डेस्क। बता दें कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अमेठी के अपने दो दिवसीय दौरे पर थी। इस दौरे का मंगलवार (10 मई) को अंतिम दिन रहा। अपने दौरे पर स्मृति ने स्थानीय लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनी। उन्होंने दिगिशक्ति योजना के चलते यहां बच्चों को टैबलेट भी बांटे। इसी कड़ी में उन्होंने एक छात्रा नीतू पधारी को इसरो ले जाने का वादा भी किया। आज हम जानेंगे कि उन्होंने ऐसा क्यों किया, इसके पीछे क्या कारण है।
बता दें टैबलेट बाटते हुए उन्हें पता चला कि एक गांव के सामान्य परिवार की लड़की नीतू इसरो के लिए तैयारी करना चाहती है। यह जानकर उन्होंने कहा कि मेरी इच्छा है कि नीतू को कम से कम एक बार इसरो की अनुमति से इसरो का प्रांगण दिखाऊं।
छात्रा नीतू पधारी ने कहा, “मुझे टैबलेट मिला इसके लिए मैं दीदी (स्मृति ईरानी) का धन्यवाद करना चाहती हूं और मेरा सपना है कि मुझे इसरो जाना है।”
आगे नीतू ने बताया कि स्मृति ईरानी ने उनसे कहा कि अपने पापा से अनुमति ले लेना। 10 जून को इसरो लेकर जाएंगे और दिखाएंगे कि वहां कैसे क्या होता है।
नीतू का बचपन से ही साइंटिस्ट बनने का सपना है।
उन्होंने बताया कि इसरो दोनों को इसलिए चुना क्योंकि इसके जरिए देश की सेवा का मौका मिलेगा।
स्मृति ईरानी ने नीतू को इसरो दिखाने और फिर वहां पहुँचने का प्रोसेस बताते के लिए कहा ही।
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