धर्मांतरण और आरक्षण पर दो दिवसीय सम्मेलन- विधिवेता, शिक्षाविद, शोध छात्र और स्वयंसेवी संगठन होंगे शामिल

धर्म परिवर्तन करने वाले अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए अथवा नहीं, इस विषय पर चर्चा के लिए 4 और 5 मार्च को ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है। इसकी जानकारी देते हुए कार्यक्रम के संयोजक व जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर डॉ प्रवेश चौधरी ने बताया कि इस राष्ट्रीय बौद्धिक विमर्श में देश भर के विधिवेता, शिक्षाविद, शोध छात्र एवं स्वयंसेवी संगठन भी शामिल हो रहे है।

उन्होंने कहा कि हम सब को विदित है की यह विषय सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है। इस पर समाज की राय जानने हेतु, सरकार ने पूर्व न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन भी किया है। इसी पर विचार विमर्श हेतु आगामी 4 और 5 मार्च को ग्रेटर नोएडा में देश भर के बौद्धिक जगत के नाम-चीन लोग जुटेंगे। इसका विषय- ‘धर्मांतरण और आरक्षण: के जी बालाकृष्णन आयोग के विशेष सन्दर्भ में’ रखा गया है। उन्होंने आगे बताया कि इस दो दिवसीय परिचर्चा में उनका प्रयास है कि धर्मांतरण और आरक्षण पर बिन्दुवार चर्चा हो। धर्मान्तरित ईसाई एवं मुसलमानों को आरक्षण मिले अथवा न मिले इसको लेकर सच्चर कमेटी, रंगनाथ मिश्रा आयोग के गठन और उसकी अनुशंसा के बाद देश में अनुसूचित जाति के बंधुओं के मध्य एक उहापोह की स्थिति का निर्माण हुआ है। समाज में इस पर एक विस्तृत विमर्श भी हो रहा है।

दरअसल, कुछ लोगों का मानना है कि धर्मान्तरित ईसाई एवं मुसलमान हिन्दू धर्म से धर्मान्तरित होने के बावजूद भी अपने सामाजिक स्तर में कोई परिवर्तन नहीं पाते है। रंगनाथ मिश्रा आयोग की सिफारिशों पर, उसकी वैधता, अध्ययन, अध्ययन की पद्धति, समय अवधि को लेकर समाज में तमाम प्रश्न खड़े हुए हैं। वहीं देश का बहुसंख्यक समाज यह मानता है की अनुसूचित जाति जिनका धर्म हिन्दू है, ऐसे लोगों को ही तमाम संविधान प्रदत्त सुविधाएं, प्रतिनिधित्व एवमं आरक्षण मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में भारत सरकार ने इन्हीं प्रश्नों के समाधन हेतु के. जी बालाकृष्णन आयोग का गठन किया है। ऐसे में समाज के बौद्धिक वर्ग को एक स्वतंत्र मंच देने के लिए ही यह विमर्श आयोजित किया जा रहा है। इस विमर्श की विशेषता यह है कि इसमें सम्पूर्ण भारत के प्रत्येक राज्य के विश्व-विद्यालयों में पढ़ाने वाले प्रोफेसर, स्कूलों के डीन, विभाग अध्यक्ष, कुलपति, शोधार्थी एवं गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भी हिस्सा ले रहे हैं। इसमें कई पूर्व न्यायाधीश एवं वरिष्ठ अधिवक्ता भी शामिल हो रहे हैं। प्रस्तावित परिचर्चा की जानकारी देते समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्व-विद्यालय के प्रोफेसर डॉ कौशल पंवार तथा विश्व संवाद केंद्र के विजय शंकर तिवारी भी मौजूद रहे।

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