलों के बीच एक तलवार सी खींच गई हैं। इसी बीच आज वकीलों ने हड़ताल कर रखी हैं। आपको बताते जाए कि मंगलवार को पुलिसकर्मियों ने पुलिस हैडक्वाटर पर 11 घंटे हड़ताल की थी। पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद पुलिसकर्मी आज वे अपनी ड्यूटी पर आ गए हैं।
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भारतीय विदेश सेवा एसोसिएशन ने कहा कि हम पुलिस कर्मियों के खिलाफ तीस हजारी कोर्ट में हिंसा की निंदा करते हैं और संबंधितों से हिंसा के अपराधियों को न्याय दिलाने का आग्रह करते हैं।
-पुलिस और वकीलों के बीच दिल्ली की जंग अब दूसरे राज्यों में भी फैलती जा रही है। राजस्थान की अलवर कोर्ट में वकीलों और पुलिस के बीच भिड़ं गई है। अलवर कोर्ट में वकीलों ने हरियाणा पुलिस के एक जवान पर हमला बोल दिया दिल्ली पुलिस के समर्थन में अन्य IPS संगठन आ रहे हैं, वैसे ही वकीलों के समर्थन में अन्य राज्यों के वकील आ रहे हैं।
-दिल्ली के तीन बड़े अदालतों के बाहर वकील प्रदर्शन कर रहे हैं। छह में से तीन अदालतों(पटियाला हाउस कोर्ट, रोहिणी कोर्ट, साकेत कोर्ट) का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। यही नहीं वकीलों ने पटियाला हाउस कोर्ट का दरवाजा तक बंद कर रखा है। हड़ताल तीसरे दिन रोहिणी कोर्ट के एक वकील ने बताया कि हमारी लड़ाई सिर्फ उन पुलिस कर्मियों के खिलाफ है, जिन्होंने हम पर गोली चलाई थीं और उस दिन लाठीचार्ज किया था। हम उनकी गिरफ्तारी तक प्रदर्शन करेंगे।
- रोहिणी कोर्ट के बाहर एक वकील ने आत्मदाह करने का प्रयास किया।
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दिल्ली पुलिस के जवानों के धरने के बाद आज वकील हंगामा करने उतर आए हैं। रोहिणी कोर्ट के बाहर वकील प्रदर्शन कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। वकीलों ने न्याय करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के साथ ही दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों की हड़ताल जारी है। यह हड़ताल तीस हजारी कोर्ट में हिंसा के बाद शुरू हुई थी. वकीलों और पुलिस के बीच विवाद मामले में आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इस मामले में हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस जारी कर दिया था।
इसी बीच आज सर्वोच्च न्यायालय के वकील वरुण ठाकुर ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि पुलिस मुख्यालय पर मंगलवार को पुलिस कर्मियों के धरने से लोगों में भय का माहौल बन गया है।
नोटिस में बताया गया कि धरने के दौरान वकीलों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। इस आधार पर पुलिस कमिश्नर से धरना देने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की गई है।
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