कोर्ट:- सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश की एक महिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा प्रोबेशन के समय गलत फैसला लेने को लेकर उसके कार्य को समाप्त करने के संदर्भ में दायर याचिका को खरिज कर दिया है। जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस रवींद्र भट और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा हम यह मानते हैं कि उन्होंने जो फैसला लिया वह गलत नहीं था। इसलिए हम उस याचिका को खारिज करते हैं जो उनकी सेवाओ को समाप्त करने हेतु दायर की गई।
जानकारी के लिए बता दें याचिकाकर्ता को इस आधार पर परिवीक्षा के दौरान सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था कि उसके द्वारा हत्या (धारा-302) के एक मामले में दोषी को पांच साल कारावास की सजा सुनाई थी। लेकिन बाद में उन्होंने उन्होंने हत्या के अपराध को ‘गैर इरादतन हत्या’ में बदल दिया था। इस अनियमितता का हवाला देते हुए पूर्ण पीठ ने उन्हें बर्खास्त करने की सिफारिश की, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आपके प्रति हमारी सहानुभूति है। हम आपके उज्वल भविष्य की कामना करते हैं। जानकारी के लिए बता दे याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें नोटिस नहीं मिला था और एक गलती बर्खास्तगी का आधार नहीं हो सकता। उनका कहना था, वह मेरी पहली पोस्टिंग थी और पहला फैसला था। मैं अभी भी सीख रही हूं। यह केवल एक गलती थी और मुझे निकाल दिया गया था। मुझे खुद को साबित करने का मौका नहीं दिया गया।
Leave a Reply