देश: हिंदी हमारी राज्य भाषा है लेकिन पूरे भारत मे सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा मे हिंदी का नाम सबसे ऊपर होने के वाबजूद भी हिंदी को अंग्रेजी के सामने शर्मिंदा होना पड़ता है। हमारे देश मे आज हिंदी की दशा कुछ ऐसी हो गई है कि लोग उसे बोलना और लिखना नही पसन्द करते उन्हें लगता है कि यदि वह हिंदी में बातचीत करेंगे तो समाज मे उनका महत्व कम हो जाएगा। लेकिन कई लोग समाज मे ऐसे हैं जिन्हें सिर्फ अपनी मूल भाषा से प्रेम है। वही अब हिंदी एमबीबीएस की पढ़ाई का वैकल्पिक माध्यम बनने जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अब एमबीबीएस के छात्र हिंदी में डॉक्टरी की पढ़ाई कर सकेंगे। हिंदी प्रदेश में एमबीबीएस पाठ्यक्रम की पढ़ाई का वैकल्पिक माध्यम बनने जा रही है। इस सिलसिले में लंबे समय से चल रही महत्वाकांक्षी कवायद सितंबर के आखिर में शुरू होने वाले नए अकादमिक सत्र में अपने मुकाम पर पहुंच सकती है। आधिकारिक ने कहा कि छात्रों को अकादमिक सत्र के सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों के एमबीबीएस प्रथम वर्ष के कुल 4,000 विद्यार्थियों को अंग्रेजी के साथ हिंदी पुस्तकें पढ़ने का विकल्प मिल सकता है।
फिजियोआजी के पूर्व सह प्राध्यापक डा. मनोहर भंडारी ने इस परिपेक्ष्य में कहा कि मेडिकल की पढ़ाई करने आने वाले छात्रों में 60 से 70 फीसदी छात्र हिंदी माध्यम के।होते हैं। उन्हें प्रथम सेमेस्टर की पढ़ाई करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लेकिन अब उन्हें प्रथम सेमेस्टर में अंग्रेजी के साथ हिंदी किताबे भी मिलेगी जो उनकी राह को आसान बना देगी। उन्होंने कहा जिन लेखकों की अंग्रेजी में मेडिकल की किताबें पढाई जा रही है उन्हें हिंदी में ढालने का काम चल रहा है जल्द ही उन किताबो का हिंदी अनुवाद हो जायेगा। इन पुस्तकों के आने से विद्यार्थियों को काफी मदद मिलेगी और इससे मेडिकल की पढ़ाई को एक नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा अंग्रेजी माध्यमों में मेडिकल की पढ़ाई इसी तरह बरकरार रहेगी। लेकिन शिक्षकों से अनुरोध किया गया है कि वह मेडिकल की पढ़ाई में हिंदी के प्रयोग को अधिक महत्व दें। जानकारी के लिये बता दें मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षार्थियों को हिंग्लिस में लिखित परीक्षा, प्रायोगिक परीक्षा और मौखिक परीक्षा (वाइवा) देने का विकल्प काफी पहले ही प्रदान कर चुका है।
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