PM आवास योजना: जनता घेर रही सब्सिडी को लेकर बैंकों को

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हाउसिंग फॉर ऑल का सपना पूरा करने लाई गई प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर जागरूकता की कमी और फाइनैंशल सिस्टम को लेकर लोगों के बदल रहे सेंटिमेंट्स के चलते कई नई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सब्सिडी योजना में दिक्कतों और सब्सिडी वापस लिए जाने की शिकायतों की तह में जाने पर इस योजना के बारे में आम जन में भ्रम की पुष्टि हो सकी।

मुंबई के मीरा रोड, बोइसर के कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कुछ लोगों ने बैंक या हाउसिंग फ‌ाइनैंस कंपनियों से लोन लेते वक्त पीएम आवास योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी के लिए अप्लाई किया, लेकिन उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला और कई मामलों में तो दी गई सब्सिडी लाभार्थी से वापस मांग ली गई। ऐसे में आर्थिक रूप से पिछड़े व मध्यम वर्गीय लोगों को लग रहा है कि उनके साथ बैंकों व हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों ने धोखा किया है।

14,000 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी हो चुकी है जारी
जब इस मामले की पड़ताल की गई तो पाया गया कि इस योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी का नाम ही क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम है, जिसमें पैसा स्कीम के तहत सभी नियमों को पूरा करने वाले लाभार्थी को सीधे दिया जाता है। यहां बता दें कि अब तक इस योजना के तहत 14,000 करोड़ से ज्यादा की सब्सिडी दी जा चुकी हैं।

मिल रहे फर्जी फॉर्म
ठाणे में एक रिक्शाचालक ने जब यह कहा कि उसने भी किसी एजेंट से 200 रुपये में PM आवास योजना का फॉर्म लिया है, तो ऐसे में समझा जा सकता है कि इस योजना को लेकर लाभार्थियों में अभी भी जानकारी का लेकर कितना अभाव है, क्योंकि ऐसा कोई फॉर्म बिकता ही नहीं है। इस योजना के तहत सब्सिडी देने वाली नोडल एजेंसी नैशनल हाउसिंग बैंक (NHB) के अधिकारी का कहना है कि लोगों को पहले यह समझना होगा कि यह कोई लोन नहीं है, बल्कि एक ऐसी सब्सिडी है, जिसका बैंक या हाउसिंग फाइनैंस कंपनी ड्यू डिलिजेंस के आधार पर ऑनलाइन फॉर्म अप्लाई करती हैं। अगर आवेदक शर्तों और नियमों को पूरा नहीं करता है तो उसे उसका लाभ नहीं मिल पाता। दूसरी बार कोशिश करने वालों का आवेदन तुरंत पकड़ में आ सकता है। सब्सिडी वापस लेने के मामले में पीएनबी के बैंक अधिकारी कहते हैं,’असल में स्टैचुअरी टाउन की लिस्ट के आधार पर कई बार दिक्कतें आ जाती हैं। कुछ इलाके उसमें शामिल नहीं होते हैं।’

वादाखिलाफी
कुछ लोगों का कहना है कि सब्सिडी देने के वादे के नाम पर कई कंपनियां लोन दे रही हैं। जवाब में एचडीएफसी लि. के प्रवक्ता कहते हैं, ‘हम इस योजना के तहत एक लाख दस हजार होम बायर्स को 2,462 करोड़ रुपये की सब्सिडी डिस्बर्स कर चुके हैं, लेकिन किसी को भी यह नहीं कह सकते कि हम सब्सिडी देने का वादा करते हैं, क्योंकि वह हमारे दायरे का हिस्सा ही नहीं है। हमारा काम सिर्फ इसके लिए आवेदन नोडल एजेंसी को भेजने का है। निर्णय का अधिकार नियामक के पास है और पैसे लाभार्थी को देना भी, हम तो इस योजना को लोगों तक पहुंचाने का सिर्फ जरिया हैं।’

डिवाइडिंग लाइन पर प्रश्न
IIFL हाउसिंग फाइनैंस के खिलाफ बोइसर में लोगों द्वारा हो रहे विरोध के बाबत जब IIFL हाउसिंग फाइनैंस की सीईओ मोनू रात्रा से पूछा गया कि तो उन्होंने कहा,’असल में हमारा काम लोन देना है और अगर अप्लाई करने वाला सब्सिडी की शर्तें पूरी करता है तो सरकार से सीधे सब्सिडी उसके अकाउंट में भेजी जाती है। हमें डिफॉल्ट थोड़े ही करना है कि हम सब्सिडी के आधार पर लोन दें। सब्सिडी में मिले सरकारी पैसे का हमारे द्वारा इस्तेमाल का तो कोई प्रश्न ही नहीं है। असल में अर्बन व रूरल की डिवाइडिंग लाइन इतनी भ्रमित करने वाली है कि समरूपता नहीं होने से लोगों को भ्रम होता है।’

क्या है हकीकत
– सरकार की नोडल एजेंसी NHB और HUDCO तय करती है सब्सिडी की नियम और शर्तें।
– सब्सिडी सरकार सीधे लाभार्भी के खाते में जमा करती है, न कि बैंक या कंपनी को देती है।

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