PM नरेंद्र मोदी की भारतीय मूल की अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से पहली मुलाकात की

वॉशिंगटन/नई दिल्ली

दुनिया में नए समीकरण बन रहे हैं। अपने हितों को साधने के लिए नई दोस्ती हो रही है और यह ऐसे समय में हो रहा है जब कोरोना के कहर से दुनिया उबरने की कोशिश में जुटी है। अफगानिस्तान से अमेरिका निकल चुका है और हथियारों के दम पर तालिबान हुकूमत करने लगा है। चीन के बढ़ते दबदबे पर अंकुश लगाने और अपने फायदे के लिए अमेरिका संबंधों के पुराने खांचे से बाहर निकल रहा है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका से आ रही तस्वीरें एक तरफ भारत और अमेरिका के संबंधों के नई ऊंचाई पर पहुंचने की कहानी कह रही हैं तो पाकिस्तान और चीन में भी खलबली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय मूल की अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से पहली मुलाकात की तस्वीरों को पाकिस्तान में काफी ‘जूम’ करके देखा जा रहा है। पाकिस्तान की मीडिया हो या वहां के नेता, उन्हें भारत और अमेरिका के बढ़ते रिश्ते रास नहीं आ रहे हैं। पाकिस्तान की बेचैनी इस बात को लेकर हैं अमेरिका में जो भी राष्ट्रपति बनता है उसके साथ भारतीय पीएम की केमिस्ट्री जम जाती है। ओबामा हों, ट्रंप या बाइडन प्रशासन सबने भारत से अपने रिश्तों को अहमियत दी है। चीन की अपनी टेंशन है। मोदी अमेरिका में क्वाड सम्मेलन में शामिल होंगे। जापान, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका के साथ भारत के इस गठबंधन से चीन टेंशन में है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव पर अंकुश लगाना इस समूह का एक मकसद समझा जा रहा है। आइए उन तस्वीरों को देखते हैं जो भारत के लिए फीलगुड और पड़ोसियों की नीद खराब कर रही हैं।

वाइट हाउस की बालकनी पर पीएम मोदी और उपराष्ट्रपति कमला

इस बार पीएम के अमेरिका दौरे पर नजरें गड़ाए पाकिस्तान को उस समय झटका लगा जब उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने मोदी के साथ अपनी पहली मुलाकात में ही आतंकवाद के मुद्दे पर उसे सुना दिया। कमला ने पाक की भूमिका का खुद ही जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा कि देश में कई आतंकवादी संगठन हैं। उन्होंने पाकिस्तान को इस संबंध में कार्रवाई करने को कहा ताकि इससे अमेरिका और भारत की सुरक्षा पर असर नहीं पड़े। अमेरिका की धरती से भारत और अमेरिका के साझा सुरक्षा हितों की बात करना पाकिस्तान के लिए बड़ा संदेश है। अमेरिका ने भारत को स्वाभाविक साझेदार मानते हुए साफ कर दिया है कि क्षेत्र में वह भारत को ज्यादा तवज्जो देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को भारत आने का न्योता दिया। मोदी ने हैरिस से यह भी कहा, ‘आप विश्व के कई लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।’

कमला ने पाकिस्तान को खूब सुनाया

अफगानिस्तान में जब तालिबान की सरकार बनी तो आतंकियों को पालने वाला पाकिस्तान इस बात पर इतराने लगा कि अब उसकी ताकत क्षेत्र में बढ़ जाएगी। उसे लगता है कि काबुल में अब उसकी ही चलेगी। ऐसे में अफगानिस्तान में भारी भरकम निवेश हो या कश्मीर के खिलाफ उसके नापाक मंसूबे, भारत सरकार अलर्ट है। अब कमला हैरिस ने मोदी के साथ मुलाकात में पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को हर हाल में आतंकियों का साथ छोड़ना होगा। मोदी-हैरिस मुलाकात के बाद पाकिस्तान के पूर्व गृह मंत्री रहमान मलिक ने भारतीय मीडिया चैनल से बातचीत में कहा कि भारत अमेरिका का पसंदीदा मुल्क है। उन्हें बुलाया गया है और यहां इस तरह के हालात हैं कि अमेरिका के नए राष्ट्रपति ने पाक पीएम इमरान खान से अभी तक टेलिफोन पर बातचीत भी नहीं की। उन्होंने यह भी कह दिया कि अगर वहां का प्रेसिडेंट मेरे मुल्क के पीएम से बात नहीं करता तो मुझे तकलीफ जरूर होगी।

कमला के उपराष्ट्रपति बनने पर भी बेचैन था पाक

अब जरा याद कीजिए कुछ महीने पहले अमेरिका में जब साफ हो गया कि भारत मूल की कमला हैरिस वहां की उपराष्ट्रपति बनेगी। पाकिस्तान में उसी समय से बेचैनी बढ़ने लगी थी। पाकिस्तान न्यूज चैनलों पर विशेषज्ञ कहने लगे थे कि अब भारत अमेरिका के और करीब आ जाएगा और पाकिस्तान के हित प्रभावित होंगे। ऐसे में समझा जा सकता है कि व्हाइट हाउस की बालकनी में कमला हैरिस और पीएम मोदी की बातचीत और हाथ हिलाने की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसने पाकिस्तान की सरकार और वहां की आवाम को कितना बेचैन किया होगा।

मोदी-कमला ने क्या बात की

मोदी और कमला हैरिस ने अफगानिस्तान और हिंद-प्रशांत के लिए खतरों सहित साझा हित के वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। जैसे ही आतंकवाद का जिक्र आया, हैरिस ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान से कार्रवाई करने को कहा ताकि इससे (आतंकवाद संगठनों से) अमेरिका और भारत की सुरक्षा पर कोई असर न पड़े। सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से मिली जानकारी पर वह सहमत थीं। उन्होंने इस तथ्य को भी स्वीकारा कि भारत कई दशकों से आतंकवाद का पीड़ित रहा है और ऐसे आतंकवादी समूहों के लिए पाकिस्तान के समर्थन पर लगाम लगाने और बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता है। काबुल में तालिबान सरकार बनने पर पाकिस्तान ने कश्मीर और भारत के खिलाफ जो मंसूबे पाल रखे हैं, अमेरिका के इस बयान से उसके सपने चकनाचूर हो गए हैं। पहले ही पाकिस्तान के साथ 20 साल के संबंधों की समीक्षा करने की बात कर चुका अमेरिका ने भारत से नजदीकी जताकर साफ कर दिया है कि क्षेत्र पाकिस्तान की हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वह 1971 था, आज 2021 में बदल गए समीकरण

ऐसे माहौल में 1971 के हालात को भी याद करना प्रासंगिक है। उस समय भारतीय फौज ने ढाका में घुसकर पाकिस्तान के सैनिकों को सबक सिखाने की तैयारी कर ली थी। तब रूस भारत के साथ खड़ा था तो अमेरिका पाकिस्तान को सपोर्ट कर रहा था। तब पाक-अमेरिका दोस्ती कितनी गहरी थी, इसका अंदाज इसी से लग जाता है कि पूर्वी पाकिस्तान पर भारत के ऐक्शन का इनपुट मिलते ही अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद के लिए बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसेना का सातवां बेड़ा रवाना कर दिया था। अमेरिका भारत पर हमले की योजना बना चुका था लेकिन भारत ने बहुत जल्दी बांग्लादेश में पाक फौज को घुटनों पर ला दिया। दस्तावेज यह भी बताते हैं कि तत्कालीन निक्सन प्रशासन पाकिस्तान को गुपचुप तरीके से लगातार हथियार भी मुहैया करा रहा था। लेकिन आज पाकिस्तान के बुरे दिन चल रहे हैं। वैश्विक राजनीति करवट ले चुकी है और अमेरिका भारत के साथ आ खड़ा है। भारत ने अपने सिद्धांत पर चलते हुए एक तरफ अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान से दोस्ती बढ़ाई है तो वहीं पुराने और भरोसेमंद मित्र देशों- रूस और इजरायल से भी मित्रता को तवज्जो देता आ रहा है।

लोकतंत्र, अफगानिस्तान पर भी हुई बात

मोदी से मुलाकात के दौरान हैरिस ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करना दोनों देशों का दायित्व है और यह दोनों देशों के लोगों के सर्वोत्तम हित में है। उन्होंने कहा, ‘चूंकि दुनियाभर के लोकतंत्र खतरे में हैं ऐसे में यह जरूरी है कि हम अपने-अपने देशों और दुनियाभर में लोकतांत्रिक सिद्धांतों और संस्थानों की रक्षा करें और अपने-अपने देश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए निश्चित ही प्रयास करें। जाहिर तौर पर लोकतंत्र की रक्षा करना हमारे देशों के नागरिकों के सर्वोत्तम हित में है।’ अमेरिका के इस रुख से साफ है कि उसका इशारा अफगानिस्तान की ओर था। ऐसे में वह भविष्य में भारत की बड़ी भूमिका चाहेगा।

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