मुंबई में इश्क़ की जंग: हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़के की प्रेम कहानी ने हाईकोर्ट में दस्तक दी
क्या आप जानते हैं मुंबई में एक ऐसी प्रेम कहानी चल रही है, जो धर्म की दीवारों को तोड़कर इश्क़ की नई मिसाल कायम कर रही है? लेकिन, इस कहानी में एक ऐसा मोड़ भी है, जिसने बॉम्बे हाईकोर्ट के दरवाज़े खटखटा दिए हैं। 20 वर्षीय मुस्लिम छात्र और एक हिंदू लड़की की प्रेम कहानी में आये तूफ़ान ने ज़िन्दगी की तस्वीर बदल कर रख दी है, और इस तूफ़ान का केंद्र बन गया है- शासकीय महिला केंद्र यानि शेल्टर होम।
प्यार का इम्तिहान
यह प्यार की कहानी बेशक खूबसूरत है, लेकिन इसकी शुरुआत एक चुनौती से हुई। दोनों परिवारों के धर्म अलग हैं, लेकिन दोनों प्रेमी अपनी मर्ज़ी से एक-दूसरे के साथ हैं, एक साथ जीने की चाहत रखते हैं। लेकिन, जब लड़की के परिजनों ने अपनी बेटी को एक मुस्लिम लड़के के साथ देख, पुलिस में शिकायत दर्ज की और साथ में धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से भी समर्थन ले लिया। पुलिस ने लड़की को हिरासत में लेकर शेल्टर होम भेज दिया, और प्यार की राह में एक बड़ा रोड़ा आ गया।
शेल्टर होम में कैद, बॉम्बे हाईकोर्ट में उम्मीद
मुस्लिम छात्र के दिल में प्यार की ऐसी आग जल रही है, कि उसने अपनी प्रेमिका को शेल्टर होम से मुक्त करवाने और अपनी सुरक्षा की गुहार बॉम्बे हाईकोर्ट में लगाई है। याचिका में छात्र ने आरोप लगाया है कि उसकी प्रेमिका को शेल्टर होम में जबरन रखा गया है। छात्र के मुताबिक, उसे और उसकी प्रेमिका को सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। याचिका में यह भी कहा गया है की लड़की को पुलिस ने हिरासत में लेते समय सामाजिक कार्यकर्ता और परिजनों ने भी इस मामले में बहुत दबाव बनाया।
क्या लड़की है ज़बरदस्ती की शिकार?
छात्र ने कोर्ट में दलील दी है कि उसकी प्रेमिका ने अपनी मर्जी से उसके साथ रहने का फ़ैसला किया है, लेकिन फिर भी उसे शेल्टर होम में बंद कर दिया गया। लड़की के 16 नवंबर के हलफ़नामे में उसने साफ-साफ लिखा है की वो अपनी मर्ज़ी से प्रेमी के साथ रह रही हैं और वो किसी के ज़बरदस्ती का शिकार नहीं है। यह पूरा मामला एक अहम सवाल खड़ा करता है: क्या हमारे समाज में प्रेम को आजादी है? क्या धर्म प्रेम के रास्ते में बाधा बनता है?
प्यार के लिए लड़ाई
यह मामला सिर्फ़ एक जोड़े की कहानी नहीं है, यह समाज की सोच और प्रेम के प्रति हमारे दृष्टिकोण की परीक्षा भी है। इस मामले का बॉम्बे हाईकोर्ट में 3 दिसंबर को सुनवाई होनी है। देशभर की नज़रें इस फैसले पर टिकी हुई हैं। यह फ़ैसला सिर्फ इस जोड़े के लिए ही नहीं, बल्कि देश के सभी उन प्रेमियों के लिए महत्वपूर्ण है जो धर्म और समाज के बंधनों से आजाद होकर प्यार करना चाहते हैं। इस पूरे मामले में प्रेम के लिए लड़ाई लड़ी जा रही है।
क्या मिलेगा न्याय?
क्या प्रेमी जोड़े को न्याय मिलेगा? क्या अदालत उन्हें एक-दूसरे के साथ रहने और शादी करने की अनुमति देगी? ये सब सवाल हैं जिसके जवाब इस मामले के फैसले में तलाशे जाएँगे। हमें यह भी सोचने की जरूरत है कि क्या हम ऐसे प्रेम संबंधों को स्वीकार कर पाएँगे, जहां धर्म एक बाधा ना बनें, या हमेशा सामाजिक रीति-रिवाजों की कठोर परीक्षा प्रेम के मार्ग में रुकावट बनेगी।
Take Away Points
- एक मुस्लिम छात्र और हिंदू लड़की की प्रेम कहानी बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची है।
- लड़की को कथित रूप से ज़बरदस्ती शेल्टर होम में रखा गया है।
- छात्र ने सुरक्षा और शादी की इजाज़त मांगी है।
- मामले की सुनवाई 3 दिसंबर को होनी है।
- यह मामला धार्मिक सहिष्णुता और प्रेम के अधिकार पर सवाल उठाता है।

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