नई दिल्ली। तीस हजारी कोर्ट परिसर में मामूली बात पर दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच हिंसक झड़प हो गई है। इस दौरान कई पुलिसकर्मी और वकील घायल हो गए तो बड़ी संख्या में गाड़ियों को फूंक दिया गया। पुलिसकर्मियों और कवरेज के लिए पहुंचे कुछ पत्रकारों की पीटा गया। वकीलों ने फायरिंग का आरोप लगाया है, लेकिन पुलिस इससे इनकार कर रही है।
विवाद की शुरुआत
तीस हजारी बार एसोसिएशन के सचिव जयवीर सिंह चौहान ने बताया कि एक वकील की कार, पुलिस की जेल वैन को छू गई जिसके बाद वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच बहस हो गई। चौहान ने आरोप लगाया, ‘इसके बाद उन्हें हवालात ले जाया गया और बुरी तरह पीटा गया। थाना प्रभारी आए लेकिन भीतर जाने नहीं दिया गया। मध्य और पश्चिमी जिले के जिला न्यायाधीश, छह अन्य न्यायाधीशों के साथ वहां गए लेकिन वकील को नहीं निकलवा पाए।’ आगे उन्होंने दावा किया कि न्यायाधीश जब जा रहे थे तो 20 मिनट बाद पुलिस ने चार राउंड गोलियां चलाई। उन्होंने दावा किया कि अन्य वकीलों के साथ बाहर में प्रदर्शन कर रहे एक वकील रंजीत सिंह मलिक गोली से घायल हो गए। उन्होंने बताया कि घायल वकीलों को सेंट स्टीफन अस्पताल ले जाया गया।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि झड़प के दौरान एक वाहन में आग लगा दी गई और 8 अन्य को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। दमकल विभाग ने मौके पर 10 गाड़ियों को भेजा। झड़प के बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों और दंगा रोधी वाहनों को तैनात किया गया। बहरहाल, अदालत परिसर के द्वार के सामने बैठकर प्रदर्शन करते हुए वकीलों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने घटना के दौरान गोली चलाई और इसमें संलिप्त कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
झड़प में 10 पुलिसकर्मी और कुछ वकील घायल हो गए, जबकि 17 वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पुलिस ने बताया कि घायलों में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (उत्तरी जिला) हरिंदर कुमार, कोतवाली और सिविल लाइंस थाने के प्रभारी और पुलिस उपायुक्त (उत्तरी) के ऑपरेटर भी हैं। वकीलों ने आरोप लगाया कि उनके चार सहयोगी घायल हो गए। इसमें एक पुलिस की गोलीबारी में घायल हुआ। हालांकि, पुलिस ने इनकार किया कि उसने गोली चलाई।
झड़प के दौरान एक वाहन में आग लगा दी गई और 8 अन्य वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। कई बाइकों में भी आग लगा दी गई। दमकल विभाग ने मौके पर 10 गाड़ियों को भेजा। झड़प के बाद घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिसकर्मियों और दंगा रोधी वाहनों को तैनात किया गया। पुलिस ने बताया कि स्थिति अब नियंत्रण में है और झड़प के कारण अदालत परिसर के भीतर फंसे विचाराधीन कैदियों को बाद में पुलिस वाहनों से संबंधित जेलों में पहुंचाया गया।
Lawyers Vs Cops, one confrontation that happens every now & then – like a ritual. Both sides get hurt, both sides hurt each other, with a lot of personal baggage of their own. Then starts politics, blame game for around a fortnight or so. Today it was #Delhi‘s Tis Hazari court. pic.twitter.com/2lv14cPMZO
— Utkarsh Anand (@utkarsh_aanand) November 2, 2019
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा, ‘ यह दिल्ली पुलिस की बहुत बर्बर कार्रवाई है। पार्किंग को लेकर मामूली विवाद में पुलिस ने निर्दोष वकीलों पर फायरिंग शुरू कर दी। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। हमने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सरकार से दोषी पुलिसकर्मियों को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है। उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो स्थिति बिगड़ सकती है और सरकार व बार काउंसिल के नियंत्रण से बाहर हो जाएगी।’
दिल्ली बार काउंसिल के चेयरमैन केसी मित्तल ने कहा, ‘हम बिना किसी उकसावे के पुलिस की ओर से तीस हजारी कोर्ट में की गई फायरिंग की निंदा करते हैं। एक युवा वकील को लॉकअप में पीटा गया। यह पुलिस की मनमानी है। उन्हें बर्खास्त किया जाए और केस चलाया जाए। हम दिल्ली के वकीलों के साथ खड़े हैं।’
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