डेस्क। देश में जारी साम्प्रदायिक तनाव के बाद इसपर राजनीति होना तो लाजमी है। कई राजनीतिक विशेषज्ञों का मामला है कि इन दंगो ने देश को नया राजनीतिक मुद्दा दे दिया है। इसी कड़ी में नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला का भी बड़ा बयान सामने आया है।
उमर अब्दुल्ला ने आपने बयान में कहा है कि अगर पता होता मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा नहीं होगी तो कश्मीर के भारत में विलय को लेकर निर्णय कुछ अलग ही होता।
आगे उन्होंने कहा कि हमने ये सोचकर विलय के लिए स्वीकृति दी थी कि भारत में सभी धर्मों का सम्मान होता है पर आज के हालात को देखकर लगता है कि यहां केवल एक ही धर्म है।
मस्जिदों में लाउडस्पीकर और हलाल मीट के मुद्दे पर भी कसा तंज
उमर आगे बोले हमने तो मंदिरों और गुरुद्वारों के माइक पर कभी नहीं एतराज किया। हलाल मीट पर उनका कहना था कि इसमें गलत क्या है? हमारे धर्म में इसे खाने की मान्यता है। हमने किसी दूसरे को तो जबरन हलाल मीट खाने को नहीं कहा।
अब्दुल्ला ने कहा कि भारत में सभी को अपना धर्म मानने की आजादी है, यह हमारे संविधान में लिखा है कि हम धर्मनिरपेक्ष देश हैं। आगे उन्होंने कहा कि इससे किसी को छेड़छाड़ नही करनी चाहिए। सभी पंथों के लोग अपना-अपना धर्म मानने के लिए पूर्ण रूप से आजाद हैं।
संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त करने से जुड़ी याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए उमर ने कहा कि ये फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 2019 से कई बदलाव हुए हैं, जो नहीं होने चाहिए थे। देरी होने का मतलब होगा कि इन बदलावों को पलटा नहीं जा सकेगा।
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