डॉक्टरों की लापरवाही: क्या सरकारी अस्पताल सुरक्षित हैं?

डॉक्टरों की लापरवाही: क्या अस्पताल सुरक्षित हैं?

क्या आप जानते हैं कि भारत में हर साल हजारों मौतें सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की लापरवाही से होती हैं? यह एक हैरान करने वाला सच है, जो हमें अपनी स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करने के लिए मजबूर करता है। आज हम डूंगरपुर जिले के पीठ सरकारी अस्पताल से आई एक ऐसी ही घटना के बारे में बात करेंगे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। एक गर्भवती महिला को अस्पताल में मिलने वाली बेहद घटिया सुविधा के कारण अपने ही परिवार के सदस्यों द्वारा अस्पताल के पोर्च में डिलीवरी करवानी पड़ी। क्या हमारी सरकार ने इस तरह के दर्दनाक और गंभीर विषय को नज़रअंदाज़ कर दिया है ? यह जानने के लिए, पढ़ते रहिए!

अस्पताल में लापरवाही से महिला की पोर्च में हुई डिलीवरी

डूंगरपुर जिले के पीठ सरकारी अस्पताल में एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसमें एक गर्भवती महिला, सुरा डामोर, को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। जब महिला को प्रसव पीड़ा हुई, तो उसके परिजन उसे तुरंत पीठ अस्पताल ले गए। लेकिन वहां मौजूद नर्सिंग स्टाफ ने डिलीवरी केस देखते ही सीमलवाड़ा अस्पताल ले जाने की सलाह दी, और महिला की हालत की जांच तक नहीं की। इस लापरवाही की कीमत सुरा डामोर को अपने और अपने बच्चे के जीवन के लिए भुगतनी पड़ी। अस्पताल के पोर्च में, अपनों द्वारा, जमीन पर ही उसकी डिलीवरी करानी पड़ी। सोचिये, एक ऐसी जगह जहां आप चिकित्सकीय मदद की उम्मीद करते हैं, वहां एक महिला को जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते हुए देखना कितना भयावह होगा?

अस्पताल प्रशासन की उदासीनता

यह घटना तब और भी चौंकाने वाली हो जाती है, जब अस्पताल का मेडिकल स्टाफ खून से लथपथ महिला को तड़पते हुए देखता रहा। यहां तक ​​कि परिजनों ने बच्चे के नाल को भी खुद काट दिया। जब स्थिति बेहद बिगड़ गई, और स्थानीय लोग विरोध प्रदर्शन करने लगे, तभी आधे घंटे बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और महिला को भर्ती किया। यह घटना स्वास्थ्य सेवा के प्रति सरकार की उदासीनता की ओर इशारा करती है।

सीएमएचओ ने डॉक्टर को किया एपीओ

इस घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया और कार्रवाई की मांग की। इस खबर के मिलने पर, डूंगरपुर सीएमएचओ मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया। पीठ अस्पताल के डॉक्टर जय सिंह चौधरी को एपीओ कर दिया गया है, लेकिन क्या सिर्फ़ एपीओ करना ही इस समस्या का समाधान है? क्या यह इस बात का प्रमाण नहीं है कि अस्पताल में गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता व्याप्त है?

क्या पीड़ित महिला को मिलेगा इंसाफ?

हालांकि एपीओ करना एक कदम है लेकिन इससे न तो सुरा डामोर के सहारे और न ही अस्पताल में व्याप्त लापरवाही दूर होती है। क्या महिला को हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी ? क्या आरोपी डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी ? क्या सरकारी अस्पतालों में भविष्य में इस तरह की घटनाएं नहीं होंगी, इस सवाल का जवाब तभी मिलेगा जब स्वास्थ्य सेवा के प्रति एक गंभीर रवैया अपनाया जाएगा।

क्या यह भारत में स्वास्थ्य सेवा की असल तस्वीर है?

सुरा डामोर की घटना भारत के सरकारी अस्पतालों में व्याप्त गंभीर लापरवाही की तरफ एक भयावह झलक पेश करती है। कई बार ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जिनसे सवाल उठते हैं कि क्या यह सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को सुधारने के लिए उठाए जा रहे कदमों की असफलता को दर्शाते हैं? जब तक यह लापरवाही बनी रहेगी, सामान्य मध्यम वर्ग के लोग अपने जीवन की सुरक्षा को लेकर हमेशा डरते रहेंगे।

क्या हमारा स्वास्थ्य सुरक्षित है?

इस मामले से स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सुधार की अत्यावश्यकता सामने आती है। सरकार को ऐसे मामलों की गंभीरता को समझना चाहिए और दोषी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही, स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था में सुधार करने की दिशा में ठोस कदम उठाना भी आवश्यक है। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करना और स्टाफ को पर्याप्त प्रशिक्षण देना इस समस्या के स्थाई समाधान की ओर पहला कदम होगा।

टेक अवे पॉइंट्स

  • सरकारी अस्पतालों में व्याप्त लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।
  • सुरा डामोर का मामला भारतीय स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था की कमियों को दर्शाता है।
  • सरकार को इस मामले में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
  • स्वास्थ्य सेवा में सुधार करने की आवश्यकता है।

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