नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को निर्भया दुष्कर्म और हत्या मामले में मौत की सजा पाने वाले दोषियों में से एक की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। आरोपी ने अपनी अर्जी में दावा करते हुए कहा कि मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया और सिर व हाथ की चोटों के लिए उसे बेहतर इलाज की जरूरत है।
दोषी विनय शर्मा की ओर से एक आवेदन में कहा गया कि मानसिक बीमारी के उच्च स्तरीय उपचार के लिए उसे दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (आईएचबीएएस) में स्थानांतरित करने के लिए एक दिशा-निर्देश की मांग की गई है। इस हफ्ते की शुरुआत में विनय ने जेल की दीवारों में सिर मारकर खुद को घायल कर दिया था।
उसने इसके लिए भी उपचार की मांग की है। विनय के सभी कानूनी उपचार समाप्त हो चुके हैं। तीन अन्य दोषियों सहित उसे 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी होनी है। दोषियों में से एक पवन ने अभी तक अपने कानूनी उपायों का इस्तेमाल नहीं किया है।
दोषी ने नई कानूनी सहायता लेने से मना किया
निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में मौत की सजा पा चुके आरोपियों में से एक पवन गुप्ता ने तिहाड़ जेल में नई कानूनी सहायता लेने से मना कर दिया है। गौरतलब है कि बीते सप्ताह दोषी के वकील ए.पी सिंह ने मामले से खुद को अलग कर लिया था, जिसके बाद रवि काजी को पवन का नया वकील नियुक्त किया गया था। पवन ने अभी तक क्यूरेटिव या दया याचिका दायर नहीं की है।
तीन अन्य आरोपियों के साथ उसे भी 3 मार्च को सुबह 6 बजे फांसी की सजा दी जाएगी। पवन के वकील ने मीडियाकर्मियों से कहा कि हालांकि बीते कुछ दिनों से पवन के साथ उनकी बातचीत नहीं हो पाई है, ऐसे में उनकी तरफ से कोई भी कानूनी उपाय नहीं किया गया है।
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