NSI ने तैयार किया मॉडल, गन्ने से निकलेगी 80 फीसद चीनी और 20 फीसद इथेनॉल

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कानपुर, देश में ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने के साथ ही चीनी मिलों की सेहत सुधारने की तैयारी है। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआइ) ने चीनी की सरप्लस की समस्या को दूर करके इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए मॉडल तैयार किया है। इसे केंद्र सरकार, नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड और इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन को दिया है। इस पर हरियाणा और महाराष्ट्र की कई फैक्ट्रियों ने काम शुरू कर दिया है। मॉडल के अंतर्गत गन्ने से 80 फीसद चीनी और 20 फीसद इथेनॉल निकाला जाएगा।

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चीनी मिल एसोसिएशन और फेडरेशन को दिया बढ़ेगा इथेनॉल उत्पादन। एनएसआइ के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि गन्ने के शुगर सिरप (जूस) से चीनी तैयार होती है। इसका बचा हुआ हिस्सा शीरा कहलाता है। दूसरी बार चीनी निकालने में इस्तेमाल को बी हैवी शीरा कहते हैं।

संभव नहीं हो पा रहा चीनी मिल से उत्पादन बढ़ाना 

नेशनल बायोफ्यूल पॉलिसी के अंतर्गत 2030 तक पेट्रोल में 20 फीसद इथेनॉल की ब्लेंडिंग (सम्मिश्रण) किया जाना है, जिससे तेल के आयात को कम किया जा सके। अभी 10 फीसद ब्लेंडिंग के लिए भी इथेनॉल की मात्रा पूरी नहीं हो पा रही है। सरकार चीनी मिलों से उत्पादन बढ़ाने के लिए कह रही है, लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर चीनी का उत्पादन लगातार तीसरे वर्ष भी सरप्लस हो गया है। मांग से अधिक उत्पादन हो गया है। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते पुराना स्टॉक खत्म भी नहीं हो सका है। एनएसआइ के निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने बताया कि गन्ने के शुगर सिरप (जूस) से चीनी तैयार होती है। इसका बचा हुआ हिस्सा शीरा कहलाता है। शीरे के दूसरी बार चीनी निकालने में इस्तेमाल को बी हैवी शीरा और तीसरी बार को सी शीरा कहते हैं। इसी शीरे से इथेनॉल भी मिलता है। सरकार ने इथेनॉल निकालने के लिए जूस का 62.25 रुपये,  बी हैवी शीरा का 57.61 और सी शीरा का 43.75 रुपये प्रति लीटर रेट निर्धारित किया है। चीनी मिलें सी शीरे से इथेनाॅल निकालती हैं। जूस में जहां एक टन में 600 लीटर इथेनॉल मिलता है, वहीं बी हैवी शीरा से 300 और सी शीरे से 225 लीटर निकलता है।

मॉडल के अनुरूप ऐसे होगा उत्पादन  

एनएसआइ निदेशक के मुताबिक गन्ने के जूस से 80 फीसद चीनी निकाली जाएगी, जबकि 20 फीसद इथेनॉल का उत्पादन होगा। यह प्रक्रिया पेराई सत्र तक रहेगी। अब पेराई सत्र के बाद चीनी निकालने के बाद बचे शीरे से जरूरत के हिसाब से चीनी या इथेनॉल निकाला जा सकेगा। इससे चीनी के सरप्लस की समस्या दूर हो जाएगी।

4250 मिलियन लीटर उत्पादन का प्रयास 

2020-21 में पेट्रोल की खपत 38,075 मिलियन लीटर है, जबकि 2021-22 तक यह बढ़कर 41,266 मिलियन लीटर हो जाएगी। इसके लिए क्रमश: 3808 और 4127 मिलियन लीटर इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने की जरूरत पड़ेगी। 2020-21 तक 3200 मिलियन और 2021-22 तक 4250 मिलियन लीटर इथेनॉल के उत्पादन का प्रयास किया जा रहा है।

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