2015 में लालगंज बाजार में दंगा हुआ था जिस मामले में लालगंज थाना की पुलिस ने गिरफ्तार किया था और 16 फरवरी को जेल भेजा था. कैदी की मौत हो जाने के बाद इसकी सूचना परिजनों को दी गई जिसके बाद परिजन सदर अस्पताल पहुंचे. बताया जा रहा है मृतक लालगंज में एक छोटी सी दुकान चलाता था और उसकी मौत से परिजनों में कोहराम मच गया है. बिहार में जेल प्रशासन का अमानवीय चेहरा देखने को मिला. जेल प्रशासन का कहना है कि अस्पताल में इलाज के दौरान कैदी की मौत हो गई जबकि सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉक्टर शशांक का कहना है कि कैदी को मृत हाल में अस्पताल लाया गया था. चिकित्सक द्वारा जब इस बात की जानकारी परिजनों को मिली तो परिजनों ने जेल प्रशासन पर सवाल खड़ा करते हुए जमकर हंगामा किया.
मामला वैशाली जिले से जुड़ा है कैदी की पहचान राजकिशोर साह के रूप में की गई है जो लालगंज थाना क्षेत्र के चकसाले गांव का रहने वाला था. उसे पुलिस ने 7 साल पुराने एक मामले में गिरफ्तार किया था और लगभग एक सप्ताह पहले जेल भेजा था. कैदी की तबियत बिगड़ने पर इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया था जहाँ इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई, हालांकि सदर अस्पताल के चिकित्सक ने बताया है कि बन्दी को मृत हालत में ही अस्पताल लाया गया था और बन्दी का किसी तरह का इलाज नहीं हुआ था.
परिजनों ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाया है. परिजनों ने बताया कि हाजीपुर मंडल कारा को कत्लखाना बना दिया गया है जिसके तहत आए दिन कैदियों की मौत हो रही है और प्रशासन अपनी नाकामी छुपाने के लिए सदर अस्पताल का सहारा लेता है, जबकि जेल में कैदियों का समुचित इलाज नहीं होता है, इसलिए मृत बन्दी राजकिशोर साह को अगर न्याय नहीं मिला तो मजबूरन लोग उग्र आंदोलन करेंगे.
सात साल पहले हुए दंगा मामले में मृत कैदी के पुत्र की भी गिरफ्तारी हुई है और पुत्र अभी जेल में ही है. कैदी के शव का पोस्टमार्टम दंडाधिकारी की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा. फ़िलहाल शव का पोस्टमार्टम करा परिजनों को सौंप दिया गया है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है.
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